भाभी जान के लिए मेरा बेशुमार प्यार -1

सभी पाठको (चुत वालियों व लंडवालों) के लिए एक बार फिर कामुकता से भरी कहानी पेश कर रहा हूँ. आशा हैं की आप लोगो को यह सत्य कथा पसंद आएगी. कृपया इस सत्य कथा पर अपने विचार प्रकट करनी की कृपा करे जैसे की आप जानते हैं जब मैं 10 साल का था तब एक बस दुर्घटना में मेरे माता पिता का देहांत हो गया था हालाँकि मैं में उस दुर्घटना में सामिल था पर इश्वर की कृपा से मैं बच गया था. मेरे पिताजी ने काफी बैंक बैलेंस रखा था इस कारण हमें कोई भी आर्थिक कमी नहीं थी हर महीने बैंक बैलेंस की रकम से करीब २५-३० हजार रूपये ब्याज के रूप में मिलते थे जिस कारण घर खर्च आराम से निकल जाता था.

जब अब मैं 26 वर्ष का हो चूका था इसलिए मेरी देख भाल के लिए किसी की जरुरत नहीं थी खाना बनाने के लिए व बर्तन कपडे धोने के लिए २ नौकरानी रखी थी वे सुबह शाम आकर काम निबटा कर अपने अपने घर चली जाती थी. मैंने अब अपना पुराना मकान बेच कर उसी ईमारत में २ बेडरूम, एक हॉल और किचन वाला मकान ले लिया था. मेरे पास ६-७ छोटी छोटी कंपनिया थी जिस का अकाउंट व बिल्लिंग का काम घर पैर लाकर करता था जिस से अतिरित आय भी हो जाती थी और टाइम पास भी | मकान बड़ा होने के कारण मैं ११-११ महीने के लिए पेईंग गेस्ट रखता था मेरे बेड रूम में कंप्यूटर लगा था मेरे बेड रूम के बगल में बाथरूम व टोइलेट था और उसके बगल में एक और बेड रूम था उसके बगल में किचन और हॉल में टी वी सेट इत्यादि थे.

पिछले २ महीने से पेईंग गेस्ट के रूप में 45-50 वर्षिय बिकाश भाई व उनकी बीवी जान जो की 37 वर्षिय थी और उनका नाम लक्ष्मी था. बिकाश भाई सरकारी कर्मचारी थे जिनका तबादला कुछ महीनो के लिए इस शहर में हुआ था बिकाश भाई ने ८ साल पहले लक्ष्मी से दूसरी शादी की थी उनकी पहले वाली बीवी का देहावास हो चूका था इसलिए उन्होंने दूसरी शादी की.

पहले वाली बीवी से उनको एक लड़का हुआ जो अब 26 साल का हैं और कुवैत में रह कर काम करता हैं. लक्ष्मी (दूसरी बीवी) से उनको कोई औलाद नहीं हुई बिकाश भाई को मैं भाई जान कहता था और लक्ष्मी को भाभी जान. लक्ष्मी भाभी बिलकुल जय ललिता (तमिल नाडू की मुख्य मंत्री) की तरह गोल मटोल गौरा चहेरा नुकीले नाक बड़ी बड़ी सुरमई आँखे, ठुड्डी पर छोटा सा तिल उनके मुख मंडल पर चार चाँद लगा रहे थे. उनके मोटे मोटे चूचियां तो उनके बदन की शोभा बड़ा रहे थे वो ऊँची कद काठी की खुबसूरत काया की मलिक्का थी जब वो चलती थी तब उनके मोटे मोटे गोल मटोल चुतड ऊपर निचे हिचकोले खाते थे मुझे उनकी मटक ती हुई गांड बहुत अच्छे लगती थी.

