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चुदवाते चुदवाते मै चुदाई की मशीन बन गयी -5

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

चुद्वाते चुद्वाते मै चुदाई की मशीन बन गयी -4

अब्बू आपने आज बहुत पी रखी है! आप आज अपने कंट्रोल में नहीं हो! आप यहीं रेस्ट करो | मैं दूसरे कमरे में जाती हूँ। मैंने दरवाजे की तरफ़ अपने कदम बढ़ाये ही थे कि उनकी कड़कती आवाज से मेरे कदम वहीं रुक गये। खबरदार अगर एक भी कदम आगे बढ़ाया तो! जैसा कहता हूँ वैसा कर नहीं तो आज मैं तेरा रेप करने से भी नहीं चूकुँगा।

अब्बू क्या हो गया आज आपको! हम दोनों का रिश्ता बदनाम हो जायेगा। अगर किसी को पता चल गया तो लोग क्या कहेंगे। तू उसकी चिंता मत कर! किसी को पता ही नहीं चलेगा। यहाँ अपने वतन से दूर हमें जानने वाला है ही कौन। और तू रिश्तों की दुहाई मत दे। एक आदमी और एक औरत में बस एक ही रिश्ता हो सकता है और वो है हवस का रिश्ता। जब तक यहाँ रहेंगे | हम दोनों साथ रहेंगे। अपने घर जा कर तू भले ही वापस मुझसे पर्दा कर लेना।

ऐसा कैसे हो सकता है? हम दोनों के बीच एक बार जिस्म का रिश्ता हो जाने के बाद आप क्या सोचते हैं कि कभी वापस नॉर्मल हो सकेगा?

तू जब तक यहाँ है, भूल जा कि तो मेरे बेटे की बीवी है। भूल जा कि मैं तेरा ससुर हूँ। तू बस मेरी सेक्रेटरी है। अगर तेरा निकाह मेरे बेटे से नहीं हुआ होता तो हम यहाँ क्या करते ?

फिर तो बात दूसरी ही होती! मैंने कहा। तू समझ कि अब भी वही बात है। तू केवल मेरी सेक्रेटरी है। देखा नहीं…. सारी सेक्रेटरिज़ अपने बॉस के साथ कैसे खुल्लम खुल्ला सेक्स कर रही थीं।

लेकिन मैं अभी भी झिझक नहीं छोड़ पा रही थी। ताहिर अज़ीज़ खान जी उठे और कमरे में बने मिनी बार से व्हिस्की की एक बोतल लेकर उन्होंने एक ग्लास में डाली और मेरे होंठों से लगा दी। ये ले… तेरी झिझक इससे कम होगी और नशे में तुझे मज़ा भी ज्यादा आयेगा। मेरी धड़कनें तेज़ चल रही थीं और इस हालात में मुझे इसकी सख्त जरूरत थी। मैंने दो घूँट में ही वो तगड़ा पैग खाली कर दिया। वो कमरे में कुर्सी-टेबल खिसका कर जगह बनाने लगे। इतने में मैंने वो बोतल ही उठा ली और दो-तीन घूँट व्हिस्की के सिप किये। मैं चाहती थी कि मुझे इतना नशा हो जाये कि मैं खुलकर बिना किसी झिझक के उनका साथ दे सकूँ। ससुर जी ने फिर मुझे खींच कर बीच में खड़ा कर दिया। अंदर कुछ नहीं पहना होने के कारण मेरे बूब्स बुरी तरह इधर-उधर हिल रहे थे। फिर वो मेरे हाथों को अपने हाथ में थाम कर थिरकने लगे। मैं भी एक हाथ में बोतल पकड़े धीरे-धीरे उनका साथ देती हुई डाँस करने लगी।

कुछ ही देर में मुझ पर नशा हावी होने लगा और मैं मूड में आ गयी और पूरे जोश के साथ मैं म्युज़िक पर थिरकने लगी। ताहिर अज़ीज़ खान जी ने एक झटके में अपने जिस्म पर पहने गाऊन को अलग किया। वो अंदर कुछ भी नहीं पहने हुए थे। वो पूरी तरह नंगे हो गये थे। अपने गाऊन को वहीं छोड़ कर वो वापस जाकर बेड पर बैठ गये। अब मैंने भी झिझक छोड़ कर खुद को समय के हवाले कर दिया और कमरे के बीच में थिरकने लगी।

