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टाइट चुत वाली भी इतने मजे से लंड चुसी

मेरा नाम ध्रुव है और मैं एक ट्रैवल एजेंसी में काम करता हूं। हमारी एजेंसी बहुत ही ज्यादा बड़ी है। जो कि हर शहर में है। मुझे यहां पर काम करते हुए काफी वर्ष हो चुके हैं और मैं अब एक अच्छी पोस्ट पर हूं। मैं शहर शहर जाकर घूमता रहता हूं और हमारे जितने भी ऑफिस हैं उनका काम देखता हूं, कि वहां पर किस तरीके से काम चल रहा है। जिसकी वजह से मुझे घूमने का मौका भी मिल जाता है और मैं अपनी लाइफ भी जी लेता हूं।

मेरा पहले से ही शौक था कि मैं ट्रैवल इंडस्ट्री में ही अपना कैरियर बनाऊ। इसलिए मैंने भी शुरुआत से ही ट्रेवल एजेंसी ज्वाइन कर ली थी। इस बार भी मुझे कंपनी की तरफ से माथेरान भेजा गया। वहां पर भी हमारा एक छोटा सा ऑफिस है और मेरे ऑफिस वाले चाहते थे कि मैं वहां का भी काम देखू। कि किस तरीके से वहां पर काम हो रहा है। मैंने ऑफिस में पूछा कि मुझे वहां कब निकलना है। तो उन्होंने बताया कि आपको एक हफ्ते बाद माथेरन के लिए निकलना है। मैं एक हफ्ते तक अपने काम करता रहा और एक हफ्ते बाद मैं माथेरन चला गया।

मैं जब वहां पहुंचा तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। मैं उससे पहले भी वहां पर तीन चार बार जा चुका था। वहां पर हमारे ही ऑफिसर्स के गेस्ट हाउस हैं। तो मैं वहीं पर रुका हुआ था। मैं वहां पर एक महीने तक रुकने वाला था। इस वजह से मैं अक्सर पैदल ही घूमने निकल जाया करता था और काफी दूर आपना पैदल जाता था। जिससे कि मुझे भी बहुत अच्छा लगता और मैं ऐसे ही अकेले घूमने निकल जाया करता हूं। कभी कबार हमारे गेस्ट हाउस में कुछ नए लोग आ जाते हैं। तो मैं उनके साथ भी इंजॉय कर लेता और उनको भी अपने साथ घुमाने ले चलता। वहां पर हमेशा कोई ना कोई नया व्यक्ति आता रहता था और मैं ऐसे ही घूमता रहता हूं।

एक दिन मैं अकेले ही घूमने निकल पड़ा और मैंने देखा वहां पर एक छोटा सा रेस्टोरेंट था। वहां पर एक सुंदर सी लड़की बैठी हुई थी। उसे देखकर मुझे अंदर से कुछ अच्छी फीलिंग आयी और मैं जैसे ही उस रेस्टोरेंट में गया तो वह लड़की तब तक वहां से जा चुकी थी। मैं उसके बारे में रेस्टोरेंट वाले से पूछ रहा था लेकिन उसने कहा साहब हमें भी नहीं पता। मैंने भी उसे पहली बार यहां देखा है। वह इतनी ज्यादा सुंदर थी कि मुझे लग रहा था कि वह दुनिया की सबसे ज्यादा सुंदर लड़की है और मैं उसे ढूंढने लगा। मुझे लगा शायद वह मुझे मिल जाएगी लेकिन वह मुझे मिली ही नहीं।

फिर एक दिन ऐसे ही मैं घूमते घूमते किसी के घर के पास पहुंच गया और वहीं खड़ा होकर काफी देर तक इधर उधर देख रहा था। तभी अचानक से आगे से वह लड़की मुझे दिखाई दी। मैं जल्दी से उसके पास गया और मैंने उससे बात की। पहले तो वह मुझे देखकर डर गई। उसने सोचा कोई अनजान व्यक्ति है और ऐसे ही बात कर रहा है। मैंने उसे फिर अपने बारे में बताया और अपनी कंपनी का विजिटिंग कार्ड दिखाया। उसे थोड़ा राहत मिली और उसने मुझे अपना नाम बताया। उसका नाम संध्या था और वह भी घूमने के लिए ही आई हुई थी। मैंने उससे पूछा कि आप कहां पर रह रहे हो। तो उसने मुझे अपने होटल का नाम बताया और वह अब निकल पड़ी। मैंने उससे ज्यादा बात नहीं की लेकिन फिर भी मैं उसके होटल पर चला गया है।

जहां वह रुकी हुई थी। मैंने वहां इंक्वायरी की और उसके बारे में पता लगवा लिया। तो उन्होंने बताया कि वह 1 महीने तक यहां रुकने वाली हैं और वह साल या 2 साल में यहां पर आती रहती हैं। यह सुनकर तो मैं बहुत ही खुश हो गया। मैंने सोचा कि मैं भी अभी काफी दिनों तक यहीं पर रुकने वाला हूं और मुझे एक अच्छी कंपनी भी मिल जाएगी। अब मैं अक्सर उसके होटल के बाहर चक्कर मारता रहता हूं और जब भी वह अपने होटल से बाहर निकलती तो मैं भी उसके पीछे पीछे चल पड़ता। जब वह मुझे देखती तो मैं भी उससे बातें करने लगता। पहले तो वह मुझसे बात ही नहीं करती थी लेकिन जब मैंने उसे बताया कि मैं कंपनी के काम से आया हूं और अभी कुछ दिन यहां पर रुकूंगा। तो वह मुझसे बातें करने लगी। क्योंकि उसे भी ऐसा लगने लगा था कि मैं भी उसे कंपनी दे सकता हूं।

