पदमा पड़ोसन गांड उछाल उछाल चुदवाया

गतांग से आगे …..

मैं- हाँ हाँ क्यो नहीं, रोज अपना माल नाली में बहाने से तो अच्छा है किसी के काम आ जाए। कोई औरत माँ बन जाए। यह तो बड़े पुण्य का काम होगा ना?
पदमा- तो फिर मुझे भी जल्दी से माँ बनना है।यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है। मुझे भी माँ बना दो अपने बच्चे की, तुम्हारा ये एहसान मैं कभी नहीं भूलूँगी।
मैं- रानी एहसान लेने के लिए पहले चूत देनी पड़ेगी ना, उसके लिए तुम्हें मेरे नीचे आना पड़ेगा। बोलो आ रही हो नीचे?
पदमा- माँ बनने के लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ।

मैं- अच्छा तो मैं भी देखूँ तुम क्या क्या कर सकती हो।
वो झट से नीचे आ गई, मुझे बाहों में भर लिया और पागलों की तरह चूमने लगी। फिर मेरा हाथ अपनी छातियों पर रख कर बोली- दबाओ इन्हें!

मैंने उसे चूमना और उसकी चूचियों को दबाना शुरू किया। उसका हाथ भी मेरे लंड पर आ गया और वह उसे सहलाने लगी। मैंने फटाफट उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिये और उसे नंगी कर दिया। उसने मेरा हाथ अपनी छातियों से हटाकर चूत पर रख दिया।

पदमा- देखो इसकी हालत क्या हो रही है, पूरी तरह से तप रही है। क्या तुम्हारी बरसात इसकी प्यास बुझा पायेगी?
मैं- अच्छा ये बात है तो देखो मैं कैसे तुम्हारी बंजर जमीन को हरी करता हूँ।

मैंने भी फटाफट अपने कपड़े उतारे और अपना लंड उसके आगे कर दिया। वो उसे लालापॉप की तरह चूसने लगी। मैं भी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया था मेरा लंड पत्थर जैसा सख्त हो गया था। जैसे ही लंड गीला हुआ, मैंने उसे लिटा कर उसकी चूत पर थूक लगाया और लंड के टोपे को चूत के मुहाने पर रख कर रगड़ने लगा।
वो तो पागल सी हो गयी- राजा अब तड़पाओ मत… बस डाल दो अपने लंड को मेरी दहकती चूत के अन्दर!

मैंने अपने होंठ उसके होठों से मिलाए और धीरे धीरे चूत पर लंड का दबाव देने लगा। उसकी चूत से पानी बह रहा था इसलिए चिकनी चूत में लंड डालने में कोई परेशानी नहीं हुई, थोड़ी ही देर में वो पूरा लंड अपनी चूत में निगल गई।

उसकी सिसकारियां निकलने लगी। उसे रोज लंड खाने की आदत तो थी ही पर मुझे आज बहुत दिनों बाद चूत मिली थी। मैं तो चूत में लंड डालकर अलग ही दुनिया में चला गया और धीरे धीरे उसकी चूत मारने लगा।
फिर मैंने उसकी दोनों चूचियां पकड़ी और स्पीड बढ़ाने लगा। पदमा को भी मजा आ रहा था। मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो पदमा कराहने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह…

मैं- पदमा रानी, मजा आ रहा है या नहीं? तुम्हारी जमीन पर मेरा हल चल रहा है तुम्हारी जमीन की जुताई तो ठीक से हो रही है ना? पदमा- राजा कुछ ना बोलो, बस चोदते जाओ, बहुत मजा आ रहा है… और जोर जोर से धक्के मारो और मेरी चूत को अच्छी तरह से रगड़ डालो।

मैं जोर जोर से उसकी चूचियां मसलने लगा, अब मैं तेज तेज कमर चलाने लगा, पदमा भी गांड उछाल उछाल कर साथ देने लगी। दोनों को बहुत मजा आ रहा था। फिर मैंने उसे उल्टा लेटने को कहा और उसके ऊपर आकर जोर जोर से लंड अंदर बाहर करने लगा।

