मेरी जिंदगी की दर्दभरी कहानी-1

गतांग से आगे ….

कितनी जल्दी ये लड़की जवानी की और बढ़ रही है अगर यही रफ़्तार रही तो 2-3 सालों में ये पूरी बोम्ब बन जायेगी. मैं उसे ऊपर से नीचे तक देखता ही रह गया. उसका बदन कितना निखर सा गया था. मैं अभी सोच ही रहा था की उसकी पिक्की की साइज़ कितनी बड़ी हो गयी होगी और उसकी केशर क्यारी बननी शुरू हुयी या नहीं मेरा मतलब है की वो अभी पिक्की ही है या बुर बन गयी है. पता नहीं उसने अभी तक अपनी पिक्की या बुर से मूतने का ही काम लिया है या कुछ और भी, अचानक मेरे साले की आवाज मेरे कानो में पड़ी.
अरे प्रेम कहाँ खो गए भई ?
मैं अपने ख़्वाबों से जैसे जागा. आइये आइये भाई साहब रास्ते में कोई परेशानी तो नहीं हुई मैंने उनका अभिवादन करते हुए पूछा. उन्होंने क्या जवाब दिया मुझे कहाँ ध्यान था मेरी आँखें तो बस अनुष्का पर से हटाने का नाम ही नहीं ले रही थी. ऐसे खूबसूरत मौके का फायदा कौन कम्बख्त नहीं उठाएगा. आप समझ ही गए होंगे मैंने आगे बढ़ते हुए अनुष्का को अपनी बाहों में भरते हुए कहा अरे अनुष्का तू तो बहुत बड़ी हो गयी है.
अपने सीने से लगाए मैंने उसकी गालों और सिर के बालों पर हाथ फिराया. उसके छोटे छोटे अमरुद मेरे सीने से दब रहे थे. उसके नाज़ुक कमसिन बदन की कुंवारी खुश्बू मेरे नथुनों में समां गयी. मुझे लगा की मेरे ख़्वाबों की मंजिल मेरे सामने खड़ी है. मेरा दिल तो कर रहा था कि उसका प्यार से एक चुम्बन ले लूँ पर स्टेशन पर उसके माता-पिता के सामने ऐसा करना कहाँ संभव था. न चाहते हुए भी मुझे उस से अलग होना पड़ा लेकिन अलग होते होते मैंने उसके गालों पर एक प्यारी सी थप्पी तो लगा ही दी. फिर मैंने उसका हाथ पकडा और हम सभी स्टेशन से बाहर अपनी कार की ओर आ गए. घर पहुँचने पर अंजली ने अपने भैय्या, भाभी और अनुष्का का गरमजोशी से स्वागत किया और फिर अनुष्का की और बढ़ते हुए कहा अरे मोना तू ? अंजली अनुष्का को मोना ही बुलाती है वो उसे अपनी बाहों में लेते हुए बोली नमस्ते बुआजी शायद कहीं सितार बजी हो, जलतरंग छिडी हो या किसी अमराई में कोयल कूकी हो इतनी मीठी और सुरीली आवाज अनुष्का के सिवा किसकी हो सकती थी.
अरे ये तो मुझसे भी एक इंच बड़ी हो गयी है. अंजली ने कहा.
हाँ लम्बी तो बहुत हो गयी है पर पढाई लिखाई में अभी भी मन नहीं लगाती सुषमा ने बुरा सा मुंह बनाते हुए हुए कहा.
अरे तुम क्यों चिंता करती हो अंजली बोली आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
उसके बूब्स नितम्ब तो कहर बरपाने वाले बन चुके हैं.
फूफाजी बाथरूम किधर है ? अनुष्का ने पूछा
आ…न.. हाँ आओ इधर है मैं उसका हाथ पकड़ कर अपने बेडरूम से लगे बाथरूम की ओर ले गया.
मैं साथ आऊँ क्या ? मैंने मुस्कुराते हुए पूछा
नहीं .. क्यों ?
क्या पेंटी नीचे नहीं करवानी ?
ओह.. हटो आप भी…. वो शर्माते हुए बाथरूम में घुस गयी और दरवाजा बंद कर लिया. और मैं बाहर खडा उसके सु सु की आवाज का इन्तजार करने लगा ….
बाहर खडा मैं अपने सपनो में खोया हुआ था. आज से कोई 4-5 साल पहले जब मैं अपनी ससुराल किसी फंक्शन में गया था तब की एक घटना मेरी आँखों में फिर से घूम गयी.
शायद उस दिन गणगोर उत्सव था. सभी ने मेहंदी लगा राखी थी. मैं संयोगवश बाथरूम से बाहर निकल कर आ रहा था कि अनुष्का दोड़ती हुई मेरी तरफ आई और बोली फूफाजी मेरी मेहंदी कैसी लग रही है ? उसने अपने दोनों मेहंदी लगे हाथ मेरे सामने फैला दिए. बहुत खूबसूरत बिलकुल तुम्हारी नाक कि तरह मैंने उसकी नाक पकड़ते हुए कहा.
अईई… अनुष्का थोडा सा चिहुंकी क्या हुआ ? मैंने पुछा
जोरों से सु सु आ रहा है अनुष्का ने आँखे बंद करते हुए कहा
तो बाथरूम चली जाओ न ?
पर मेरे दोनों हाथों में तो मेहंदी लगी है. मैं अपनी कच्छी कैसे खोलूंगी अनुष्का ने अपनी परेशानी बताई.
चलो मैं खोल देता हूँ | आप ?
हाँ मैं अ….

