चुदते चुदते प्यार हो गया -2

चुदते चुदते प्यार हो गया -1

दोस्तो अब तक की कहानी में आप ने देखा कि कैसे मैं ने अपने शारारिक तौर पर कमजोर पति की मदद से एक अजनबी के साथ फोन सेक्स किया और झड़ गयी. अब आगे का किस्सा सुनिए
उस रात फ़ोन सेक्स करते हुए मेरी जो चुदाई हुई तो मुझे सारी रात बड़ी मस्त नींद आयी. सुबह आंख खुलते ही उस शख्स राज का खयाल आया और उस को सोच कर ही मेरे दिल की धड़कने तेज़ हो गयी. उसकी नशीली आवाज़ सुनने को मन बेचैन होने लगा. नाश्ता करने के बाद जमील आफिस और बच्चे स्कूल चले गए. मैंने नहा धो कर अलमारी में से उस फ़ोन को निकाला जो जमील सिर्फ ये सब करने के लिए इस्तिमाल करते थे वर्ना फ़ोन बन्द गई पड़ा रहता. मैने भी आज तक जमील के पीछे उसे हाथ तक नही लगाया था मगर आज तो मेरा मन और तन दोनों मेरे काबू में नही थे.

मैंने नहाने के बाद अब तक कपड़े नही पहने थे नंगी ही फ़ोन ले कर रज़ाई में घुस गई. कॉल किया तो किसी ने नही उठाया दूसरी बार ट्राई किया. अब के दो तीन रिंग के बाद उसने फ़ोन उठाया..हालो नींद में डूबी उस की आवाज़ सुन कर मेरे दिल की धड़कने तेज़ हो गयी.
सो रहे थे आप? सॉरी हम ने आप को उठा दीया?
ओह्ह नही नही हम सो नही रहे थे आंखे बंद करके आप को सीने से लगाये लेटे हुए थे.
अच्छा जी.. रात भर से
नही अभी सुबह सुबह से ही, रात भर तो फुरसत किसे थी. न आप को न हमे.
क्यों भला. मैं उस की बात का रुख समझ गयी थी मगर मेरा मन उस की खुली खुली कमोतेजित बातें सुनने को मचल रहा था.

सारी रात तो न हमे आप को चोदने से फुरसत थी न आप को चुदवाने से.
स स स  मै ने होले से सिसकी भरी। मेरा हाथ अपनी नंगी चुत पर चला गया.
जब हम ने अपना लन्ड आपकी चुत में डाला था तब भी आप ने ऐसी ही सिसकारी भरी थी.
आआह मै जल्दी जल्दी अपनी चुत सहलाने लगी और पूछा आप का कैसा है.
क्या कैसा है?
वही जो आप ने मेरी उस मे।
देखना चाहोगी उस को?
हाँ।।मैं ने बेताबी से कहा..
एक शर्त पर
क्या?
पहले साफ साफ बोलो मैं ने क्या डाला था आप की उस मे और क्या किया था.

मैने एक गहरी सांस ली अपनी टांगें फैला ली और ज़ोर ज़ोर से अपनी चुत को अपनी हथेली से सव्हलने लगी. मेरी चुत में अपना लन्ड डाल कर मुझे चोद दिया था आप ने! इतना कहते ही में झटके खाने लगी मै झड़ रही थी. आआह आआह शायद वो भी झड़ रहा था और बोल रंडी और बोल 
आआहआआह तू ने मेरी चुत को पेल पेल कर उस का भोसड़ा बना दिया था. भोसड़ी के आये छिनाल तू खुद ही तो टांगें चौड़ी करके नीचे आयी थी. मेरे लाल लाल लन्ड को गटकने रंडी आआआआआआ तू ने भड़वे सारा माल मेरी चुत में उंडेल दिया अपने बच्चे की माँ बना दिया मझे।

में ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी और झड़े जा रही थी.
हम दोनों झड़ते गए बड़ी देर बाद दोनों शांत हुए. जब इस फ़ोन चुदाई में इतना मज़ा था तो असली चुदाई में क्या हाल होगा. थोड़ी देर बाद उठ कर मैं में कंप्यूटर खोल कर मैसेंजर चालू किया. उसने फ़ोटो भेजी थी फ़ोटो देख कर मेरा दिल ज़ोरों से धडकने लगा वो एक शानदार मर्द था, मज़बूत बदन और भारी भरकम वजूद से ऊर्जा टपकती हुए महसूस होती थी 45 के आस पास उम्र थी उसकी. गोरा खूबसूरत, बड़े बड़े घने देबाल. उस की डैशिंग पेर्सनॉल्टी देख कर मैं मस्ती से भर गई.

