पदमा पड़ोसन गांड उछाल उछाल चुदवाया

मैं रमाकांत उम्र 34 साल शादीशुदा हूँ। मेरे बच्चे गाँव में रहते हैं और मैं यहां दिल्ली में एक रेस्टोरेंट व बार में वेटर की नौकरी करता हूँ। मेरी कहानी दो साल पहले की है।

मैं साउथ एक्स के एक होटल में नौकरी करता था और मेरा कमरा वहीं पास में ही था। वो पूरा मकान किरायेदारों के लिए ही बना था। नीचे तीन कमरे थे और छत पर सिंगल बने कमरे में मैं रहता था। होटल की नौकरी की वजह से मेरी ड्यूटी का कोई टाईम नहीं था, कभी रात में आ जाता जो कभी शाम को ड्यूटी जाता। छुट्टी के दिन पूरा दिन कमरे में टीवी देखने में गुजार देता।

मेरी कहानी यहीं से शुरू होती है। नीचे के तीन कमरों में भी किरायेदार ही थे जिनमें आसाम का एक परिवार भी था जिनमें वो मियां बीवी ही रहते थे। दोनों की शादी को चार साल हो गये थे पर कोई बच्चा नहीं था। आदमी ड्राईवर का काम करता था व उसकी बीवी घर पर ही रहती थी।

जब भी मैं घर पर रहता तो देखता उसकी बीवी छत पर कपड़े डालने आती है और मुझे टीवी देखते देख मेरे कमरे में झांकती रहती है। उसका पति शराबी था और शराब पीकर अपनी बीवी को खूब गाली देता और मारता पीटता था, बीवी चुपचाप सब सहन करती रहती थी। धीरे- धीरे मेरी उसके पति से दोस्ती हो गई और कभी कभी हम दानों साथ में बैठ कर पीने लग गये, कभी उसके रूम में तो कभी अपने रूम में पीने का दौर चलने लगा।

इसी बीच उसकी बीवी भी मुझ से घुलमिल गई और हमारी आपस में कभी कभी बातें होने लगी। एक बार उसने कहा- जब आप ड्यूटी जाते हो तो अपने रूम की चाभी मुझे दे जाया करें, मैं घर में बोर हो जाती हूँ। मेरे रूम में टीवी नहीं है। मैं देख लिया करूँगी आपके रूम में।

मैंने भी उसे एक डुप्लीकेट चाभी दे दी और वो मेरे जाने के बाद रोज आकर टीवी देखने लगी। धीरे धीरे वो कुछ ज्यादा ही मुझ से घुलमिल गई। पहले मेरा भी उसे चोदने का कोई विचार नहीं था पर उसे देख कर मेरी भी नीयत उस पर डोलने लगी और मेरा मन अब उसे चोदने का करने लगा। वो भी शायद मेरी ओर आकर्षित हो रही थी इसलिए वो कुछ ज्यादा ही मेरा ध्यान रख रही थी।

अब वो मेरे कमरे की सफाई भी करने लगी, अपने पति के साथ साथ वो मेरे भी कपड़े धोने लगी। छुट्टी के दिन हम दिन में साथ बैठकर ही टीवी देखते और रात को उसके पति के साथ बैठकर खूब दारू पीता।

एक दिन की बात है, उसके पति ने मेरे सामने ही उसे पीट दिया, वो रोने लगी और कमरे से बाहर निकल गई। मैंने उसके पति को समझाया पर वो उस रात कुछ ज्यादा ही पी चुका था और बड़बडाते हुए अपने बिस्तर पर लुढ़क गया। मैं भी उसे सुलाकर अपने रूम की ओर छत पर आ गया। यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

जब कमरे में पहुंचा तो देखा उसकी बीवी मेरे कमरे में ही बैठी है और टीवी देख रही थी।
मैंने उससे कहा- आप यहां क्या कर रही हैं?
वो बोली- वो मुझे उन पर बहुत गुस्सा आ रहा था इसलिए मैं कमरे से बाहर आ गई और अब रात में कहां जाती, इसलिए आपके रूम में आ गई।

मैं- ठीक है कोई बात नहीं, अब वो सो चुका है जाओ आप भी सो जाओ।
वो बोली- नहीं, आज रात मुझे यहीं सोने दो, कहीं रात में उठकर वो मुझे और न मार दे। मैं कल सुबह चली जाऊँगी अंधेरे अंधेरे में!
मैं- अरे यह ठीक नहीं है, तुम जाओ न अपने रूम में!

