सेक्स के बिना हर प्यार अधूरा है

एक दिन जब मैं ऑफिस जाने के लिए निकली मेरी कार ख़राब हो गई. मजबूरी में मुझे बस में जाना पड़ा, ऐसे मैं कभी बस से नहीं जाती हूँ. लेकिन उस दिन मेरी किस्मत ही ख़राब थी, जब मैं बस स्टॉप पर पहुची देखा बस में बहुत भीड़ थी. मैंने बस को देखा तो बस पूरी भरी हुई आ रही थी लेकिन मैं हिम्मत करते हुए बस में चढ़ ही गई और जैसे ही मैं बस में चढ़ी तो मुझे बड़ा ही अनकंफरटेबल सा महसूस हो रहा था गर्मी भी बहुत ज्यादा हो रही थी क्योंकि मुझे अपने ऑफिस के लिए लेट हो रही थी इसलिए मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था पहले मैं सोच रही थी कि मैं ऑटो से जाऊं लेकिन ऑटो भी सुबह के वक्त मिल पाना बहुत मुश्किल होता है इसलिए मुझे बस से ही जाना पड़ा मैं अपनी कार से ही अपने ऑफिस जाया करती हूं।

मेरे सामने एक लड़का खड़ा था उसने अपने कान में बड़े-बड़े हेडफोन लगाए थे और उसने टीशर्ट पहनी थी उसके बाल भी खड़े थे वह बार-बार मेरी तरफ देख रहा था मैंने उसे कहा तुम ऐसे मुझे क्या देख रहे हो उसने अपने कान से हेडफोन को निकालते हुए मुझे कहा हां मैडम आप क्या कह रही थी, मैंने उसे कहा तुम मुझे ऐसे घूर कर क्या देख रहे हो उसने मुझसे कहा मैं आपको घूरकर नहीं देख रहा हूं मैं आपके चेहरे की तरफ देख रहा था आप बडा ही अनकंफरटेबल सा महसूस कर रहे हो। मैंने सोचा वह कह तो ठीक रहा है मैंने उसे कहा हां मैं अन कंफर्टेबल महसूस कर रही हूं क्योंकि बस में बहुत ज्यादा भीड़ है और मैं कभी भी ऐसे सफर नहीं करती वह मुझे कहने लगा मैं आपको सीट दिलवा देता हूं।

उस युवक ने मुझे सीट दिलवा दी उसने एक व्यक्ति से कहा कि मैडम की तबीयत खराब है आप उन्हें सीट दे दीजिए, मुझे बस में बैठने के लिए सीट मिल गई क्योंकि मेरे घर से मेरा ऑफिस काफी दूर है इसलिए मेरे पैरों में भी दर्द होने लगा था और जब मुझे सीट मिल गई तो मैंने उस लड़के की तरफ देख कर मुस्कुरा दिया उसने भी मुझे इस्माइल दी और कहा कोई बात नहीं। थोड़ी देर बाद मैंने उससे पूछा कि तुम क्या करते हो जिस सीट पर मैं बैठी थी वह वहीं पास में खड़ा था वह मुझे कहने लगा मैडम मैं तो बच्चों को डांस सीखता हूं मैं एक डांस टीचर हूं, मैंने उससे हाथ मिलाते हुए अपना नाम बताया मैंने उसे कहा मेरा नाम मोनिका है।

वह मुझे कहने लगा मेरा नाम दिनेश है उसने मुझे अपनी जेब से अपना विजिटिंग कार्ड निकाल कर दिया और कहा मैडम कभी आप हमारे डांस एकेडमी आइएगा मैंने उसे कहा जरूर मैं तुम्हारे डांस अकैडमी आऊंगी उसने मुझसे पूछा कि आप कौन सी कंपनी में जॉब करती हैं तो मैंने उसे बताया मैं एक आईटी कंपनी में जॉब करती हूं उस लड़के ने मुझे कहा मैडम बस मैं अब अगले स्टेशन पर ही उतर जाऊंगा और यह कहकर वह चला गया लेकिन मैं उसकी तरफ देखती रही और जब वह उतरा तो उसने मुझे हाथ दिखाते हुए बाय किया मैंने उसे देख लिया था परंतु मैंने कोई रिप्लाई नहीं किया मैं वहां से अपने ऑफिस चली गई और मैं उस दिन अपने काम में इतनी बिजी हो गई कि मुझे पता ही नहीं चला कि कब 6:30 बज गए मुझे उस दिन जल्दी घर लौटना था क्योंकि मुझे मेरे पापा को डॉक्टर के पास लेकर जाना था उनके दांत में बहुत तकलीफ रहती है जिस वजह से मुझे उन्हें डॉक्टर को दिखाना था।

