मेरी गर्लफ्रेंड की वर्जिनिटी

गतांग से आगे …. दोनों रिया के बिस्तर पे ही बैठे थे, लेकिन रिया अब फाल्गुनी के एकदम साथ आ के बैठी थी. दोनों के कूल्हों से जांघे तक सटी हुई थी. फाल्गुनी ने वापिस रिया को बोतल पकडाने की कोशिश की, लेकिन रिया ने उसकी बाजू पकड़ के अपनी गर्दन के गिर्द घुमा के सीधे उसके हाथों को पकड़ के हलके से एक घूँट ली. मूलत: फाल्गुनी की दायीं बाजू रिया के कंधे पे थी और उसी हाथ में बीयर थी, जिससे रिया ने एक घूँट भरी. फाल्गुनी ने अपनी घूँट लगाने के लिए बाजु रिया के कंधे से हटानी चाही लेकिन रिया ने उसके हाथ पकड़ पे बोला – “ऐसे ही पीयो यार” फाल्गुनी ने अपना मुंह अपने हाथ की और झुकाया और जैसे वो घूँट भर रही थी, रिया ने अपनी बाईं बांह फाल्गुनी की कमर के गिर्द लपेटी और हलके से फाल्गुनी के गाल को चूमा. फाल्गुनी को हल्का सा झटका लगा, उसे याद आया कि वो बीयर पीने नहीं, कुछ और करने बैठे थे. उसे गालों पर किस्स बिलकुल अजीब नहीं लगी लेकिन उसे मालूम था, कि असली किस्स के लिए अभी और आगे जाना है. उसने सुना था कि किस्स करने कि टेक्नीक भी होती हैं और उसे थोड़ी ख़ुशी सी भी हुई कि वो एक एक्सपर्ट से सीखेगी, हालांकि वो किसी को इस बारे में शायद कभी बता न पाए. इस बार जब फाल्गुनी ने बोतल रिया के मुंह से लगाई, उसने रिया के गालों पर हलके से चुम्बन जड़ दिया. रिया ने घूँट भरी और फाल्गुनी की और देख कर मुस्कराई. दोनों को समझ में आ गया था कि इस के आगे बातें करने कि बजाय बाकी काम होंगे क्यूंकि बातों में दोनों को थोड़ी शर्म आयेगी, लेकिन बीयर के बहाने प्रेक्टिस पूरी हो जायेगी. रिया ने अपने बांयें हाथ से फाल्गुनी की कमर को सहलाना शुरू किया. फाल्गुनी के लिए ये नया अनुभव था, किसी ने कभी इस तरह से उसे छुआ नहीं था. बीयर अब ख़त्म सी हो गयी थी. रिया ने फाल्गुनी के हाथ से बीयर ले कर फर्श पे रखी और फाल्गुनी की और मुडी. रिया के नर्म चूचे फाल्गुनी के चूचों पर आ दबे. फाल्गुनी को अनुभव था लड़कों और लड़कियों, दोनों से गले मिलने का, लेकिन ये कुछ और था. वो रिया को बताना नहीं चाहती थी के ये कितना सुखद अनुभव था. लेकिन रिया शायद समझ गयी थी क्यूंकि चूचों के टकराव के साथ रिया थोडा रुकी और फाल्गुनी की आँखों में आँखें डाली. फाल्गुनी को ऐसा लगा कि वो शर्म में डूब मरेगी, लेकिन उसे लगा कि प्रेक्टिस ही तो है, क्या फर्क पड़ता है. फाल्गुनी ने आँखें झपकी लेकिन रिया ने अपने हाथ से उसका चेहरा ऊपर उठाया और दोनों की आँखें फिर मिली. रिया ने अपना हाथ उसकी ठोडी से हटा के गले से सरकाते हुए फाल्गुनी के कानों के गिर्द फिराया और फाल्गुनी के सर के पीछे ले जा कर हलके से फाल्गुनी के सर को पकड़ा. फाल्गुनी को समझ में आ गया कि उसे भी ऐसा ही करना है सो उसने भी अपने हाथ से रिया के