पड़ोसन की चुत बड़ी सुहावन लागे

मैं निखिल कुमार हूँ. आज जो यह आप सभी को अपनी कहानी बताने जा रहा हूँ वो बात कुछ 6 महीने पहले की है. हमारी गौशाला से सटे मकान में कोलकाता से एक बंगाली परिवार रहने को आया था. पति पत्नी और उनका एक बेटा (तरुण उम्र 18-19). उनके बेटे का दाखिला आरा के एनआईटी कॉलेज के बी.टेक. में हुआ है और वो हॉस्टल में ही रहता है. पति का नाम रमेश, उम्र 48 की है. वो एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करते हैं और ज्यादातर घर से बाहर ही होते हैं. उनकी पत्नी, गीतांजली, उम्र 45 साल, हॉउस वाइफ के साथ एक एलआईसी एजेंट भी है. वो बहुत हँसमुख और मिलनसार महिला है. उसका रंग गोरा है, लगभग 5 फ़ीट 5 इंच की ऊंचाई. उभरे हुए सुडौल स्तन, मस्त ठुमकते हुए नितम्ब, कमसिन चिकनी कमर, रसीले होंठ.. वो एक भरी पूरी औरत है. उसे देख कर मानो बदन में बिजली सी दौड़ जाती है. मन करने लगता है कि उसे बांहों में लेकर खूब प्यार करूँ.. प्यार करूँ से मतलब, उसकी जमके लूँ.

पड़ोसी होने की वजह से वो अक्सर हमारे घर आया करती थी और मेरी बहू से भी उसकी अच्छी खासी मित्रता हो गयी थी. वे दोनों टीवी देखना, बाजार जाना साथ ही करने लगी थीं.

मैं हमेशा की तरह स्कूल से छुट्टी के बाद गौशाला की देख रेख करता हूँ और रात को खाना खा कर हो सके, तो गौशाला में बने कमरे में ही सो जाता हूँ. मुझे चाय पीने की बहुत आदत है और गीतांजली मेरी पड़ोसन काफी अच्छा चाय बनाती है मैं हमेशा चाय के बहाने उसका रूप निहारने उसके घर चला जाता था. उसे भी चाय पीते वक्त मुझे कंपनी देना अच्छा लगता था. हम काफी बातें करते थे, वो मुझसे काफी घुल मिल गयी थी. शनिवार के दिन हमारे स्कूल की छुट्टी जल्दी हो जाती है.

एक दिन स्कूल से निकलने के बाद घर आया, तो देखा कि गीतांजली हमारे घर में अकेली थी.
“क्या बात है गीतांजली जी, आप अकेली हैं.. क्या ऑफिस की छुट्टी है आपकी? और मेरी बहू रानी कहां गयी?”
“जी.. आज मेरी छुट्टी है, आपके बेटे और बहू बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास रूटीन चेकअप के लिए गए हैं. आपकी बहू ने कहा था कि आप स्कूल से जल्दी आ जाएंगे, सो उसने मुझसे थोड़ा घर का ध्यान रख लेने को कहा है. आप फ्रेश हो जाइए, मैं आपके लिए खाना परोस दूंगी.
“अरे नहीं नहीं.. आप क्यों तकलीफ करती हो.. मैं खुद ले लूंगा.”
“कोई परेशानी नहीं है, आप फ्रेश होके आइए, मैं खाना गर्म करती हूँ, वरना फिर कभी चाय नहीं पिलाऊंगी.”
“ठीक है जी.. लेकिन आप अपने लिए भी निकाल लो, दोनों साथ ही खा लेंगे.”

खाना परोसने के दौरान मेरा सारा ध्यान गीतांजली की बड़े बड़े रसीले स्तनों पर ही था. वो भी खुले मिजाज की महिला मानो जानबूझ कर अपने जिस्म का मुजाहिरा कर रही थी. जैसे रूप की धनी कुछ छींटों की बरसात कर रही हो.

अब करें क्या … बस फिलहाल देख कर ही थोड़ी आंख सेंक लो, पर मन ने तो खजाना लूटने की तय कर ली थी. इस औरत की कुछ बात ही अलग थी, इसे देख कर ही उत्तेजना चरम सीमा पर आ जाती है. सारा ज्ञानपीठ, समझ बूझ, आत्मसंयम सब दरकिनार हो जाता है और मैं वासना की भूख में डूब जाता हूँ. हो भी क्यों ना.. 8 वर्षों से मैंने किसी स्त्री को आंख उठा कर नहीं देखा था, लेकिन गीतांजली की मिलनसारिता और हँसमुख मिजाज ने मुझसे बातें करना सिखा दिया था. उसका ये व्यवहार मुझे उसके कुछ ज्यादा करीब ले गया था.

अब मैं मन ही मन बस गीतांजली के बारे में सोचने लगा था. उसके बारे में सोच कर रोज दो बार बाथरूम में हस्तमैथुन करता था. मन बड़ा असंतुष्ट रहता था. अब मुझे अकेलेपन का अहसास होने लगा था. मेरे अन्दर का उत्तेजित जानवर, बस गीतांजली पर टूट पड़ना चाहता था. पर करें क्या.. वो किसी और की धर्मपत्नी है और मैं एक विधुर हूँ.

तब भी गीतांजली को देख कर लगता ही था कि वो अपने यौन जीवन से काफी असंतुष्ट है.. और हो भी क्यों ना, पति तो उनके हमेशा बाहर ही होते हैं. हफ्ते में एक दो बार ही आना जाना होता है.
आप जानते ही हैं कि 35 से 55 वर्ष के बीच की आयु यौन जीवन की सब से कामुक अवस्था होती है. खैर.. जो भी है सो बस सामने है.

खाना खाने के बाद गीतांजली भी अपने घर चली गयी. मैं भी आराम करने चला गया. इस बीच बच्चे भी आ गए. शाम हो चुकी थी और मैं हमेशा टहलने को बाहर जाता हूँ. थोड़ी सैर करने के बाद मैं चाय पीने गीतांजली के घर चला गया.

