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Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

नई चूत का इन्तज़ाम

हेल्लो मेरा नाम किरन है ये सच्ची कहानी मेरी करीबी सहेली की है | मेरी सहेली मस्ताराम डॉट नेट की फैन है और बहुत बड़ी चुदक्कड़ भी है उसे अब रोज नए नए लंड का नशा हो जाता है उसने कल मुझे कॉल कर बोला किरन मै एक कहानी भेज रही हूँ मस्ताराम डॉट नेट पर प्रकाशित करवा दे ना वो मुझे जानती है की मैंने भी अपनी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर लिखी थी मै बोली ठीक है भेज तो उसने अपनी कहानी भेजी मैंने जब कहानी पढ़ी तो मेरी चुत गीली हो गयी फिर मैंने फिंगरिंग कर अपनी इच्छा शांत की अब आप लोगो को पढ़ने के लिए भेज रही हूँ | और हां आप सभी लोग कहानी पढ़ने के बाद अपने अपने विचार कमेंट के माध्यम से जरुर भेजना मेरी सहेली रिप्लाई करेगी |

2 अक्टूबर 2009 को मेरे पति के ऑफ़िस की गांधी जयन्ती की छुट्टी थी, १५ अगस्त का दिन था मेरे हस्बैंड के ऑफिस का छुट्टी था इसलिए वो घर पर ही थे और कही बाहर जाने वाले थे उन्हें १५ अगस्त के फंक्शन में जाना था और दुसरे दिन आने वाले थे क्योकि जो फंक्शन में उन्हें बुलाया गया था वो गाव में था | आप जानते ही हैं कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है, मेरे सेक्सी दिमाग ने एक दम से ही एक योजना बना डाली। मैंने अपने बॉयफ्रेंड ब्रिजेश को फोन कर दिया। मैंने श्रेया से भी कहा, पर डर के मारे उसने कुछ नहीं कहा। ब्रिजेश समय पर आ गया था। हम दोनों शाम को बाज़ार घूमने निकल पड़े। वहां ब्रिजेश ने मेरे लिये ब्रा और एक छोटी सी प्यारी पेंटी ली। मैंने भी उसके लिये एक बढ़िया सा अंडरवियर लिया। इसका सीधा सा मतलब था कि हमें रात की चुदाई में ये सब ही पहनना है। यही १५ अगस्त का गिफ्ट था ।

रात ढलते ढलते हम घर आ चुके थे। रात को जब मैं खाना बना रही थी तो ब्रिजेश अपने घर जाकर जाने कब लौट आया। श्रेया को उसके आने के बारे में पता नहीं था। श्रेया मुझसे ब्रिजेश के बारे में ही पूछ रही थी कि हम दोनों ने क्या क्या मजे किये ?

मुझे लगा कि उसकी चूत भी यह सोच सोच कर गीली हो रही थी कि मैंने लण्ड कैसे लेती हूँ, वगैरह।

मैंने उसे बताया कि यदि मैं बताऊंगी तो फिर अपने आप को रोक नहीं पाऊंगी।

“अरे वाह, ऐसा क्या किया था तुम दोनों ने ? बता ना दीदी?”

“अच्छा तू अपना काम खतम कर फिर बताऊंगी तुझे |”

हम दोनों ने फ़टाफ़ट अपना अपना काम समाप्त किया … तभी मेरे मन एक प्यारा सा ख्याल आया कि क्यों ना श्रेया मेरे साथ मिलकर रात को चुदाई का मजा ले। मैंने श्रेया को कहा,”देख बात तो बहुत लम्बी है … रात को मेरे साथ ही सो जाना … मैं पूरी कहानी बता दूंगी |”

“हाय नहीं रे दीदी, तू कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर करेगी, मुझे तो शरम आयेगी |”

“तुझे सुनना है तो बोल वरना तेरी मर्जी …”

ये सब बातें ब्रिजेश सुन रहा था, उसे लगा कि आज रात की चुदाई तो गई, पर उसे क्या पता था था कि मैं उसी के लिये तो नई चूत का इन्तज़ाम कर रही हूँ | और श्रेया के लिये एक सोलिड नया लण्ड तैयार कर रही हूँ। श्रेया ने कुछ सोच कर कहा कि मुझे पूछना पड़ेगा उन्होने हां कह दी तो मैं अभी आ जाती हूँ।

