Mastaram.Net

100% Free Hindi Sex Stories - Sex Kahaniyan

मुझे वाइल्ड सेक्स और पति को थ्रिसम सेक्स-2

कहानी का पहला पार्ट नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते है।

मुझे वाइल्ड सेक्स और पति को थ्रिसम सेक्स की इच्छा

मैंने रंजीत की तरफ देखा तो उसकी भी आँखें चमकने लगी थीं.. रंजीत उसका लंड देख कर खुश हो गया।

तभी नीतिन ने कैम बंद कर दिया।

नीतिन- बोल साले.. कैसा लगा मेरा लंड?

नीतिन की बात सुन कर हम दोनों चौंक गए… नीतिन ने रंजीत को साला बोला था।
अब उसकी बात करने का टोन ही बदल गया था।

रंजीत- हाँ नीतिन.. सच में आपका लंड बड़ा है।

नीतिन- फिर मुझसे कब चुदा रहा.. अपनी रंडी पत्नी को..

मैं चौंक गई.. उसने मुझे रंडी कहा।

रंजीत की तरफ देखा.. नीतिन ने मुझे रंडी बोला तो वो खुश लगा..

रंजीत- हाँ नीतिन.. इसी हफ्ते में शनिवार या इतवार को प्रोग्राम करते हैं।

नीतिन- तू अपनी बीवी को शनिवार नाइट को मेरे पास लेकर आ.. साली को तेरे सामने पूरी रात चोदूँगा।

अब मुझे नीतिन की भाषा अच्छी नहीं लग रही थी।

रंजीत- हाँ नीतिन.. शनिवार नाइट अच्छा रहेगा।

नीतिन- उस रात तेरे बीवी क्या पहनेगी?

रंजीत- कोई अच्छी से सेक्सी ड्रेस में लेकर आता हूँ।

नीतिन- नहीं.. मुझे तेरे बीवी शादी के जोड़े में चाहिए.. तेरी शादी हुई.. तब तेरी बीवी ने जो दुल्हन का जोड़ा पहन था… उसी में लेकर आ.. तू उस साली को..

रंजीत- जैसा आप कहो नीतिन भाई.. आपके सामने अपनी पत्नी को मैं दुल्हन बना कर लाऊँगा..

नीतिन- हाँ.. पूरी तरह से दुल्हन लगनी चाहिए.. मुझे उसके साथ सुहागरात जो मनानी है।

रंजीत- ओके सर.. लेकिन एक शर्त है नीतिन..

नीतिन- क्या.. बोल..

रंजीत- आपको मेरी जोरू के साथ कन्डोम में ही चुदाई करनी होगी।

नीतिन- साले मादरचोद.. पहले लेकर तो आ तू उस रंडी को.. फिर देखते हैं..

रंजीत- ठीक है.. शनिवार नाइट लेकर आता हूँ।

फिर दोनों ने अपने-अपने मोबाइल नम्बर लिए और दिए।

रंजीत ने नेट बंद किया और हम कमरे में आ गए।

मैंने उनको कहा- रंजीत.. मुझे यह नीतिन ठीक नहीं लग रहा है.. उस दिन रेहान से बात की.. वही लड़का ठीक है।

वो बोला- तुझे क्या समझ है.. आदमियों की.. उस रेहान में क्या है.. 22-23 साल का लड़का है.. उसको चुदाई का कुछ अनुभव भी नहीं है.. इस नीतिन की उम्र 35 है और खेला-खाया भी है.. लंड भी बड़ा है.. तुझे नीतिन के साथ खूब मज़ा आएगा..

उनकी बात सुन कर मैं चुप रही..

आगे कुछ नहीं बोली..

उस रात में रंजीत ने नीतिन को कल्पना में लेकर मेरे साथ चुदाई की.. और सो गया..
लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी।
मैं नीतिन के बारे में सोच रही थी… पता नहीं लेकिन मुझे बार-बार उसका लंड याद आने लगा।

लेकिन एक मन कह रहा था कि यह नीतिन अच्छा इंसान नहीं है.. हमको उसके घर नहीं जाना चाहिए… लेकिन मुझे यह भी पता था कि रंजीत मेरी बात नहीं मानने वाला है।
बस यही सोचते-सोचते नींद आ गई।

सुबह 8 बजे नींद खुली… आज शुक्रवार था और कल शनिवार.. कल रात को हमको नीतिन के घर जाना था।

सोच कर ही मुझे डर लग रहा था… जैसे-तैसे कर के दिन निकल गया.. रात में खाना खाते वक़्त नीतिन का फोन आया कि नेट पर आ जाओ।
हम खाना ख़ाकर वापिस नेट पर आ गए।

नीतिन- हाय!

रंजीत- हाय नीतिन..

नीतिन- तो कल लेके आ रहा ना तू.. तेरी रंडी बीवी को.. मेरे साथ चुदाने को..

रंजीत- हाँ यार.. कल का पक्का है।

नीतिन- और सुन.. तेरी पत्नी मुझे दुल्हन के लिबास में ही
चाहिए.. नहीं तो साले तुझे घर में नहीं घुसने दूँगा.. समझा क्या गान्डू..

रंजीत- नीतिन भाई.. आपने जैसा कहा.. सब वैसा ही होगा।
नीतिन- ठीक हैं फिर.. कल रात को 8 बजे तक मेरे घर आ जा..
रंजीत- ओके बॉस..

नेट बंद करके वो मेरी तरफ देखने लगा।

मैंने अपनी नजरें झुका लीं.. हिम्मत करके उनको कहा- रंजीत.. एक बार और सोच लो.. कितनी गंदी तरीके से बात कर रहा आपसे.. मुझे यह अच्छा इंसान नहीं लग रहा..

रंजीत बोला- डियर ये रण्डियों के दीवाने लोगों की ज़ुबान ऐसी ही होती है.. दिमाग मत लगा।

मैं चुप रही.. अगले दिन.. आज शनिवार था।

रंजीत ने मुझसे कहा- दोपहर में पार्लर जाकर आ.. और तू मुझे एकदम ‘फ्रेश-लुक’ में दिखनी चाहिए..