“आइए आइए मास्टर जी, घर वाले आ गए?”
“जी गीतांजली जी, बस आपके जाने के कुछ देर बाद ही आ गए थे.”
“रुकिए मैं अभी चाय बनाकर लती हूँ, मास्टर जी आप हमेशा की तरह शक्कर ज्यादा ही लेंगे ना?”
“जी हां गीतांजली जी.”

कुछ देर बाद हम दोनों चाय की चुस्की लेते हुए बातें करने लगे.
“मास्टर जी इस उम्र में इतना मीठा लेना अच्छी बात नहीं है.”
“अब क्या करें, आदत से मजबूर हूँ, मेरी चिन्ता करने वाली तो कब का मुझे छोड़ कर चली गयी. घर वाले तो हैं, पर जीवन साथी की जगह कौन ले सकता है. उसकी कमी तो खलती ही है.” ये कहते हुए मैं थोड़ा उदास सा हो गया.

“अरे..रे आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं. ये सब बातें सोच कर मन उदास मत करिए, ऐसी कौन सी कमी है, जो हम सब मिलकर पूरी ना कर सकें.”
“अब आपसे क्या कहूँ गीतांजली जी, जाने दीजिए.”
“क्या मास्टर जी, मुझे लगा हम हमउम्र हैं … आपसे इतना घुल मिल गए हैं कि दिल की बातें जाहिर कर सकते हैं, पर शायद आप हमें अपना नहीं मानते हैं.”

“अच्छा … पता नहीं ये कहना शायद आपसे उचित ना हो, पर आप एक विवाहित 45 साल की महिला हैं, तो पता ही होगा. हमारी जो उम्र की अवस्था है, जिसमें हम ज्यादा उत्तेजित और कामुक समय काल में होते हैं, उसमें जीवन साथी की क्या भूमिका होती है?”
“हां … मैं समझ सकती हूँ, आपके पास जीवन साथी न होने का दुःख है और मुझे जीवन साथी होके भी वो सुख नहीं है. ये सब किस्मत की बात है. वैसे एक बात पूछूँ … इतने समय बाद आप ये सब ख्याल मन में क्यों ला रहे हैं?”
मैंने जरा मुस्कुरा कर ताना कसा- क्या बताऊं गीतांजली जी, सब आपकी चाय की गलती है.

वो भी मजे में मूड में हंस कर बोली- लो अब मैंने क्या किया मास्टर जी?
“गीतांजली जी आपके हाथ की चाय मुझे हमेशा मेरी पत्नी की याद दिला देती है, इसी लिए मैं हमेशा चाय पीने आपके घर आ जाता हूँ … आपको परेशान करने.”
“आप हमेशा ऐसा क्यों कहते हो, परेशान करने … मुझे कोई आपत्ति नहीं है आपको चाय पिलाने में … और चलो इसी बहाने आपसे इतनी बातें भी हो जाती हैं.”
“वैसे आपकी और मेरी बहू की काफी जमती है, फिर मुझसे बात करने के बहाने क्यों जी?”
“आप भी ना, अरे दो औरतों … और एक औरत और मर्द के बीच बात का फर्क अलग ही होता है.”

“वैसे आपके पति देव से भी फ़ोन पे बातें तो होती ही होंगी क्यों?”
“अरे कहां.. उनको काम से फुरसत ही नहीं है, कभी फ़ोन कर लो तो बस झिड़क कर फ़ोन काट देते हैं.”
“कोई बात नहीं गीतांजली जी, आप मेरा नंबर रख लो.. जब जी करे, फ़ोन करिये कुछ हेल्प चाहिए भी तो आप बता सकती हो, मेरा भी मन लगा रहेगा.”
इस बार मैं मन ही मन खुश हो रहा था.

“सच में मास्टर जी! चलो अच्छा है और एक बात आप प्लीज मुझे गीतांजली जी या आप करके मत बोलिए, सिर्फ गीतांजली और तुम भी कह सकते हैं.”
“ओके, पर क्या मैं आपको रानी बुला सकता हूँ? वो क्या है ना … मैं प्यार से अपनी बीवी को रानी कहता था, मुझे आपमें मेरी पत्नी की झलक दिखाई पड़ती है.. इफ यू डोन्ट माइंड?”
“हां क्यों नहीं.. लेकिन अकेले में ही … बाहर ये सब अच्छा नहीं लगेगा, ये चीजें अपने पास तक ही रखिएगा, मैं एक घरेलू औरत हूँ.”
“हां मेरी रानी, मैं समझ सकता हूँ. ओके मैं चलता हूँ, चाय के लिए शुक्रिया.”

आज मैं ख़ुशी ख़ुशी अपने घर को निकल गया, आज मैं बहुत खुश था, मेरी गीतांजली से जो वासना की इच्छा थी, उस पर में एक सीढ़ी ऊपर चढ़ गया था. अब बस मुझे उसे अपनी बातों में रिझाना था.

अगले दिन मुझे गीतांजली का फ़ोन आया- हैलो मास्टर जी … मैं गीतांजली.
“क्या बात है रानी साहिबा, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?”
“धत्त … ऐसे क्यों बोलते हैं, वो मैं कह रही थी कि क्या आप मुझे स्कूल के बाद पिक करने मेरे ऑफिस आ सकते हैं? क्या है ना आज ऑटो नहीं चल रहे हैं.”
“हां क्यों नहीं रानी … मैं जरूर आ जाऊंगा, कितने बजे छुट्टी होगी तुम्हारी?”
“यही कोई 5 बजे, आप आओगे ना?”
मैं थोड़े रोमांटिक मूड में बोला- अरे तुमने बुलाया और हम चले आए.