जैसे ही श्रेया जाने लगी तो मैंने उसे पीछे से आ कर उसकी कमर को पकड़ कर अपने से चिपका लिया और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ दबा दी … और उत्तेजना में मसल दी …

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“उफ़्फ़्फ़्फ़, दीदी … हाय रे …” और वो हंस पड़ी

“सॉरी, श्रेया … जल्दी आना … मैं इन्तज़ार करूंगी” और हंस कर आंख मार दी।

“दीदी … अब तो बड़ी बेशरम हो गई है तू … अभी आती हूँ …” श्रेया चली गई।

बैचेन सा ब्रिजेश बाहर आया और असमन्जस में बोला,”अक्षी, आज की चुदाई का क्या होगा …?”

“क्यों … क्या हुआ … तेरा लण्ड तो मस्त है ना … या कुछ …?”

“ओह्ह हो … तुमने श्रेया को बुलाया है ना …?”

“मेरे जानू, आज मैं तुम्हें वो मजा दूंगी कि हमेशा याद करोगे, बस अब देखते जाओ |”

ब्रिजेश के मुख पर एक प्यारी सी मुस्कुराहट तैरने लगी, शायद उसे कुछ अंदाज़ा हो गया था। खाना बनाने के बाद मैं बैठक में आ गई। ब्रिजेश नहाने चला गया … कुछ ही देर में बाथरूम से उसने आवाज दी,”अंजलि, जरा यहाँ आना …|”

मैं बाथरूम के पास गई और दरवाजा खोला। उसे देखकर मैं सन्न रह गई, वो पूरा नंगा था … उसका मोटा और भारी लण्ड कड़क होकर सीधा तना हुआ था। मेरे मन में हलचल होने लगी। दिल धड़क उठा। उसे मैंने यों पहली बार देखा था। उसका नंगा और चिकना बदन, उस पर पानी की बूंदें उसे बला का सेक्सी बना रहा था। मेरे मन में वासना का उबाल आने लगा। मेरे चुचूक अकड़ गये, चूत से पानी रिसने लगा। वो खड़े खड़े अपना लण्ड हिला रहा था, उसका लाल सुपारा गजब ढा रहा था। मैं शर्माती हुई अन्दर चली आई, उसने मुझे आँख मार दी, मेरी नजरें झुक गई और मैंने धीरे से उसका फ़ड़फ़ड़ाता हुआ लौड़ा अपने हाथों में भर लिया।

“मेरी पीठ पर साबुन लगा दे … जरा रगड़ कर …” मैं उसकी पीठ पर साबुन मलने लगी, साथ ही साथ अपना हाथ उसके कड़े चूतड़ो पर भी फ़िसलने लगा।

उसके चूतड़ों की गहराई में हाथ घुस कर उसे मजे दे रहा था। दूसरे हाथ से मैंने उसकी चौड़ी छाती पर उसके जरा से निपल को मसलने लगी। मैंने उसकी छाती पर अपना सर रख दिया और साबुन वाले हाथ नीचे लण्ड पर उतर आये। उसके लण्ड पर साबुन मलते हुये उसका जैसे मुठ ही मारने लगी। ब्रिजेश ने अपनी आंखें बन्द कर ली … और उसके गीले हाथ मेरे उन्नत वक्ष पर आ गये। कुछ ही देर में उसने मेरी चूचियाँ बाहर निकाल ली और एक दूसरे को मसला-मसली का दौर चल पड़ा। उसका पूरा शरीर साबुन के झाग से ढक गया था। जाने कब हम दोनों के होंठ आपस में जुड़ गये … सच में बहुत आनन्द आ रहा था … स्वर्ग जैसा आनन्द … ।