वैक्स भी कर ले.. मैं आज हाफ-डे की छुट्टी लेकर 4 बजे तक घर आता हूँ।

रंजीत ऑफिस चला गया।

मैंने खाना बना कर खुद ही वैक्स किया.. चूत शेव की.. अंडरआर्म भी साफ़ किए और दोपहर में पार्लर गई.. वहाँ ब्लीचिंग.. फेशियल सब कुछ किया।

अब मैं बहुत खूबसूरत दिखने लगी थी.. पार्लर वाली ने मेरी हेयर स्टाइल भी अच्छी की थी.. बाल खुले रखे थे। घर आते हुए 3.30 हो गए.. 4 बजे रंजीत भी घर आ गया.. आते समय कुछ सामान लेकर आया था।

मैंने देखा उसमें मेरे लिए एक लाल रंग की ब्रा और एक लाल रंग की जाली वाली पैन्टी थी और बहुत सारी लाल रंग की चूड़ियाँ भी थीं और कुछ साज़-श्रृंगार का सामान था साथ ही दो कन्डोम के पैकेट भी थे।

करीब 6 बजे मैं फ्रेश होकर तैयार होने लगी।

आज पहली बार शौहर के सामने मैं किसी दूसरे मर्द के लिए सज रही थी और शौहर देख रहा था।

पहले मैंने रंजीत के लाए हुए पैन्टी पहनी और ब्रा.. फिर रंजीत ने हमारे शादी का लाल रंग का शरारा मुझे पहनने को दिया।

शरारा पहनने के बाद रंजीत ने मुझे चूड़ियाँ पहनने को कहा।

मैंने दोनों हाथों में 20-20 चूड़ियाँ पहन लीं।

फिर रंजीत ने नाक की नथ पहनने को दी… हल्के गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगाई।

अब मैं पूरी तरह से दुल्हन बन गई थी, अच्छे से मेकअप किया और नये सैंडल पहन लिए।

रंजीत भी कपड़े पहन कर तैयार हुआ… अब सवा सात बजे थे।

रंजीत मेरे पास आकर बोला- सच में तू बहुत खूबसूरत लग रही हैं.. नीतिन तुझे देख कर खुश हो जाएगा।

मैं शर्मा गई और चुप रही… फिर वो मुझसे बोला- सुनो डियर.. आज तू तेरा मोबाइल घर पर ही रख और वहाँ नीतिन को बोलना मत कि तेरे पास मोबाइल है.. ग़लती से भी तू उसको अपना मोबाइल नम्बर नहीं देना और ना ही हमारे घर का पता बताना।

रंजीत की बातों से मुझे पता चला कि वो ज़रा भी नहीं चाह रहा था कि नीतिन मुझसे चुपके से कोई रिश्ता बनाए।

उसके मन में यह डर था कि हम बाद में चुपके से रिश्ते न रख लें.. मैं बस चुप रही।

रंजीत मेरे पास आकर बोला- सच में तू बहुत खूबसूरत लग रही हैं.. नीतिन तुझे देख कर खुश हो जाएगा।

मैं शर्मा गई और चुप रही…
फिर वो मुझसे बोला- सुनो डियर.. आज तू तेरा मोबाइल घर पर ही रख और वहाँ नीतिन को बोलना मत कि तेरे पास मोबाइल है.. ग़लती से भी तू उसको अपना मोबाइल नम्बर नहीं देना और ना ही हमारे घर का पता बताना।

रंजीत की बातों से मुझे पता चला कि वो ज़रा भी नहीं चाह रहा था कि नीतिन मुझसे चुपके से कोई रिश्ता बनाए। उसके मन में यह डर था कि हम बाद में चुपके से रिश्ते न रख लें.. मैं बस चुप रही। निकलते वक़्त एक बार फिर रंजीत मुझसे बोला- उसको कहना कि तुम्हारे पास मोबाइल ही नहीं है।

मैंने ‘हाँ कहा और हम घर से निकल पड़े। ऑटो वाले को रंजीत ने पता दिया और हम निकल पड़े।करीब 7.50 को नीतिन के बताए हुए पते पर पहुँच गए।

जैसे ही उस बिल्डिंग में एंट्री की.. मेरी धड़कनें तेज हो गईं.. एक डर सा लगने लगा। नीतिन का फ्लैट सेकंड फ्लोर पर था। रंजीत ने दरवाजे की घन्टी बजाई। नीतिन ने दरवाजा खोला और हमको अन्दर बुला लिया।

मैंने देखा नीतिन का कद करीबन 6 फीट और पहलवानी जिस्म था। कपड़ों में उसके मसल्स दिखाई दे रहे थे। उस कमरे में 2 सोफे रखे थे, एक पर नीतिन बैठा और दूसरे सोफे पर मैं और मेरा शौहर बैठ गए। नीतिन मुझे देख कर बोला- रंजीत.. यह नगीना कहाँ से ढूँढ लाया रे तू.. साले मुझे तो यह तेरी बीवी लगती ही नहीं है.. कोई अप्सरा लग रही है।

मैं शर्मा कर नीचे देखने लगी…

फिर नीतिन ने हमको कोल्ड ड्रिंक दिया। कुछ देर तक नॉर्मल बातें हुईं।

फिर नीतिन रंजीत से बोला- बोल गान्डू, क्या-क्या करवाना चाहता है तू.. इस छिनाल से..मैं उसकी बातों से चौंक गई।

रंजीत बोला- नीतिन.. आज तू मेरी इस रंडी बीवी को ऐसे चोद कि इसको इसकी नानी याद आ जाए.. चिल्लाने तक चोद इसको.. मुझे बहुत मज़ा आएगा।

रंजीत की बात सुनकर मैं और डर गई, मेरी समझ नहीं आ रहा था कि आज रात में क्या होने वाला है।

तब नीतिन बोला- तू देखते जा.. आज मैं इसकी गान्ड भी और चूत भी कैसे फाड़ने वाला हूँ.. ऐसा चिकना माल बार-बार थोड़ी ना मिलता है.. तेरे सामने आज तेरी पत्नी से मैं सुहागरात मनाने वाला हूँ। इतना कह कर वो मेरे पास आया और मुझे सोफे से उठा कर खड़ा किया।

मैं नीचे देख रही थी.. तब नीतिन ने मेरा सिर ऊपर किया..
दो मिनट तक मुझे निहारता रहा।
फिर अचानक से उसने मुझे पास खींच कर मेरे मुँह पर अपना मुँह रख दिया और चूमा-चाटी करने लगा।