यह चुदाई दारू के नशे के कारण कुछ ज्यादा ही लम्बी चल गई। हम दोनों पसीने से पूरी तरह भीग गये। अब उसने मुझे कस कर पकड़ लिया- राजा, तेज तेज करो मैं आने वाली हूँ। मेरा लंड भी लावा उगलने को तैयार खड़ा था, मैंने भी उसे कस कर पकड़ लिया और जोर जोर से चोदने लगा।

कुछ ही देर में हम दोनों को पानी एक साथ ही बह निकला, मैंने अपने गर्म गर्म वीर्य से उसकी चूत लबालब भर दी। मैं भी हांफते हुए उसके बगल में लेट गया, उसकी भी सांसें बड़ी तेज तेज चल रही थी।
मैं- मजा आया मेरी रानी?
पदमा- हाँ बहुत मजा आया। बहुत दिनों के बाद आज जम कर चुदी हूँ और बहुत दिनों बाद मेरा पानी झड़ा है। आज तो तुमने मजे करवा दिये। मेरी चूत तर कर दी तुमने आज तो!

मैं- मैंने कहां रानी, तुमने मेरे मजे करवा दिये। बहुत दिनों से कोई चूत नहीं मारी थी। अब जाके लंड को थोड़ा शान्ति मिली। चल एक राउण्ड और हो जाए?
वो भी तैयार हो गई।

इस बार भी चुदाई घमासान चली। छत पर कमरा होने से सुनने वाला तो कोई था नहीं। मैंने भी उसे हचक हचक कर चोदा, वो भी उछल उछल कर चुदवा रही थी। पूरा लंड उसकी चूत में पिस्टन की तरह चल रहा था। यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।
इस बार वो जल्दी झड़ गई। कुछ देर बाद मैं भी उसकी चूत में ढेर हो गया। उस रात मैंने उसे 4 बार चोदा और सुबह उजाला होने से पहले वो अपने कमरे में नीचे चली गई।

अब जब भी हमें मौका मिलता हम दोनों चुदाई का खेल खेलने लगे। इसी बीच उसने एक दो बार अपने पति से भी चुदवा लिया। मैंने उसे हर तरीके से चोदा उसने भी चुदाई के खुलकर पूरे मजे लिए। जो सुख उसका पति उसे नहीं दे पाया वो सुख अब वो मेरे से लेने लगी। चुदाई जितनी खुल कर और टेंशन मुक्त होकर करी जाए उतना मजा देती है। छत का कमरा होने को हम दोनो ने पूरा मजा उठाया। हमारी चुदाई रंग लाई और अगले ही महीने खुशखबरी भी आ गई वो माँ बनने वाली थी।

जब उसके पति को पता चला कि वो बाप बनने वाला है तो वो भी बड़ा खुश हुआ, उसने अपनी बीवी को मारना बंद कर दिया और उसका ख्याल रखने लगा। अब तो वो मेरी बीवी ही बन गई, हम दोनों बस चुदाई और चुदाई ही करते रहे।

मैंने उसकी डिलीवरी से एक महीने पहले तक उसकी खूब चुदाई की उसे अपना लंड चुसवाया और उसकी बहुत बार गांड भी मारी। मेरे लंड का पानी वो बड़े चटकारे लेकर पीती थी, उसने कभी किसी चीज के लिए मना नहीं किया। मैंने उसे उसके जीवन की सबसे बड़ी खुशी जो दे दी थी अपने वीर्य का दान जो देकर! ठीक समय पर उसने एक लड़के को जन्म दिया। अब उसका पति भी बहुत ज्यादा खुश था, बाप बनने की उसने मुझे भी दारू की बहुत बड़ी पार्टी दे डाली मैंने भी ले ली आखिर मैं भी फिर से बाप बन गया था।

इस तरह एक परिवार आबाद हो गया। बच्चा होने के 4 महीने बाद उसने कमरा बदल लिया और दूसरी जगह चले गये। मैंने भी फिर उसे ढ़ूंढने की कोशिश नहीं की क्योंकि मैं खुद अब उसके परिवार के बीच नहीं आना चाहता था। आजकल फिर मैं अकेला हो गया हूँ। देखो अगली चूत अब कब नसीब में मिलती है।