ठीक 5 बजे मैं बाइक लेकर उसके ऑफिस के नीचे पहुँच गया. वो धीरे से मेरे पीछे बाइक पर बैठ गयी. मुझे बहुत मजा आ रहा था. सालों बाद कोई औरत मेरे साथ बाइक पर बैठी थी. उसने भी जोर से मेरी कमर को पकड़ा हुआ था. मैं भी जानबूझ कर आगे का ब्रेक लगा देता, जिसे वो मेरे और करीब आ जाती. उसके स्तन के अंगूर मुझे मेरी पीठ पर साफ महसूस हो रहे थे. उसका दायां हाथ मेरे कमर से होता हुआ हल्के से मेरे लिंग को छू रहा था जो मुझे और उत्तेजित कर रहा था.
गीतांजली को साफ समझ आ रहा था कि उसके स्पर्श से कैसे मेरा लिंग पैंट में तन के तंबूरा हो रहा था. वो जानती थी कि मैं उससे क्या चाहता था, पर जानबूझ कर अनजान बनती थी.

अब मैं रोज गीतांजली को उसके ऑफिस लेने जाता था, हम साथ ही घर आते थे. ऐसा कुछ हफ्ते तक चला. बातें करना घूमना फिरना, हम कई बार मूवीज भी देखने गए. दोनों को एक दूसरे की अच्छी कंपनी मिलती थी.

अब गीतांजली को भी मेरे साथ टाइम बिताने की आदत सी हो गयी थी, पर वो सब कुछ एक सीमित दायरे में होता था. उसने मुझे इतनी छूट नहीं दी थी कि मैं उससे कुछ कर पाऊं.

एक बार अपने मोहल्ले के एक मित्रों के साथ बैठकी (मदिरा पान) कर रहा था. अब शराब के नशे में आदमी क्या बोल जाए, कुछ ठीक नहीं होता. और हुआ भी कुछ ऐसा ही … मेरे मित्र ने मुझसे पूछा- क्या बात है मास्टर जी … आपकी तो निकल पड़ी है, आपकी पड़ोसन तो कितनी जबरदस्त है, एकदम खरा सोना … आपने कुछ चान्स मारा कि नहीं, बाइक में तो खूब घुमाते हो, कभी बिस्तर में मजे लिए?
मैंने भी थोड़ी सहजता से जबाब दिया- नहीं यार, वो एक पतिव्रता महिला है, मुझे नहीं लगता कि वो कभी किसी गैर मर्द के साथ हमबिस्तर होना चाहेगी. मन तो मेरा भी है, लेकिन करूँ क्या?

तब मेरे मित्र ने मुझे सुझाव में कहा- देख यार, कोई भी पराई औरत खुद तुझे नहीं कहेगी कि आओ और मुझे चोद दो, इसके लिए तुम्हें ये जानना होगा कि तुम्हारा स्पर्श उसे अच्छा लगता है या नहीं … अगर कोई आपत्ति नहीं है, तो फिर मजे ले लो.

दारू की बैठकी खत्म होने के बाद हम अपने अपने घर को निकल पड़े लेकिन मैं सीधे गीतांजली के घर चला गया. मैंने थोड़ी ज्यादा पी रखी थी. गीतांजली अपने रसोई में खाना पका रही थी.

मैंने जोर से आवाज लगाई- गीतांजली जी, ओ मेरी रानी.
वो भागते हुए रसोई में से बाहर आई और बोली- कौन है … अरे मास्टर जी आप हो. बैठिये ना, मैं चाय लेके आती हूँ.
फिर वो रसोई में चली गयी, मैं भी उसके पीछे पीछे रसोई में चला गया.

गीतांजली ने पूछा- क्या हुआ मास्टर जी आपको कुछ चाहिए था क्या?
“नहीं नहीं … बस मैंने सोचा आज रसोई में आपकी थोड़ी मदद कर दूँ.”

मैं गीतांजली के ठीक पीछे खड़ा हो गया. वो समझ गयी थी कि मैंने शराब पी रखी है.

“मास्टर जी जरा वो ऊपर रखी चीनी का डब्बा निकल दीजिये ना … मेरा हाथ नहीं पहुँचेगा.”
मैंने भी नशे के झोंक में गीतांजली को पीछे से कमर के बल उठा लिया और कहा- अब तो हाथ पहुँच जाएगा ना.

इस दौरान मैंने नोटिस किया कि मेरे छूने से गीतांजली को कोई परेशानी नहीं हुई. बजाए उसके उसने मुस्कुरा कर कहा- आप में तो बहुत दम है, मुझे लगा जवानी के साथ जोश भी चला गया होगा. लगता है ये सब शराब का कमाल है.
मैंने अब भी उसे गोद में ही उठा रखा था.

“अरे उतारिये मुझे मास्टर जी, कोई आ जाएगा तो क्या सोचेगा?”
“कोई नहीं आएगा … मैंने आते वक़्त बाहर का दरवाजा लॉक कर दिया था. गीतांजली तुम तो जानती हो, मेरी पत्नी के गुजरने के बाद मुझे कभी यौन सुख नहीं मिला, प्लीज एक बार … एक बार के लिए मेरी पत्नी बन जाओ. मैं जानता हूँ आप भी मुझमें रूचि दिखाती हैं, मेरे साथ घूमना फिरना बातें करना, मेरी तरफ इतना झुकाव है तो फिर ये हया की दीवार क्यों, आपकी आंखों में मेरे प्रति वासना की चाह साफ छलकती है.”

“लेकिन ये सब गलत है मास्टर जी … समाज क्या कहेगा, किसी को पता चल गया तो?”
“घबराती क्यों हो गीतांजली रानी … किसी को नहीं पता चलेगा.”
इतना कह कर मैं गीतांजली को किस करने लगा. वो भी मदहोश हो गयी और मेरा साथ देने लगी.

क्या होंठ थे, इतने दिनों बाद किसी स्त्री के बांहों में होना मुझे तरन्नुम दे रहा था. मैं तो पागलों की तरह उसे चूम रहा था. मेरा एक हाथ उसकी कमर में था और दूसरा हाथ उसके उभरे हुए स्तनों पर था.

