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प्यासे लंड की आग के सामने बेबस लड़की

प्यासे लंड की आग के सामने बेबस लड़की
( Pyase Land Ki Aag Ke Samne Bebas Ladki )

हेल्लो दोस्तों कैसे है आप लोग मजे कर रहे हो ना मै समझ गया आप लोग मुठ मारने की तयारी कर रहे हो और मेरी बहने भी चुत रगड़ने की तयारी कर रही है तो चलिए सुरु करता हूँ कहानी दोस्तों कहानी के बाद अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरुर लिखना | प्यासे लंड की आग के सामने बेबस लड़की कहानी का शीर्षक है दोस्तों अब आपको बता दूँ सागर की मम्मी का देहांत हुए महीना भी नहीं हुआ था की उसका पापा चंदेल, 19 साल की दुल्हन ढूढ़ने लगा. एक दिन, सागर घर में काफ़ी लोगों को देख अपने पापा से पूछता है की क्या बात है इतने लोग उसका पापा, उसे समझाने की कोशिश करता है की दोनों को ज़रूरत है एक औरत की जो, घर संभाल सके. सागर की मम्मी के बाद, उसकी बुआ घर के काम देख रही थी पर वो हमेशा तो रुक नहीं सकती. सागर को समझाते समझाते, चंदेल थक गया.

थोड़ी देर बाद, बुआ आकर अपने तरीके से समझाने लगी. सागर की बात सही थी. वो कैसे किसी और को, अपनी मम्मी एक्सेप्ट कर पाएगा. सागर सब समझ रहा था पर उसका दिल बिल्कुल भी नहीं मान रहा था थोड़ी देर बाद, चंदेल फिर आया और बुआ को जाने के लिए कहा. चंदेल, सागर से बोला की शादी करना ज़रूरी है और वो और उसकी नयी मम्मी वही करेगी, जो तू कहेगा कभी कोई प्राब्लम नहीं होगी सागर फिर भी इनकार करने लगा.

आख़िरी में चंदेल ने सागर से कहा मेरी मजबूरी है और बर्दाश्त नहीं होता चाहे जो भी मांग ले पर इनकार मत कर मैं तेरे हाथ जोड़ता हूँ और, वहाँ से चल दिया. “चुड़क्कड़ पापा” तरस रहा था और पीछे नहीं हटने वाला था. आख़िर, में शादी हो ही गई. दुल्हन का नाम, नताशा था.. 21 साल की थी और शरीर भरा हुआ था.. देखा जाए तो सागर, उससे 3 साल ही छोटा था और उसका पति उससे दुगुनी उमर का था. 2-3 दिनों तक, सब घर में ही थे तो “सुहाग रात” तो हुई ही नहीं. सबके जाने के बाद, नताशा ने घर संभाला.

चंदेल, सुबह खेत पर जाता और 7-८ बजे वापस आ जाता. सागर, दोपहर १ बजे स्कूल जाता और 5 बजे तक वापस आ जाता. सागर के दिल में, नयी मम्मी के लिए कोई फीलिंग नहीं थी बल्कि गुस्सा था. पहले दिन से ही, उसने नयी मम्मी को छोटे छोटे काम के लिए परेशान किया. पर नताशा ने, उसकी हर ज़रूरत का ख़याल रखा. सागर ने नहलाने तक का काम, नताशा से कराया.

नताशा के घर में भी वो सब काम करती थी और उसे इन सबकी आदत थी. गाँव की लड़कियों को, ये सब की आदत होती है. नताशा को पहले ही उसके पति ने कह कर रहा था की सागर को किसी चीज़ की तकलीफ़ नहीं होनी चाहिए जो वो कहे, वैसा ही करना नताशा डरी हुई थी, पर साथ ही खुश भी थी. चंदेल रोज़ सुबह, जल्दी खेत में काम करने जाता.

पहले दिन से ही, सागर ने नताशा को परेशान करना शुरू किया. सागर चंदेल के जाने के बाद उठा और संडास जा के नताशा के पास गया और नताशा को कहा – मुझे नहाना है पानी गरम कर के दो घर में ही एक कुआ था, नताशा कुए के पास गरम पानी रख कर खड़ी हो गई. सागर सामने, अंडरवियर में खड़ा हो गया. सागर ऐसे ही खड़ा रहा और नताशा को देख रहा था.

