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Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

नई चूत का इन्तज़ाम

गतांग से आगे ….

पर आखिर में मेरा पानी छूट ही गया। मैंने जल्दी से उठ कर अपनी चूत ब्रिजेश के मुख से सटा दी … उसने मेरे रस का स्वाद लिया और जोर से चूत को चूसने लगा। मैं चूत चुसाने के बाद उल्टी हो कर उसके खड़े लण्ड का वीर्य निकालने के लिए उसे चूसने लगी। श्रेया की जीभ भी लपालपा उठी, मैंने श्रेया को पूरा मौका दिया चूसने का। ब्रिजेश कुछ ही देर में श्रेया के मुख में ही झड़ गया। श्रेया को थोड़ा अजीब लगा पर मैंने उसे पूरा पी जाने कहा। उसने पूरा लण्ड साफ़ किया और उठ कर बाहर चली गई। मैंने ब्रिजेश से कहा कि मैं अभी मुँह साफ़ करके आती हूँ …

उसकी आंखों से मैंने अपनी चुन्नी खोल दी। ब्रिजेश मन्द-मन्द मुस्करा रहा था।

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मैं बाहर आई तो श्रेया का चिकना सुघड़ शरीर देख कर दंग रह गई। मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसकी चूत में अंगुली डाल दी। वो हंस पड़ी। फिर उसे हटते ही मैंने अपना मुख भी साफ़ कर लिया। श्रेया सोफ़े पर चादर डाल कर सो गई। मैं भी भीतर जाकर ब्रिजेश का लण्ड पकड़ कर सो गई।

सवेरे उठते ही मुझे झटका लगा। ब्रिजेश मेरे साथ नहीं था। मैंने धीरे से उठ कर परदे से झांका तो वो नंगा खड़ा था और श्रेया के नंगे बदन को देख कर मुठ मार रहा था। श्रेया की चादर नीचे गिर गई थी। मैंने धीरे से जाकर ब्रिजेश का हाथ लण्ड से छुड़ाया और बताया कि वो रात उससे चुद चुकी है। उसे कहा कि अब देर किस बात की है … अब खुल कर चोद डालो …

ब्रिजेश ने मेरी तरफ़ देखा और धीरे से उसके पास आ गया और उसकी चूत पर अपना लण्ड लगा दिया। थोड़ा सा जोर लगाते ही वो अन्दर उतर गया। आप यह हॉट हिंदी सेक्सी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

श्रेया जाग गई … और ब्रिजेश को अपने ऊपर पा कर जैसे धन्य हो गई। उसके हाथ ब्रिजेश की कमर पर लिपट गये, दोनों एक होने के लिये मचल पड़े। उसकी नजर ज्योंही मुझ पर पड़ी … वो सब कुछ समझ गई। मुझे आंखों ही आंखों में धन्यवाद कहा और अपनी आंखें बंद कर ली … श्रेया की शरम अब जा चुकी थी … उसने अपनी टांगें ऊपर कर ली और ब्रिजेश का एक नया सफ़र आरम्भ हो गया।

मैंने ईश्वर को अपनी इस सफ़लता पर धन्यवाद किया। और रोज़मर्रा के कार्य पर लग गई। आज तो चुदाई का आगाज था … आगे जो चुदाई होनी थी, उसे सोच सोच कर श्रेया बेहाल हुई जा रही थी।

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