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फ़ाइनल वाला प्रैक्टिकल तो हमने बाथरूम में किया

हाय दोस्तो, आज आपको मै बाथरूम में सेक्स करने में कितना मजा आता है ये बताना चाहती हु उम्मीद है मेरी ये पहली स्टोरी आपको पसंद आएगी. मेरा नाम अमीषा है.. मैं 23 साल की हूँ आज मेरा फिगर 32-30-34 का है.. बहुत से लड़के मुझ पर आज भी मरते हैं.. उस वक्त मेरा गोरा बदन.. 28-24-28 का मोहक फिगर.. उम्र 18 की थी, मेरा पूरा बदन भरा-पूरा था, मेरे काले घने बाल लेकिन छोटे बहुत से लड़के मुझ पर मरते हैं.. बाकी लड़कों के साथ मेरे पड़ोस में ब्यूटी पार्लर वाली आंटी का लड़का भी था।

मैं 12वीं क्लास में पढ़ती हूँ और मेरी आंटी का लड़का  भी मेरे साथ मेरे स्कूल में ही 12वीं क्लास में पढ़ता है, स्कूल की बहुत सी लड़कियाँ उस पर मरती हैं। मैं उसे बाबु कह कर बुलाती हूँ और हम दोनों साथ ही स्कूल जाते हैं, इस तरह लगभग सारा समय इकट्ठे ही बिताते है। हम दोनों अच्छे दोस्त थे.. इस वजह से बाबु अक्सर हमारे घर आता-जाता था।

एक दिन मेरे-स्कूल में बायो का प्रैक्टिकल चल रहा था। मैं और मेरी फ्रेण्ड तेजल साथ में ही थे। यह मेरे इम्तिहानों का फाइनल वाला प्रैक्टिकल था। मैं और तेजल अपनी ही मस्ती में थे, हम दोनों मेंढक के नीचे वाले अंग देख रहे थे। ओहह.. अब आप से क्या छुपाना.. मैं और तेजल मेंढक के पप्पू महाबाबु के दीदार कर रहे थे।
तभी तेजल ने कहा- इतने से लण्ड से क्या करता होगा मेंढक?

मेरे मुँह से निकल पड़ा- उसकी मेंढकी से जा कर पूछ.. जिसकी चुनमुनिया में ये जाता है.. वो ही बताएगी।
इस बात को उसके ब्वॉय-फ्रेण्ड ने सुन ली और वो हमारे पास आकर बोला- अमीषा तुम्हारा तो पता नहीं पर.. तेजल को सब पता है कि कैसा मज़ा आता है।

मैं यह सुन कर थोड़ी सी भौंचक्की रह गई। बाद में तेजल ने मुझे बताया कि वो उसके साथ चुदाई का मज़ा ले चुकी है और वो भी स्कूल में ही चुदी थी। मैं उसकी बात सुन कर गर्म हो चुकी थी और मेरा मन कर रहा था कि कोई आकर मेरी भी चुनमुनिया में अपना लण्ड डाल दे..

पता नहीं इस ख़याल में मेरा हाथ पता नहीं कब चुनमुनिया पर चला गया.. और मैं उसको सहलाने लगी।
उस वक्त मेरी मुन्नी पर बाल थे..

तभी तेजल ने मुझको बोला- चल तुझको ठंडी कर देती हूँ।
मैं मना किया.. लेकिन वो मानी नहीं और मुझे टॉयलेट में ले गई।
उस वक्त वहाँ कोई नहीं था.. क्योंकि स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी। बस जिनका प्रक्टिक्ले था वो ही बच्चे रुके थेl

मैं वहाँ गई.. तो उसने जाते ही मेरी पैन्टी और सलवार एक झटके में उतार दिया। मैं हैरान थी कि वो करना क्या वाली है। उसके बाद वो मेरी मुन्नी को सहलाने लगी.. कभी वो अपनी उंगली मेरी चुनमुनिया में अन्दर कर दी.. कभी बाहर..

मैं अपने होश में नहीं थी.. पर मुझे मज़ा आ रहा था।
बस 5 मिनट में ही मेरी मुन्नी ने पानी छोड़ दिया और तेजल ने अपने रूमाल से मेरी मुन्नी को साफ़ किया।
उसके बाद बोली- चुनमुनिया की सफाई नहीं करती है क्या?

मैंने कहा- रोज़ तो नहाती हूँ.. और साबुन से रोज चुनमुनिया साफ़ करती हूँ।
वो बोली- पागल बचपन वाली सफाई नहीं.. बड़ी वाली।

मैं समझी नहीं कि वो कहना क्या चाहती है।
उसने बोला- तू ऐसे ही खड़ी रह और अपनी आँखें बंद कर ले।
जैसा वो बोली.. मैंने किया.. तभी मुझे लगा कि मेरी चुनमुनिया पर कुछ चल रहा है.. लेकिन मैं देख नहीं पाई.. क्योंकि उसने मेरी आँखों पर रूमाल बाँध दिया था।

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