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Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

ऐसी बीवी पाकर मै धनवान हो गया-1

गतांग से आगे …..

मैंने भी शिल्पा को तुरंत हंसते हुए जवाब दिया – ऐसा भी क्या है शिल्पा, मेरी जान… तुम अपने लिए गोरखपुर में भी कोई टेम्पररी इंतेज़ाम कर लो… ढूँढ लो, कोई मूसल सा लण्ड, जो तुम्हारी चूत की सर्विसिंग करता रहे… तुम तो जानती हो, मुझे तो कोई परेशानी नहीं है… बस, शर्त यही है, मुझे विस्तार से सब बताना होगा… हो सके तो, एक आध फोटो भी ले लेना…

खैर, मुझे नहीं मालूम इधर शिल्पा ने रुकमनी से क्या बातें की इस बारे में।

मैं रोज लूँगी पहन कर सोता हूँ और लूँगी के नीचे चड्डी नहीं पहनता।
रोज सवेरे, रुकमनी मुझे चाय देती है और फिर झाड़ू पोंछ करती है और मैं चाय के साथ ही न्यूज़ पेपर पढ़ता हूँ।

दो तीन दिन तक, मैंने नोटीस किया की रुकमनी मेरे पैरों की तरफ फ्लोर पर बैठी हुई काफ़ी देर तक पोंछ लगाती रहती थी और कनखियों से मेरी लूँगी के भीतर देखती रहती थी.. जिसमें से, मेरे पैर पर पैर रखने से मेरा लटका हुआ लिंग उसे साफ़ साफ़ दिखता था..

मैंने सोचा, शायद बेचारी शादी से सिर्फ़ कुछ महीनों बाद ही भरी जवानी में विधवा हो गई.. इसलिए, रुकमनी को मेरा लिंग देखने मे मज़ा आता होगा..
कुछ भी कहो, विधवा हुई तो क्या अरमान थोड़ी ही ना मर जाते हैं।

इसलिए, जब चौथे दिन रुकमनी फिर काफ़ी देर तक झाड़ू के बहाने से फ्लोर पर बैठी हुई चोरी चोरी मेरा लिंग देख रही थी तो यह सोच कर की एक जवान औरत, बड़े ध्यान से मेरा लण्ड देख रही है, मेरा लटका हुआ लण्ड भी फन फ़ना कर खड़ा हो गया और उस दिन रुकमनी ने मेरा पूरा खड़ा हुआ लण्ड देखा।आप ये कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

वैसे भी, रुकमनी असल में बाई जैसी कहीं से नहीं है।
दिखने में वो सुंदर भले ही ज़्यादा ना हो, पर गोरी बहुत थी.. साथ ही साथ, वो एक कमसिन जिस्म की मालकिन थी..
उसके ससुराल वालो ने, बेटे को खा जाने का इल्ज़ाम लगा के घर से निकाल दिया और मायके में भाई भाभी ने मनहूस का दर्जा दे कर घर से भगा दिया।

इधर उधर, बर्तन भंडे करने के बाद, उसकी मुलाकात अनायास ही मेरी बीवी शिल्पा से हो गई।
मैं भी उसको अपना लण्ड दिखाता रहा.. लेकिन, उसे ये नहीं मालूम होने दिया की मैंने उसको लण्ड देखते हुए देख लिया है..

मैंने रुकमनी को जब नंगा देखा तो ठिठक कर रुक गया.. लेकिन, मेरी आहट रुकमनी ने सुन ली थी.. रुकमनी उठी और तुरंत दरवाजे पर टाँगें अपने पेटिकोट से अपने सामने चूत के हिस्से को छिपाते हुए, मेरी तरफ मुँह कर के कहा – बाबूजी, जल्दी नहाना है क्या… ??

 

रुकमनी पीछे से अभी भी पूरी नंगी थी और उसके गोरे, नंगे, गोल गोल चुत्तड़ मेरी आँखो के सामने थे..
मैंने कहा – नहीं, नहीं… पहले, तुम नहा लो… मैं बाद में नहा लूँगा…
यह कह कर, मैं वापस चला आया.. लेकिन, गोरी चिकनी रुकमनी का नंगा पिछवाड़ा देख कर, मेरा लण्ड फन फ़ना कर खड़ा हो चुका था और मेरी लूँगी का टेंट बन चुका था..
10-15 मिनट बाद, मैंने सोचा की शायद रुकमनी अब तक तो नहा कर किचन में चली गई होगी और फिर से बाथरूम की ओर गया।
बाथरूम का दरवाजा, लुड़का हुआ था और पानी गिरने की आवाज़ भी नहीं आ रही थी।
मैंने जैसे ही, दरवाजा खोला तो देखा रुकमनी अभी भी बाथरूम में ही थी।
इस बार, रुकमनी मेरी तरफ मुँह करके बिल्कुल नंगी खड़ी थी और एक छोटे तौलिए से अपने बाल सूखा रही थी..
जिस कारण, तौलिए से उसका मुँह और आँखें ढकी हुई थी और वो मुझे नहीं देख पाई..
मेरी निगाह, सीधी उसकी टाँगों के बीच जा कर टिक गई।
उसकी चूत पर, घनी घनी काली झांटों का जंगल था और उन झांटों के बीच उसकी चूत फूली हुई लग रही थी।
काली काली झांटों के बीच, उसकी चूत की दोनों होंठ साफ़ नज़र आ रहे थे।
दोनों होंठ, आपस में बिल्कुल चिपके हुए थे.. जिससे, साफ़ समझ आ रहा था की बिचारी विधवा होने से पहले, ज़्यादा नहीं चुद पाई है..कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …

The Author

Gautam

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