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आज मौका भी है दस्तूर भी है

मेरा नाम प्रभात है.. उम्र 24 साल, कद 5 फुट 11 इंच, रंग गोरा और बदन कसरती है.. क्योंकि मुझे जिम जाने का शौक है। मैं पटियाला से MBA करने के बाद चंडीगढ़ में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी कर रहा हूँ। यह घटना उस समय की है जब मैं 21 साल का था और पटियाला में MBA कर रहा था।

मैं अपने मामा के घर पर रहता था, घर बहुत बड़ा था। घर में हम पाँच लोग थे, मामा मामी, उनका लड़का रुपेश उसकी वाइफ ब्यूटी, और मैं! मामा मामी नीचे के कमरे में रहते थे रुपेश और ब्यूटी भाभी और मैं ऊपर के कमरों में रहते थे।

मामा का बहुत बड़ा कपड़े का बिज़नेस था और वो बहुत बिजी रहते थे।
रुपेश और ब्यूटी दोनों नौकरी करते थे, रुपेश सेल्स में था इसलिए उसको अक्सर बाहर जाना पड़ता था।
तो ज्यादातर शाम को घर पर मैं ब्यूटी भाभी और मामी ही होते थे और टाइम पास करने के लिए हम तीनों ताश खेलते थे।

रुपेश की शादी अभी एक साल पहले हुई थी। रुपेश और ब्यूटी के प्यार की सिसकारियाँ और मस्ती की आवाजें मैं अपने कमरे में सुन कर बहुत उत्तजित हो जाता था और मुठ मार कर काम चलाता था।

ब्यूटी, उम्र 24 साल.. हाइट 5 फुट 4 इंच, साँवला सा बदन.. पर तीखे नयन-नक्स, फिगर 36-30-36 की!
ब्यूटी भाभी बहुत मस्त बिदास औरत थी, उसकी मुस्कान बहुत सुंदर थी, मेरा मन करता था कि बस उनको देखता ही रहूँ। वो भी मुझको बहुत प्यार करती थी और बहुत खयाल रखती थी।

घर में सभी लोग काफी खुले विचारों के थे। इसलिए हर तरह का हँसी मज़ाक, छेड़छाड़ चलता रहता था। ब्यूटी भाभी अक्सर मुझको छेड़ती थी- क्यों प्रभात, अभी कोई गर्लफ्रेंड बनी या नहीं? और जब मैं ‘नहीं’ कहता तो वो खिलखिला कर हँस कर बोलती- इतने हैंडसम होने का क्या फायदा… एक लड़की को नहीं फंसा सकते? और मैं उनकी हँसी को ही देखता रहता।

‘ऐसे क्या देख रहा है प्रभात?’ भाभी अपनी बड़ी-बड़ी काली काली सेक्सी आँखों से मेरी तरफ देख कर बोली।
मैं- यह आप की वजह से ही है भाभी… कोई लड़की आपकी जैसी सुंदर मिलती ही नहीं… हर कोई रुपेश भाई की तरह किस्मत वाला तो नहीं हो सकता!
भाभी- देखा मम्मी… यह प्रभात अब मक्खन लगा रहा है… कोई फायदा नहीं देवर जी, अब कुछ नहीं मिलने वाला है। दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

मैं- हाय भाभी, जब सब कुछ बिना मांगे ही मिल जाता है तो फिर मक्खन लगाने की क्या जरूरत है। आप ऐसे ही मेरा इतना ख्याल रखती हैं… ऊपर से आप की यह हँसी.. सुंदर सी मुस्कान… बस और क्या चाहिए! क्यों मामी? है या नहीं!

मामी- हां, यह बात तो है… पर एक बात और भी है प्रभात… जबसे तू इस घर में आया है, एक रौनक सी हो गई है… नहीं तो रोज़ शाम को मैं और ब्यूटी चुपचाप एक दूसरे की शक्ल देखते रहते थे… रुपेश आता है तो थका हुआ अपने कमरे में जाकर लेट जाता है।

ब्यूटी- हां मम्मी जी, यह बात तो अपने सही कही है… रोज़ इंतज़ार रहता है इस तरह बैठ कर हँसी मज़ाक करने का ताश खेलने का चाय पीने का!

यह सब सुन कर मैं कहना चाहता था कि ‘भाभी मुझे भी इंतजार रहता है… आपकी शर्ट में तनी हुई चूची और खड़े निप्पल देखने का.. स्कर्ट में चिकनी चिकनी जांघें देखने का और फिर अपने कमरे में जा कर मुठ मारने का।’ पर मुझे लगता है कि भाभी यह सब जानबूझ कर करती हैं, उसे मालूम है कि मैं क्या देख रहा हूँ और उसका क्या असर हो रहा है। क्योंकि मैंने उनको बहुत बार अपने पाजामे में बने टेन्ट को देखते हुए देखा है और अब भी कनखियों से देख रही थी और मेरी हालत पर मुस्करा रही थी।

जैसे उसने मेरे दिमाग में क्या चल रहा है पढ़ लिया था- क्या भाभी, आपको भी बस मैं ही मिलता हूँ अपनी मस्ती दिखाने के लिये? मैंने फुसफुसा कर कहा।

 

मेरा हाथ भाभी की पैंटी तक पंहुचा… पैंटी गीली थी।
भाभी उचक गई- हाय… सी… यह क्या देवर जी, आप तो एकदम अंदर ही घुस गए?

‘मैं क्या करू भाभी आपने ही अपना बॉयफ्रेंड बना कर यह सब शुरू किया है…’ मैंने अंगूठे से उसकी पैंटी के ऊपर से चूत के दाने को रगड़ दिया।

भाभी की जोर से सिसकारी निकल गई…

तभी मामी आ गई।
मैंने अपना हाथ खींच लिया और भाभी ने अपनी स्कर्ट ठीक कर ली।

‘क्या हुआ?’ वो बोली।
‘नहीं कुछ नहीं मम्मी जी, बस ऐसे ही!’ भाभी बोली।

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The Author

गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें

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