पड़ोसी भाभी की चुदने की बेताबी

गतांग से आगे …..

दोस्त ने कहा- आवाज कम करके देख और मुझे सोने दे.. मैंने कम आवाज की और फोन का इन्तजार करते हुए फिल्म देखने लगा। जब 11:50 तक भी फोन नहीं आया.. तो मैं भी सोने की तैयारी करने लगा।

रात को 12:30 बजे.. जब सभी गहरी नींद में सो गए और मुझे भी नींद आने ही लगी थी.. कि तभी मेरे फोन पर भाभी का मैसेज आया कि छत पर मिलो।

सर्दी के दिन थे.. रात में छत पर कोई नहीं जाता था। मैंने तेज खांसकर चैक किया कि दोस्त सोया है कि नहीं, वह गहरी नींद में था।

मैं चुपचाप उठा.. बाहर देखा कोई नहीं था। सभी अपने-अपने दरवाजे बंद करके कबके सो चुके थे। जब मैं छत पर पहॅुचा.. भाभी वहाँ पहले से ही खड़ी थी।

भाभी- बच्चे अभी सोये हैं, मैं उन्हें ज्यादा देर अकेला नहीं छोड़ सकती, प्लीज राज, जो भी करना है.. जल्दी करो।

मैं- पर भाभी, यहाँ पर कैसे?
भाभी- ये देखो.. मैंने आज दोपहर में ही एक गद्दा छत पर सूखने डाला था। जिसे मैं नीचे नहीं ले गई.. यहीं पर है।
मैं- भाभी आप तो बहुत तेज हो..

भाभी चुदासी सी बोल पड़ीं- जब नीचे आग लगी होती है तो तेज तो होना ही पड़ता है.. अब जल्दी से वो कोने में ही गद्दा बिछाओ और जो दो टीन की चादरें रखी हैं.. उनको दीवार के सहारे लगाओ।

मैंने फटाफट बिल्कुल कोने में जीने से दूर गद्दा बिछाया व उसे दीवार के सहारे टिन की चादरें लगाकर ऊपर से ढक दिया। छत पर पहले से ही बहुत अंधेरा था.. फिर भी कोई आ गया तो चादरों के नीचे कोई है.. ये किसी को दिखाई नहीं देगा।

मैं भाभी के दिमाग को मान गया। भाभी रात में कोई झंझट ना हो इसलिए वो साड़ी पहन कर आई थी।

मैंने भाभी को लेटने को कहा और खुद उनके बगल में लेट गया और धीरे-धीरे उनके मम्मे दबाने लगा। भाभी तो पहले से ही बहुत गरम और चुदासी थी। वो सीधे मेरे से चिपट गई और मेरा लौड़ा पकड़ते हुए बोली- प्लीज राज जो भी करना है.. जल्दी करो। मैं बहुत दिनों से तड़प रही हूँ। मेरी प्यास बुझा दो।

मैंने कहा- जरूर भाभी.. पहले थोड़ा मजे तो ले लो।

उन्होंने मुझे पूरे कपड़े नहीं उतारने दिए, कहा- फिर कभी.. मजे ले लेना.. आज जो भी करना है.. फटाफट करो। मैं अब ये आग नहीं सह सकती।

फिर भी मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोल दिए व ब्रा को ऊपर उठा कर उनके निप्पल चूसने लगा। दूसरे हाथ से उनका पेटीकोट को ऊपर करके पैन्टी उतार दी और उनकी चूत सहलाने लगा।

वहाँ तो पहले से ही रस का दरिया बह रहा था, उन्हीं की पैन्टी से चूत साफ की और जीभ से चूत चाटने लगा, उन्हें मजा आने लगा। फिर हम 69 अवस्था में आ गए और वो भी मेरा लण्ड चूसने लगी।

जब उन्हें मजा आने लगा तो वो तेज-तेज मुँह चलाने लगी।
मैंने मना किया- ऐसे तो मेरा माल गिर जाएगा।

तो उन्होंने मुझे अपने ऊपर से हटा लिया और किसी राण्ड की तरह टांगें चौड़ी करते हुए बोली- राज अब मत सताओ.. आ जाओ.. मेरी चूत का काम तमाम कर दो..मैं भी देर ना करते हुए उनकी टांगों के बीच में आ गया और अपना लण्ड उनकी चूत में लगाने लगा।

मेरा लवड़ा बार-बार चूत के छेद से फिसल रहा था। तो उन्होंने लण्ड हाथ से पकड़ कर चूत के मुहाने पर रखा और कहा- अब धक्का लगाओ।

मैंने एक जोर का धक्का लगाया तो उनके मुँह से एक चीख निकल गई। मैंने तुरंत अपने होंठ उनके होठों पर रख दिए और थोड़ी देर वैसे ही पड़ा रहा और उनकी चूचियां मसलने लगा।

थोड़ी देर बाद होंठ हटाए और पूछा- चिल्लाई क्यों?