नताशा समझ गई की उसे स्नान भी करवा के देना होगा. नताशा ने साड़ी ऊपर की और बैठ गई. सामने सागर को बिठाया और उस पर पानी डाल कर, साबुन लगाने लगी. पूरे बदन पर साबुन लगा लिया पर अंडरवियर बाकी था. सागर के अंडरवियर में भी, उसे हाथ डालना पड़ा. सागर ये सब, “एंजाय” कर रहा था.

नताशा के मुलायम हाथों का स्पर्श, अपने “लंड और ग़ुल्लों” पर पा कर मन में ही उछल रहा था. साबुन घोते समय, नताशा को महसूस हुआ की सागर का लंड खड़ा हो गया था. नताशा, कुछ नहीं बोली. स्नान होने के बाद, सागर को टॉवेल से पोंछ दिया. सागर का लंड तब भी खड़ा हुआ. अंडरवियर निकाल कर टॉवेल लपेट कर, सागर ने नताशा को कहा की उसे भूख लगी है और सीधा रसोई में चला गया.. नताशा की नज़र उसके लंड पर थी, जो टॉवेल में “टेंट” बन रहा था. सागर, रसोई में गया और बैठ गया.

नताशा आ कर, सागर को खाना परोस कर सामने बैठ गई. एक दो नीवाला मुंह में डालने के बाद, सागर रुक गया. नताशा ने पूछा – क्या बात है खाना ठीक नहीं बना क्या ?? सागर कुछ नहीं बोला और खाना खाने लगा. कुछ देर बाद, सागर बोला की उसे नुन्नी में दर्द हो रहा है उसका लंड, अब भी खड़ा था नताशा ने कहा के टॉवेल ढीला कर दे, बाद में तेल लगा दूँगी. सागर बोला – अभी, तेल ले आओ नताशा ने कहा की खाना ख़तम कर लो, उसके बाद पर सागर ज़िद करने लगा.

नताशा ने कहा – ठीक है और वो तेल की शीशी ले आई. सागर वैसे ही, बैठा रहा. नताशा ने तेल थोड़ा हाथ में ले कर टॉवेल के अंदर हाथ डाल दिया और लंड को पकड़ कर रगड़ने लगी.

10 मिनिट के बाद, सागर का खाना हो गया पर मालिश चल ही रही थी. सागर टॉवेल को हटा कर बोला की टॉवेल चुभ रहा है. नताशा के सामने, सागर पूरा “नंगा” बैठा था. सागर अब बस झड़ने वाला था.

नताशा हाथ में लंड लेकर खुद भी हैरान थी और सोच रही थी की ये सब क्या हो रहा है. सागर, मज़े ले रहा था. खाना ख़तम होने के 2 मिनिट बाद, सागर बोला – अभी, बस हो गया आ आ आहा हा सागर के लंड से पिचकारी, सीधे सामने निकली. नताशा हैरान हो गई, ये सब देख कर.. पिचकारी, सीधे थाली में जा गिरी. यह हिंदी सेक्स कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

सागर बोला – अब अच्छा लग रहा है नताशा की उंगली, सागर के वीर्य से सनी हुए थी. नताशा ने साड़ी के पल्लू से अपना हाथ और सागर का लंड पोंछ कर, साफ किया. अब ये, रोज़ की बात हो गई थी.

सागर नहाते वक़्त, नंगा हो जाता. नताशा को भी ये ही लगता था क्यूंकि सागर खुश था. सागर को अपनी सोच पर, बहुत अफ़सोस होने लगा. वो सोचता था की नताशा को परेशान करेगा, पर पहले दिन से ही नताशा उसकी सब बात मानती थी. सागर ने सोच लिया की वो नताशा को बहुत प्यार देगा पर एक दोस्त की तरह, वो कभी “मम्मी” का दर्जा नहीं दे पाएगा. एक दिन रात में, सागर को नींद नहीं आ रही थी.

सागर, उसका पापा और नताशा साथ ही एक ही कमरे में सोते हे. सागर ने देखा की चादर की अंदर, चंदेल नताशा के ऊपर सोया हुआ है और ज़ोर ज़ोर से हिल रहा है. कमरे की खिड़की से स्ट्रीट लाइट की रोशनी, सीधे उन पर आ रही थी. सागर, ध्यान से देखने लगा. थोड़ी देर में चादर साइड में हो गई और दोनों का “नंगा बदन” सामने आ गया.

