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Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

आज मौका भी है दस्तूर भी है

गतांग से आगे …..

मेरा लंड अकड़ कर लोहे की रॉड की तरह हो गया था और उसमें तेज दर्द होने लगा था।
मेरे लंड को भाभी सुलगती चूत की गर्माहट महसूस हो रही थी।

‘मैं कैसे घुसा सकता हूँ भाभी… उस्ताद भी आपके हाथ में है और मुनिया भी!’
मैंने चूत के रस में भीगे अपने लन्ड के टोपे को उसकी गीली गीली रस से भरी चूत के होटों के बीच में जोर से दबा दिया।

टोपा होंठ खोल कर अंदर घुस गया और भाभी मस्ती में लहरा उठी- अहह… हा राजा… हाँ…हां.. घुसा दे पूरा अंदर तक… उफ़ बहुत मचल रही है यार…
उसने अपनी जांघों को पूरी खोल लिया और अपने चूतड़ धकेल कर अंदर घुसने की कोशिश करने लगी।
भाभी की चूत इतनी गीली थी कि चूत से रस बह रहा था और टॉप अंदर घुसते मैंने चूत के दाने को अंगूठे से रगड़ दिया।

‘…हाय… सी.. …यूएई… ई.. मार डाला राजा… उफ़्फ़ पूरा तो घुसा दे..’ भाभी मचल रही थी, उछल रही थी।

अब मैं भी पूरे जोश में आ गया था मैंने भाभी के चूतड़ पकड़ कर आगे खींच कर टेबल के किनारे तक ले आया और एक हाथ से चूची और दूसरे से चूतड़ पकड़ कर अपना मोटा गर्म फ़ूला टॉप धीरे धीरे गीली गीली रस से भरी चूत में अंदर बाहर करने लगा।

चूत का दाना लंड से रगड़ खा रहा था… इससे भाभी को बहुत मज़ा आ रहा था और वो आँख बंद किए आनन्द के सागर में गोते लगा रही थी अपने चूतड़ हिला कर मेरा साथ दे रही थी- …हाय राजा… यह क्या साले चोदू ऐसे ही निचोड़ देगा… पूरा अंदर कर न साले चोदू… उह्ह… शई… स… ..ई… जल्दी करना राजा.. मेरा निकलने वाला है… उई.. उई..

भाभी की चूत का रस झाग बन कर लंड पर और चूत के होटों पर आ रहा था।
उसका बदन अकड़ने लगा था.. मुझे लगा कि वो झड़ने वाली है… बस मैंने पूरे जोर से एक जोरदार झटका मार दिया।

पत्थर जैसा कड़क लन्ड गीली रस से भरी चूत में सट से पूरा अंदर तक घुस गया और ठोकर मार दी।

ब्यूटी भाभी तड़फ उठी- हाय… हाय मार दे मेरे चोदू राजा… निकाल दे जान… उफ़ क्या क़िल्ला ठोक दिया राजा… उफ़… हां… गई… राजा… मैं तो.. गई… और जैसे ही मैंने दूसरा झटका मारा, भाभी अकड़ कर अपनी जांघें कसने लगी- ईईइशशश.. अहह.. ईईशश.. अआहहह..

और चूतड़ हिला हिला कर झड़ रही थी… मेरी गर्दन में अपनी बाहें लपेट कर होंट चूम रही थी- उफ़… यह… क्या कर.. डाला राजा… बहुत जोर से निकाल दिया मेरे चोदू राजा!

‘यह क्या भाभी? बस इतना ही जोश चढ़ा था… दो ही झटको में ठंडी हो गई… अब मेरा क्या होगा.. अपना तो अभी असली चुदाई के लिए मस्ती में है।’

‘हां… हां मेरे देवर राजा… हां उड़ा लो मज़ाक… क्या जोरदार मस्त चुदाई कर डाली राजा! आज तो असली जवानी की चुदाई का मज़ा आ गया! कितनी जोर से कितना सारा रस निचोड़ डाला! राजा सच में आज तक इतना ज्यादा रस इस चुदासी चूत से नहीं निकला.. देखो अब अपना लौड़ा बाहर नहीं निकलना… बस ऐसे ही चोद डालो और निकालो अपने इस मस्त घोड़े जैसे लंड का रस मेरी चूत में!’

‘क्या भाभी… मैं तो घोड़ी चुदाई की सोच रहा था… तेरे चूतड़ बहुत मस्त हैं चप चप.. धप धप चुदाई में बहुत मज़ा आयेगा।’

‘ठीक है, जैसे तेरी मर्जी!’

मैंने भाभी के होंट चूम कर एक हाथ से चूची पकड़कर और दूसरे से उसका टना रगड़ते हुए पहले धीरे-धीरे चोदना शुरू किया और जब झड़ी हुई चूत में खूब पानी भर गया और भाभी चिल्लाने लगी- हाय…फाड़ दे… रगड़ दे.. मसल डाल… निचोड़ दे.. दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l
और दुबारा झड़ने वाली थी।

मैंने धक्कों की रफ्तार तेज़ कर दी और अगले दस मिनट तक चोदता रहा और फिर हम दोनों साथ में झड़ कर लिपट गए और एक दूसरे के होंटों का रसपान करते रहे।

भाभी बहुत सन्तुष्ट थी उनकी आँखें चमक रही थी, होटों पर प्यारी सी मुस्कान थी- सच राजा, आज तो तूने बहुत खुश कर दिया.. अब हमें नीचे चलना चाहिए… अब बाकी प्यार और चूत चुदाई का खेल रात को मेरे कमरे में होगा।

इसके बाद भी मैंने अपनी भाभी की खूब चुदाई की।

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The Author

गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें

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