मैंने बहुत जोर से उसे अपनी बांहों में कसा हुआ था. फिर मैं उसके मस्त नर्म नर्म स्तनों को दबाने लगा. वो भी गर्म होने लगी. वो कह कुछ रही थी और कर कुछ रही थी.
“छोड़िये न मास्टर जी … छोड़िये ना.”

उसकी ना में मुझे हां साफ झलक रही थी, उसके निप्पल चने की तरह सख्त हो गए थे. लगा अब ब्लाऊज फाड़ कर बाहर आ जाएंगे. मैं और जोर जोर से उसके स्तनों को दबाने लगा. मैं इस कदर उसे चूम रहा था कि वो दर्द से आह की आवाज भी ना निकल सकती थी.

फिर वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी. पर मैं कहां रुकने वाला था, मैंने उसे करीब 10 से 15 मिनट तक यूं ही बांहों में जकड़े रखा. मेरा लिंग भी तन के खड़ा हो गया था और साड़ी के ऊपर ही उसकी योनि से रगड़ रहा था.

अब तो उसे भी मजा आने लगा. दोनों पसीने से लथपथ होने लगे.
“गीतांजली जी आप में तो बहुत गर्मी है, लगता है, आपके पति देव ने कभी आपकी गर्मी ठीक से शान्त नहीं की.”

वो बस मुझसे चिपकी रही. फिर मैं उसे गोद में उठा कर बेडरूम की तरफ ले गया. उसने अपनी आंखें बंद कर लीं. मैंने धीरे से उसे बेड पे लिटाया, उसने झट से अपनी करवट बदल ली और दूसरी तरफ घूम कर लेट गयी.
“देखिये मास्टर जी ये जो हो रहा है, ये ठीक नहीं है, भले मेरे पति मुझे संतुष्ट ना कर पाते हों, पर किसी पराये पुरुष से हमबिस्तर होना गलत है.”
“इतना क्यों सोचती हो गीतांजली, मैंने भी पत्नी के गुजरने के बाद कभी किसी स्त्री से सम्बन्ध नहीं बनाए हैं. पर तुम्हें देख कर मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाता हूँ और तुम भी तो मेरा साथ पसंद करती हो.” यह कह कर मैंने उसे अपनी तरफ घुमाया.
“वो तो है मास्टर जी … मुझे हमेशा से ही आपके जैसे हट्टे कट्टे पुरुष पसंद थे और आप तो मेरे पति से दोगुना हो.”

यह सुन कर मैं झट से उसके ऊपर चढ़ गया और उसे बांहों में जकड़ कर लिपट लिपट कर उसके होंठों का रसपान करने लगा. कभी वो मेरे नीचे, तो कभी मैं उसके नीचे.

अब लग रहा था कि वो भी मेरा खुल के साथ दे रही थी. उसे मेरे शरीर का भार और बनावट आदि सब पसंद आ रहा था. अब वो हल्की गर्म सांसों के साथ सिसकारियां लेते हुए पूरी उत्तेज़ना में आ गई थी. वो अपने स्तनों को मसलने लगी. मैंने भी अपने शर्ट के बटन खोले और उसकी स्तनों पर टूट पड़ा, उसके ब्लाऊज के हुक खोलने लगा.

“मास्टर जी लाइट बंद कर दीजिये ना … मुझे थोड़ी शर्म आ रही है.”
“अब क्या शर्म गीतांजली मेरी रानी … उजाले में क्या दिक्कत है, जलने दो ना लाइट, जरा मैं भी तो देखूँ मेरी रानी चुदते वक़्त कैसी दिखती है.”
“अच्छा जी, आप तो बहुत नटखट हो मेरे राजा.”

इस दौरान मैं ठीक उसके ऊपर था, मैंने ब्लाऊज के हुक खोले और उसके बड़े बड़े स्तनों को जोर जोर से दबाने लगा और उसके निप्पल को होंठों से चूसने लगा. दोनों स्तनों को चूस चूस कर मैंने पूरा गीला कर दिया था.

वाह मेरी रानी … क्या मस्त चुचियां है तेरी! एकदम दूध से भरी हुई, बड़े दिनों बाद ऐसा दूध पिया है. गीतांजली मेरी रानी अ हह अहा!”
“आह … पी लो मेरे राजा … अब तो बस ये तुम्हारी दीवानी हो गयी है, इससे पहले इस दूध को इसके मालिक ने कभी ऐसे नहीं दुहा था … अह … सच में बहुत मजा आ रहा है मेरे मास्टर राजा. अब बस जल्दी से डालो ना अपना अन्दर.”
“क्या कहाँ डालूँ मेरी गीतांजली रानी … जरा खुल के नाम तो लो अपने चमन का और मेरे माली का.”
“अपना लंड डालो मेरी चूत में मास्टर जी, लंड पेल दो मेरी प्यासी चूत में.”
“अरे इतनी जल्दी क्या है मेरी रानी.”

आज मैं गीतांजली को ऐसे चोदना चाहता था कि वो मेरी वासना की दीवानी हो जाए.
मैं अपना हाथ गीतांजली की नाभि में फेरने लगा, फिर हाथ पेटीकोट के अन्दर डाला और धीरे धीरे उसकी चूत में उंगली करने लगा.

आह क्या … कोमल फूली हुई और चिकनी चूत थी … मानो कोई सील पैक नई नवेली दुल्हन की चूत हो. फिर मैं थोड़ी तेजी से उंगली करने लगा.

“हम्म आह्ह … मास्टर जी, आराम से धीरे धीरे करो न …”
“मेरी जान तुम्हारी चूत तो एकदम टाईट है, लगता है तुम्हारे पति ने कभी तुम्हारी चूत उंगली भी नहीं की.”
“अरे नहीं की है बाबा … अब उसकी बातें मत करो प्लीज!”
“अच्छा नहीं करता हूँ मेरी रानी, पर तुम जरा अपनी पैर फैलाओ ना … जरा चख कर देखूं तेरी चूत की स्वाद.”