चंदेल, चोदने में लगा हुआ था. नताशा, धीरे धीरे चिल्ला रही थी. नताशा की नज़र, सागर पर पड़ी. पर वो, कुछ ना बोली. सागर, चुप चाप देख रहा था. थोड़ी देर बाद, चंदेल ने नताशा को “डॉगी स्टाइल” में चोदना चालू किया. चंदेल ने जब सागर को जागते हुए देखा तो ज़ोर से सागर पर चिल्लाया – ओय, सोया नहीं अभी तक चल, मुंह उधर कर के सो नहीं तो टाँगे तोड़ दूँगा सागर डर गया और डर के मारे, सो गया. अगले दिन, सागर ने नहाते वक़्त नताशा से पूछा की रात मैं क्या चल रहा था नताशा, कुछ नहीं बोली.

सागर के बार बार पूछने पर नताशा ने कहा की ये सब बड़े लोगों का खेल है तुम नहीं समझोगे सागर ने कहा की उसे भी ये “खेल” खेलना है नताशा डाँट कर बोली की ऐसा, ये सब नहीं बोलना चाहिए वरना वो शिकायत करेगी, चंदेल से सागर चुप हो गया पर उसके दिमाग़ में कुछ चल रहा था. सागर, रोज़ खाना खाते खाते मूठ मरवाता.

अब, पापा बेटा दोनों खुश थे. नताशा, बेटे और पति को खुश रखने की कोशिश में जुटी थी. चंदेल ने कहा था की सागर को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए और जो कहे, जो मांगे, दे देना. अपने पति की आग्या का पालन कर रही थी और सागर की कभी शिकायत नहीं की. चंदेल रात को आता और खाना खा कर सो जाता.

सागर दिन भर खेलता कूदता और पापा के आते ही, किताब ले कर बैठ जाता. नताशा, सुबह सागर को संभालती और शाम को चंदेल को. 3-4 महीनो बाद चंदेल की रिश्तेदार, सागर की चाची आई. सब की खबर, लेने के लिए.

शीला की शादी नहीं हुए थी और उमर बढ़ने के कारण, वो “वर्जिन एंड अनमॅरीड” ही रह गई. शीला (चाची) को लग रहा था की सब कुशल मंगल है, सब खुश लग रहे थे. वो कुछ दिनों के लिए, आई थी. अगले दिन, सुबह उठ कर वो पहले संडास करने के लिए खेतो में गई. उसके बाद वापस आ कर, घर के कामो में नताशा का हाथ बटाने लगी. नताशा ने फिर कुछ देर बाद, सागर को उठाया. सागर का लंड, सुबह की ठंडी में कड़क हो गया था. शीला ने देखा की उसकी पतलून में उभार है, और समझ गई की लड़का अब जवान हो गया है.

सागर, संडास करके आया और कुए (वेल) के पास जाकर कपड़े निकालने लगा. तब तक नताशा, गरम पानी बाल्टी में लेकर आई. शीला, दोनों को देख रही थी. शीला को होश तब आया जब नताशा, सागर के सिर पर पानी डाल कर साबुन लगाने लगी.

शीला यूही देखती रही और सोचने लग गई की ये तो “जवान लड़का” है, थोड़ी तो शरम आनी चाहिए. नताशा ने सारे बदन पर साबुन लगा दिया और एक पत्थर से, बदन घिसने लगी.

सागर नताशा से बोला – चाची को यहाँ से हटाओ मुझे शरम आती है नताशा हँसते हुए शीला से बोली – आप ज़रा रसोई में जाइए मेरे मुन्ना को, शरम आ रही है |

चाची बोली – काहे की शरम मैं तो तेरी मम्मी जैसी हूँ ना सागर ज़िद करने लगा.

नताशा के फिर से कहने पर चाची अंदर गई और हँसते हुए बोली – कितना शरमाता है शादी के बाद, क्या होगा तेरा

सागर नताशा से कहता है – नुन्नि को भी सॉफ कर दो

नताशा कहती है – तू अब बड़ा हो गया है ये सब, खुद से करना चाहिए चाची देखेगी तो क्या बोलेगी

सागर बोला – चाची तो एक दो दिनों के लिए है

नताशा ने फिर एक हाथ से एलास्टिक खींचा और दूसरे हाथ को अंदर डा

कर नुन्नि को मुट्ठी में पकड़ लिया.

