पड़ोसी भाभी की चुदने की बेताबी

यह कहानी कुछ 3 साल पुरानी.. सर्दियों के दिनों की है जब मैं नोयडा में किराए के मकान में अपने दोस्त के साथ रहता था। वह पूरा चार-मंजिला मकान किराएदारों के लिए ही बना हुआ था.. इसलिए मकान-मालकिन वहाँ नहीं रहती थी।

दूसरे फ्लोर पर जाने पर मेरा ही पहला कमरा था। सभी के लिए टायलेट, बाथरूम व पानी भरने के लिए एक ही जगह बनी थी.. जो ठीक सीधे जाने के साथ मेरे कमरे के सामने थी। एक फ्लोर में 5 कमरे थे व चारों फ्लोर किराएदारों से भरे हुए थे.. जिनमें अधिकतर फैमेली वाले ही रहते थे।

कहानी यहीं से शुरू होती है। मेरे कोने वाले कमरे में एक उड़ीसा की भाभी.. कल्पना अपने 2 छोटे-छोटे बच्चों के साथ रहती थी। जिसकी उम्र 22 साल व लम्बाई 5’6″ फिट थी वो देखने में काफी सुन्दर और मनमोहनी थी दो बच्चे होने पर भी उसका फिगर मस्त था।

उसका पति शादी व पार्टियों में खाना बनाने का ठेका लेता था.. इसलिए वह अक्सर दो-तीन दिन तक घर से बाहर ही रहता था। वह सारा दिन मेरे कमरे के सामने जीने में बैठकर बाकी औरतों से बातें करती रहती थी। वो उन औरतों से बातें करते समय.. मुझे चोर नजरों से देखती रहती थी।

मैं और मेरे दोस्त की शिफ्ट में ड्यूटी होने के कारण हम जल्दी ही कमरे में आ जाते थे.. या कभी देर में जाते थे.. वो मुझसे कुछ ही दिनों में जल्दी ही खूब घुलमिल गई थी।

कुछ दिन बातें करते हुए एक दिन उन्होंने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्ल-फ्रेण्ड है?
मैंने मना कर दिया साथ ही मैंने बात भी बदल दी.. पर दूसरे दिन उन्होंने फिर वही सवाल पूछा तो मैंने कहा- आप हो तो.. गर्ल-फ्रेण्ड की क्या जरूरत..वो शरमा गई।
मैंने अपना नम्बर उन्हें यह कहकर दे दिया कि कभी बाजार से कोई सामान मंगवाना हो तो मुझे बता देना.. मैं ले आऊँगा।

धीरे-धीरे हमारी फोन पर बातें होने लगीं। एक दिन कपड़े धोते समय उन्होंने शरारत करते हुए मेरे ऊपर पानी डाला और भागने लगीं। मैंने तुरन्त उनका हाथ पकड़ा और उन्हें भी भिगो दिया। वो जल्दी से हाथ छुड़ाकर बोली- बेशरम.. और अपने कमरे में भाग गई और वहाँ से मुस्कुराने लगी।

अगले दिन वो मुझे फिर छेड़ने लगी।
मैंने कहा- भाभी मुझे बार-बार मत छेड़ा करो.. नहीं तो मैं भी छेड़ूँगा। भाभी- तो छेड़ो ना.. किसने मना किया है।
यह कहते हुए वो मुस्कुराने लगी।

मैंने इधर-उधर देखा.. सभी दिन में आराम कर रहे थे.. बाहर कोई नहीं था। मेरा दोस्त भी ड्यूटी गया था। मौका अच्छा था.. मैंने उनको लपक कर पकड़ लिया और उनका एक मम्मा सूट के ऊपर से ही दबा दिया। यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

उनके मुँह से एक ‘आह’ निकली। मैंने फिर दूसरे मम्मे को भी जोर से मसल दिया।
भाभी बोली- क्या करते हो.. कोई देख लेगा।

मैं समझ गया कि भाभी का मन तो है.. पर डर रही हैं। मैं उन्हें खींचते हुए सामने बाथरूम में ले गया। दरवाजा बंद करके उन्हें बाहों में भर लिया और बोला- मेरी गर्ल फ्रेण्ड बनोगी भाभी..
भाभी ने मादकता भरे स्वर में कहा- मैंने कब मना किया।

इतना सुनते ही मैंने उनके गालों व होंठों पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी।
भाभी- हटो.. यह क्या कर रहे हो।
मैंने कहा- गर्लफ्रेण्ड को चुम्मी कर रहा हूँ।