इतना सुनते ही उसने अपने पैर फैला दिए. मेरे दोनों हाथ उसकी चुचियों को मसल रहे थे और मैं उसकी चूत चाटने का आनन्द ले रहा था. मैं अपनी पूरी जीभ उसकी चूत के अन्दर बाहर करता, तो वो गनगना उठती. यूं अपनी चूत चटवाना गीतांजली का पहला अनुभव था. वो आह आहा हह की आवाज के साथ जोर जोर से झटके ले रही थी.

गीतांजली की ऐसी उत्तेज़ना और कामुकता देख कर मुझे बहुत मजा आ रहा था, पर मैं इतने जल्दी में ना था. मैंने उसकी चूत खूब मजे से चाट कर और भी लाल और कोमल कर दिया.

“मास्टर जी बस कीजिये ना … अब और मत तड़पाईए, अब जल्दी से इस प्यासी चूत में अपना लंड डाल दीजिये.”
“अरे मेरी गीतांजली रानी पहले पूरी नंगी तो हो जाओ.”

मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट भी उतार दिया. बिना कपड़ों के क्या माल लग रही थी वो … एकदम रसगुल्ले की तरह गोलू मोलू.

अब वो पलंग पर मेरे नीचे थी और मैं ऊपर बैठा था. मैंने अपना पजामा उतार दिया और अपना 8 इंच का लंड उसके हाथों में थमा दिया. गीतांजली मेरा लंड देख कर थोड़ा चौंक गयी.

“क्या हुआ मेरी जानू … घबरा गयी क्या … जरा इसे मुँह में तो लेकर देखो.”
मैंने गीतांजली के मुँह में अपना लंड दे दिया, शायद उसने अपने पति का लंड भी कभी नहीं चूसा था. तो मैं धीरे धीरे उसका सर पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगा. अब उसे मेरे लंड को चूसने में मजा आने लगा. वो पूरी रफ़्तार से लंड मुँह के अन्दर बाहर करने लगी. मैं भी पूरे जोश में आ गया.

अब मेरा लंड और भी सख्त और मोटा हो गया था. मैंने गीतांजली को पलंग के ऊपर खींच कर उसे अपने नीचे कर दिया. उसकी दोनों टांगों को फैला कर अपने कंधों पर ले लिया. उसने अपनी आंखें बंद कर लीं. मैंने हल्का सा थूक … उसकी चूत पे गिराया और अपना लंड उसकी उभरी हुई जगहों पर रगड़ने लगा. लंड का टच पाते ही गीतांजली मचलने लगी.

फिर मैंने अपने लंड का सुपारा उसकी चूत पे टिकाया और हल्का सा एक धक्का दे मारा. पक्क की आवाज के साथ मेरे लंड का सुपारा गीतांजली की चूत में घुस गया. उसने एक हल्की सी आह के साथ अपनी आंखें खोल दीं.

फिर मैंने अपना सुपारा बाहर निकाला, लंड को थोड़ा हिलाया और हल्का सा काम रस उसकी चूत पे गिराया. फिर पूरे लंड को उसकी चूत पे ऊपर से नीचे तक रगड़ा और फिर अपना सुपारा उसकी चूत पे टिकाकर एक जोर का शॉट लगाया. मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया.
गीतांजली दर्द से चीख उठी- आहह्ह्ह … मर गई …
वो मुझे धक्का देकर फट से थोड़ा पीछे हो गयी. मेरा लंड आधे से अधिक बाहर हो गया.

“आह … आपका लंड बहुत बड़ा है … थोड़ा धीर धीरे घुसाइए ना मेरे राजा … मैं कौन सा अब भागने वाली हूँ यहाँ से.”
“क्या करूँ मेरी जान तेरी चूत है ही इतनी टाईट … थोड़ा बर्दाश्त कर ले मेरी रानी … अच्छा रुक तेरी चूत थोड़ी गीली करता हूँ, फिर आराम से लंड उसके अन्दर जाएगा.”

मैंने एक तकिया उसके कमर के नीचे लगाया ताकि मुझे थोड़ी अच्छी पकड़ मिले. फिर मैंने उसकी चूत को चाट कर जोरदार उंगली करना चालू कर दिया. वो छटपटाने लगी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

कुछ 3-4 मिनट बाद उसकी चूत ने हल्का सा पानी छोड़ा. मैंने तुरंत वो सारा रस रगड़ कर अपने लंड पे लगा कर चिपचिपा और चिकना सा कर दिया. फिर दोनों हाथों से उसकी कमर को जोर से पकड़ा, अपनी तोंद उठाई, हल्के से लंड को उसकी चूत पे टिकाया और एक जोर का शॉट लगा दिया.

इस बार फचाक की आवाज से लंड गीतांजली की चूत को चीरता हुआ पूरा अन्दर तक घुस गया.
वो दर्द से चीख पड़ी- आहह!
उसने मुझे जोर से पकड़ लिया.
कुछ 20 सेकंड हम बस यूं ही पड़े रहे. क्या मस्त आनन्द आया था वो शॉट लगा कर आह्हह ओह …

फिर मैंने अपना लंड निकल तो देखा तो उसकी चूत से खून आ रहा था. मैं समझ गया कि गीतांजली के पति का लिंग इतना छोटा होगा कि वो सील भी नहीं तोड़ पाया होगा. बेचारी गीतांजली कैसे नामर्द पति से शादी कर ली उसने.

फिर मैंने कपड़े से उसका खून साफ किया और धीरे धीरे उसकी चुदाई चालू कर दी. दोनों हाथों से उसके निप्पलों को मसल मसल कर उसकी चुचियों को दबा रहा था. साथ ही लंड हल्के हल्के मधुर ध्वनि के साथ पच्च पच्च अन्दर बाहर हो रहा था. हर 6-7 हल्के शॉट के बाद एक जोर का शॉट मार देता, ताकि लंड का ख़ौफ़ बना रहे.

गीतांजली भी 6-7 बार अह अह के बाद एक जोर से आहह करती … अब उसका दर्द मजे में बदलने लगा था. उसकी चूत मेरे लंड पर फिट बैठने लगी थी. हम दोनों को खूब आनन्द आ रहा था. मुझे तो कोई जल्दी थी नहीं … मैं भी उसे इसी तरह प्यार से चोद रहा था.