सागर बोला – अच्छे से सॉफ करो इसमें से, बदबू आती है

नताशा, सागर के लंड पर साबुन लगा कर हिलाने लगी. सागर भी मज़े ले रहा था. शीला थोड़ी देर के बाद आई और फिर ये सब देख कर सोच में पड़ गई. सागर की नुन्नि, असल में एक लंड के आकर की हो गई थी. नताशा को भी पता था पर वो सागर को बच्चा ही समझ रही थी. शीला, सागर के हाव भाव देख कर समझ गई की दाल में कुछ काला है. आप यह हिंदी सेक्स स्टोरी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | स्नान होने के बाद, सागर कमरे में कपड़े पहनने गया. नताशा ने उसके सर पर चमेली का तेल लगाया. सागर बोला की थोडा तेल नुन्नि को भी लगाओ

नताशा ने पूछा – क्यू ??

तो सागर बोला – ऐसा करने से, मैं जल्दी जवान हो जाऊंगा ऐसा, मेरे दोस्तो ने कहा है

नताशा बोली – चल हट, बदमाश जा कर खुद लगा मुझे बहुत काम है

सागर बोला – बाद मैं मालिश कराऊंगा मुझे नहीं आता

नताशा, रूम से बाहर चली गई.

सागर ने फिर खुद ही तेल लगा लिया.

खाना खाते हुए, सागर बोला की दर्द हो रहा है.

नताशा बोली – नहीं अभी चाची है उनको अच्छा नहीं लगेगा

सागर, कुछ नहीं बोला. नताशा बोली की बाद में, तुझे मालिश करवाती हूँ  खाना खाने के बाद, सब सो गये पर सागर तो मालिश करवाने के लिए उत्तेजित था. शीला, रूम में सोई थी.सागर नताशा को लेकर रसोई में गया और कपड़े उतार कर, अंडरवियर में लेट गया. नताशा तेल की शीशी लेकर, उसकी मालिश करने लगी. फिर हाथ पैर की मालिश कर दी.. उतने में सागर का लंड, टाइट हो गया था. सागर ने कहा – जिसके लिए आया था वो तो छोड़ दिया

नताशा ने पूछा – क्या ??

तो सागर ने झट से जवाब दिया – मेरी नुन्नि

नताशा ने मुस्कुराते हुए हथेली में काफ़ी तेल लिया और दोनों हाथ से लंड पकड़ कर हिलाने लगी.

10 मिनिट के बाद सागर बोला – रूको मत, ज़ोर ज़ोर से करो

नताशा बोली – तेरा रस निकल जाएगा ऐसा मत कर

सागर बोला – रस निकलने के बाद ही चैन मिलता है आप जल्दी करो

नताशा फिर हिलाने लगी और थोड़ी देर के बाद, गरम वीर्य लंड से निकल आया.

नताशा ने फिर अपने पल्लू से लंड और हाथ सॉफ किया.

नताशा, ने सागर को कपड़े पहनकर सोने के लिए कहा और खुद भी सो गई.

शाम को चंदेल आया, हंसी मज़ाक का माहोल बना हुआ था.

चाची अपने गाँव के किस्से सुना रही थी और चंदेल भी घर की गाँव की बात करता.

रात में खाना खाते वक़्त, नताशा सागर से बोली की चाची, तुम्हारे साथ सोएगी

सागर ने ज़िद की, की अकेले सोना है.

शीला ने कहा की तुम्हारे साथ ही सोउंगी

नताशा ने कुछ कहा नहीं पर सोच में पड़ गई.

खाना खाने के बाद, नताशा ने शीला से कहा की रात में आप, जाग जाओगी

शीला समझ गई और हंस कर बोली – चिंता मत कर मैं एक बार सो गई तो आसानी से नहीं उठती तुम दोनों चाहे, जितना आवाज़ करो मुझे पता नहीं चलेगा और पता भी चला तो क्या हुआ ?? मैं तो घर की ही, हूँ ना

नताशा मुस्कुर कर बोली – क्या आप भी कुछ भी कहती हो

रात में, सब सो गये. शीला, नताशा के बगल में थी और दूसरी साइड में चंदेल. सागर, दूसरे कोने में सोता था. चंदेल को चुदाई बिना, नींद नहीं आती थी.
शीला और सागर को सोता हुआ देख, चंदेल नताशा के कपड़े उतारने लगा. नताशा को शरम आ रही थी, मना भी किया पर चंदेल के सिर पर सेक्स चढ़ा हुआ था. नताशा को नंगा कर खुद भी नंगा हो गया और आधी रात तक सेक्स होता रहा. चंदेल, नताशा पर रोज़ भारी पड़ता था. नताशा, चंदेल के लंड को कुछ देर बर्दाश्त करने के बाद टूट जाती थी और किसी तरहा फिर से ताक़त जुटा कर, दूसरी बार झड़ जाती. उस रात भी, कुछ ऐसा ही हुआ. नताशा ने कोशिश की, की आवाज़ ना निकले पर चीख तो निकल ही जाती थी. सुबह उठने के बाद, सब अपने अपने काम पर लग गये. शीला ने नताशा की तरफ़ देखा.