मोटी और लम्बी कद होने के बावजूद वो हर एक को आकर्षित करने वाली हसमुख स्वाभाव की थोड़ी पढ़ी लिखी औरत थी. वो गरीब परिवार से थी इसलिए उसके माँ बाप ने बिकाश भाई जान (जो की लक्ष्मी की उम्र से 9 वर्ष बड़े हैं) से निकाह कर दिया था हालाँकि बिकाश भाई जान की सरकारी नौकरी थी इसलिए लक्ष्मी को भी कोई ऐतराज नहीं था लक्ष्मी हमेशा सलवार कुर्ते में रहती थी इन दो महीनो में हम तीनो काफी घुल मिल गए थे बिकाश भाई को हर शनिवार और रविवार को दफ्तर की छुटी होती थी तो कभी कभार मैं और बिकाश भाई संग में बैठ शराब पी लेते थे तब लक्ष्मी भाभी अपनी गांड मटकाते हुवे हमारे लिए खाने को कुछ ना कुछ लाकर देती थी जब मैं शराब का घुट लेकर लक्ष्मी भाभी को गांड मटका कर जाते हुवे देखता तो मेरे लंड राज में हल चल मच जाती थी. बिकाश भाई बहुत ही रसिया इन्सान थे जिसका मुझे कुछ दिनों में पता चला.

घर की मुख्य दरवाजे की दो चाबियाँ थी एक मेरे पास रहती थी और एक उन मिया बीवी के पास होती थी बिकाश भाई सुबह ८ बजे दफ्तर चले जाते थे उनके जाने के बाद लक्ष्मी भाभी नहाकर रसोई में खाना बनाने लगती थी और मैं सुबह ९-१० बजे उठ कर दिनचर्या निबटा कर नहाने चला जाता था फिर भाभी जान और मैं मिल कर नाश्ता करते थे. जैसे की मैंने बताया की लक्ष्मी भाभी जब बिकाश भाई घर में होते थे तब वो मुझसे कम बाते करती थी और उनके दफ्टर जाते ही वो बहुत बातूनी बन जाती थी और मेरे साथ हंसी मजाक करने लगती थी मैं भी उनसे फ्री होकर बिकाश भाई की अनुपस्तिथि में उनसे हंसी मजाक कर लेता था और और भाई जान के सामने काम बोलता था एक दिन मैं बाथ रूम में नहाने गया तो मेरी नजर कोने में पड़े बकेट पर गयी क्योंकि उसमे लक्ष्मी भाभी की पीले रंग सलवार व कमीज पड़ी थी मैंने सलवार कमीज को उठा उनके पेंटी और ब्रा को तलाशने लगा पर बकेट में पेंटी ब्रा नाम की कोई चीज नहीं थी यानि की लक्ष्मी भाभी पेंटी नहीं पहनती थी.

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जब घर में होती तो ब्रा भी नहीं पहनती थी सो मैंने सलवार को उठा कर उस हिस्से को देखा जो की लक्ष्मी भाभी की चुत छुपाये रहती हैं वो हिस्सा थोडा गिला था और वहां पर ३-४ झांटो के बाल चिपके थे यानि की वो नंगी होकर नहाने का आनंद उठाती थी मैं उनकी मोटी फूली चुत की कल्पना में खो कर सलवार के उस हिस्से को सूंघते सूंघते मुठ मारा फिर स्नान करके बहार आ गया. अगले दिन जब मैं सुबह जल्दी उठा बिकाश भाई दफ्तर जा चुके थे तब मैं रसोई में गया और लक्ष्मी भाभी से चाय लेकर हॉल में बैठ कर चाय पी रहा था तो लक्ष्मी भाभी भी चाय लेकर मेरे बगल में बैठ गयी -पप्पू आज कहीं बहार जाना हैं क्या जो जल्दी उठ गए -नहीं भाभी जान मुझे कहीं नहीं जाना हैं बस दोपर को एक आध घंटे के लिए पेमेंट लाने जाना हैं क्यों कुछ काम हैं क्या -नहीं रे मैं तो बस यूँही पूछ रही थी और सुनाओ काम कैसा चल रहा हैं -ठीक चल रहा हैं,