इस मस्त चुदाई में लगभग 20 मिनट गुजर गए थे.

“और गीतांजली रानी … कैसा लग रहा है मुझसे चुद कर … मेरी सील पैक रानी.”
“जान निकाल दी आपने तो मेरी … मेरी सील तोड़ राजा … आज पहली बार ऐसा लगा कि चुदाई हुई है मेरी … अब आपका जब जी करे, मुझे चोदने आ जाना. मैं इन्तजार करूँगी.”
“अरे मेरी रसगुल्ला … आज का प्रोग्राम अभी लम्बा चलेगा मेरी जान … इतने साल बाद कोई सील पैक माल मिली है … तुझे तो सारी रात चोदूँगा आज.”
यह कह कर मैंने चुदाई थोड़ी तेज कर दी ‘घप घप घपघप …’

गीतांजली की वो मीठी दर्द की बंगाली आवाज आने लगी- आह आह आह आह्ह ओरे बाबा धीरे … धीरे … एक्टू धीरे अमार राजा … हम्म आह ऊह्ह!
कुछ जबरदस्त शॉट लगाने के बाद वो झड़ने लगी- आअह्ह हम्म आह्ह!
उसकी चूत के पानी से चूत और चिकनी हो गयी. अब मुझे और मजा आने लगा. मैं दोनों हाथों से चुचियों को मसल मसल कर उसका दूध पी रहा था. वो भी कमर उठा उठा कर लंड के मजे ले रही थी.

तभी मैं झड़ने को आ गया. मैंने और जोर से धक्का लगाना शुरू कर दिया. कुछ 20-22 जोरदार शॉट के बाद मैंने भी फचक फचाक से अपना गर्म गर्म वीर्य उसकी चूत में गिरा दिया. हम दोनों एक दूसरे की बांहों में कुछ देर यूं ही पड़े रहे. फिर थोड़ी देर बाद गीतांजली उठी और बाथरूम की ओर जाने लगी. मैंने पीछे झट से उसका हाथ पकड़ा और उसे अपनी गोद में बिठा लिया और पीछे से चुचियाँ दबा दबा कर हम बातें करने लगे.

“अरे कहां चल दी मेरी रोसोगुला … इतनी जल्दी थक गयी क्या?”
“नहीं मेरे राजा … आज शादी के 25 साल बाद में पहली बार झड़ी हूँ ना इसलिए.”
“क्या बात कर रही हो? तुम इससे पहले कभी नहीं झड़ी थी, तब तो और मजे की बात है … आज मैं तेरी सारी भूख मिटा दूँगा मेरी जान.”
“एक औरत की वासना की भूख मिटा दे, ऐसा कोई मर्द नहीं है दुनिया में मेरे राजा.”
“अच्छा मेरी जान … वो तो है, पर तुझे सन्तुष्ट जरूर कर दूँगा रानी.”

थोड़ी देर आराम से लेटने के बाद मैंने उसे अपनी तरफ घुमाया, उसे गोद में उठा कर खड़ा हो गया. मेरा लंड अब तक दुबारा खड़ा हो गया. मैंने अपने लंड को धीरे से उसकी चूत पे टिकाया और उसे हल्के हल्के ऊपर नीचे करने लगा. मेरा लंड उसकी चूत में अंदर घुस गया और वो भी मेरे गोद के मजे ले रही थी. गीतांजली की चुचियां मेरी चौड़ी छाती से थप थप टकरा रही थीं. उसे बहुत आनन्द आ रहा था.

“और गीतांजली कैसा लग रहा है मेरी गोद में … कहो तो ठुकाई थोड़ी तेज करूँ?”
“ऐसे चुदने में तो और भी मजा आ रहा है मास्टर … आपका लंड अब पूरा अन्दर तक महसूस हो रहा है … ओरे बाबा आह्हा अहा उम्म अह …”
“अच्छा तो और मजे लो मेरी कोलकाता की रोसगुल्ला …”

मैंने चुदाई तेज कर दी, वो थोड़ा दर्द से आवाज निकालती- आअह्ह अहह …
उसकी चुचियों का मेरी छाती से टकराना … थप थप थप … मेरे लंड का उसकी चूत में पिलना …
सच में क्या रंगीन माहौल था.

फिर मैं गीतांजली को गोद में ही लेकर पलंग पर बैठ गया और उसकी चुदाई जारी रखी. हम दोनों पसीना पसीना भीग कर लथपथ हो गए थे. करीब 15 मिनट मैंने ऐसे ही चुदाई की उसकी. फिर मैं सीधे लेट गया और वो मेरे ऊपर कूद कूद कर चुदवा रही थी. उसने रफ़्तार बढ़ा दी, वो तेजी से मेरे पेट के ऊपर कूदने लगी.

‘आह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… उम्मह …’ करते हुए गीतांजली झड़ गयी और मेरी छाती पे जोर से हाथ मार कर मुझे पकड़ कर ठंडी हो गयी. पर मैंने नीचे से लंड उठा कर उसकी चुदाई जारी रखी.
मैंने उसे फिर से गोद में उठा लिया और बैठे बैठे उसकी चुदाई करने लगा. गीतांजली कुछ सुस्त पड़ने लगी, तो मैंने चुदाई में और तेजी कर दी.

“गीतांजली गीतांजली आई लव यू मेरी रानी, तुम कमाल की हो … काश मेरे जीवन में तुम पहले आती, तुम्हें जिंदगी की हर ख़ुशी देता … ओह आह्ह मेरी जानू उम्ह्ह्ह उम्ह्ह्ह …”
“आई लव यू टू मेरे स्वामी … मेरे राजा आह्ह ह्ह्ह मास्टर ओ मास्टर आमार दुस्टो रोजा एक्टू धीरे धीरे ओरे बाबा मोरे जेबो आह्ह उम्ह्ह …”
“की होलो गीतांजली आमार मिष्टी दोही, भालो लगछे हम्म …”

मैंने चुदाई जारी रखी. दस मिनट और गुजर गए. गीतांजली फिर से चार्ज हो गयी और जमके मेरा साथ देने लगी.
“मास्टर मेरा राजा … अब तुम रोज मेरी ऐसी चुदाई करोगे ना हम्म.”
“क्यों नहीं मेरी रोसोगुल्ला … तुम हो ही इतनी रसीली … बस अपने मरियल पति को घर से दूर रखना बाकी सारी कमी मैं पूरी कर दूँगा.”