भाभी बोली- तुम्हारे भैया ने मुझे अपने काम के चक्कर में तीन महीनों से नहीं चोदा है और तुम्हारा उनसे लम्बा और मोटा है। इसलिए दो बच्चों की माँ होने पर भी तुमने मेरी चीख निकाल दी।

मैं- बोलो.. अब क्या करना है?
भाभी- अब धीरे-धीरे धक्के लगाओ।

थोड़ी देर में मुझे भी व भाभी को भी मजा आने लगा। मैंने स्पीड बढ़ा दी। यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

भाभी – आ..ह आ..ह ओ..ह ओ..ह आ…ह स. और जोर से राज आ..ह और जोर से ओ…ह.. मैं कब से तड़फ रही थी राज.. आज मेरी सारी प्यास बुझा दो राज आ…ह.. बहुत मजा आ रहा है राज.. फाड़ दो मेरी चूत.. आज ओ..ह बहुत सताया है इसने.. मुझे.. आज इसकी सारी गर्मी निकाल दो राज.. चोदो.. और जोर से आ…ह आ….ह

उनके चूतड़ों का उछल-उछल कर लण्ड को निगलना देखते ही बनता था।

मैं- मेरा भी वही हाल था भाभी.. जब से तुम्हें देखा है.. रोज तुम्हारे नाम की मुठ मारता था।
भाभी- अब कभी मत मारना.. जब भी मन करे.. मुझे बता देना.. पर अभी और जोर से राज.. रगड़ दो मुझे.. आह्ह..

छत पर हमारी तेज-तेज आवाजें गूजने लगीं.. पर सर्दी की रात होने के कारण डर नहीं था और हम दोनों एक-दूसरे को रौंदने लगे।
मैं पूरी ताकत से धक्के लगा रहा था व भाभी नीचे से गाण्ड उठा कर मेरा पूरा साथ दे रही थी।

थोड़ी देर बाद भाभी अकड़ते हुए बोली- मेरा होने वाला है.. तुम जरा जल्दी करो।
कुछ धक्कों के बाद मैंने भी कहा- मेरा भी निकलने वाला है।

भाभी बोली- अन्दर मत गिराना। मेरे मुँह में गिराओ.. मैं तुम्हारा जवानी का रस पीना चाहती हूँ।

मैंने फटाफट अपना हथियार निकाल कर उनके मुँह में लगा दिया। लौड़े से दो-चार धक्के उनके मुँह में मारने के बाद लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी।

भाभी ने मेरा सारा रस निचोड़ लिया और लण्ड को चाट कर अच्छे से साफ भी कर दिया।

हम दोनों बहुत थक गए थे। थोड़ी देर सुस्ताने के बाद भाभी बोली- राज तुमने मुझे आज बहुत मजा दिया। इसके लिए मैं कब से तड़प रही थी। मेरे पति जब भी आते हैं थक-हार कर सो जाते हैं और मेरी तरफ देखते भी नहीं। मेरी 18 साल में शादी हो गई थी और जल्दी ही 2 बच्चे भी हो गए.. पर अभी तो मैं पूरी जवानी में आई हूँ। उन्हें मेरी कोई फिक्र ही नहीं है। राज तुम इसी तरह मेरा साथ देना।

मैं- ठीक है भाभी चलो एक राउण्ड और हो जाए.. अभी मन नहीं भरा।

भाभी- अरे नहीं.. अभी और नहीं, अब तो मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ। अभी तो खेल शुरू हुआ है, सब्र रखो सब्र का फल मीठा होता है।

मैंने हंसते हुए कहा- हाँ.. वो तो मैंने चख कर देख लिया। बहुत मीठा था.. हा हा हा।

भाभी- चलो अब जल्दी नीचे चलो.. कहीं बच्चे जाग ना जाएं.. नहीं तो बहुत गड़बड़ हो जाएगी.. बाकी कल का पक्का वादा..
मैं- अच्छा चलो एक चुम्मा तो दे दो।

भाभी ने जल्दी से होठों पर एक चुम्मा दिया। मैंने तुरंत उनके मम्में दबा दिए।
भाभी ने एक प्यारी सी ‘आह’ निकाली व कल मिलने का वादा करके अपने कमरे में भाग गईं।