भाभी मेरे लिए खाना मत बनना मैं जहां जा रहा हूँ वहां खाना खा के आऊंगा -अच्छा ठीक हैं अगर तुम्हे जल्दी नहीं हो तो मैं नहा लेती हूँ -आप नहा लो मैं बाद में नहा लूँगा वो उठ कर अपने कमरे में गयी और तोवेल और सफ़ेद रंग का सलवार कमीज ले के आई और बाथ रूम में चली गयी जब वो नहा कर लौटी तो मैंने देखा की वो केवल सफ़ेद रंग की सलवार पहनी थी और सफ़ेद ही रंग की कमीज पहनी थी कमीज केवल उनकी चूतडों तक ही थी सफ़ेद रंग के कमीज में से उनके मोटी मोटी चुचिओ के भूरे रंग के निपल्स दिख रहे थे जैसा की मैंने बताया की वो ब्रा नहीं पहनी थी और जब वो अपने कमरे में जाने लगी तो उनका तोलिया जो उनके कंधे पर था वो जमीन पर गिर पड़ा सो उन्होंने उसे झुक कर उठाया जब वो झुकी तो उनकी मोटी मोटी गोल मटोल चुतड और उसके कटाक्ष मस्त लग रहे थे वो तोलिया उठा कर जाने लगी तो देखा की सलवार के साथ साथ कमीज उनकी गांड की दरारों के बिच फंसी थी जिस कारण उनकी मोटी मोटी भारी चुतड कटाव मनमोहक लगने लगा .

फिर वो अपने एक हाथ से गांड की दरारों के बिच फंसी हुई कमीज को खिंच कर गांड की दरार से निकाला और गांड मटकाते हूए अपने कमरे में घुस गयी मेरा तो यह नजारा देख कर लंड मोहदय ख़ुशी की मारे तन गया था फिर मैं बाथ रूम जाकर नहाने से पहले उनकी उतारी हुई सलवार को सूंघते हुवे मुठ मार कर नहा कर अपने कमरे आ गया और क्या करता अब तक उनके गदराये हुवे बदन नो निहारने के अलावा कोई चारा नहीं.हम दोनों बैठ कर नाश्ता किये और मैं करीब १२ बजे घर से बहार नक़ल गया करीब ३:३० को घर आया और अपनी चाबी से दरवाजा खोल कर अपने कमरे में जा कर कपडे बदल कर रसोई में गया तो वहां लक्ष्मी भाभी नहीं थी ना ही हॉल में थी मैं समज गया की वो खाना खा कर अपने कमरे में आराम फरमा रही होगी मैं हॉल में बैठ कर अख़बार उलटे लगा पर मन नहीं लगा और दिमाग में शैतानी कीड़ा कुलबुलाने लगा और दबे पैर लक्ष्मी भाभी के कमरे के पास जाकर दरवाजे के एक होल से अन्दर झाँकने लगा.

(प्यारे पाठको आप को बता देना चाहता हूँ की मैंने बाथ रूम और जो रूम किराये पर देता हूँ उन दरवाजे में एक छोटा सा होल बना रखा था जिस का ध्यान मेरे अवाला किसी को नहीं रहता था) जब अन्दर झाँका तो देखा लक्ष्मी भाभी पलंग पर लेट कर कोई किताब पड़ने में मस्त थी पलंग कमरे के बीचोबीच लगा था पलंग का सिरहाना जहां से मैं झांक रहा था वहां से मेरे बाएं ओर था, पलंग का पगवाना दाहिने ओर था लक्ष्मी भाभी किताब पढने में लीन थी की यका यक उन्होंने अपनी कमीज को अपने चुचिओं के ऊपर सरका कर अपने बड़े बड़े स्तन को बहार निकाल कर एक हाथ से एक चूची की घुंडी को किताब पढ़ती हुई अपने अंगूठे और उंगली के बिच पकड़ कर घुंडी को मसल ने लगी मुझे थोडा अचरज हुआ क्यों की वो किताब पढ़ते हूए घुंडी को मसल रही थी फिर मन में खयाल आया की जरुर वो कोई वासना मयी किताब पढ़ रही थी.

कुछ देर घुंडी को मसल ने के बाद किताब पढ़ते हूए उन्होंने एक हाथ से सलवार का नाडा खिंच कर वो हाथ सलवार के अन्दर डाल कर शायद वो अपनी चुत को रगड़ रही होगी यह सब देख कर तो मेरा बाबु मोशाय पजामे के उस हिस्से को तम्बू का रूप दे डाला जहां वो छुपा रहता हैं यानि की लंड राज फुल कर लोहे के समान कड़क हो गया था मैं लंड को पजामे से बहार निकाल कर अन्दर का नजारा देखते हूए हस्तमैथुन करने लगा.