लण्ड की घिसाई से वो बहुत आनन्दित हो रहा था। तभी उसने मुझे खींच कर शॉवर के नीचे कर लिया और पानी बरसा दिया। मेरे कपड़े भीग उठे, मेरे चिकने स्तन पानी से भीगे हुये थे। एकदम फ़ूल कर कड़े हो गये थे। मेरे गीले बदन को भोगने की नजर से देखने लगा … मैं समझ गई थी कि अब उसका लण्ड मुझे चोदने के लिये तैयार है। मेरे हाथ उसके लण्ड पर तेजी से मुठ मार रहे थे। उसने मेरे रहे सहे कपड़े भी उतार दिये। मेरी आंखों में नशा सा छा गया। वो मुझे बेहद सेक्सी लगने लगा था। चुदने को चूत लपलपाने लगी थी। मुझे एक झुरझुरी सी आई और मैं उससे एक दम चिपक गई। हमारे अधर एक दूसरे को पी रहे थे …

चूसने की आवाज यूं आ रही थी मानो आम चूस रहे हों … क्या रस भरा महौल था …

मेरा अंग अंग मसले जाने को बेताब हो रहा था। उसका लण्ड अब भी मेरी मुठ्ठी में था। उसने मेरे निपल को दांतो से काट सा लिया … मेरी चूत पर जैसे आग में घी के जैसा असर होने लगा। चूत में आग सी लग गई,”बेबीऽऽऽऽ अह्ह्ह् … मार डाला रे तूने तो …”

“मेरी रानी … तेरे अंग बहुत मद भरे हैं … आह्ह्ह्ह”

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मुझसे रहा नहीं जा रहा था। इसका सुन्दर, मोहक लण्ड मेरे दिल को पिघला रहा था। अनजाने में मैं नीचे बैठती गई और अब उसका मनमोहना सुन्दर लण्ड मेरे होंठो के पास था। मैंने उसका लाल तड़पता हुआ सुपारा अपने मुख में भर लिया और चूसने और काटने लगी।

“हाय रे … मेरा लण्ड काट कर खा मत जाना … श्स्स्स्स्स्स्स् … निकल जायेगा रानी” उसकी सिसकी फ़ूट पड़ी। मैं अब जल्दी जल्दी उसके लण्ड को अपने मुख में अन्दर बाहर करने लगी, उसका लण्ड बुरी तरह से फ़ड़फ़ड़ा रहा था। वो भी झुक कर मेरे स्तनों को मरोड़ने और खींचने लगा। उसने मुझे अब प्यार से उठाया और खड़ा कर दिया। उसने मेरे मस्तक पर चूमा, फिर मेरे होंठो को, मेरे कंधे पर, फिर मेरे उरोज पर, नाभी पर … हाय राम …

वो तो मेरी चूत तक पहुंच गया। उसके होंठ मेरी गीली और चिकनी चूत के लबों में पहुंच कर उस रस का स्वाद लेने लगे … मेरी चूत की चिकनाई में वासना से भरे बुलबुले भी उभर आये थे, जैसे चूत में रस का मन्थन हो रहा हो। मेरा वो पहला प्यार था, उसके लिये मैं सब कुछ कर सकती थी … मेरे मन भी चूत चुसवाने को मचल रहा था। दिल को दिल से रहत होती है … वो मेरी अदायें समझता था। मेरी टांग अपने आप एक तरफ़ उठ गई और मेरी चूत का मुख खुल गया उसकी जीभ मेरी चूत के अन्दर तक चाट रही थी। दाना फूल कर लाल हो गया था। बार बार होंठो से चुसने के कारण मेरे तन की आग भड़कने लगी थी।

मैंने उससे कहा,”ब्रिजेश मुझे तेरा लण्ड चूसना है … बड़ा ही मस्त है रे …”

वो मुस्करा उठा और वहीं बाथरूम में सीधा लेट गया। वो जब मेरी चूत चूसता है तो मेरा मन करता है कि मैं अलादीन का चिराग बन जाऊँ और जो वो मांगे दे दूं।

मैं ब्रिजेश पर उल्टा लेट गई। हम अब 69 पोजीशन में थे। वो मेरी चूत के रस का स्वाद ले रहा था और मैं उसके मोटे और सुन्दर लण्ड को बड़े प्यार से चूस रही थी, कभी कभी काट भी लेती थी और फिर उसके सुपारे के छल्ले को कस कर और खींच कर चूस लेती थी। मेरे अंगों में तरावट सी आने लगी … जिस्म कंपकंपाने सा लगा … एक मीठी सी लहर उठने लगी …

कहानी जारी है … आगे की कहानी पढ़ने के लिए निचे दिए पेज नंबर पर क्लिक करें ….

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