वो चुम्बन करते-करते मेरे होंठ भी काट रहा था।

पाँच मिनट हो चुके थे लेकिन नीतिन अपना मुँह मेरे मुँह से निकाल ही नहीं रहा था। कुछ देर बाद मेरे बदन में भी कुछ-कुछ होने लगा, मैं भी नीतिन को चुम्बन करने लगी..चुम्बन करते-करते मैंने रंजीत की तरफ देखा.. वो बड़े ध्यान से हमारी ओर ही देख रहा था।

उस वक़्त मुझे कुछ शरम आई.. तभी अचानक नीतिन ने अपना मुँह अलग किया और एक झटके में मेरा शरारा खींच दिया.. दूसरे झटके में फाड़ कर मेरे जिस्म से निकाल फेंका। अब मैं एकदम डर गई। नीतिन के लिए 2 घंटे से मैं तैयार हो रही थी और उसने 2 मिनट में मेरे कपड़े फाड़ कर निकाल दिए।

अब मैं नीतिन के सामने सिर्फ़ पैन्टी और ब्रा में थी। नीतिन रंजीत को बोला- ओए गान्डू.. इधर आ और तेरी रंडी पत्नी की ब्रा निकाल…रंजीत मेरे पास आया और पीछे से ब्रा का हुक खोला और ब्रा निकाल दिया और वहीं खड़ा रहा।

तब नीतिन चिल्लाया- अब यहाँ क्यों अपनी माँ चुदा रहा है तू.. चल सोफे पर जा..रंजीत सोफे पर जाकर बैठ गया।

नीतिन मेरे पास आया और मेरे दोनों मम्मों पर हाथ रख के बोला- क्या मस्त बॉल हैं.. वो दोनों हाथों से मेरे मम्मों को दबाने लगा।

दो मिनट बाद नीतिन ने मेरे दोनों मम्मों इतने ज़ोर से दबाए कि मेरी चीख निकल आई।

मैं ज़ोर से चिल्लाई तब नीतिन भी ज़ोर से मुझसे बोला- चुप रंडी.. बाहर आवाज़ जाएगी ना.. अब चिल्लाई तो तेरा मुँह तोड़ दूँगा..

मैं चुप हो गई।

अब नीतिन ज़ोर-ज़ोर से मेरे मम्मों को मसलने लगा.. चूचुकों को मींजने लगा.. मुझे बहुत दर्द हो रहा था।

दस मिनट बाद नीतिन ने अपने कपड़े निकाल दिए.. वो अब सिर्फ़ अंडरवियर में था। फिर उसने मुझे नीचे बैठने को बोला।
‘चल अपने हाथ से मेरा कच्छा निकाल..’

मैं नीतिन के सामने बैठी थी और दोनों हाथ उसके अंडरवियर पर रख कर धीरे से नीचे खींचा.. वैसे ही उसका 9 इंच का लंड मेरे सामने आ गया।

अब मेरी धड़कनें बहुत तेज हो गई थीं। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि इतना बड़ा लंड भी होता है। नीतिन का लंड मेरे शौहर से डबल साइज़ का और मोटा भी था।

कुछ सोचे बिना ही मैंने दोनों हाथों से उसको पकड़ लिया, ऐसा लगा कि मैंने कोई गरम लोहा पकड़ा है। फिर ऊपर नज़र नीतिन की तरफ घुमाई..

तब वो मुस्कुराते हुए बोला- कैसा लगा.. जानू..?
मैं शर्मा कर नीचे देखने लगी और ध्यान से नीतिन का लंड देखने लगी

लंड एकदम काला था और बहुत ही क्यूट था।

तब नीतिन बोला- सिर्फ़ देख मत कुतिया.. इसको मुँह में लेकर चूस भी.. जैसे ही मैं लंड के और करीब गई तो मुझे वहाँ से कुछ गंदी बदबू आने लगी और मैं वापिस पीछे हटी।

तब नीतिन बोला- क्या हुआ?

मैं डरते हुए बोली- बहुत बदबू आ रही है..

वो ज़ोर से हँसने लगा और बोला- रंडी.. सुबह से मैंने इस लंड को धोया नहीं है.. क्योंकि मैं चाहता हूँ कि तू अपने मुँह से इस लंड को साफ़ करे.. चल अब नखरे मत कर.. मुँह में लौड़ा लेकर साफ़ कर..

अब मैं समझ गई कि ऐसा करने के सिवाय कोई चारा नहीं है।

मैंने 3-4 सेकेंड के लिए अपने साँसें बंद करके उसका लंड मुँह में भर लिया और चूसना शुरू किया।
मेरे मुँह में उसका लंड केवल 4-5 इंच ही जा रहा था।

करीब 5 मिनट चूसने के बाद अब मेरी चूत में से भी पानी बहना शुरू हो गया था।
मुझे महसूस होने लगा कि मेरी पैन्टी भी गीली हो गई है।
अब मैं और मूड में आकर लंड चूसने लगी।

तब नीतिन ने मेरा सिर और दबा कर पूरा लंड मुँह में लेने को कहा…लेकिन मुँह मे पूरा जा ही नहीं रहा था.. उसका लंड मेरे गले तक ही आ रहा था।

दस मिनट बाद मुझे खड़ा किया और बोला- चल अब कमरे में चल।

उसने रंजीत से भी कहा- एक कुर्सी लेकर तू भी आ जा कमरे में..