दोपहर बाद बच्चों के ट्यूशन पर जाने के बाद मैंने उस को कॉल किया तो जैसे वो भी मेरी काल के लिए बेताब था छुटते ही पूछा तस्वीर कैसी लगी हमारी जान को बोहत हैंडसम हैं आप । हीरो लगते हैं हमे नही पता था आप की आवाज़ की तरह आप की शख्सियत भी दिलकश है. वह हंसा और बोला आवाज़ तो आप की भी बोहत प्यारी है शक्ल कब दिखाएंगी नही में इंटरनेट पर मेरी तस्वीर शेयर करने का रिस्क नही ले सकती। तो आप कहो हम मिलने आ जाये आप से। 4 घण्टे का सफर ही तो है.

दूसरे दिन वो आ गया वह मुझे देखने के लिए और में उस से मिलने के लिए पागल हो रहे थे
एक थोड़े सुनसान इलाके में वो कार में इंतेज़ार कर रहा था । मै ऑटो से थोड़ी दूरी पर उतर गई और उस की कार की तरफ बढ़ी मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था । मै ने पिंक कलर का शलवार सूट पहने था और खूब अच्छे से तैयार हो कर आई थी.
कार के करीब पोहची तो कार का ब्लैक शीश खुला उस का हसीन चेहरा सामने था  आंखों पर धूप का चश्मा लगाया हुआ था मुझे देख कर वो देखता ही रह गया. उसने जाने क्यों मुझे पीछे की सीट पर बैठने का इशारा किया में इतनी नर्वस हो रही थी के बिना कुछ कहे पिछला दरवाज़ा खोल कर बैठ गयी. निहायत शानदार बड़ी सी गाड़ी थी अंदर का माहौल भी ख़्वाबनाक था, परफ्यूम की भीनी भीनी खुशबू और ऐ सी की ठंडी फ़िज़ा. मेरे बैठते ही उसने कार आगे बढा दी.

मै पीछे की सीट पर सिमटी और घबराई हुई सी बैठी थी रिलैक्स वो बोला आप तो अपनी आवाज़ से ज़्यादा हसीन निकली. उसने थोड़ा आगे ले जाकर कार को एक कच्चे रास्ते पर मोड़ कर यूँ खड़ा कर दिया कि मेन रोड से गुजरती हुई एक्का दुक्का गाड़ियों की नज़र हम पर नही पड़ती थी. वो ड्राइविंग सीट से उतर कर पीछे की सीट पर मेरे बराबर आ कर बैठ गया. उसको इतना करीब पाकर एक तरफ शर्म से मेरा बुरा हाल हो रहा था तो दूसरी तरफ उस के भरपूर वजूद को इतना पास महसूस कर के मेरे बदन में और खास तौर से मेरी जांघों में खून ज़ोरों से दौड़ रहा था. उसने अपने मज़बूत और बड़े बड़े हाथों से मेरे नाज़ुक हाथों को थामा तो मेरे बदन में ज़बरदस्त करंट लगा पहली बार किसी पराये मर्द ने इस तरह छुआ था मुझे.

फिर उस ने मुझे खुद से करीब किया और मेरी पेशानी को प्यार से चूमा फिर मेरे होंठों से अपने होंठ लगा दिए. उसके होठों से मेरे होंठ मिलते ही मेरे सारे जिस्म में जैसे च्योटियाँ सी रेंग गयी, फिर उस ने मेरे सर को अपने सीने से टिका दिया उस की टी शर्ट के दो बटन खुले थे जिसमें से उस की छाती के घने काले बाल झांक रहे थे. उसकी छाती में अपना मुंह धसा कर मैं ने अपने आप को उस के बाज़ुओं में ढीला छोड़ दिया शर्म से मेरी आँखें मुंदी हुई थी मगर उसके वजूद से उठती हुई. मर्दाना खुशबू मुझे पागल किये दे रही थी वो अपने मज़बूत हाथों से मेरी पीठ और बाल सहला रहा था.