आप मेरी शेम शेम तो नहीं करोगे न ?

अरे नहीं बाबा अच्छा तो फिर ठीक है मैं तो ख़ुशी से झूम ही उठा. मैंने इधर उधर देखा आस पास कोई नहीं था. मेरा दिल धड़क रहा था. किसी ने देख लिया तो क्या समझेगा. कहीं अनुष्का ने अगर बाद में किसी को बता दिया तो ? पर फिर मैंने सोचा अगर कोई देख भी लेगा या अनुष्का ने कुछ बता भी दिया तो क्या हुआ मैं उसके एक बाजु को पकड़ कर बाथरूम के अन्दर ले गया. लाईट ओन करके मैंने बाथरूम का दरवाजा जानबूझकर आधा ही बंद किया.
ओफोः फूफाजी दरवाजा छोडो जल्दी करो मेरा सु सु निकल जायेगा | ओह हाँ मेरे मुंह से केवल इतना ही निकला.
आप मेरी हालत का अंदाजा लगा सकते हैं. मैं अपने पंजो के बल बैठ गया और धड़कते दिल से उसकी स्कर्ट को ऊपर उठाया और उसकी गुलाबी काछी के इलास्टिक को दोनों हाथों से पकड़ कर धीरे से नीचे सरकाया ….
आईला….. आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | मेरे जीवन का ये सबसे खूबसूरत नजारा था. उसकी नाभि के नीचे का भाग (पेडू) थोडा सा उभरा हुआ और उसके नीचे डबल रोटी के तिकोने टुकड़े कि तरह एक छोटी सी गुलाबी रंग कि पिक्की रोम विहीन. चुकंदर सी रक्तिम पिक्की के बीच का चीरा 2.5 इंच से ज्यादा बड़ा नहीं था. पिक्की के ठीक बीच में दो पतली सी भूरे रंग की खड़ी लाइन आपस में चिपकी हुई. मदन-मणि अभी बनी ही नहीं होगी या बहुत छोटी होगी. पतली पतली जांघें और दाहिनी जांघ पर एक काला तिल. हे भगवान् मैं तो बस मंत्रमुग्ध सा देखता ही रह गया. केवल कुछ पलों की इस झलक में तो बस इतना ही देखा जा सकता ता पर ये हसीं नजारा तो मेरे जीवन का सबसे कीमती और अनमोल नजारा था | अनुष्का एक झटके के साथ नीचे बैठ गयी. उसकी नाजुक गुलाबी फांके थोडी सी चोदी हुई और उसमे से कलकल करती हुई सु सु की एक पतली सी धार….. फिच्च्च्च…… सीईई… पिस्स्स्स.. करती लगभग डेढ़ या दो फ़ुट तो जरूर लम्बी होगी. कम से कम दो मिनिट तक वो सु सु करती रही. पिस्स्स्स….. का प्रियदर्शिनी संगीत मेरे कानो में गूंजता रहा. शायद पिक्की या बुर को पुस्सी इसी लिए कहा जाता है कि उसमे से पिस्स्स्स… का प्रियदर्शिनी संगीत बजता है. छुर्रर…. या फल्ल्ल्ल्ल…. की आवाज तो चूत या फिर फुद्दी से ही निकलती है. अब तक अनुष्का ने कम से कम एक लीटर सु सु तो जरूर कर लिया होगा. पता नहीं कितनी देर से वो उसे रोके हुए थी. धीरे धीरे उसके धार पतली होती गयी और अंत में उसने एक जोर की धार मारी जो थोडी सी ऊपर उठी और फिर नीचे होती हुई बंद हो गई. ऐसे लगा जैसे उसने मुझे सलामी दी हो. दो चार बूंदें तो अभी भी उसकी पिक्की के गुलाबी होंठों पर लगी रह गयी थी.

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