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मेरे देवर के साथ मेरी प्यास भरी रात

गतांग से आगे …..

अचानक मेरी नींद खुल गई मुझे नीचे कुछ हलचल सी लगी। अमन कमरे में था और उसने मेरा पेटीकोट ऊपर कर दिया था। मेरी नंगी चूत को बड़ी उत्तेजना से वो देख रहा था। उसका चेहरा मेरी चूत की तरफ़ झुक गया।

उसका चेहरा वासना के मारे लाल था। मैंने भी धीरे से टांगे चौड़ी कर ली। तभी एक मीठी सी चूत में टीस उठ गई। अमन की जीभ मेरी चूत की दरार में लपलपाती सी दौड़ गई। मेरी गीली चूत को उसने चाट कर साफ़ कर दिया। मेरी जांघें कांप गई।

उसने नजरें उठा कर मेरी तरफ़ देखा और बोला,”चुदा ले मेरी जान … लण्ड कड़क हो रहा है…!”

अभी शायद वो और पीकर आया था। उसके मुख से शराब का भभका इतनी दूर से भी मेरे नथुनों में घुस गया। उसकी बात सुन कर मेरे शरीर में एक ठण्डी सी लहर दौड़ गई। उसका मुख एक बार फिर से मेरी चूत पर चिपक गया और मेरी चूत में एक वेक्यूम सा हो गया। मुझे लगा यह तो अभी मदहोश है, उसे पता ही नहीं है कि वो क्या कर रहा है। मौका है ! चुदा ही लूँ।

उसने भरपूर मेरी चूत को चूसा, मैं गुदगुदी से निहाल हो गई। बरबस ही मुख से निकल पड़ा,”अमन, यूँ मत कर, मैं तो तेरी भाभी हूँ ना…।”

मेरी बेकरारी बढ़ती जा रही थी। मेरी टांगें चुदने के लिये ऊपर होती जा रही थी। तभी उसने अपनी अंगुली मेरी चूत में घुसा दी और मेरे पास आकर मेरे स्तन उघाड़ कर चूसने लगा।

मैं उसे शरम के मारे उसे धकेल रही थी पर चुदना भी चाह रही थी। मेरी दोनों टांगें पूरी उठ चुकी थी। इसी दौरान उसने अपना मोटा लण्ड मेरे मुख में घुसा दिया।

हाय राम ! कब से मैं इसे चूसने के लिये बेकरार थी। मैंने गड़प से उसका लण्ड मुख में ले लिया और आँखें बन्द करके चूसने लगी। उसने भी अपने चूतड़ हिला कर अपने लण्ड को मुख में हिलाया।

उसके लण्ड में बहुत रस जैसा था… मेरे मुख को चिकना किये दे रहा था।    दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

“भाभी, देखो तो आपकी टांगें चुदने के लिये कैसी उठी हुई हैं … अब तो चुदा ही लो भाभी…!”

“देवर जी ना करो ! भाभी को चोदेगा … हाय नहीं, मुझे तो बहुत शरम आयेगी…!”

“पर भाभी, आपकी टांगें तो चुदने के लिये उठी जा रही है” उसने लण्ड को मेरी चूत की तरफ़ झुकाते हुये कहा।

“देवर जी, आप तो बहुत खराब है … ” मैंने तिरछी नजर का एक भरपूर वार किया।

विपिन घायल हो कर मेरे ऊपर चढ़ा जा रहा था। अपने आप को मेरे बदन पर सेट कर रहा था। मैंने मस्ती में अपनी आँखें मूंद ली थी। अन्ततः वो मेरी दोनों टांगों के मध्य फ़िट हो गया था। उसका भारी सा लण्ड मेरी चूत पर दबाव डालने लगा था।

मेरी चूत ने अपना मुँह खोल लिया और मुँह फ़ाड़ कर लण्ड के सुपाड़े को पकड़ लिया। एक मीठी सी गुदगुदी उठी और लण्ड भीतर समाता चला गया। मेरे मन को एक मीठी सी ठण्डक मिली। इतने दिनों से लण्ड की चाहत में तड़पती रही थी और अब अचानक ही जैसे मन चाही बात बन गई। उसकी शराब से भरी महक मुझे नहीं भा रही थी पर चुदना तो था ही ना। जाने साधारण अवस्था में वो मुझे चोदता या नहीं, पर नशे में टुन्न उसे भला बुरा कुछ नहीं सूझ रहा था, बस जानवर की तरह उसे चूत नजर आ रही थी, सो लण्ड घुसा घुसा कर उसे चोद रहा था।

मैं भी अपने पूर्ण मन से और तन से उसका साथ देने लगी थी। उसका लण्ड अब पूरा अन्दर तक घुस कर बहुत वासनापूर्ण उत्तेजना दे रहा था। मेरी चूत अपने आप ही ऊपर नीचे चलने लगी थी और आनन्द भोगने में लगी थी।

अचानक मेरे सीने में दर्द सा उठा, उसने मेरी चूचियाँ बहुत जोर से दबा दी थी। मेरी यौवन-कलिका लण्ड से घिस घिस कर मेरे तन को सुखमय बना रही थी। मैं उसे जोर से जकड़ कर उसकी जवानी भोग लेना चहती थी।

उसकी कमर मेरी चूत पर जोर जोर से पड़ रही थी। मेरी चूत पिटी जा रही थी। मुझे गुदगुदी ज्रोर से उठने लगी। चूत जैसे लण्ड को पूरा खा जाना चाहती हो … मेरा जिस्म अकड़ने सा लगा। मेरा तन जैसे सारी नसों को खींचने लगा… और मैं एक दम जोर से झड़ गई। मेरी चूत में लहरें सी उठने लगी। ऐसे ही हम एक साथ झड गए और आगे भी ये सिलसिला चलता रहा.

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The Author

Ruby

मै रूबी हूँ मेरी उम्र २२ साल है | मुझे सेक्सी कहानिया लिखना और पढ़ना अच्छा लगता है | अगर आप लोगो को मेरी कहानियां पसंद है तो निचे कमेंट बॉक्स में अपने अपने विचार जरुर लिखे ताकि मै आगे की कहानियो में सुधार कर सकू | थैंक यू सो मच |

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