मैं जल्दी से ऑफिस से निकली और मैंने ऑटो ले लिया मैं आधे घंटे में अपने घर पहुंच गई और मैंने पापा से कहा पापा सॉरी मुझे आने में लेट हो गई पापा कहने लगे कोई बात नहीं बेटा हमें यही नजदीक में जाना है। मैं पापा को लेकर डेंटिस्ट के पास चली गई डेंटिस्ट ने पापा के दांत को देखा तो वह कहने लगे कि अब इनका दांत पूरी तरीके से खत्म हो चुका है इनका दांत बदलना पड़ेगा मैंने उन्हें कहा सर क्या आज ही हो जाएगा वह कहने लगे हां मैं आज ही दांत निकाल देता हूं।

डॉक्टर ने पापा के दांत को निकाल दिया लेकिन वह कहने लगे कि शायद आज ही दांत को दोबारा से लगाना मुश्किल हो जाएगा इसलिए आप अगले हफ्ते आइएगा और फिर हम वहां से घर चले आए पापा को बहुत ज्यादा तकलीफ हो रही थी इसलिए मैंने पापा से कहा आज आप आराम कीजिए मैंने मम्मी को भी कह दिया था कि पापा को आज आप कुछ हल्का ही खिलाना जिससे कि उनके दांत में ज्यादा तकलीफ ना हो मम्मी कहने लगी ठीक है बेटा क्योंकि घर में मैं ही एकलौती हूं इसलिए मुझे अपने घर का और ऑफिस दोनों का ही ध्यान रखना पड़ता है।

मैं अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती आ रही हूं मैंने कभी भी अपने पापा मम्मी से कोई चीज की डिमांड नहीं कि मैं हमेशा से ही अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी और बचपन से ही मेरी ज्यादा चीजों को लेकर मांग कभी नहीं रहती थी इसलिए मेरे माता-पिता भी मुझे बहुत प्यार करते हैं और वह हमेशा कहते हैं कि तुमने घर को बखूबी संभाला है और तुम किसी लड़के से कम नहीं हो। एक दिन मेरे ऑफिस की छुट्टी थी उस दिन मैं अपने पर्स में से कुछ निकाल रही थी तभी मेरे हाथ में दिनेश का विजिटिंग कार्ड लगा मैंने जब उस विजिटिंग कार्ड को देखा तो मैंने उसके नंबर पर फोन कर दिया और दिनेश से कहा आज तुम कहां हो तो वह कहने लगा मैं तो आज अपनी डांस अकैडमी में ही हूं और बच्चों को डांस सिखा रहा था मैंने उसे कहा चलो आज मैं तुमसे मिलने आती हूं दिनेश कहने लगा क्यों नहीं मैडम आप मुझसे मिलने आईये।

उस दिन मैं दिनेश से मिलने के लिए चली गई मैं जब उस दिन दिनेश से मिली तो मैंने उसके डांस अकैडमी को देखा वहां पर काफी भीड़ थी दिनेश मुझे एक रूम में लेकर गया वहां पर बिल्कुल भी शोर शराबा नहीं हो रहा था और हम दोनों वहीं बैठे रहे वह मुझे कहने लगा मैडम आज आप यहां कैसे आ गई मैंने उसे कहा बस ऐसे ही आज तुम्हारा विजिटिंग कार्ड मेरे हाथ में आ गया तो मैंने सोचा तुमसे मिल लूं क्योंकि उस दिन मैंने तुम्हें कहा था मैं तुमसे जरूर मिलूंगी।

दिनेश ने भी मुझे अपने बारे में बताया दिनेश के बारे में सुनकर मुझे भी ऐसा लगा कि दिनेश ने भी अपने जीवन में बहुत मेहनत की है मैंने भी जब दिनेश को अपने बारे में बताया तो दिनेश कहने लगा मैडम आपकी और मेरी जिंदगी तो बिल्कुल एक जैसी है आपने भी अपने जीवन में बहुत मेहनत की है और मैं भी अपने जीवन में बहुत मेहनत कर रहा हूं, उस दिन दिनेश के साथ मैं ज्यादा देर तक नहीं रुकी लेकिन उसके बाद दिनेश और मेरी बातें अक्सर फोन पर होने लगी कभी कबार मैं दिनेश से मिलने भी चले जाया करती, दिनेश से मिलना मुझे बहुत अच्छा लगता था और दिनेश से मेरी दोस्ती भी हो चुकी थी। जब दिनेश से मेरी दोस्ती हो गई तो दिनेश और मैं एक दूसरे को मिलने भी लगे थे हम दोनों ज्यादा से ज्यादा समय एक दूसरे के साथ गुजारने लगे जिससे कि हम दोनों के बीच और भी नजदीकिया आने लगी मुझे नहीं पता था कि हम दोनों के बीच में आखिरकार क्या है.