कमरा बड़ा था और एक बड़ा सा बिस्तर था वहाँ मैं बिस्तर पर बैठ गई और रंजीत बाजू में कुर्सी लगा कर बैठ गया।

अब नीतिन ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी पैन्टी निकाल कर चूत देखने लगा और बोला- ओए रंजीत यहाँ आ.. देख मेरा लंड चूस कर तेरे रंडी बीवी की चूत कैसी गीली हो गई है.. ज़रा पास आकर तो देख।

नीतिन की बात सुन कर मुझे बहुत शरम आ गई।

रंजीत भी अब पास आकर मेरी चूत का पानी देखने लगा… तो मैं और शरमा गई।

फिर नीतिन ने मेरी दोनों टाँगें फैला कर अपना मुँह मेरी चूत पर रखा और चाटना शुरू कर दिया.. वो कुत्ते जैसे चाटने लगा… मेरी चिकनी बुर में ज़ोर-ज़ोर से जुबान अन्दर-बाहर करने लगा।

मैं तो उसकी नुकीली जीभ की रगड़ से पागल होने लगी और 3-4 मिनट में ही झड़ गई और मेरा पानी चूत में से बहने लगा।

नीतिन ने सब पानी चाट कर साफ़ कर दिया।
अब नीतिन मेरे ऊपर आ गया और मुझे चूमने लगा.. मेरे मम्मों को मसलने लगा।

पाँच मिनट तक वही करता रहा।

अब मुझसे सहा नहीं जा रहा था.. मैं दुबारा अपनी चूत में चुनचुनी महसूस करने लगी थी.. मुझे ऐसा लग रहा था कि कब नीतिन मेरी चूत में लंड डालेगा और मुझे ठंडी करेगा।

फिर नीतिन ने एक हाथ से लंड सैट करके चूत पर रखा..
तभी रंजीत की आवाज़ आई- नीतिन भाई.. प्लीज़ कन्डोम लगा कर करो ना..

नीतिन बोला- साले डर मत.. तेरी पत्नी को मैं प्रेग्नेंट नहीं करने वाला हूँ।

फिर नीतिन ने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत पर रखा…

मेरी चूत में से तो पानी बहने लगा था.. दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं।

फिर नीतिन ने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत में धीरे से धकेला और कुछ देर वैसे ही रहने दिया.. मुझे अपनी चूत में उत्तेजना इतनी ज्यादा थी कि सुपारा बड़ा लगने के बाद भी ठीक लगा.. उसका लौड़ा बहुत बड़ा सा था.. पर तभी अचानक से नीतिन ने एक ज़ोर का झटका मारा और उसका आधा लंड मेरी चूत को चीरते हुए अन्दर घुस गया।

मैं ज़ोर से चिल्लाई और नीतिन को पीछे धकेलने लगी.. लेकिन उसी वक़्त नीतिन ने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों हाथ बिस्तर पर दबा कर रखे और अपना मुँह मेरे मुँह से लगा कर मेरी आवाज़ बंद कर दी।

मैं छ्टपटाने लगी.. मुझसे इतना बड़ा लंड नहीं सहा जा रहा था..

मुझे ऐसा लग रहा था कि किसी ने लोहे की गरम कोई चीज़ अन्दर डाल दी है।

अब मेरी चूत के अन्दर जलन शुरू हो गई थी। मैं नीतिन से ज़ोर से लिपट गई।

एक मिनट बाद नीतिन ने वापिस से एक ज़ोर का धक्का मारा और 6 या 7 इंच लंड और अन्दर घुसा दिया।

अब मेरी हालत सच में बहुत बुरी हो गई थी.. मेरा पूरा बदन काँपने लगा.. मैं छ्टपटाने लगी।

फिर नीतिन कुछ देर वैसे ही रुका रहा.. जब उसने देखा कि उसके मोटे लंड को मेरी चूत के छोटे से सुराख ने एडजस्ट कर लिया है.. तब उसने अपना लंड आगे-पीछे करना शुरू कर दिया..
लेकिन मेरा दर्द कम नहीं हुआ और मेरी चूत से और पानी निकलने लगा।

कुछ देर उसी अवस्था में नीतिन अपना लंड अन्दर-बाहर करता रहा था।

मेरी चूत के पानी से लौड़े में चिकनाई आ गई थी और अब सटासट चुदाई से मैं भी पागल हो गई थी.. मुझे दर्द भी अच्छा लगने लगा था।

नीतिन का लंड मेरी चूत में फंसा हुआ था और मेरी चूत के अन्दर से ऐसा लगने लगा कि कोई लावा उबल रहा है और बाहर आने को बेचैन है।

उतने में नीतिन ने अपना लंड मेरी चूत मे से पूरा बाहर निकाला तो मुझे मेरी चूत खाली-खाली लगने लगी और फिर देखते ही देखते नीतिन ने दुबारा इतनी ज़ोर का झटका मारा कि मैं फिर चीख पड़ी- उईई माँआआआआ.. ये क्या कर दिया.. आआअ निकालो.. निकालो प्लीज़…

मुझे ऐसे लगने लगा कि मेरे बदन को चीरते हुए कोई मोटा सा लोहे का सख़्त सरिया मेरी चूत के रास्ते मेरी टाँगों के बीच घुस गया है।

मैं नीतिन से लिपट गई और उसको ज़ोर से पकड़ लिया और फिर ‘टोटल ब्लैक आउट’.. शायद मैं एक लम्हे के लिए बेहोश हो गई थी।

मेरी दोनों आँखों से पानी निकलने लगा।
नीतिन का पूरा का पूरा 9 इंच का लंड अब मेरी चूत के अन्दर घुस चुका था।
मेरा दिमाग़ कुछ काम नहीं कर रहा था.. पता नहीं मैं कितनी देर बेहोश रही थी..
लेकिन जब होश आया तो देखा नीतिन अपने मोटे लंड से मेरी फटी हुए चूत को चोद रहा था।

उसका लंड आगे-पीछे हो रहा था और मेरी चूत में बहुत जलन हो रही थी।

फिर 3-4 मिनट में दर्द कुछ कम होने लगा और मुझे भी अब मज़ा आने लगा।

मैं भी अब नीचे से मेरी कमर उठा कर नीतिन का लंड लेने लगी।

नीतिन मुझे अब नॉनस्टॉप चोद रहा था.. रुकने का नाम नहीं ले रहा था।

मैं नीतिन के बदन से चिपकी हुई थी और उसके फटके पर मेरे दोनों मम्मों आगे-पीछे होने लगे।
अब मेरी चूत ने उसके बड़े लंड को अपने छोटे से सुराख में एडजस्ट कर लिया था।

अब नीतिन भी बड़ी मस्ती में आ गया था.. वो मुझे दनादन चोदे जा रहा था।
जैसे ही लंड अन्दर-बाहर हो रहा था तो मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा।
जिंदगी मे ऐसा मज़ा कभी नहीं आया था मुझे अब नीतिन मेरे दोनों कंधे पर हाथ रख कर अपनी गान्ड उठा-उठा कर लंड को पूरे सिरे तक बाहर निकालता था और ज़ोर के झटके से अन्दर घुसा रहा था।