ये कहते कहते मैं जोर जोर से शॉट लगाने में लग गया. मैंने उसे नीचे किया, उसकी दोनों टांगों को फैलाया और अपने लंड से जोर जोर से उसकी चूत पर चाबुक चलाने लगा.

थाप थाप थाप …

फिर लंड टिका कर चूत में पेल दिया और 10 मिनट निकल गए. गीतांजली फिर झड़ने को आ गयी थी. मैंने भी रफ़्तार बढ़ा दी. एक जोरदार शॉट के साथ दोनों झड़ गए. मैं गीतांजली के ऊपर ही लेट गया. दोनों एक दूसरे की बांहों में बांहें डाल एक दूसरे को देख कर किस करने लगे.

अब शाम के 8 बज चुके थे. हम दोनों लगातार लम्बी चुदाई से काफी थक गए थे.

“क्या हुआ मेरे सील तोड़ राजा … थक गए क्या … अभी तो रात बाकी है न … हेहेहै …”
“अरे मेरी मिष्टी डोई … मैंने आज तक तेरी जैसी गुद गुद औरत नहीं देखी … तुझे चोद कर परम आनन्द आ गया. मैं रात को 11 बजे आता हूँ … जब मेरे बहू बेटे सो जाएंगे. तो तू दरवाजा खुला रखना मेरी जान, आज कुछ सरप्राइज भी है तुम्हारे लिए.”
“ठीक है जी … मैं इन्तजार करूँगी.”

फिर मैं अपने घर चला गया, थोड़ी देर टीवी देख कर समय निकाला, लेकिन अब तो जैसे एक मिनट भी 1 घंटे के बराबर लग रहा था. मन बहुत बेचैन हो रहा था, इस बीच मेरी बहू ने पूछा- क्या हुआ पापा जी तबियत ठीक है ना … आपको इतना पसीना क्यों आ रहा है?
“नहीं नहीं बेटा, बस आज इवनिंग वाक कर के थोड़ा थक गया हूँ, उम्र होती जा रही है ना.”
“ठीक है पापा जी, आप खाना खाकर आराम करिए.”

फिर मैंने खाना खाया और अपने बेटे के कमरे से वियाग्रा की कुछ गोलियां निकाल कर अपने पास रख लीं. सोने के बहाने से मैं गौशाला में चला गया.

अब करीब रात 10:30 बज रहे थे मैंने वियाग्रा की एक गोली खा लीं और गीतांजली के घर चला गया. घर का दरवाजा खुला ही था, मैंने देखा गीतांजली ने लाल रंग टाइट नाइटी पहनी हुई थी.
मुझे देख कर उसने एक गाना गाया- आईए मेहरबां, बैठिए जानेजां … शौक से लीजिये जी इश्क के इम्तिहान!

हम दोनों बांहों में बांहें डाल कर थोड़ा रोमांटिक डांस करने लगे, होंठों से होंठ, एक हाथ कमर को छूते हुए उसके चूतड़ को मसल रहा था. गीतांजली मेरी चौड़ी छाती में अपने निप्पल रगड़ रही थी. हम दोनों काफी गर्म और रोमांटिक हो गए थे.

फिर मैंने गीतांजली को गोद में उठाया और बेड पे ले आया. गीतांजली ने बेड से सटे टेबल पर दूध के दो ग्लास रखे थे. गीतांजली मेरी गोद पर बैठी थी, उसने मुझे दूध पिलाया और पूछा- क्या हुआ मास्टर जी मेरे लिए कुछ लाने वाले थे आप?
“अरे हां मेरी रोसोगुल्ला …”
मैंने वियाग्रा की एक गोली गीतांजली के ग्लास में डाल दीं.

“अरे वाह मास्टर जी, मैं हमेशा से सेक्स की गोली खा कर चुदना चाहती थी, पर मेरे पति बहुत बोरिंग किस्म के इंसान हैं.”
गीतांजली ने दूध पी लिया. मैं उसे गोद में बिठा कर उसकी दोनों चुचियों को नाइटी के ऊपर से मसल मसल कर दबा रहा था. कुछ ही देर में दोनों बहुत गर्म हो गए. मैंने गीतांजली की चूत में उंगली करने लगा.
गीतांजली सिसकारियां लेने लगी ‘ह्म्म्म आह्ह … ईस्स!’

मैं और तेजी से उंगली अन्दर बाहर करने लगा. गीतांजली छटपटाने लगी. किसी और की पत्नी को अपनी बांहों में इतनी उत्तेजना में देख कर मजा आ रहा था. वियाग्रा का असर होने लगा था. मैं भी पूरे जोश में जकड़ कर उसे मसल रहा था. चूम चूम कर उसके होंठों को लाल कर दिया. उसकी नाइटी का हुक खोला, चुचियों को दोनों हाथों से दबा दबा कर चूसने लगा.

गीतांजली और गर्म हो गयी- आह्ह आअह्ह हम्म …
फिर उसने मेरी धोती खोली और मेरे लंड को बड़े प्यार से चूसने लगी. चूस चूस कर मेरे लंड को और मोटा और सख्त कर दिया.

अब मुझे बर्दाश्त नहीं हुआ, मैंने गीतांजली को गोद में उठाया और बेड पे अपने नीचे किया. उसकी टांगों को फैलाया और अपने लंड को हिला कर हल्का सा प्रीकम उसकी चूत पे लगा दिया. अब लंड से उस रस को उसके फ़ूली हुई चिकनी चूत पर रगड़ने लगा.
गीतांजली उत्तेजना में इधर उधर होने लगी. मैंने दोनों हाथ उसकी चुचियों पर रख दिए. लंड को उसके चूत पे टिकाया और जोर से अन्दर ठेल दिया. पच से लंड अन्दर पिल गया.

