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चुदवाते चुदवाते मै चुदाई की मशीन बन गयी -5

गतांग से आगे ..

फिर मैं घुटनों के बल उनके सामने बैठ गयी और उनके लंड को अपने हाथों में लेकर निहारने लगी। मैंने मुस्कुरा कर उनकी ओर देखा। उनके खतना लंड का गोल-मटोल टोपा गुब्बारे की तरह फूला हुआ था। मैंने उसकी टिप पर अपने होंठ लगा दिये। एक छोटा सा किस लेकर अपने चेहरे के सामने उनके लंड को सहलाने लगी। उनके लंड को अपने मुँह में लेने की इच्छा तो हो रही थी लेकिन मैं उनके रिक्वेस्ट करने का इंतज़ार कर रही थी। मैं उनके सामने ये नहीं शो करना चाहती थी कि मैं पहले से ही कितना खेली खायी हुई हूँ।

इसे मुँह में लेकर प्यार करो |

ऊँऽऽ नहीं ये गंदा है। मैंने लंड को अपने से दूर करने का नाटक किया, छी! इससे तो पेशाब भी किया जाता है। इसे मुँह में कैसे लूँ?

तूने अभी तक मिकाल के लंड को मुँह में नहीं लिया क्या?

नहीं वो ऐसी गंदी हर्कतें नहीं करते हैं।

ये गंदा नहीं होता है…. एक बार तो लेकर देख! ठीक उसी तरह जैसे चोकोबार आईसक्रीम को मुँह में लेकर चाटती हो। असलियत में तो मैं उस लंड को मुँह में लेने के लिये इतनी बेकरार थी की अगर उसमें से तो पेशाब भी निकल रहा होता तो मैं उसे आब-ए-ज़मज़म समझ कर पी जाती पर फिर भी मैं जानबूझ कर झिझकते हुए अपनी जीभ निकाल कर उनके लंड के टोपे पर फिराने लगी। मेरे बाल खुले होने की वजह से उनको देखने में परेशानी हो रही थी। इसलिये उन्होंने मेरे बालों को पकड़ कर जूड़े के रूप में बाँध दिया। फिर मेरे चेहरे को पकड़ कर अपने लंड को मेरी ओर ठेलने लगे। मैंने उनकी हरकत के इख्तयार में अपना मुँह खोल दिया। उनका लंड आधा अंदर जा कर मेरे गले के दर में फंस गया।

बसऽऽ और नहीं जायेगा! मैंने कहना चाहा मगर मुँह से बस, ऊँऽऽऽ ऊँऽऽऽ जैसी आवाज निकली। इसलिये मैंने उनके लंड को अपने मुँह में लिये-लिये ही उन्हें इशारा किया। वो अपने लंड को अब आगे पीछे करने लगे। मैं उनके लंड को अपने मुँह से चोद रही थी और साथ-साथ उनके लंड पर अपनी जीभ भी फ़िरा रही थी।

पूरा ले! मज़ा नहीं आ रहा है! पूरा अंदर जाये बिना मज़ा नहीं आयेगा। उन्होंने अपने लंड को बाहर खींचा।

इतना बड़ा लंड पूरा कैसे जायेगा? मेरा मुँह मेरी चूत जैसा तो है नहीं कि कितना भी लंबा और मोटा हो सब अंदर ले लेगा! मैंने कहा।

उन्होंने मुझे उठाया और बिस्तर पर ले जाकर लिटा दिया। मैं पीठ के बल लेट गयी। अब उन्होंने मेरे जिस्म को कंधों से पकड़ कर बिस्तर से बाहर की तरफ़ खींचा। अब मेरा सिर बिस्तर से नीचे लटकने लगा था। हाँ ये ठीक है…. अब अपने सिर को बिस्तर से नीचे लटकाते हुए अपने मुँह को खोल! वो बोले। मैंने वैसा ही किया। इस पोज़िशन में मेरा मुँह और गले का छेद एक सीध में हो गये थे। ससुर जी अब मेरे मुँह में अपने लंड को डालते हुए मुझसे बोले, एक जोर की साँस खींच अंदर! मैंने वैसा ही किया। वो अपने लंड को अंदर ठेलते चले गये। उनका मोटा लंड सरसराता हुआ गले के अंदर घुसता चला गया। पहले तो उबकायी जैसी आयी। लेकिन उनका लंड फंसा होने के कारण कुछ नहीं हुआ। उनका लंड अब पूरा अंदर घुस चुका था। उनके लंड के नीचे लटकते दोनों गेंद अब मेरी नाक को दाब रहे थे।