नताशा नॉर्मल बिहेव कर रही थी, जैसे कल आधी रात तक रात सेक्स किया ही ना हो. संडास करने, दोनों साथ में गये. संडास करते करते, शीला ने नताशा से कहा – क्या बात है ?? रात में इतनी देर जागने के बाद भी तुम काफ़ी फ्रेश लग रही हो नताशा बोली – आप को कैसे पता ?? आप तो सोई थी ??

शीला बोली – रात में तुम्हे बहुत दर्द हो रहा था अंजाने में, तुमने मेरा हाथ पकड़ लिया था मैंने आँखें खोली तो देखा की चंदेल तुम्हारी जम कर चुदाई कर रहा है |

चुदाई नाम सुन कर, नताशा शर्माकर बोली – क्या आप भी मुझे शरम आ रही है आप किसी को मत कहना, प्लीज़

शीला बोली – बोली भी दिया तो क्या सब को पता है की तुम्हारी चुदाई तो रोज़ होती होगी

दोनों हँसते हुए, गांड धो कर घर आ गई. नताशा और शीला, दोनों एक दूसरे के सामने थोड़ा खुल गई थी. सागर उठने के बाद, हॅगने गया और वापस आ कर नहाने कुए के पास आया. आप यह हिंदी सेक्स स्टोरी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | रोज़ की तरह नताशा से स्नान करवाया और लंड मालिश भी करवाई. दोपहर में तेल मालिश करवाने रसोई में दोनों गये और हमेशा की तरहा, लंड मालिश हो रही थी की अचानक शीला आ गई और उसने देख लिया. आप यह हिंदी सेक्स स्टोरी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | शीला को देख कर, दोनों डर गये. शीला का खून खौलने लगा पर वो कुछ ना बोली. शाम को चंदेल को, शीला ने सब कुछ बता दिया. चंदेल को याद था की उसके बेटे ने शर्त रखी थी की नयी मम्मी के साथ, वो किसी भी तरहा रह सकता है. चंदेल ने लंबी साँस ली और शीला को सब कुछ बता दिया. नताशा, दरवाजे के बाहर खड़ी सब सुन रही थी और सागर बाहर खेलने गया था. शीला, फिर बोली की ये सब ग़लत है.

चंदेल बोला – जाने दो घर की ही बात है, आपस में देख लेंगे

शीला का दिमाग़ घूम गया था और बहुत कुछ बोल देती पर चुप रही.

रात में खाना खाने के बाद, सब सो गये पर असल में सिर्फ़ सागर सोया था बाकी सब सोने का नाटक आर रहे थे. कुछ देर बाद, चंदेल मूतने के लिए बाहर गया और रूम के अंदर आते ही, कपड़े निकाल कर नंगा हो गया. चंदेल को देख, नताशा ने भी खुद के कपड़े नीकाल लिए. चंदेल, नताशा की टाँग फैला कर उसके ऊपर आ गया और चूमने लगा. “सेक्स का प्रोग्राम” स्टार्ट हो गया. शीला, इसका आनंद लेने के लिए आँखें खोल कर देख रही थी. चंदेल का ध्यान, सिर्फ़ नताशा पर था. 2 घंटे के बाद, दोनों सो गये. शीला का मन, बहुत करता सेक्स करने के लिए पर, कुछ नहीं कर पा रही थी. अगले दिन, शीला और नताशा दोनों संडास करते करते बाते कर रही थी..

शीला ने कहा – तुम बहुत नसीब वाली हो जो इतना प्यार करने वाला पति और बेटा मिला है

ये कह कर शीला की आँखें नम हो गई थी..

नताशा ने देखा और पूछा – क्या बात है आप को कोई दुख है क्या ??

शीला बोली – कुछ नहीं, चलो

एक दो बार पूछने पर भी, शीला कुछ नहीं बोली.

रात में जब चंदेल चोद रहा था तो नताशा ने देखा की शीला, उन दोनों को देख रही है और बदन को सिकोड कर सोई है.

नताशा को पहले ही शक हो गया था और अब यकीन हो गया की शीला की चुत में “आग” लगी है.

