Mastaram.Net

Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

ऐसी बीवी पाकर मै धनवान हो गया-1

गतांग से आगे …..

जैसे ही, उसने तौलिया हटाया तो रुकमनी मुझे सामने देख कर शरमा गई।

उसने तौलिये से, तुरंत अपनी चूत ढकने की कोशिश की। लेकिन, उसके बड़े बड़े गोल गोल दूध, नंगी चिकनी जांगें और गोरे गोरे चुत्तड़ अभी भी मेरे सामने नंगे थे।
मुझे देख कर, रुकमनी शरमाती हुई बोली – बाबूजी, आज दफ़्तर क्या जल्दी जाना है… अंदर आ जाओ और नहा लो… मैं तो बस, नहा ली…

यह कह कर, रुकमनी एक हाथ से अपनी चूत के सामने छोटा सा तौलिया लगा कर और दूसरे हाथ में अपना पेटिकोट ले कर नंगी ही बाहर आ गई और किचन में चली गई। बाहर आते समय, उसकी नज़र शायद मेरी लूँगी के टेंट पर थी।
खैर, मैं बाथरूम में चला गया और दरवाजा भेड़ कर नंगा हो कर नहाने लगा।

रोज की तरह, मैं सिर्फ़ तौलिया ले कर ही गया था। तौलिया और लूँगी, मैंने दरवाजे के पल्ले पर ही टाँग दी थी।
मैंने नहाने से पहले, अपने खड़े हुए लण्ड को शांत करने के लिए बाथरूम में खड़े खड़े ही मूठ मारनी शुरू ही की थी की रुकमनी दरवाजा खोल के अंदर आ गई। रुकमनी ने अब सिर्फ़, एक पेटिकोट पहन रखा था जो उसने अपने बड़े बड़े तरबूज जैसे दूध को ढँकते हुए छाती पर बाँध रखा था।

उसने मेरे लण्ड पर नज़र जमाए हुए ही, मुझ से कहा – बाबूजी, लाओ उतरे हुए कपड़े मुझे दे दो… मैं धो धूंगी…
यह कहते हुए, उसने लूँगी दरवाजे से उतार ली.. लेकिन, इस दौरान उसकी नज़र मेरे 9 इंच लंबे और 6 इंच मोटे लिंग पर ही टिकी हुई थी.. मैं अपने इतने बड़े लिंग को, किसी तरह से भी उसकी नज़र से छुपा नहीं सकता था। उसने झुक कर, लूँगी को पानी की बाल्टी में डाला।

लूँगी पानी की बाल्टी में डालते हुए, उसकी कोहनी मेरे लिंग से रगड़ खा गई.. लेकिन, मुझे तब बहुत हैरानी हुई जब उसने लूँगी को बार बार बाल्टी में डाल कर बाहर निकाल कर निचोड़ना शुरू किया और हर बार उसकी कोहनी मेरे लण्ड से रगड़ खा रही थी क्योंकि बाथरूम में जगह बहुत कम थी.. बीच बीच में, रुकमनी नज़र घुमा कर मेरे खड़े लण्ड को देख रही थी.. ..आप ये कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

मैंने सोचा शायद, यह जानमुझ कर ऐसा कर ही है और इसने मेरा खड़ा लण्ड देख तो लिया ही है।
मैंने उसे कहा – रुकमनी, यह तुम क्या कर रही हो… मेरा तो खड़ा हो गया… अब, मैं क्या करूँ…
रुकमनी, मेरी ओर मुँह करके खड़ी हुई। मैंने देखा उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी और उसकी नज़र, मेरे खड़े लण्ड पर टिकी हुई थी।

मैंने अपने एक हाथ से उसका हाथ पकड़ा और अपने लण्ड पर रख दिया।
मैंने मन ही मन सोचा – शायद, अपना हाथ झटक देगी… लेकिन, उसने ऐसा नहीं किया..
उसने तुरंत, अपने हाथ से मेरा खड़ा मोटा लण्ड कस कर पकड़ा और फुसफुसते हुए धीरे से बोली – बाबूजी, आपका तो बहुत मोटा है…

जैसे ही, उसने मेरा लण्ड पकड़ा मुझसे रहा नहीं गया।
मैंने झट से, रुकमनी के पेटिकोट का नाडा खोल दिया और बोला – रुकमनी, इसे भी उतार दो…
उसने तुरंत अपना पेटिकोट निकाल कर, दरवाजे पर टांग दिया।
अब वो, बिल्कुल “नंगी” थी.. ..