अचानक उस ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लन्ड पर रख दिया कॉटन की मुलायम पतलून में उस के तने हुए लन्ड पर हाथ पडते ही मुझे ज़ोर का झटका लगा. मैंने घबराकर अपना हाथ खींच लिया मगर इस एक लम्हे में मैं उस के लन्ड की साइज और मोटाई को महसूस कर चुकी थी उस ने अब मेरे कुर्ते पर से मेरी चुचियों पर हाथ फेरा तो में ने तडप कर उस के लन्ड को थाम लिया और उस को कपड़े पर से ही अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया। थोड़ी देर तक इसी तरह चूमा चाटी चलती रही बड़ी मुश्किल से हम ने अपने अपने जज़्बातों  को काबू किया. घर वापस आने के बाद भी सारा दिन मैं उस के खयालो से पीछा नही छुड़ा सकी।

आज पहली बार किसी गैर मर्द ने मेरे बदन को छुआ था. अब मुझे किसी हाल करार नही था जी चाहता था वो कहीं से आ जाये और मुझे अपनी बाहों में दबाकर चूर चूर कर दे। कहते है जब बात बनने को आती है तो बनती चली जाती है उसी शाम जमील ने बताया कि वो आफिस के काम सेअगले हफ्ते सिंगापुर जा रहे है चार दिन का टूर था ।

दूसरे दिन जमील के जाने के बाद मैने राज को कॉल किया यह खबर सुन कर वो बे हद खुश हो गया। उस ने प्लान किया कि वो दो दिन के लिए मेरे शहर में आकर होटल में रुकेगा.
जमील के जाने के दूसरे दिन बच्चों को स्कूल भेजने के बाद मै बाथरूम में घुस गई सबसे पहले चूत को शेव किया फिर खुशबूदार झाग वाले साबुन से बदन को रगड़ रगड़ कर नहाई. फिर डार्क पिंक कलर की चड्डी और चोली निकली जो मै ने अभी दो दिन पहले ही खास आज के लिए खरीदा था। फिर हल्के पिंक रंग का सूट निकाला। कपड़े पहन कर और हल्का सा मेकअप करके आईने में अपने आप को देखा तो मुझे अपने आप पर ही प्यार आने लगा फिर राज की क्या हालत होगी दिल मे सोचने लगी।

यह सब करते हुए मेरे मन मे हल्का सा भी विचार आखरी हद को पार करने का नही था यानी चुदाई का बिल्कुल भी इरादा नही था कुछ भी हो मै जमील के साथ बे वफाई का सोच भी नही सकती थी मैं तो बस उन लम्हो को एक बार जी भर के जीना चाहती थी. जो कार में राज के साथ पहली मुलाकात में जिये थे। उसकी विशाल छाती में सर धसा कर उस के बदन की गर्मी को फील करना चाहती थी और राज की उस दिन की एक ख्वाहिश भी पूरी करनी थी जो उस ने मेरे कानों मे उस दिन की थी मुझे अपनी बाहों की कैद से आज़ाद करने से पहले उस ने मेरे कान में ऐसी बात की थी कि शर्म और नशे से मेरी आँखें मूंद गयी थी. उसने कहा था हम कल आपका अपने रूम पर इंतेज़ार करेगे अरे अरे घबराइये नही. जब तक आप खुद नही कहेगी हम आप को नही चोदेगे मगर एक बार आपकी गुलाबी चुत के दीदार करवा दीजिये. पलीज़….

सिर्फ हम उस को निहारेगे आप की इजाज़त के बिना उस को छुवेगे तक नही।
और आज मैं अपनी चुत को दुल्हन की तरह सजा के दीदार करवाने रिक्शे में बैठ कर उस की होटल जा रही थी. होटल में चुत का दीदार करने के बाद क्या उस ने मुझे चोदे बिना जाने दिया। क्या उस ने अपने लन्ड का दीदार मुझे करवाया। क्या उस के लन्ड को देख कर मेरी चुत चुदड गयी ये जानने के लिए इस कहानी के अगले भाग का इंतज़ार कीजिये और अबतक की कहानी कैसी लगी मुझे बताईये।