गीतांजली दर्द से चीख उठी- आह्ह्ह!
उसने मुझे जोर से पकड़ लिया- थोड़ा धीरे डालिये ना मेरे सोना … अब कौन सा में कहीं जाने वाली हूँ.
“क्या करूँ गीतांजली मेरी रानी … तू है ही इतनी रसीली कि सब्र नहीं होता.”

यह कह कर मैंने लंड निकाला और फिर जोर का एक शॉट लगा दिया. गीतांजली की और जोर से चीख निकल गयी- आआह … अह्हह्हह्ह … दर्द हो रहा है थोड़ा आराम से जी!
“क्या हुआ मेरी रोसोगुल्ला … थोड़ा बर्दाश्त कर लो … आज तो मैं यूं ही चुदाई करूँगा.”
मैंने उसी रेंज में चुदाई चालू रखी. गीतांजली पे मैंने बहुत जोर से पकड़ बनाई थी ताकि वो दर्द बर्दाश्त कर ले.

वो समझ गयी कि मैं नहीं रुकूंगा. वो दर्द से “आह्ह अहह धीरे धीरे हम्म …” करती रही. मैं घप्प घप्प उसकी चुदाई करता रहा. उसकी चुचियों को दबा दबा कर दूध पी रहा था.

करीब 20 मिनट मैंने उसकी चुदाई की. हम दोनों पसीने से लथपथ एक दूसरे की बांहों में पड़े थे. अब गीतांजली का दर्द मजे में बदलने लगा था. वो कहे जा रही थी- बहुत मजा आ रहा है मास्टर जी … आप तो कमाल हो … इहम्म आह्ह … आज से मैं आपकी हुई … काश ये सुख मुझे पहले मिलता, आज मुझे किसी असली मर्द से चुदाई का अहसास हुआ है.
“मेरी रानी अब मैं रोज तुम्हें ऐसे ही चोदूँगा, मैं भी सालों बाद चुदाई के मजे ले रहा हूँ … वो भी तुम जैसी गुद गुद और रसीली औरत से … आज से तुम मेरी पत्नी हो.”
मैंने गीतांजली को उठा कर अपने ऊपर बैठा दिया और बहुत प्यार से चुदाई के मजे लेने लगे. वो मेरी तोंद पर बैठ कर मेरे लंड पे कूद रही थी. उसकी बड़ी बड़ी चुचियां ‘थप थप …’ उछल उछल कर टकरा रही थीं. मधुर चुदाई का समा बन गया था … मजा आ गया.

मैं गीतांजली को वैसे ही गोद में उठा कर खड़ा हो गया और उसे ऊपर नीचे करने लगा. उसकी चुचियां मेरी छाती के बालों से रगड़ खा कर और टाइट हो गईं. मैं भी मसल मसल कर दूध पी रहा था. मैंने थोड़ी तेजी बढ़ा दी. गीतांजली भी पूरे जोश में मेरा साथ देने लगी.

थप थप थप …

गीतांजली झड़ने को आ गयी. मैं और तेजी से लंड अन्दर बाहर करने लगा. एक जोर की चीख के साथ गीतांजली झड़ गई. ‘आह्ह …’ उसके पूरे चूत रस ने मेरे लंड को और चिपचिपा कर दिया था.

अब तो मेरा लंड और अन्दर तक आसानी से घुस रहा था. मैंने उसे फिर से बेड पे लिटाया और उसकी कमर ऊपर उठा दी. फिर लंड उसकी चूत में पेल दिया और चुदाई चालू कर दी. गीतांजली अब पूरी थक चुकी थी, पर मैं पूरी बेदर्दी के साथ उसकी चुदाई कर रहा था. वो हल्की आवाज में आह आह आह कर रही थी. फिर मैंने कुछ जोरदार शॉट लगाये और गीतांजली की चूत में ही अपना गर्म गर्म पौरुष रस छोड़ दिया और उससे लिपट कर सो गया.

जब मेरी नींद खुली तो भोर के 3 बज चुके थे, गीतांजली मेरी तरफ पीठ करके लेटी थी, मैंने कमर से सटते हुए उसकी चुचियों को पकड़ा और उसके निप्पल मसलने लगा. वो भी जाग गयी और मजे लेने लगी.

फिर मैंने अपना लंड निकाला और उसकी गांड पे टिका दिया, वो थोड़ी डर गयी.
“मास्टर जी प्लीज पीछे नहीं, मैंने कभी पीछे नहीं लिया … बहुत दर्द होगा.”
“अरे कुछ नहीं होगा मेरी जान!”
मैंने थोड़ी जबरदस्ती की, थोड़ा सा थूक उसकी गांड पे लगाया और लंड को हल्के से उसकी गांड के छेद पे रख कर घुसा दिया. गीतांजली को भी कुछ ही देर की पीड़ा के बाद मीठे दर्द का मजा आ गया.

मैंने फिर उसे पेट के बल लिटा दिया. उसके ऊपर चढ़ कर जमके उसकी गांड मारी. फिर उसे घुमाया, उसकी चुत पे लंड टिकाया और चुदाई चालू कर दी. दोनों को खूब मजा आया. कुछ देर बाद हम दोनों झड़ गए और यूं ही लेट गए.

“तो कैसी रही ये रात मेरी रोसोगुल्ला, मजा आया ना?”
“बहुत मजा आया मेरे सोना, आज से जब मन करे आ जाना मेरे पास … अब तो मुझे बस आपकी होके रहना है.”
फिर मैंने गीतांजली को एक जबदस्त गुड बाय चुम्मा दिया और कपड़े पहन कर अपने घर चल गया.

अब तो मेरी हर रात जान बंगालिन रानी की चूत और गांड का बाजा बजाने में निकलने लगी.