भाभी इठलाते हुए बोली- कोई ऐसा करता है.. भला।

मैं कहाँ मानने वाला था। चुम्बन के साथ साथ उनके दोनों मम्मों को लगातार दबाने लगा।
वो गरम होने लगी.. पर बार-बार ‘ना.. ना.. मत करो..’ कह रही थी।

मैंने अपना एक हाथ उनकी सलवार के ऊपर से ही उनकी चूत के ऊपर फिराना शुरू कर दिया। तो वह और गरम हो गई व अजीब सी आवाजें निकालने लगी।

फिर वह मेरा साथ देने लगी व मुझे भी चुम्बन करने लगी। मैंने उनके पजामे का नाड़ा खोल दिया और हाथ अन्दर ले गया तथा पैन्टी के अन्दर हाथ डालकर उनकी चूत सहलाने लगा।

उनकी चूत बहुत ज्यादा गरम हो रही थी। मैंने चूत में उंगली करनी शुरू कर दी। उन्हें मजा आने लगा। वो जोर-जोर से आवाजें निकालने लगी।

मैंने तुरन्त अपने होंठ उनके होंठों से लगा लिए और उनका हाथ पकड़ कर अपने पैन्ट के ऊपर से ही लण्ड पर रख दिया.. जो कि अब तक रॉड जैसा सख्त हो गया था।वो भी मतवाली होकर मेरी चैन खोलकर मेरा लण्ड सहलाने लगी। थोड़ी ही देर में उनकी चूत में से पानी रिसने लगा।

मैं जोर-जोर से अंगुली करने लगा। अब हम दोनों ही बहुत ज्यादा गरम हो गए थे.. पर डर भी रहे थे कि कोई आ ना जाए। थोड़ी ही देर में भाभी की चूत से पानी चूने लगा।

वो झड़ने के बाद निढाल सी होते हुए बोली- प्लीज राज अब मत करो मैं पागल हो जाऊँगी।
मैं उसके चूतरस से भीगी ऊँगली को चूसता हुआ बोला- भाभी मजा आया।
वो बोली- बहुत ज्यादा।
मैं बोला- और मजे लोगी।

वो बोली- यहाँ नहीं.. इधर हम पकड़े जाएगें बाकी बाद में.. आज रात को करेंगे।
मैं- भाभी मैं कब से तड़प रहा हूँ.. अभी इसे शान्त तो करो।
भाभी मुस्कुरा कर बोली- इसे तो मैं अभी शान्त कर देती हूँ.. बाकि बाद में.. .. सब्र करो.. सब्र का फल मीठा होता है।

वो झुक गई और मेरे लिंग को अपने मुँह में ले लिया और मॅुह को आगे-पीछे करने लगी। मैंने फिल्में में ऐसा तो दोस्तों के साथ बहुत देखा था.. पर मैं पहली बार ये सब कर रहा था। बड़ा मजा आ रहा था.. पर डर भी रहा था। थोड़ी ही देर में मैंने अपना सारा लावा उनके मुँह में भर दिया।

जिसे वो पी गई और बोली- तुम्हारा माल तो बहुत ज्यादा निकलता है और बहुत गाढ़ा और टेस्टी भी है। आज के बाद इसे बरबाद मत कर देना।
उन्होंने चाट कर पूरा लिंग साफ कर दिया।

फिर हमने फटाफट कपड़े ठीक किए व जाने से पहले एक-एक चुम्मी ली और एक-एक करके बाथरूम से बाहर आ गए।
हम दोनों ने रात में मिलने का वादा किया था।

कुछ देर बाद मैंने भाभी को फोन किया और पूछा- भाभी कैसा लगा मजा आया।
भाभी बोली- मेरे पति घर से तीन-तीन दिन तक गायब रहते हैं और तुमने मेरी प्यास और बढ़ा दी है। अब इस प्यास को कब बुझाओगे।
मैंने कहा- अभी आ जाऊँ।
भाभी- अभी मरवाओगे क्या.. अभी नहीं, मैं रात को कॉल करूंगी।

मैं रात का इन्तजार करने लगा। मैंने अपना फोन साईलेन्ट मोड में डाल दिया ताकि दोस्त को पता ना चले। रात को दोस्त भी आ गया, हमने साथ खाना खाया.. पर भाभी का फोन नहीं आया। यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

मैं परेशान हो गया और टीवी देखने लगा.. दोस्त बोला- यार कल मुझे सुबह 6 बजे ड्यूटी जाना है.. तुझे कब जाना है?
मैंने कहा- कल मैं दोपहर में जाऊँगा इसलिए अभी एक फिल्म देखूँगा।

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