मैंने उसके बिल्कुल नंगे जिस्म को निहारा और अपने से लिपटा लिया और उसके पूरे बदन पर हाथ फेरने लगा।
उसकी साँसें, अब बहुत तेज चल रही थीं।
मेरा खड़ा हुआ लण्ड, उसके पेट से रगड़ खा रहा था।
रुकमनी ने अभी भी मेरा लण्ड पकड़ रखा था तभी रुकमनी धीरे से बोली – बाबूजी, आप मेरे साथ क्या करना चाहते हो…

मैंने एक हाथ उसकी झांटों भरी चूत पर फेरते हुए, उसकी चूत में उगली डाली तो देखा वो बिल्कुल गीली हो चुकी थी।
रुकमनी मुझसे लिपटे हुए बोली – क्यूँ बाबूजी, नंगी औरत पहले कभी नहीं देखी क्या… ?? बीबीजी को, क्या अंधेरे में चोदते हो…मेरा लण्ड अब आपे से बाहर हो रहा था।

रुकमनी ने अब मेरे सारे शरीर पर साबुन लगाना शुरू किया और मेरे लण्ड और दोनों लटके हुए टट्टो को, अपने दोनों हाथों में ले कर दबाते हुए बोली – बाबूजी, दफ़्तर क्या ऐसे खड़े लण्ड को ले कर जाओगे… आप चाहो तो मुझे चोद कर, अपने लण्ड को ढीला कर लो…

अब क्या था, तुरंत नहा कर मैं रुकमनी को नंगे ही बेड पर ले आया और मैंने उसकी टाँगें फैला कर, अपना घोड़े जैसा लण्ड उसकी चूत में पेल दिया।
उसने भी चुदवाते हुए, अपने चुत्तड़ उछालते हुए मेरा पूरा साथ दिया।
उसके दोनों हाथ, मेरे चुत्तडों को कस कर पकड़े हुए थे.. लेकिन, जैसे ही उसने अपनी एक उंगली मेरी गाण्ड में डाली, मेरे लण्ड से पिचकारी निकल पड़ी और ढेर सारी सफेद क्रीम से उसकी चूत लबालब भर गई..

लण्ड ढीला पड़ने पर, मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से निकाल कर कपड़े से पोंछा और कपड़े पहन लिए।
रुकमनी ने भी उठ कर, अपने कपड़े पहन लिए।सच बात ये है, मुझे नहीं मालूम रुकमनी इस चुदाई में झड़ी थी या  नहीं.. लेकिन, चोदते वक़्त, उसकी चूत बहुत गीली और लसलासी थी..

हाँ!! चूत कसी भी बहुत थी.. कपड़े पहन कर, जब मैं नाश्ता करने बैठा तो शरमाते हुए मैंने कहा – रुकमनी, सॉरी, मैं अपने आप को रोक नहीं पाया…
रुकमनी शरमाते हुए बोली – अरे, सॉरी कैसा बाबूजी… मैंने ही तो आपको मेरी चूत चोदने के लिए बोला था…
मैंने कहा – रुकमनी, मुझे लगा तुम बुरा मान जाओगी…
अब रुकमनी बोली – बाबूजी, आप यहाँ अकेले हैं और बीबीजी गोरखपुर में रहती हैं… मेरे को विधवा हुए, भी 5-6 साल हो गये है… मेरे पति शादी के सिर्फ़ 4 महीने बाद ही, एक सड़क दुर्घटना में गुज़र गये थे…

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …

The Author

Gautam

Disclaimer: This site has a zero-tolerance policy against illegal pornography. All porn images are provided by 3rd parties. We take no responsibility for the content on any website which we link to, please use your won discretion while surfing the links. All content on this site is for entertainment purposes only and content, trademarks and logo are property fo their respective owner(s).

वैधानिक चेतावनी : ये साईट सिर्फ मनोरंजन के लिए है इस साईट पर सभी कहानियां काल्पनिक है | इस साईट पर प्रकाशित सभी कहानियां पाठको द्वारा भेजी गयी है | कहानियों में पाठको के व्यक्तिगत विचार हो सकते है | इन कहानियों से के संपादक अथवा प्रबंधन वर्ग से कोई भी सम्बन्ध नही है | इस वेबसाइट का उपयोग करने के लिए आपको उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए, और आप अपने छेत्राधिकार के अनुसार क़ानूनी तौर पर पूर्ण वयस्क होना चाहिए या जहा से आप इस वेबसाइट का उपयोग कर रहे है यदि आप इन आवश्यकताओ को पूरा नही करते है, तो आपको इस वेबसाइट के उपयोग की अनुमति नही है | इस वेबसाइट पर प्रस्तुत की जाने वाली किसी भी वस्तु पर हम अपने स्वामित्व होने का दावा नहीं करते है |

Terms of service | About UsPrivacy PolicyContent removal (Report Illegal Content) | Disclaimer | Parental Control