मेरी ओर झुक कर अपनी छातियों को हिलाओ, ताहिर अज़ीज़ खान जी ने कहा। मैंने वैसा ही किया। उन्होंने अब मुझे टॉप उतारने के लिये इशारा किया। उनके सामने नंगी होने का ये पहला मौका था। मैं झिझकते हुए अपने हाथों से अपनी टॉप को पकड़ कर ऊँचा करने लगी। जैसे-जैसे टॉप ऊँचा होता जा रहा था, मेरे बेशकीमती खजाने के दोनों रत्न बाहर निकलते जा रहे थे।

मैंने अपनी टॉप को निकाल कर अपने हाथों से पकड़ कर एक बार सिर के ऊपर हवा में घुमाया और फिर उसे ताहिर अज़ीज़ खान जी की तरफ़ फ़ेंक दिया। टॉप सीधा जा कर उनकी गोद में गिरा। ताहिर अज़ीज़ खान जी उसे उठा कर कुछ देर तक सूँघते और चूमते रहे। मैं टॉपलेस हालत में थिरक रही थी और बीच-बीच में बोतल से व्हिस्की सिप कर रही थी।

थोड़ी-थोड़ी देर में अपने बूब्स को एक झटका देती तो दोनों बूब्स उछल उठते। मैं डाँस करते-करते ताहिर अज़ीज़ खान जी के पास पहुँची और उनके होंठों के सामने अपने दोनों बूब्स को थिरकाने लगी। मैंने अपने एक मम्मे को अपने हाथों से थाम कर ऊँचा किया। फिर निप्पल को अपनी अँगुलियों से खींच कर उनके होंठों के पास ले गयी।

जैसे ही ताहिर अज़ीज़ खान जी ने अपने होंठ खोल कर मेरे बूब्स पर झपटा मारा तो मैं किसी मछली की तरह उनकी पकड़ से निकल गयी। इतने दिनों की आस आज पूरी हो रही थी। ताहिर अज़ीज़ खान जी को तरसाने में खूब मज़ा आ रहा था। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

ताहिर अज़ीज़ खान जी का लंड उनकी घनी झाँटों के बीच खड़ा हुआ झटके खा रहा था। मैंने उसे एक बार अपनी मुठ्ठी में लेकर उसे ऊपर से नीचे तक सहलाया और फिर छोड़ दिया। मेरी इस हरकत से उनके लंड के ऊपर एक बूँद प्री-कम चमकने लगा। ताहिर अज़ीज़ खान जी ने अपने सूखते हुए होंठों पर अपनी जीभ फ़िरा कर मुझे स्कर्ट उतारने के लिये इशारा किया। मैंने स्कर्ट के इलास्टिक में अपनी अँगुलियाँ डाल कर उनकी तरफ़ देखा। उनकी आँखें मेरी स्कर्ट से चिपकी हुई थीं। वो उतावले हुए जा रहे थे।

मैंने उन्हें कुछ और परेशान करने का सोचा। मैंने अपनी स्कर्ट थोड़ी सी ही खिसकायी जिससे मेरी चूत अभी भी नंगी नहीं हुई थी। थिरकते हुए मैं फिर उन्हें चिढ़ाने के लिये उनके नज़दीक गयी और अपनी एक टाँग उठा कर अपना पैर उनकी गोद में रख दिया और उनके खड़े लंड को अपने सैंडल के तलुवे और ऐड़ियों से सहलाने लगी।

उनके लंड का प्री-कम छलक कर मेरे पैरों के नाखुनों और सैंडल की पट्टियों पर गिर पड़ा। फिर मैं थिरकते हुए उनसे दूर हटी और मैंने उनकी तरफ़ अपनी पीठ कर ली और अपनी स्कर्ट को धीरे-धीरे नीचे कर दिया। वो मेरी मोटी-मोटी गाँड को ललचायी नजरों से देख रहे थे। मैं अब खड़े होकर अपने जिस्म को म्युज़िक पर थिरकाने लगी। कुछ देर बाद मैं धीरे-धीरे सामने की ओर मुड़ी। मेरी नंगी चूत अब उनके सामने थी। वो एक टक मेरी सिलकी चिकनी चूत को निहार रहे थे |

अब तो उन्हें अपने ऊपर कंट्रोल करना मुश्किल हो गया। वो उठे और मुझे बाँहों में लेकर मेरे साथ कमर हिलाने लगे। वो मेरे पीछे से सटे हुए थे। हमारे नंगे जिस्म एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे। मेरी चूत गीली हो गयी थी।

