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बिहार से सीखी लेस्बियन सेक्स करना

गतांग से आगे …..

अगले दो तीन दिनों तक हम माला ने नजर नहीं मिला सके. लेकिन माला हमें हमेशा एक कटीली मुस्कराहट के साथ देखती. हम दोनों अब माला से अक्सर नजरें बचाने की कोशिश करते. एक दिन रात को मैं सबनम बिस्तर में थे. हम दोनों एक दूजे से लिपटे ही थे कि कमरे का दरवाजा किसी ने खटखटाया.

माला के अलावा कोई और नहीं हो सकता था. सबनम ने एक चद्दर अपने ऊपर डाली और दरवाजा खोला. माला ही थी. उसने स्पोर्ट्स ब्रा और हॉट शोर्ट पहन रखा था. उसने सबनम से कहा ” आज मैं अकेली ही हूँ. वे दो दिन के लिए टूर पर गए हैं. मुझे अकेले सोते हुए डर लग रहा है.

क्या मैं आज की रात तुम लोगों के कमरे में सो सकती हूँ? तुम दोनों जो भी करती हो मुझे उसमे कोई आपत्तिजनक नहीं लग रहा. हर किसी को अपने हिसाब से जीने की आज़ादी है. तुम आज भी रात को अपने हिसाब से सो सकती हो. ” सबनम ने उसे अन्दर आने दिया. हमारा डबल बेड काफी चौड़ा था. माला उसी पलंग पर एक तरफ लेट गई. सबनम वापस आकर मेरे साथ मेरी चद्दर में मुझसे लिपटकर सो गई.

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हम दोनों हमेशा नाईट लेम्प जलाकर ही सोती हैं. माला हम दोनों को देखने लगी. मैंने सबनम को और सबनम ने मुझे चूमना शुरू किया.थोड़ी थोड़ी देर के बाद हम दोनों उस बिस्तर पर आपस में लिपटी हुई ऊपर नीचे भी हो जाती. माला को नींद नहीं आ रही थी. उसकी जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी.

उसने अचानक हम दोनों से कहा ” अगर तुम्हे बुरा ना लगे तो तुम दोनों चद्दर निकालकर भी यह सब कर सकती हो. ना जाने क्यूँ मुझे ये देखना अच्छा लग रहा है. मेरी बात मान लो प्लीज.” मैंने सबनम की तरफ देखा. सबनम ने एक इशारा किया और हम दोनों ने चद्दर को उछाल दिया.

अब हम दोनों के अर्धनग्न जिस्म माला के सामने थे. हमने केवल ब्रा और पैंटी पहन रखी थी. हम दोनों आपस में लिपटी हुई थी. कभी मैं सबनम के उपर लेटती और कभी सबनम मुझ पर. कभी एक दूसरे के अलग अलग हिस्सों को चूमते हुए हम दोनों अपने होंठ आपस में बहुत जोर से आवाज करते हुए मिला लेते माला को यह सब देखते हुए बहुत मजा आने लगा था.

कभी कभी वो तकिये को अपनी बाहों में दबा लेती. कभी वो तकिये को अपनी दोनों टांगों में दबा लेती. सबनम ने यह देखा तो उससे रहा नहीं गया. उसने मुझे इशारा किया और वो माला के करीब चली गई. सबनम ने माला से कहा ” आप को अगर हमें इस तरह से देखने में कोई आपत्ति नहीं है तो हमें भी आपको हमारे साथ शामिल होने में आपत्ति नहीं है.”

माला का चेहरा खिल उठा. वो हम दोनों के साथ आने के लिए तैयार हो गई. सबनम ने उसकी स्पोर्ट्स ब्रा को खोल दिया. माला ने स्वयं अपने हॉट शोर्ट को उतार दिया. मैंने और सबनम ने माला को अपनी बाहों में ले लिया. सबनम और मैं माला को जगह जगह चूमने लगी. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

माला भी पूरे जोश के साथ इसमें शामिल हो गई. कुछ देर के बाद हम तीनों ने अपने सारे कपडे खोल दिए थे. अब सबनम और मैंने अपने अपने जननांग माला के जननांग से कई बार स्पर्श किये और धीरे धीरे आपस में रगड़े भी. माला को बहुत ही मजा आया.

कुछ ही देर के बाद माला भी हम दोनों की तरह एक लेस्बियन बन चुकी थी. अब जब भी माला घर में अकेली होती है तो वो या तो हम दोनों के साथ या कभी हम्मे से किसी के साथ हमबिस्तर हो जाती है. हम तीनों कि जिंदगी बहुत अच्छे से गुजर रही है.

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