अब नीतिन की चोदने की रफ़्तार बढ़ चुकी थी।

मैं वापिस से झड़ चुकी थी.. अब मुझे मेरी चूत मे महसूस होने लगा कि नीतिन का लंड फूलता ही जा रहा है।

उसने और ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू किया… मैं तो अब जन्नत की सैर कर रही थी।

मेरी नज़र मेरे शौहर पर गई तो देखा हमारी चुदाई देख कर उसकी आँखें फटी की फटी रह गई थीं।

अब नीतिन पूरा लंड बाहर निकाल कर एक झटके में पूरा का पूरा अन्दर डालता था फिर निकालता और फिर वही तेज रफ्तार से अन्दर कर रहा था।

हमारी चुदाई को कम से कम 30 या 35 मिनट हो गए थे।
मैं अपनी गान्ड उठा-उठा कर नीतिन का पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में लेना चाह रही थी।

मेरी पूरी शरम खत्म हो चुकी थी।

मैं नीतिन के मुँह में मुँह डाल के उससे ‘फ्रेंच-किस’ करने लगी थी।

अब नीतिन का लोहे जैसा सख़्त लंड मेरी चूत के चिथड़े उड़ा रहा था।

मैं मदहोश हो चुकी थी.. पूरी मस्ती में नीतिन से चुद रही थी।
अब हम दोनों की कमर की आगे पीछे होने की चाल इतनी लयबद्ध हो रही थी कि मानो ताल पे ताल मिला रहे हों..

अब नीतिन के धक्के और तेज हो चुके थे और फिर मेरा बदन अकड़ गया और मैं फिर एक बार झड़ गई।
अब नीतिन इतने ज़ोर से चोदने लगा था कि मुझे महसूस होने लगा कि उसका मोटा लोहे जैसा सख़्त लंड मेरी चूत को फाड़ कर मेरे पेट तक घुस चुका है।

नीतिन ने मेरे दोनों मम्मों को अब कस कर पकड़ लिए और उनको बुरी तरह भंभोड़ना शुरू कर दिया।

वो अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को पकड़ कर मुझे बिस्तर से उठा कर फिर बेड पर पटकने लगा..

अब सच में नीतिन जानवर बन चुका था।
मेरी चूत में भी अब तूफान मच चुका था।
मैं ज़ोर से नीतिन से चिपक गई और नीतिन के मुँह में मुँह लगा दिया।
हमारी चुदाई शुरू हुए करीब एक घंटा होने को आया था।

अब नीतिन की साँसें तेज हो गई थीं और वो रफ़्तार बढ़ाने लगा था.. उसका बदन भी कुछ कँपने लगा.. मैं समझ गई कि अब नीतिन झड़ने वाला है।

मैंने भी नीतिन को कस कर पकड़ लिया.. फिर से मेरी चूत का पानी निकलने लगा और उसी वक़्त नीतिन ने ज़ोर से फटके मारने शुरू कर दिया और फिर उसके लंड से मलाई के फुव्वारे निकलने शुरू हो गए।
मुझे महसूस होने लगा नीतिन का गरम पानी मेरी चूत में निकलने लगा है… मैंने नीतिन को कस कर पकड़ लिया..

एक दो तीन चार पाँच… पता नहीं कितनी देर तक नीतिन के लंड से मलाई के फुव्वारे निकलते रहे थे।

फिर नीतिन मेरे बदन पर गिर गया।

अब हम दोनों ज़ोर-ज़ोर से हाँफने लगे थे।
मेरी चुदी हुई चूत..
हम दोनों की मलाई से भर चुकी थी।

लेकिन वो मलाई अब भी बाहर नहीं निकल रही थी क्योंकि चूत पर नीतिन के लंड का ढक्कन लगा था।

कुछ देर दोनों गहरी साँसें लेने लगे…

अब मेरी पकड़ भी शिथिल हो गई थी… दोनों के बदन पसीने से भरे थे।

कुछ देर बाद मुझे महसूस होने लगा कि नीतिन का लंड अब छोटा होने लगा है।

फिर कुछ देर बाद नीतिन ने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला.. वैसे ही मेरी चूत में से दोनों की मिक्स मलाई बाहर आकर मेरी टाँगों पर बहने लगी और नीतिन ने लंड निकाल कर सीधे मेरे मुँह में चूसने को दे दिया।

नीतिन के लंड पर भी दोनों की मिक्स मलाई लगी थी.. जो उसने मुझे चाटने को कहा।

यहाँ मेरे शौहर की हालत भी हमारी चुदाई देख कर खराब हो चुकी थी। फिर मैं उठी और लंगड़ाती हुई साफ़ करने बाथरूम चली गई..
वैसे ही मेरे पीछे नीतिन भी आ गया।
उसने मेरे हाथ में अपना लंड देकर साफ़ करने को कहा।

मैं नीतिन का लंड पानी से धो रही थी तब उसने मुझसे पूछा- कैसी लगी डार्लिंग इस सच्चे मर्द की चुदाई।

मैंने जवाब मे सिर्फ़ खड़े होकर उसको चुम्बन किया और आँखों से ही प्यार से कहा- मैं बहुत संतुष्ट हो गई हूँ।

फिर सब बाहर के कमरे में आ गए.. नीतिन ने फोन पर खाने को कुछ ऑर्डर किया।

अब भी हम दोनों नंगे ही थे.. मेरी भी शरम खत्म हो गई थी।

पता नहीं मैं इतनी बेशर्म कैसे हो गई कि मेरे शौहर के सामने नीतिन के पास नंगी बैठी थी।
शायद यह सब नीतिन की चुदाई का कमाल था।

नीतिन रंजीत को बोला- देख बे.. गान्डू, औरत को ऐसे चोदते हैं.. साले तुम जैसे कमजोर इंसानों को कैसे ऐसे हसीन औरतें मिल जाती हैं। बेचारी जिंदगी भर असली मर्द के लंड के लिए तड़पती रहती हैं…