उनका लंड मेरे दोनों नितंबों के बीच जगह तलाश कर रहा था। उनके हाथ मेरे जिस्म पर फ़िसल रहे थे। सामने आदमकद आईने में मैंने हम दोनों के अक्स को एक दूसरे से गुंथे हुए देखा तो उत्तेजना और बढ़ गयी। उन्होंने मुझे आईने में देखते हुए देखा तो मुस्कुरा कर मेरी दोनों बगलों में अपने हाथ डाल कर सामने मेरे मम्मों को सहलाने लगे। मैं अपने सुंदर मम्मों को ताहिर अज़ीज़ खान जी के हाथों से मसले जाते देख रही थी।

मेरी पीठ उनके सीने से लगी हुई थी। मैंने अपना सिर पीछे की ओर कर के उनके कंधे पर रख दिया। साढ़े-चार इंच ऊँची हील के सैंडल पहने होने से मेरा कद उनके कद से मेल खा रहा था। उनके हाथ मेरे दोनों बूब्स को बुरी तरह मसल रहे थे। आईने में हमारा ये पोज़ बड़ा ही सेक्सी लग रहा था।

उन्होंने मेरे दोनों निप्पल अपनी अँगुलियों से पकड़ कर आगे की तरफ खींचे। मेरे दोनों निप्पल खिंचाव के कारण लंबे-लंबे हो गये थे। उनके मसलने के कारण दोनों बूब्स की रंगत सफ़ेद से गुलाबी हो गयी थी। उनकी गरम साँसें मैं अपनी गर्दन पर इधर से उधर फिरते हुए महसूस कर रही थी। उनके होंठ मेरी गर्दन के पीछे, जहाँ से मेरे बाल शुरू हो रहे थे, वहाँ जा कर चिपक गये। फिर उन्होंने मेरी गर्दन पर हल्के से दाँत गड़ाये। उनके होंठ मेरी गर्दन पर घूमते हुए मेरे बाँय कान तक आये। वो मेरे बाँय कान के ऊपर अपने होंठ फिराने लगे। औरत का कान एक जबरदस्त उत्तेजक हिस्सा होता है। मैं उनकी हरकतों से उत्तेजित हो गयी।

मैंने अपने हाथ में पकड़ी व्हिस्की की बोतल को टाँगों के बीच अपनी चूत पर सख्ती से दाब रखी थी। मेरे मुँह से उत्तेजना में टूटे हुए शब्द निकल रहे थे। मैंने अपने होंठों को दाँतों में दबा रखा था, फिर भी पता नहीं किस कोने से मेरे मुँह से आआऽऽऽहहऽऽऽ ममऽऽऽऽ ऊऊऽऽऽहहऽऽऽ की आवाजें निकल रही थीं। फिर उन्होंने कान पर अपनी जीभ फ़िराते हुए कान के निचले हिस्से को अपने मुँह में भर लिया और हल्के-हल्के से उसे दाँत से काटने लगे। मेरे हाथ से बोतल नीचे छूट गयी और मैंने उनके सिर को अपने हाथों से थाम लिया। हमारे जिस्म संगीत की धुन पर एक दूसरे से सटे हुए इस तरह से थिरक रहे थे कि मानो दो नहीं एक ही जिस्म हों |

उन्होंने मुझे अपनी ओर घुमाया और मेरे बूब्स पर अपने होंठ रख कर मेरे निप्पल को चूसने लगे। इसी तरह की हरकतों की ख्वाहिश तो तब से मेरे मन में थी जब से मैंने उन्हें पहली बार देखा था। मुझे उनके साथ पैरिस आने का न्यौता कबूल करते समय ही पता था कि इस टूर में हम दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता जन्म लेने वाला है। मैं उसके लिये शुरू से ही उतावली थी। मैं भी उनको अपनी ओर से पूरा मज़ा देना चाहती थी। मैं भी उनकी छातियों पर झुक कर उनके छोटे-छोटे निप्पलों को अपने दाँतों से कुरेदने लगी। मैंने अपनी जीभ से उनके निप्पलों को सहलाना शुरू किया तो उत्तेजना से उनके निप्पल भी खड़े हो गये।

मैं उनके बालों से भरे सीने को सहला रही थी। मैंने अपने दाँतों को उनके सीने में गड़ा कर जगह-जगह अपने दाँतों के निशान छोड़ दिये। मैंने कुछ देर तक उनके निप्पल से खेलने के बाद अपने होंठ नीचे की ओर ले जाते हुए उनकी नाभी में अपनी जीभ घुसा दी और उनकी नाभी को अपनी जीभ से चाटने लगी। वो मेरे खुले बालों में अपनी अँगुलियाँ फ़िरा रहे थे |

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