लेकिन दिनेश के साथ में मुझे समय बिताना बहुत अच्छा लगता है और ऐसा लगता कि जैसे वह मेरी हर एक बात को समझता है इसीलिए तो मैं उसके साथ समय बिताती थी हालांकि दिनेश मुझसे उम्र में छोटा है लेकिन वह दिल का बहुत अच्छा है और हमेशा ही मुझे कहता है कि आप बहुत अच्छी हैं दिनेश की अच्छाइयों से मैं भी बहुत ज्यादा प्रभावित हूं। दिनेश जब मुझे मिलता तो मुझे ऐसा लगता कि दिनेश एक बहुत ही अच्छा लड़का है मैंने भी दिनेश से एक दिन अपने दिल की बात कह दी और उसे कहा दिनेश मैं तुम्हारे साथ ही अपना समय बिताना चाहती हूं। वह कहने लगा क्या आपने वाकई में मेरे अंदर इतनी अच्छाइयां देखी।

मैंने दिनेश से कहा हां दिनेश तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो उसके बाद हम दोनों जैसे एक दूसरे के ही हो गए, हम दोनों ज्यादा से ज्यादा समय एक दूसरे के साथ बिताते हम दोनों के बीच शारीरिक संबंध में बनने लगे थे लेकिन जब पहली बार हम दोनों के बीच शारीरिक संबंध बना था तो उस दिन मुझे बड़ा डर लगा था। दिनेश ने मुझे मिलने के लिए अपनी डांस एकेडमी बुलाया और उस वक्त वहां पर कोई नहीं था दिनेश और मैं साथ में बैठे हुए थे लेकिन हम दोनों की जवानी उस दिन कुछ ज्यादा ही बढने लगी। दिनेश ने मेरे हाथों को अपने हाथ में ले लिया, उसने जब मेरी जांघ पर हाथ रखा तो वह मेरी जांघ को दबाने लगा मैं उसकी बाहों में चली गई। जब मैं उसकी बाहों में गई तो उसने मेरे स्तनों को दबाना शुरू किया और मेरे होठों को चूसना शुरू किया मेरे अंदर की गर्मी बढ़ने लगी थी, मैं अपने आप को काबू में ना रख सकी। उसने मेरे स्तनों को चूसना शुरू किया तो मेरे शरीर से गर्मी अधिक मात्रा में बढने लगी, मैंने दिनेश के लंड को दबाना शुरू कर दिया।

दिनेश के लंड को मै दबाने लगी मैंने उसके लंड को थोड़ा बहुत अपने मुंह में लेकर सकिंग किया लेकिन जब उसने मेरी चूत को चाटा तो मैंने अपना आपा खो दिया। मुझे लगा बस अब वह मेरी चूत में लंड डाल दे जैसे ही उसने अपने लंड को मेरी चूत में डाला तो मैं मचलने लगी मुझे दर्द होने लगा। मै तेज आवाज में मादक आवाज लेने लगी, जिससे दिनेश की उत्तेजित बढती जाती वह भी तेज गति से मुझे धक्के देता।

उसके धक्को से मैं पूरी तरीके से अपने आपको उसे ही सौप देती लेकिन जैसे ही मेरी गर्मी शांत हो गई तो दिनेश ने तेज झटके मारे परंतु जब उसने अपने वीर्य को मेरे पेट पर गिराया तो मुझे लगा दिनेश भी शांत हो चुका है। मैंने उसके वीर्य को अपने पेट से साफ किया उसके बाद तो हम दोनों के बीच सेक्स आम बात हो गई, हम दोनों जब भी एक दूसरे से मिलते तो जरूर सेक्स किया करते क्योंकि मुझे भी अब लगता है कि शायद सेक्स के बिना प्यार अधूरा है। दिनेश को मैं खुश रखने की हमेशा कोशिश करती हूं दिनेश भी बहुत खुश है मैं भी उसके साथ बहुत ज्यादा खुश हूं।