रंजीत ने इस बार सिर्फ़ स्माइल दी और चुप रहा।

कुछ देर में खाना आ गया.. तब मैं अन्दर कमरे में चली गई थी।

नीतिन ने खाना लेकर बिल दे दिया और मुझे बाहर बुलाया।
हम सब खाना खाने बैठ गए।

नीतिन मुझसे बोला- अपने हाथ से मुझे आज खाना खिला।

मैं भी बिना झिझक के उसके मुँह में निवाला डालने लगी।
रंजीत चुपचाप से देख रहा था।
अब मुझे किसी का डर नहीं था… रंजीत ही तो मुझे यहाँ लेकर आया था.. तो मैं क्या ग़लत कर रही थी।

सब का खाना हो गया और फिर हम कमरे में आ गए।

अब नीतिन मुझसे बोला- डार्लिंग.. अब की बार मैं तुम्हारी गान्ड मारने वाला हूँ।

मैं ज़ोर से चिल्ला उठी- नहीं नीतिन.. गान्ड नहीं प्लीज़.. बहुत बड़ा है आपका लंड… मेरी गान्ड फट जाएगी.. प्लीज़ ऐसा मत करो..’

नीतिन बोला- डर मत डियर.. तेरी चूत भी छोटी थी.. फिर भी इतना बड़ा लंड ले ही लिया ना.. मैं तेरी गान्ड बड़े आराम से मारूँगा..
पता नहीं फिर भी मुझे डर लगने लगा था।

नीतिन ने मुझे पास बुला कर लंड चूसने को कहा।
कुछ देर चूसने के बाद हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए।
अब नीतिन मेरी चूत चाट रहा था.. मैं नीतिन का लंड चूस रही थी।

दस मिनट बाद नीतिन ने मुझे डॉगी-स्टाइल में कर दिया और मेरी गान्ड के छेद पर लंड का सुपाड़ा रखा।

तब मैं नीतिन से बोली- नीतिन प्लीज़ तेल लगा कर करो ना.. फिर दर्द कम होगा।

नीतिन हंसा और बोला- नहीं डियर, मुझे औरतों की चीखें सुनने में बड़ा मज़ा आता है.. तुझे जितना दर्द होगा.. उतनी मुझे खुशी होगी..

मैं चुप हो गई।

अब नीतिन मेरी गान्ड पर लंड का सुपाड़ा रख कर धीरे-धीरे अन्दर डालने की कोशिश करने लगा..

लेकिन मेरी गान्ड का होल बहुत छोटा था और नीतिन का लंड बहुत बड़ा था.. घुस ही नहीं रहा था।

फिर भी नीतिन डालने की ज़बरदस्ती कर रहा था।

कुछ ही पलों में उसका सुपारा गांड में चला गया.. मैं आँखें बन्द करके दर्द सहने की हिम्मत जुटा रही थी।

अब नीतिन मेरी पीठ के पीछे से हाथ आगे लेकर मेरे मम्मों को सहलाने लगा और पीछे गान्ड में धीरे-धीरे धक्के मारने लगा।

मुझे दर्द होने लगा.. 2-3 मिनट में मुझे महसूस होने लगा कि नीतिन का लंड का सुपाड़ा मेरी गान्ड के अन्दर चला गया है।

अब मेरी चूत भी पानी छोड़ने लगी थी।

फिर नीतिन रंजीत को बोला- ओए रंजीत.. ज़रा यहाँ आकर तेरी लुगाई की कमर एक हाथ से पकड़ और मेरा लंड दूसरे हाथ से पकड़ कर रख..

रंजीत पास आ गया.. उसने एक हाथ से मेरी कमर पकड़ी और एक हाथ से नीतिन का लंड पकड़े रखा।

अब नीतिन धीरे-धीरे अपना लंड अन्दर घुसाने लगा।

मैं चिल्लाने लगी.. लेकिन उसको अब कुछ परवाह ही नहीं थी।

दो-तीन मिनट में शायद 3-4 इंच लंड घुस चुका था।

कुछ देर ऐसे ही रहा.. नीतिन फिर उसने लंड थोड़ा बाहर निकाला और एक ज़ोर का झटका मारा और 5 इंच तक लंड अन्दर घुसा दिया।
मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया।

मैं फफक कर रो पड़ी- नीतिन बाहर निकालो.. नहीं सहा जाता.. प्लीज़.. नीतिन मैं आपके पैर पड़ती हूँ.. तुम्हारा इतना मोटा लंड मेरी गान्ड नहीं ले पाएगी.. इसको बाहर निकालो..

लेकिननीतिन कहाँ सुनने के मूड में था.. थोड़ा लंड बाहर खींच कर एक ज़ोर का धक्का मार कर और लंड को अन्दर धकेलने लगा था।

अब दस मिनट हुए थे लेकिन नीतिन का लंड अभी भी पूरा गया नहीं था।

मैं दर्द से रोने लग गई थी।

तब नीतिन ने लंड बहुत बाहर निकाल कर एक ज़ोरदार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड मेरी गान्ड में घुसा दिया।

मैं ज़ोर से चीख पड़ी और डॉगी-स्टाइल से गिर कर बिस्तर पर धराशाही हो गई।

मेरे सामने वापिस से ब्लैक आउट हो गया था।

नीतिन का पूरा लंड अब मेरी गान्ड के अन्दर चला गया था और गान्ड में जाकर लोहे जैसे सख़्त हो गया था।

मैं और कुछ समझ पाती तभी नीतिन ने मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया।

मुझे ऐसा लगने लगा कि ये लंड गान्ड में घुस कर चूत से तो बाहर निकल आएगा।

मैं चीख रही थी.. रो रही थी और नीतिन मेरी गान्ड मारते जा रहा था।

मैं मन ही मन में सोचने लगी कि अब के बाद कभी गान्ड नहीं मरवाऊँगी।

नीतिन ने पहले ही मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया था और अब गान्ड को गड्डा बना कर उसकी हालत खराब कर रहा था।

लेकिन कुछ देर बाद मेरा दर्द कम होने लगा और मैं भी नीतिन के साथ कुछ मस्ती करने लगी।

नीतिन मुझे अब ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।

करीब 40-45 मिनट बाद नीतिन की रफ़्तार बढ़ गई और उसने मेरी कमर कस कर पकड़ ली और उसकी मलाई मेरी गान्ड में छूटने लगी।