लक्ष्मी भाभी थोड़ी देर तक किताब पढ़ती हुई सलवार के अन्दर से अपनी चुत रगड़ रही थी उनका चहरा वासना से भर कर सुर्ख होने लगा था फिर उन्होंने उस किताब को पलग के गद्दे जे निचे रख कर एक हाथ से अपने उर्वोरोज की घुंडी मसल रही थी और एक हाथ से चुत सहला रही थी कुछ देर में उनका शरिर अकड़ने लगा और वो पसीने से तर बतर हो कर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी मैं समज गया था की वो झड़ चुकी हैं पर मैं अब तक झडा नहीं तो बाथरूम में आकर हस्तमैथुन करके अपनी हवस को शांत किया और हॉल में आकर बैठ गया. थोड़ी देर बाद लक्ष्मी भाभी अपने कमरे से निकल कर बाथरूम गयी और फिर मेरे बगल में आकार बैठ गयी. उनका चेहरा अभी भी पसीने से लथपथ था -पप्पू तुम कब आये-बस भाभी जान ५ मिनट पहले ही आया था -तुम्हारा काम हो गया क्या -हाँ भाभी जान सामने वाली पार्टी ने पेमेंट कर दिया हैं -हो यह तो अच्छी बात हैं तुम बैठो मैं चाय बना कर लाती हूँ वो अपने कूल्हों (चूतडों) को मटकाती हुई रसोई में गयी और कुछ ही देर में वो चाय लेकर आई हम दोनों चाय पीते हूए इधर उधर की बाते करने लगे. करीब ५ बजे मेरे मोबाइल पर बिकाश भाई जान का फोन आया -पप्पू भाई जरा तुम्हारी भाभी जान से बात करा दो -लो भाभी जान भाई जान का फ़ोन हैं भाई जान ने भाभी से फ़ोन पर बात की और बात ख़त्म होते ही भाभी जान ने सेल मुझे वापस कर दिया उनका चेहरा थोडा उदास हो गया था.

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भाभी जान क्या कह रहे थे भाई जान -आज जुम्मा (शुक्रवार) हैं ना तो कह रहे थे की बाज़ार से गोस्त लाकर पकाना और पप्पू भाई जान को कहना की शाम को कहीं जाना मत वो घर सात बजे आजायेंगे -ठीक हैं पर इसमें आप उदास क्यों हो गयी हो -पप्पू भाई तुम नहीं समजोगे, तुम्हारे भाई जान में जान तो हैं नहीं ऊपर से पीने के बाद रात में काफी तंग करते हैं -(कुटिल मुस्कान लाते हूए) तो क्या हुआ आखिर वो आप का शोहर हैं ना -तुम नहीं समजोगे पप्पू, जब भी वो पीते हैं तो रात में उनकी हरकतों से में परेसान हो जाती हैं -कौनसी हरकत करते हैं ?-(लम्बी साँस लेकर )खैर छोडो जब वक़्त आएगा तो मैं अपनी बेबसी की दास्तान सुनाउंगी अब मैं बाज़ार जाकर गोस्त लाती हूँ तब तक तुम प्याज वैगेरह काट कर गोस्त की ग्रेवी तयार करो कह कर वो बाज़ार चली गयी और मैं ग्रेवी की तैयारी करने लग गया पर यका यक खयाल आया की लक्ष्मी भाभी के कमरे में जा कर वो किताब तो देखूं जो वो दोपहर को पढ़ रही थी.

सो मैं उनके कमरे में जाकर गद्दे के निचे से किताब निकाल कर देखा तो वो मस्तराम की कहानियों की किताब थी जरुर बिकाश भाई जान ने भाभी के लिए लाये होंगे. उस किताब में सचित्र कहानिया छपी थी जिसमे अतृप्त औरतें अपने मकान मालिक, देवर, नौकर , इत्यादि को मोहित कर के उनके संग सम्भोग करके अपने तन की प्यास भुझाती हैं कुछ पन्नो को उलट कर मैंने किताब को यथा स्थान रख कर ग्रेवी की तयारी में जुट गया करीब ३०-४० मिनट के बाद लक्ष्मी भाभी गोस्त लेकर आई और रसोई में गोस्त ब्रियानी बनाने में जुट गयी मैं भी रसोई में उनकी मदद कर रहा था.

