मेरी जिंदगी की दर्दभरी कहानी-1

गतांग से आगे ….

मेरा पप्पू तो अकड़ कर तूफ़ान मचाने लगा. मैंने इतना ज्यादा तनाव आज से पहले कभी नहीं महसूस किया था. मुझे लगा कि अगर मैंने जल्दी ही कुछ नहीं किया तो मेरा पप्पू पेंट फाड़ कर बाहर आ जायेगा या मैं पेंट में ही झड़ जाऊँगा.

अनुष्का अब उठ कर थोडा आगे आ गयी. मैंने उसकी पेंटी को फिर से पकडा और धीरे धीरे ऊपर सरकाने लगा. वो जरा सा मचली. मैंने देखा उसकी पेंटी का आगे का भाग पिक्की के छेद वाली जगह पर थोडा सा गीला हो गया है. मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसकी पिक्की पर एक चुम्बन ले लिया. वाह क्या सुगंध थी बिलकुल कच्चे नारियल और पेशाब की मिलीजुली खुशबू मैं आज तक याद करके रोमांचित हो उठता हूँ.
फूफाजी क्या करते हो ? अनुष्का कमर को थोडा सा पीछे करती हुई बोली
क्यों क्या हुआ ?
छी… छी… कोई इतनी गन्दी जगह की भी पप्पी लेता है ?
अरे… मेरी बिल्लो गन्दी कहाँ है. ये तो बहुत सुन्दर और प्यारी है.
उसने मेरे और आश्चर्य से देखा तो मैंने कहा अच्छा तो कौन सी जगह पप्पी लेते है ?
‘पप्पी तो गालों पर ली जाती है वो मासूमियत से बोली
अच्छा तो लाओ फिर गालों पर भी ले लेते है
मैं आगे बढा और उसके नरम मुलायम गुलाबी होंटों पर अपने होंठ रख दिए. नीचे पिक्की की फांके और उसके गुलाबी होंठ लगभग एक जैसे ही तो थे. मैंने धीरे धीरे उसके होंठो को चूमा और फिर अपनी जीभ उन पर फिराने लगा जैसे सावन का प्यासा बारिश की हर बूँद को पी जाना चाहता है, मैं उसके होंठों को चूसने लगा. वह पूरा साथ दे रही थी उसके लिए तो मानो ये एक खेल ही था. मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डालने की कोशिश की तो वो हँसाने लगी. मेरा दिल धड़क रहा था. हमारा यह चुम्बन कोई तीन चार मिनट तो जरूर चला होगा. फिर हम अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए अलग हो गए. अनुष्का भाग गयी. अब मेरे पास मुठ मारने के अलावा और क्या रास्ता बचा था. मैंने बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया……… और ????
दोस्तों अनुष्का और मेरा यह पहला चुम्बन था. आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

बाथरूम के बाहर खडा मैं आज घटी उस घटना के बारे में सोच ही रहा था कि अनुष्का की आवाज मेरे कानो के बिलकुल पास में गूंजी.
फूफाजी कहाँ खोये हुए हो ? अनुष्का शरारत भरी मुस्कान के साथ मुझे देख रही थी.
मैंने उसके हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए कहा क्यों आज पप्पी नहीं देनी ?
वो शर्म से लाल हो गयी और मैं रोमांच से लबालब भर गया. मैं उसके गालों पर एक चिकोटी काटी और उसे अपनी और खीचने लगा. वो कुनमुनाती हुई सी बोली हटो
मैंने उसकी ठुड्डी को ऊपर उठते हुए कहा. उसकी आंके बंद थी. मैंने धीरे से एक चुम्बन उसके गालों पर ले ही लिया.
मेरी आँखें उसकी छोटी छोटी गोलाईयों पर थी जो अब अमरुद बन रहे थे. आगे से तीखे नुकीले जैसे पेंसिल की टिप. जीन पेंट में कसे हुए उसके नितम्ब ऐसे लग रहे थे मानो दो छोटे छोटे खरबूजे हो उनके बीच की गहरी दरार साफ़ नजर आ रही थी. अनुष्का के होंठ तो इतने गुलाबी और रशीले हैं जैसे कि कोई संतरे की फांकें हों.

किसी जवान लड़की या औरत की बुर या चूत का अंदाजा

उसके होंठो को देख कर लगाया जा सकता है. इस हिसाब से तो उसके निचले होंठ भी अब क़यामत बन गए होंगे. क्या मैं कभी उनको देख पाऊंगा और… और… खैर ये तो अन्दर की नहीं बाद की बात है. अनुष्का हाल में चली गयी और मैं बाथरूम में उसकी वोही पुरानी खुशबू लेने अन्दर चला गया. मेरे नथुनों में उसके जवान होते जिस्म की खुशबू भर गयी. मैं कोई 4-5 मिनिट तक आँखें बंद किये पुरानी यादों और नए चुम्बन के ख्यालों में खोया रहा. मैं सोच रहा था इस लड़की को कैसे पटाया जाए. मुझे कुछ कुछ अंदाजा तो हो ही गया था की वो हमारे पहले चुम्बन को नहीं भूली है. मैं भी कितना गाउदी हूँ इतने दिनों तक मुझे ये ख़याल ही नहीं आया की राधा डार्लिंग अब इतनी बड़ी और रस भरी हो गयी है. आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | इतनी छोटी उम्र में ही वो इतनी गदरा जायेगी मुझे अंदाजा नहीं था. मैं शर्त लगा सकता हूँ की अगर वो अपने होंठो पर लाल रंग की लिपस्टिक लगा ले तो ऐसा लगेगा जैसे वो किसी का खून पीकर आई हो. उसके सुन्दर अमृत कलश हालांकि अभी छोटे ही है पर बिजलियाँ गिराने के लिए काफी है. अब ये नीबू की जगह अमरूदों की साइज़ के तो हो ही गए है. उसकी बिल्लोरी आँखें तो ऐसी है जैसे नशे में पुरखुमार मस्त हिरनी हो. आप अंदाजा लगा सकते है उसकी पिक्की बुर बनने के लिए तड़प रही होगी. अब तो उसने रस बनाना भी शुरू कर दिया होगा. जिस तरह से मेरे चुम्बन लेने के बाद वो शरमाई थी मुझे पूरा यकीन है की उसका किसी हम उम्र सहेली या मैडम के साथ जरूर कोई चक्कर होगा. और अगर ऐसा है तो मेरे लिए तो ये और भी ख़ुशी की बात होगी कि मेरा प्यार वो जल्दी ही स्वीकार कर लेगी.

दोस्तों कहानी जारी रहेगी अगले भाग में पढ़े अधूरी कहानी और भी ज्यादा रोमास दर्द और प्यास .. और कहानी पढ़ के कमेंट करना ना भूले |

धन्यवाद |