गाल को सहलाया, अपनी उँगलियों को रिया के चेहरे के गिर्द घुमाया और रिया के बालों पर फहराते हुए उसके सर के पीछे ले गयी. रिया ने उसकी और ऐसे देखा कि अभी भी कुछ कमी है, फाल्गुनी को समझ में आ गया और उसने अपने बाएं हाथ से रिया की कमर थाम ली. अब रिया आगे भी झुकी और उसने फाल्गुनी के चेहरे को अपनी और भी झुकाया. जैसे ही दोनों के होंठ नजदीक आये, रिया ने हलके से फाल्गुनी के होठों को अपने होठों से चूमा. सिर्फ एक हल्का सा स्पर्श. फाल्गुनी ने भी रिया के होठों को हल्का सा चूमा, लेकिन रिया के होंठ हलके से खुले थे, और गीले भी. रिया ने फाल्गुनी के ऊपर वाले होंठ को अपने होठों से बड़ी नरमी से चूमा. फाल्गुनी ने भी अपने होंठ थोड़े खोले. कुछ पलों के लिए दोनों के होंठ यूँ ही जड़े रहे कि रिया ने फाल्गुनी को पूरी तरह अपने आगोश में ले लिया. फाल्गुनी के मम्मे रिया के मम्मों से दब कर भिंचे जा रहे थे. फाल्गुनी को ये सब गलत भी लग रहा था और सही भी. रिया ने अपनी बाहें फाल्गुनी की कमर के गिर्द ज़ोरों से कस दी. फाल्गुनी के होंठ और खुले और रिया ने अपने मुंह को और खोला. फाल्गुनी अभी तक झूठे के बारे में सोच नहीं रही थी, लेकिन जैसे ही रिया की जीभ ने उसके होंठों को छुआ, वो थोडा पीछे को हुई. लेकिन रिया के हाथ ने उसके सर को पीछे से थाम रखा था और इससे पहले किफाल्गुनी कुछ सोच पाती, रिया की जीभ फाल्गुनी के मुंह के अन्दर थी. आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | फाल्गुनी ने अपने आप पर बहुत जोर लगाया और अपनी जीभ से रिया की जीभ को छुआ. रिया ने अपनी जीभ और होठों से फाल्गुनी की जीभ को चूस डाला. फाल्गुनी को लगा कि इतनी बड़ी बात लग रही थी, लेकिन है नहीं. उस ने वापिस रिया की जीभ को चूसना शुरू कर दिया. कुछ पलों तक ऐसा चलता रहा. फाल्गुनी को ये सब सपने जैसा लग रहा था, और उसे शायद समय का अंदाजा भी न लग रहा हो. कितनी बार ज़िन्दगी में होता है कि एक झिझक ऐसे खुलती है कि लगता है जैसे बहुत भारी बोझ सा उठ गया हो, आज़ादी सी मिल जाती है. ऐसा कुछ मिनटों तक चला होगा और पूरी रात चलता रहता अगर उसे अगला झटका न लगता. ये झटका उसे तब लगा जब रिया के हाथ ने फाल्गुनी की कमर से हल्का सा टी-शर्ट ऊपर उठाया और अपने ठंडे हाथ से फाल्गुनी की गरम बगल पर अपना हाथ रखा. फाल्गुनी के शरीर में सिरहन सी दौड़ने लगी. रिया बोली – “देखा, मेरे छूने से इतनी प्रॉब्लम, अगर तुम्हारा बॉय-फ्रेंड छूएगा तो क्या होगा. हे भगवान्, तुम्हारा शरीर इतना संवेदनशील है. मेरा पहले बॉय-फ्रेंड मुझे इसलिए छोड़ गया था क्यूंकि मैं उस का स्पर्श सहन नहीं कर पाती थी. वो बोलता था कि मुझे छूने से मैं ऐसे करती थी मानो मेरा बलात्कार कर रहा हो. तुम्हे इस की थोडी आदत डालनी चाहिए.”