अब हम दोनों काफी बातें करने लगे और हम दोनों पैदल ही घूमने निकल जाया करते हैं। उसे भी पैदल घूमने का बहुत शौक था। अब मुझे भी धीरे-धीरे उसके बारे में पता चलता जा रहा था। उसके पिताजी एक बहुत ही बड़े व्यापारी हैं।  इसलिए वह कुछ दिन अपना समय निकालकर घूमने निकल पड़ती है। जिससे कि उसे थोड़ा सुकून मिल जाता है और वह अक्सर माथेरान आती रहती है। मुझे उस से बातें कर के बहुत ही अच्छा लगता है। अब उसे भी मुझसे बातें करना बहुत अच्छा लगने लगा और वह मुझसे बातें करती रहती। हम लोग पैदल पैदल बहुत दूर तक घूमने निकल जाया करते और हमें पता भी नहीं चलता कि हम लोग कितनी दूर निकल गए हैं।

एक दिन हम दोनों कुछ ज्यादा ही दूर चले गए थे मुझे वहां से वापस जाने का रास्ता भी नहीं मालूम था और वह भी बहुत ज्यादा परेशान होने लगी। वह मुझसे पूछने लगी कि तुम्हें मालूम है यहां से कैसे वापस जाना है। मैंने उसे कहा तुम चिंता मत करो हम कोई ना कोई रास्ता निकाल लेंगे। तभी उसे बहुत तेज टायलेट आया वह कहने लगी मैं अभी आती हूं। वह जैसे ही एक पेड़ के पीछे गई और वहां मूतने लगी मैं भी चुपके से उसे देखने लगा। मैंने उसकी गोरी गांड को देख लिया था और मुझसे रहा नहीं गया।

मैंने भी तुरंत वहां जाकर उसे कस कर पकड़ लिया और उसे वही जमीन पर लेटा दिया। वह मुझसे लिपट गई और मेरे होठों को किस करने लगी। मैं भी उसके होठों को बहुत देर तक किस करता जाता। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसे नरम होठों को अपने होठों में लेकर चूस रहा था। अब मैंने थोड़ी देर बाद अपने कपड़ों उतार दिए और उसके कपड़े भी उतार दिए। उसके गोरे गोरे स्तन मैने मुंह के अंदर ले लिए मुझे बहुत अच्छे लगता जब मैंने उसके पूरे शरीर को चाटते हुए उसकी योनि की तरफ बढ़ा।

मैंने उसकी योनि को भी बहुत ही अच्छे से चाटना शुरू किया मैं जैसे ही उस पर अपनी जीभ लगाता तो उससे बहुत तेज पानी निकलता और मैंने उसकी पूरे पानी को चाट लिया था।

वह बहुत ही खुश हो रही थी मैंने अपने लंड को निकालते हुए उसकी चूत में डाल दिया और ऐसे ही धक्के मारने लगा। जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत मे गया तो वह बड़ी तेजी से चिल्लाने लगी। वह मुझे कहती कि मुझे बहुत अच्छा लग रहा है जब तुम मुझे चोद रहे हो। मैं उसे ऐसे ही चोदता जाता ऐसे ही धक्के देता। वह भी मेरा पूरा साथ देने लगी और मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह में डाल दिया। वह बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी उसने बहुत देर तक मेरे लंड को ऐसे ही चूसा।

जब मै उसकी चूत मे अंदर बाहर करता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता मेरा मन करने लगा कि आज मैं ऐसे ही चोदता रहू। मेरा थोड़ी देर बाद माल गिर गया और मैंने उसके मुंह के अंदर ही अपने माल को गिरा दिया उसने वह सारा वीर्य निगल लिया। मैंने उसे पेड़ के सहारे घोड़ी बना दिया और जैसे ही वह घोड़ी बनी तो मैंने अपने लंड को हिलाते हुए दोबारा से खड़ा कर दिया। मैने उसकी टाइट चूत में अपना लंड अंदर डाल दिया जैसे ही मैंने उसकी चूत मे लंड डाला तो मुझे बहुत अच्छा लगा।

अब उसकी चूतडो से मेरा लंड टकरा रहा था और मुझे बहुत ही आनंद आ रहा था। मै उसे बड़ी तेज गति से धक्के मारता जाता और उसका शरीर पूरा कांपने लगा। हम दोनों बहुत ज्यादा गर्म हो चुके थे और उसे भी बहुत आनंद आ रहा था। वह अपनी गंड को मुझसे मिलाती और बहुत तेज चिल्लाती। वहां जंगल में कोई भी हमारी आवाज सुनने वाला नहीं था और ऐसे ही मैं उसे बहुत देर तक चोदता रहा।

एक समय बाद मेरा वीर्य गिरने वाला था और मैंने ऐसे ही वह उसकी योनि के अंदर ही गिरा दिया वह बहुत ज्यादा खुश हुई। हम दोनों वहां पर कुछ देर लेटे रहे और हमने अपने कपड़े पहने उसके बाद रास्ता ढूंढते-ढूंढते हम वापिस अपने होटल पहुंच गए। मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब मैंने संध्या की टाइट चूत मारी।

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