पहली बार के मुक़ाबले इस बार कम मलाई निकली और हाँफते हुए मेरी पीठ पर गिर गया।

हम दोनों दस मिनट वैसे ही पड़े रहे.. फिर मैं जैसे तैसे उठी और साफ़ करने बाथरूम गई.. उधर अपनी गान्ड को पानी से साफ़ करने लगी तो मुझे महसूस हुआ कि मेरी गान्ड काफ़ी फैल चुकी है।
मेरी 3 ऊँगलियाँ एक साथ गान्ड में जा रही थीं।

मैंने गान्ड पर पानी डाला.. तो नीचे देखा लाल पानी बह रहा है.. मैं समझ गई मेरी गान्ड में से खून निकल रहा था।
मेरी गान्ड फट चुकी थी।

फिर मुश्किल से खड़े होकर बाहर आई.. मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था। बाहर हॉल में आकर देखा तो नीतिन के सामने रंजीत अपना लंड हिला रहा था।

हम दोनों दस मिनट वैसे ही पड़े रहे.. फिर मैं जैसे तैसे उठी और साफ़ करने बाथरूम गई.. उधर अपनी गान्ड को पानी से साफ़ करने लगी तो मुझे महसूस हुआ कि मेरी गान्ड काफ़ी फैल चुकी है।
मेरी 3 ऊँगलियाँ एक साथ गान्ड में जा रही थीं।

मैंने गान्ड पर पानी डाला.. तो नीचे देखा लाल पानी बह रहा है.. मैं समझ गई मेरी गान्ड में से खून निकल रहा था।
मेरी गान्ड फट चुकी थी।

फिर मुश्किल से खड़े होकर बाहर आई.. मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था।

बाहर हॉल में आकर देखा तो नीतिन के सामने रंजीत अपना लंड हिला रहा था।

मैं नीतिन के बाजू में बैठ कर देखने लगी..

पाँच मिनट में रंजीत के लंड से पानी निकलने लगा..

वैसे ही रंजीत ने मेरे पास आकर मेरे मुँह पर सब पानी गिरा दिया और शांत हो गया।

मैं वापिस बाथरूम जाकर साफ़ करके आई और नीतिन के पास बैठ गई।

नीतिन ने मुझे पास लेकर चुम्बन करने लगा।

फिर मैंने नीतिन की छाती चाटने लगी और फिर उसके निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगी।
नीतिन की छाती पर बहुत बाल थे।

दस मिनट बाद नीतिन मुझसे बोला- अब अपने कमरे में चलते हैं डियर…

हम कमरे में जाने लगे.. तब रंजीत भी हमारे पीछे आने लगा..
तो नीतिन बोला- रंजीत.. अब तुम बाहर हॉल में रूको या सो जाओ.. मैंने तुम्हारी फैंटेसी पूरी कर दी है.. अब मुझे तेरी पत्नी को अकेले में चोदना है.. इसलिए हमको डिस्टर्ब मत करना।

रंजीत बोला- लेकिन नीतिन भाई.. मैं सिर्फ़..

नीतिन बीच में बोला- कहा ना तुझे.. बाहर रुक अब…
और हम दोनों कमरे मे आ गए और नीतिन ने कमरे का दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया।

मैं नीतिन से लिपट कर उसको प्यार करने लगी।

तब मुझे नीतिन बोला- डियर तुझे मेरा चोदने का तरीका पसंद आया ना.. सच बोल?

मैंने ‘हाँ’ कहा।

फिर नीतिन बोला- तुझे ये चुदाई सिर्फ़ आज की रात भी चाहिए या बाद में और भी चुदेगी।

मैं झट से बोली- मुझे तुम्हारी चुदाई हमेशा चाहिए.. अब मैं तुम्हारे लंड के बिना नहीं रह सकूँगी।

फिर नीतिन मुझसे बोला- देख.. मुझे नहीं लगता आज के बाद तेरा गान्डू शौहर तुझे मेरे पास लेकर आएगा.. अगर तुझे मेरा लंड चाहिए तो तू मुझे अपना मोबाइल नंबर दे दे और मेरा नंबर भी ले ले।

मैं अब सोच में पड़ गई.. रंजीत ने मुझे पहले ही कहा था कि नीतिन को अपना नंबर नहीं देना।

फिर मैंने सोचा कि रंजीत अगर अपनी खुशी के लिए मुझे नीतिन से चुदा रहा है तो मैं क्यों ना अपनी खुशी से नीतिन से चुदवाऊँ…
और फिर मैंने मोबाइल नंबर नीतिन को दे दिया जो उसने अपने मोबाइल में सेव कर लिया और अपना नंबर भी लिख कर मेरे पर्स में डाल दिया।

मैंने नीतिन से कहा- रंजीत को पता नहीं चलना चाहिए कि हमने नंबर एक्सचेंज किए हैं।

फिर रात में दो बार हमने पलंगतोड़ चुदाई की.. हम ऐसे चुदाई करते रहे जैसे हम मियाँ-बीवी हों और हमारी सुहागरात चल रही हो।

हमको सोते-सोते रात के 4 बज गए… और हम सुबह 9 बजे उठे।

मैं नहा कर तैयार हो गई। मुझे रंजीत कुछ खुश नहीं लग रहा था क्योंकि रात भर हम दोनों ही सिर्फ़ कमरे में थे इसलिए शायद…
उसने मुझसे ज़्यादा बात नहीं की… हम दोनों तैयार होकर जाने लगे.. तब देखा कि मेरे कपड़े फटे हुए हैं।

नीतिन ने बोला- मेरी बीवी की पुरानी साड़ी वगैरह हैं.. तुम वो पहन लो।

मैंने वही किया और फिर उसने मुझे पास लेकर अपनी बाँहों में भर कर मेरी गान्ड को सहलाते हुए एक लंबा चुम्बन लिया।
फिर हम वहाँ से निकले।

जैसे ही घर आए.. रंजीत मुझ पर चिल्लाने लगा कि तू अकेले क्यों सोई उसके साथ?

मैं बोली- तुमको मना करना चाहिए ना.. मेरी क्या ग़लती है.. उसके पास मुझे तुम ही लेकर गए थे ना..

फिर वो चुप हो गया और मुझसे पूछा- अपना मोबाइल नंबर तो नहीं दिया ना तूने?