करीब ७ बजे बेल बजी-लगता हैं तुम्हारे भाई जान आ गए हैं अब तुम जाओ हॉल में बैठो -ठीक हैं मैं दरवाजा खोल कर हॉल में बैठ कर टी वी देखने लगा, बिकाश भाई जान अपने कमरे में जा कर कपडे बदले पजामा कुर्ता पहन कर विस्की की बोतल और दो गलास ले कर हॉल में आ गए -पप्पू भाई आज पीने का मन हो रहा था तो सोचा क्यों ना वीक एंड एन्जॉय किया जाये -हाँ भाई जान वीक एंड तो जरुर एन्जॉय करना चाहिए-रज्जू जरा बर्फ और पानी लाना भाभी जान बर्फ और पानी लाकर अपने चूतडों को मटकाती हुई जाने लगी -सुनो रज्जू ब्रियानी में पका गोस्त मिलाने से पहले एक प्लेट में थोडा गोस्त तो ला दो नो -थोड़ी देर बाद लक्ष्मी भाभी प्लेट में गोस्त लेकर आई और हमेश की तरह अपने भारी भरकम चूतडों को ऊपर निचे करते हूए रसोई में चली गयी और हम बाते करते करते जाम पर जाम पीने लगे आज भाई जान काफी मूड में थे क्योंकि काफी सेक्सी जोक सुना रहे थे -क्या बात हैं भाई जान आज काफी मुड़ में हो(आँख मारते हूए) वीक एंड हैं ना और आज सारी रात कई वर्सो बाद मोज मस्ती करूँगा मेरे प्यारे पप्पू भाई हम लोग लगभग रात १० बजे पीने का सिलसिला ख़त्म करके खाना खाया बिकाश भाई ने अपने रूम में जाकर अपने बिगम साहिबा के साथ खाना खाया.

बागम साहिबा यानि की लक्ष्मी भाभी सारा काम निबटा कर अपने कमरे में चली गयी थी मैं खाना खा कर टी वी देखने में लीन था करीब ११:५० पर फिल्म ख़त्म हुई पर मुझे नींद नहीं आ रही थी ने चेनल बदल कर एक इंग्लिश मूवी लगाई वो भी १० मिनट्स में ख़त्म हो गयी मैं बोर होने लगा तो मैंने बिकाश भाई जान के कमरे की ओर देखा तो पाया कमरे का दरवाजा बंद था और अन्दर की लाईट चालू थी इसलिए जिज्ञासा वस मैं उनके कमरे की ओर रुख करके दरवाजे के छेद से देखा तो पाया बिकाश भाई और लक्ष्मी भाभी दोनों निर्वस्त्र पलंग पर लेते थे बिकाश भाई कोई किताब पड़ रहे थे उनका खतना किया हुआ लंड मुरझाया पड़ा था वो लक्ष्मी भाभी का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखा.-रज्जू लंड सहला कर खड़ा करो ना -पहले भी मैं सहला कर खड़ा करने की कोशिश की पर नहीं होता तो क्या करूँ -पर आज करने का बहुत मुड़ हैं रज्जू -क्या फायदा जब खड़ा ही नहीं होता हैं.

चलो रहने दो ना -अबकी बार जरुर खड़ा होगा क्योंकी यह कहानी काफी सेक्सी हैं और चुदाई से युक्त कहानी तो मुर्दों के लंड में जान डाल देती हैं तो अबकी बार जरुर खड़ा होगा मुझे भाई जान का लंड और भाभी जान की चूचियां साफ़ साफ़ नजर आरही थी भाभी जान की चुत रानी पर घने झांटे होने के कारण उनकी बुर बालों से ढकी थी वो भाई जान के लंड को सहलाने में मग्न थी भाई जान का लंड पतला था वैसे भी वे ५० के उम्र के थे तो लवडे में जान कहाँ से आये गी पर शायद यह मस्तराम की कहानी का असर था जो वो पढ़ रहे थे की उनके लंड में तनाव आने लगा. तब वो किताब को गद्दे के निचे रख कर पलंग के किनारे पैर निचे कर के बैठ गए उन्होंने भाभी जान से कुछ कहा तो लक्ष्मी भाभी भी पलंग से उठ कर जमीन पर घुटनों के बल बैठ कर भाई जान का लंड चूसने लगी भाई जान उनसे लंड चुसवाते हूए उनकी चुचियों की घुंडी मसल रहे थे.