अगले दिन, नताशा ने चंदेल को सब बता दिया..

चंदेल गुस्से में बोला – बहन चोद को एक करेला दे, कुछ दिन के लिए अगर, सिर पर चढ़ गई तो मुसीबत होगी

नताशा बोली – आप की बात सही है पर एक बार तो उसको वो सुख दे ही सकते है ना

चंदेल, कुछ ना बोल कर निकल गया.

नताशा फिर दोपहर में खाते समय शीला से पूछा – आपको कैसे लगते है ??

शीला ने पूछा – क्या ??

नताशा बोली – सागर के पापाू ??

शीला, खाना खाते खाते बोली – अच्छा तो है काम भी बहुत करता है कमाता भी अच्छा है और क्या चाहिए

नताशा बोली – रात में, कैसे लगते है

शीला बोली – मैं समझी नहीं ??

नताशा बोली – मैंने देखा है आपको, रात में आँखें खुली थी..

शीला, कुछ नहीं बोली.

नताशा बोली – शरमाती क्यू हो ?? आपने ही तो कहा था की चुदाई सब करते है आज रात मे, मैं नहीं करूंगी मेरा व्रत है ना पर चंदेल को नहीं पता एक मुसीबत है

शीला पूछती है – क्या ??

नताशा बोली – चंदेल, रात में सुनते ही नहीं सीधा, हल जोतना चालू कर देते है एक काम करते है आप मेरी जगह पर सो जाना और मैं आपकी चंदेल, मुझे दूसरी तरफ़ देख कर कुछ नहीं करेंगे क्यूंकी उस तरफ दीवार है

शीला कुछ ना बोली और सोचने लगी.  शीला को अजीब लगा पर उसे कोई दिक्कत भी नहीं थी.

नताशा बोली – चलो, सो जाते है

शीला और नताशा, दोनों सो गये. रात में सोने से पहले, चंदेल को नताशा ने समझा दिया की वो आज रात में चुदाई नहीं करेगी, आप चाहो तो शीला को चोद लेना, वो कुछ नहीं बोलेगी उसकी चुत में भयंकर आग लगी है |

चंदेल बोला – कैसी बाते कर रही हो ?? मैं तुम्हारे साथ ही सोऊंगा ??

पर नताशा, मान ही नहीं रही थी. रात में नताशा, शीला की दूसरी तरफ सोई थी और उस तरफ थोड़ी दूर चंदेल सोया था. रात में, सब सो गये.
चंदेल ने चुदाई किए बगैर ही, रात निकाल ली. अगले दिन भी ऐसा ही होना था. नताशा ने शीला से कहा की रात में ध्यान से सोना, चंदेल रात को नींद मैं भी चुदाई कर सकता है, कोई भरोसा नहीं. शीला मन ही मन सोचने लगी की चुदाई के लिए, अगर लंड आ रहा है तो वो रोकेगी नहीं. अगली रात, सब सो गये. रात में, नताशा ने शीला की साड़ी को ऊपर उठा दिया. कुछ देर बाद, चंदेल को होश आया. सामने चूत का द्वार देख उससे रहा नहीं गया और वो शीला के करीब जाकर, पैर सहलाने लगा. शीला, आधी नींद में थी.

दोनों घुटने ऊपर करके, वो पीठ के बल आ गया. चंदेल ने शीला की साड़ी उतार दी और चिपक कर सो गया. शीला तुरंत जाग गई और देखा की चंदेल का एक हाथ चड्डी के अंदर था और एक से पीठ पकड़ी थी. शीला की गर्मी कम नहीं हुई थी और फिर “हवस की ज्वाला” भड़क उठी. आधी रात तक, दोनों “प्रेम लीला” में मग्न थे. सागर भी आवाज़ सुन कर जाग उठा पर दोनों एक दूसरे में इतने खो गये थे की उनका ध्यान ही नहीं गया. सुबह, दोनों लेट उठे. दोनों के चेहरे पर गिल्टी की फीलिंग सॉफ दिख रही थी और साथ ही साथ, एक दूसरे को प्यार करने की चाहत भी. उस दिन भी रात में चंदेल से, रहा नहीं गया. शीला भी सोई नहीं थी. चंदेल शीला के पास गया और बिना कुछ कहे, शीला से लिपट गया. आप सोच रहे होंगे की “नताशा और सागर” का क्यू हुआ. अब तक नताशा ने अपने पति और शीला को एंगेज करा लिया था तो अब वो फ्री हो गई थी, सागर को आज़माने के लिए |

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