मैंने ‘ना’ बोली।

पता नहीं फिर भी उसके दिमाग़ में कुछ शक़ था।

उसने मेरा मोबाइल लिया और उसमें से सिम निकाल कर मेरे सामने तोड़ दी और कचरे के डिब्बे में फेंक दी।

मैं चुप रही… 3-4 दिन निकल गए।

वहाँ नीतिन मुझे रोज मोबाइल लगता रहा होगा.. लेकिन सिम तोड़ने की वजह से संपर्क नहीं हो रहा था।

मेरे पास नीतिन का नंबर था.. जो उसने लिख कर मेरे पर्स में रखा था।

चार दिन बाद मैं नीचे जाकर पीसीओ से नीतिन को कॉल किया और सब बताया।

नीतिन बोला- मैं कल 11 बजे तेरे शौहर के जाने के बाद आता हूँ।

अगले दिन नीतिन 11 बजे घर आया।

उसने मुझे एक मोबाइल दिया और कहा- इस मोबाइल को छुपा कर रखना, तेरा शौहर बाहर जाएगा.. तब ऑन करना… हम दोनों इससे बात करते रहेंगे।

मैं खुश हो गई।

पूरे दिन में हमने तीन बार चुदाई की, अब मुझे रोज नीतिन के लंड का चस्का लग चुका था।

मुझे रंजीत का लंड ज़रा भी पसंद नहीं आ रहा था।

नीतिन हफ्ते में 5 दिन रोज मेरे घर आकर मेरी चुदाई करता था।

यहाँ मेरे शौहर के दिमाग़ से अब threesome का भूत भी उतर चुका था.. लेकिन उसको पता नहीं था.. कि नीतिन से उसकी पत्नीउसकी पत्नी चुदवा रही है।

अब 7 महीने हो गए उस बात को।

एक दिन मुझे पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूँ। मुझे बहुत खुशी हुई.. रंजीत भी खुश हुआ… नीतिन भी सुन कर खुश हुआ।

अब मैं और नीतिन सोच रहे थे कि किसका बच्चा है.. नीतिन या रंजीत का?

मैंने नीतिन से कहा- जिसका भी हो.. मैं खुश हूँ.. मैं यही समझूँगी कि ये तुम्हारे पानी से हुआ है।

नीतिन भी खुश हुआ… डॉक्टर ने मुझे इस अवस्था में चुदाई करने से मना किया।

नीतिन भी बोला- अब चुदाई नहीं करते हैं।

फिर नीतिन मुझे दिन भर प्यार करता रहता था।

मैं अब उसकी चुदाई के साथ साथ उसके प्यार से पागल हो रही थी।
मेरा नीतिन मुझे इतना प्यार करता था।
एक दिन नीतिन ने मुझे बताया कि वो अमेरिका जा रहा है…

मेरा छठा महीना चल रहा था.. मेरा पेट भी बाहर निकला हुआ था।
दिन भर हमने बातें की.. सेक्स तो कर नहीं सकते थे पर मैं उसके लंड के लिए बेचैन थी तो मैंने नीतिन का लंड मुँह में लेकर चूसना चालू किया.. वो मेरे मम्मों और गान्ड.. मेरे अंग-अंग को मसल रहा था।

करीब 30 मिनट तक मैंने लंड चूसा और उसने पूरा पानी मेरे मुँह में गिराया।

फिर शाम को चला गया.. जाते वक़्त बोला- अमेरिका से आने के बाद मेरे बच्चे की शक्ल देखूँगा।

वो चला गया… 9 महीने 18 दिन के बाद मैंने एक खूबसूरत से लड़के को जन्म दिया.. रंजीत बहुत खुश था।

मैंने ध्यान से देखा तो मुझे उस लड़के में नीतिन की झलक दिखाई दे रही थी।

यह बात रंजीत को नहीं पता चली क्योंकि रंजीत को ज़रा भी शक़ नहीं था कि उस दिन के बाद मैं कभी नीतिन से मिली हूँ।

अब हम सब खुशी से रहते हैं।

एक दिन मेरे सामने नीतिन का रंजीत के मोबाइल पर कॉल आया.. तब रंजीत ने बड़ी खुशी से नीतिन से कहा- मैं बाप बन गया हूँ।

मैं मन ही मन मुस्कुराई.. मुझे पता था कि ये लड़का नीतिन से हुआ है।

नीतिन का दो दिन बाद मुझे कॉल आया तब मैंने नीतिन से कहा- बेबी तुम्हारे जैसा ही दिखता है।

नीतिन बहुत खुश हो गया और बोला- इंडिया आऊँगा तब ज़रूर अपने बेटे से मिलूँगा।

यह मेरी एक सच्ची कहानी है.. मैं अब मेरे बच्चे और शौहर के साथ खुश हूँ।अब भी मैं आनंद से चुदती हु रंजीत को कुछ पता नही

आप इन सेक्स कहानियों को भी पसन्द करेंगे:

The Author

Sex Lover

Disclaimer: This site has a zero-tolerance policy against illegal pornography. All porn images are provided by 3rd parties. We take no responsibility for the content on any website which we link to, please use your won discretion while surfing the links. All content on this site is for entertainment purposes only and content, trademarks and logo are property fo their respective owner(s).

वैधानिक चेतावनी : ये साईट सिर्फ मनोरंजन के लिए है इस साईट पर सभी कहानियां काल्पनिक है | इस साईट पर प्रकाशित सभी कहानियां पाठको द्वारा भेजी गयी है | कहानियों में पाठको के व्यक्तिगत विचार हो सकते है | इन कहानियों से के संपादक अथवा प्रबंधन वर्ग से कोई भी सम्बन्ध नही है | इस वेबसाइट का उपयोग करने के लिए आपको उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए, और आप अपने छेत्राधिकार के अनुसार क़ानूनी तौर पर पूर्ण वयस्क होना चाहिए या जहा से आप इस वेबसाइट का उपयोग कर रहे है यदि आप इन आवश्यकताओ को पूरा नही करते है, तो आपको इस वेबसाइट के उपयोग की अनुमति नही है | इस वेबसाइट पर प्रस्तुत की जाने वाली किसी भी वस्तु पर हम अपने स्वामित्व होने का दावा नहीं करते है |

Terms of service | About UsPrivacy PolicyContent removal (Report Illegal Content) | Disclaimer | Parental Control

error: Content is protected !!