बोली – “तुम बोलो तो मैं अभी रुक जाती हूँ.” फाल्गुनी कुछ न बोली तो रिया ने फाल्गुनी को चूमना और चूसना जारी रखा. अब उसका बांया हाथ सरक कर फाल्गुनी के कूल्हे को हलके से दबा रहा था और दांया हाथ फाल्गुनी के मम्मों की और जा रहा था. जब रिया ने फाल्गुनी के मम्मे को अपने हाथ से यूँ थामा के बहुत नाजुक फूल हो जो चूने से पंखुड़ी-पंखुड़ी हो जाएगा तो फाल्गुनी यूँ कांप उठी की ज़ोरों से बुखार आया हो. उसमें अब हिम्मत नहीं रही थी कि वो आँखें खुली रखे और रिया का सामना कर पाए. रिया उसके होठों और जीभ को चूसती रही और हौले हौले फाल्गुनी के मम्मे को दबाने लगी. फिर रिया ने फाल्गुनी को अपने साथ खडा किया और दोनों एक दूसरे के आगोश में एक दूसरे को चूसने लगी. फाल्गुनी ने आँखें बंद कर रखी थी और रिया ने धीरे धीरे दबाव में जोर बढाते हुए फाल्गुनी के मम्मों और कूल्हों को कस के दबाना शुरू कर दिया. फाल्गुनी कांपती भी रही और सिस्कारियां भी भरती रही. रिया ने फाल्गुनी को बताया कि अपने हाथों से उसकी कमर सहलाती रहे. ऐसा शायद १०-१५ मिनट चला होगा. आखिर रिया को लगा के एक दिन के लिए बहुत हो गया, तो बोली – “फाल्गुनी, मुझे उम्मीद नहीं थी कि एक दिन में तुम इतना आगे आ जाओगी. तुम वाकई में अपने बॉय-फ्रेंड से बहुत प्यार करती हो और मैं प्रोमिस करती हूँ कि अपने एक्सपीरिएंस से तुम्हारी जितनी होगी, मदद करूंगी.” उसने फाल्गुनी को ये भी कहा कि मौका देख के अपने बॉय-फ्रेंड (यानी मुझे) किस्स करे. बोली कि खड़े हो कर किस्स करे, मुझसे लिपटे और अगर मुझमें सेक्स की भावना आये, तो उसे पता लगेगा जब मेरा लंड उसके पेट में चुभेगा. ये भी कहा कि जब चाहे किस्स करने की प्रेक्टिस के लिए आ जाए. इन्हें गलतियाँ कहूं तो इसका मतलब होगा कि मैं पश्चाताप मना रहा हूँ, शुक्र नहीं, लेकिन मैंने अनजाने में कुछ काम ऐसे किये कि फाल्गुनी को लगा कि वो मुझे खोने वाली है. मैंने इंग्लैंड की कंपनी में ईमेल के जरिये एक अंग्रेज लडकी से दोस्ती कर ली. आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | वो काफी मददगार थी और मैं पहले कभी भारत से बाहर गया नहीं था, तो उसकी मदद ले रहा था, क्या साथ ले जाना है, रहने-खाने का क्या करना है, वगैरा. आगे पीछे मुझे सिर्फ चूत दिखाई देती, लेकिन दिल साफ़ होता है तो कई बार इधर उधर की बातें नहीं दिखती. वैसे ही, जब रिश्ते में असुर्खशित महसूस कर रहे हो तो हर चीज़ का बेकार में अति-विश्लेषण करने लगते हो. सो, मैं उस अँगरेज़ लडकी कि तारीफ़ करता रहता फाल्गुनी के सामने और उसे लगता रहता कि मैं जाते ही उस लडकी पे लाइन मारना शुरू कर दूंगा. मुझे इस बात का बिलकुल भी भान नहीं. और हमारी आपसी- समझ भी थी कि हम शादी से पहले कुछ नहीं करेंगे, सो जब वो मेरे नजदीक आने की कोशिश करती तो मैं समझता कि वो मेरे जाने से पहले ही मुझे मिस्स