वो बोली- मैं आज रात उसके साथ नहीं सोऊँगी यदि आप मुझे यहां नहीं सोने दोगे तो मैं छत पर ही रात गुजार लूँगी। यह कह कर वो बाहर जाने लगी।
मैं- अच्छा, चलो यहीं सो जाओ, तुम चारपाई में सो जाओ, मैं नीचे बिस्तर बिछा लेता हूँ।
फिर मैंने अपना बिस्तर नीचे बिछाया और लेट गया।
अरे मैं आपको उसका नाम बताना ही भूल गया, उसका नाम पदमा था, 22 साल की थी, 18वें साल में उसकी शादी हो गई थी, तब से वो अपने पति के साथ ही दिल्ली में रह रही थी।

जवानी उसकी अभी पूरे उफान पर थी जो उसकी बड़ी बड़ी चूचियों से झलकती थी, बड़ी मस्त लगती थी, उसके पति की भी उम्र 26 साल की होगी।
लेटे लेटे मैंने उससे पूछा- पदमा सो गई हो क्या?
पदमा- नहीं जी, नींद नहीं आ रही है।
मैं- तो कुछ देर बातें करें।
पदमा- हाँ हाँ, मैं भी यही सोच रही थी पर आपसे कहा नहीं, सोचा आपको नींद आ रही होगी।

मैं- नहीं, मुझे रात में देर से सोने की आदत है। पदमा ये बताओ, ये तुम्हें रोज मारता है क्या?
पदमा- नहीं, जब दारू ज्यादा पी लेता है। पर हफ़्ते में दो तीन दिन तो हो ही जाते हैं।
मैं- अच्छा क्या यह तुम्हें प्यार नहीं करता?
पदमा- शादी के बाद कुछ साल तो बहुत करता था पर अब तो ढंग से बात भी नहीं करता है।

मैं- तो तुम बच्चा प्लान क्यों नहीं कर रहे हो? हो सकता है बच्चे के साथ साथ उसका प्यार भी बढ़ जाए।
पदमा- कहां जी, चार साल से कोशिश तो कर रहें हैं पर हो ही नहीं रहा है। अब तो ये मुझे कभी कभी ताने भी मारने लगे हैं कि तू मां नहीं बन सकती है।

मैं- तो किसी अच्छे डॉक्टर को दिखा कर चेकअप करवा लो।
पदमा- मैंने तो कब का दिखा भी लिया पर इनसे जब बोलो तो ये मुझ पर चिल्लाने लगते हैं और मुझे बहुत मारते हैं, बोलते हैं तुझे मेरी मर्दानगी पर शक है क्या? मेरे में तो कोई कमी नहीं है। अब तो मुझे भी बच्चा चाहिए। बिना बच्चे के मैं भी नहीं अकेले इनके साथ रह सकती हूँ।

मैं- तो कोशिश करते रहो, हो ही जाएगा।
पदमा- अब मैं आपसे कैसे कहूँ आपसे! कहते हुए मुझे बहुत शर्म आ रही है।
मैं- अरे शरमाओ मत, मैं भी तो तुम्हारे घर का ही सदस्य जैसा हूँ। मुझसे क्या शरमाना, खुल कर कहो ये बात हमारे ही बीच रहेगी। किसी को पता नही चलेगा।

पदमा- वो क्या है कि दो साल तक तो हमारा रिश्ता बहुत अच्छा चला पर अब पहले जैसी बात नहीं रही। जब इनका मन करता है तो मेरे ऊपर चढ़ जाते हैं और अपना काम करके मुंह घुमा कर सो जाते हैं मुझे तड़फती हुई छोड़कर!
मैं- फिर तुम क्या करती हो?
पदमा- धत्त… ये भी कोई पूछता है।

मुझे भी दारू का नशा चढ़ रहा था और पूछने में भी मजा आ रहा था- बताओ ना, यहां और कौन है तुम्हारे और मेरे सिवा?
पदमा- अंगुली डाल कर काम चलाती हूँ।
मैं- पर अंगुली से मजा आता है क्या?

पदमा- नहीं, पर क्या करूँ? और कोई चारा भी तो नहीं है। अच्छा आप भी शादीशुदा हो बिना बीवी के आप कैसे रहते हैं?
मैं- हम भी हाथ से काम चला लेते हैं आपकी तरह!
पदमा- मजा आता है क्या उसमें?
मैं- आता तो नहीं हैं, पर कोई देती भी तो नहीं है शादीशुदा लोगों को, सभी को कुंवारे लड़के ही चाहिए होते हैं मजा लेने के लिए!

पदमा- तुमने कितनों से मांगी है अब तक जो बोल रहे हो कोई देती ही नहीं?
शायद वो भी गर्म हो रही थी और मैं भी, मैंने उसकी तरफ देखा और बोला- मैं तुमसे मांगू तो तुम दे दोगी क्या?
पदमा- हाँ मैं तो दे देती अगर तुम मेरी प्यास बुझा पाओ तो!
मैं- तो आ जाओ ना नीचे फिर… ऊपर क्या कर रही हो? अभी बुझा देता हूँ।

वो थोड़ा घबरा गई- अरे मैं तो मजाक कर रही थी।
मैं- अरे आ भी जाओ, तुम भी क्या याद करोगी। दो महीने में ही तुम्हारे पेट में बच्चा ना डाल दिया तो कहना!
पदमा- क्या तुम मुझे सचमुच में माँ बना सकते हो? सच बताओ!

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