कर रही है. आखिर एक बार मौका मिला जब हम दोनों अकेले थे. वो मुझसे लिपट गयी. उसके मम्मे जब मेरी छाती से लगे तो एक साल पुरानी कहानी याद आयी, जो सदियों पुरानी लग रही थी. जब उसने मेरी कमर पर हाथों को फेरा तो भी मुझे कुछ न खटका, आखिर वो जब अपने होठों से मेरे मुंह पे चुम्बन लेने लगी तो मैंने हलके हलके ऊपर ऊपर से उसके मुंह पे चुम्बन दिए और बात ख़त्म. मैं तो अपनी समझ से अपने ऊपर काबू रखने की कोशिश कर रहा था और वो ये समझ रही थी कि मुझे उसमें रूचि नहीं रही, सो हताश और निराश हो गयी. मुझे तो ये सब बातें बाद में पता चली लेकिन उस समय मैं किसी तरह से ये नहीं जताना चाहता था कि मैं उसे चुदना चाहता हूँ. कहने की ज़रुरत नहीं कि हलके से चुम्बन के समय मेरा लंड न तो खड़ा हुआ न उस के पेट में चुभा. इन सब बातों से फाल्गुनी इस निष्कर्ष पर पहुँची कि कुछ करना पड़ेगा. ऐसे में उनकी अनुभवी दोस्त रिया से ज्यादा और कौन काम आता, सो वो रिया के पास जा के रो दी. रिया बोली – “यार, परेशानी की बात तो है. मुझे मालूम है तुम्हारे बीच में क्या है. तुम्हारे बॉय-फ्रेंड को लगता है कि तुम एक दम “कोल्ड फिश” यानी कि सर्द लडकी हो और वो तुममें बिलकुल शारीरिक आकर्षण नहीं देखता.” गौर करने की बात ये है कि लडकी भले ही शादी से पहले (या कुछ लोगों के लिए, शादी के बाद भी) शारीरिक रिश्ता न रखना चाहे, ये उसे बिलकुल कबूल नहीं होता कि वो शारीरीक तौर पे आकर्षक न हो. ये सब सुन कर फाल्गुनी एकदम परेशान और मायूस हो उठी. बोली – “मैं क्या कर सकती हूँ, यार, तुम नहीं बताओगी तो कौन मेरी मदद करेगा. आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | तुम पहले ही मेरी इतनी मदद कर चुकी हो.” उसे अब भी रिया के हाथों अपना यौन शोषण रिया का बलिदान लग रहा था. रिया बोली – “तुम्हे अपनी इमेज थोडी बदलनी पड़ेगी. थोडा सा सेक्सी होना कोई बुरी बात नहीं है.” रिया ने फाल्गुनी से हेर फेर की बातें जारी रखी और अगले २-३ दिनों तक मानसिक दबाव के जरिये फाल्गुनी की सोच को सीमित कर दिया. मैं लन्दन आने की तैय्यारियों में व्यस्त था और रिया के साथ फाल्गुनी की बातें इस हद तक पहुँच चुकी थी कि वो अपने माता-पिता से भी सलाह नहीं ले सकती थी, सो फाल्गुनी रिया पर कुछ ज़रुरत से ज्यादा निर्भर हो गयी. इस के और भी हज़ारों तरीके हैं और ये तरीका शायद सबसे बचकाना और घटिया है, लेकिन रिया फाल्गुनी को २-३ दिनों तक लगातार बहलाती फुसलाती रही. आखिर रिया ने फाल्गुनी को इस बात के लिए सहमत कर लिया कि फाल्गुनी रिया और उस के बॉय-फ्रेंड, उस रंडीबाज राधेश्याम से रिश्तों के बारे में खुल के बात करे. उस ने न सिर्फ फाल्गुनी को इस बात के लिए तैयार किया बल्कि उसे अपना एहसानमंद भी बना दिया कि वो और राधेश्याम किसी और के लिए ऐसा हरगिज़ न करेंगे |