एक सेकेंड इस हालत में रख कर उन्होंने वापस अपने लंड को बाहर खींचा। उनके लंड ने जैसे ही गले को खाली किया, मैंने अपने फ़ेफ़ड़ों में जमी हवा खाली की और वापस साँस लेकर उनके अगले धक्के का इंतज़ार करने लगी। उन्होंने झुक कर मेरे दोनों मम्मों को अपनी मुठ्ठी में भर लिया और उन्हें मसलते हुए वापस अपने लंड को जड़ तक मेरे मुँह में ठेल दिया। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

फिर एक के बाद एक, धक्के मारने लगे। मैंने अपनी साँसें उनके धक्कों के साथ एडजस्ट कर ली थी। हर धक्के के साथ मेरे मम्मों को वो बुरी तरह मसलते जा रहे थे और साथ-साथ मेरे निप्पलों को भी उमेठ देते। जैसे ही वो मेरे निप्पलों को पकड़ कर खींचते, मेरा पूरा जिस्म कमान की तरह ऊपर की ओर उठ जाता। काफी देर तक यूँ ही मुँह में ठेलने के बाद उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल लिया। और ज्यादा देर तक चूसने से हो सकता है मुँह में ही निकल जाता। उनका लंड मेरे थूक से गीला हो गया था और चमक रहा था। उनके उठते ही मैं भी उठ बैठी। उन्होंने मुझे बिस्तर से उतार कर वापस अपने आगोश में ले लिया। मैंने उनके सिर को अपने हाथों से थाम कर उनके होंठों पर अपने होंठ सख्ती से दाब दिये।

मेरी जीभ उनके मुँह में घुस कर उनकी जीभ से खेलने लगी। साढ़े-चार इंच ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने होने के बावजूद मुझे अपनी ऐड़ियों को और ऊपर करना पड़ा जिससे मेरा कद उनके कद के कुछ हद तक बराबर हो जाये। मेरे सैंडलों के ऐड़ियाँ अब ज़मीन से ऊपर उठी हुई थी और मेरे पंजे मुड़े हुए थे। फिर मैंने अपने दोनों मम्मों को हाथों से उठा कर उनके सीने पर इस तरह रखा कि उनके निप्पलों को मेरे निप्पल छूने लगे। उनके निप्पल भी मेरी हरकत से एक दम कड़े हो गये थे। मेरे निप्पल तो पहले से ही उत्तेजना में तन चुके थे। मैंने अपने निप्पल से उनके निप्पल को सहलाना शुरू किया। उन्होंने मेरे नितंबों को सख्ती से पकड़ कर अपने लंड पर खींचा।

मममऽऽऽ माहिरा मीऽऽऽऽ ऊँमऽऽऽऽ। तुम बहुत सेक्सी हो। अब अफ़सोस हो रहा है कि तुम्हें इतने दिनों तक मैंने छुआ क्यों नहीं। ओफफओऽहहऽऽऽ तुम तो मुझ पागल कर डालोगी। आआआऽऽऽहहहहऽऽऽ हाँऽऽऽ ऐसे हीऽऽऽ वो अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर रगड़ रहे थे। कुछ देर तक हमारे एक दूसरे के जिस्म को रगड़ने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर के पास ले जाकर मेरे एक पैर को उठा कर बिस्तर के ऊपर रख दिया। अब घुटनों के बल बैठने की उनकी बारी थी। वो मेरी टाँगों के पास बैठ कर बिस्तर पर रखे मेरे पैर और उसके सैंडल की पट्टियों पर अपनी जीभ फिराने लगे। मुझे ऊँची हील वाले सेक्सी सैंडल पहनना बहुत अच्छा लगता है,

इसलिये मैं हरदम सैंडल पहने रहती हूँ। ज्यादातर मरदों की तरह शायद उन्हें भी हाई-हील सैंडल निहायत पसंद थे, इसलिये ताहिर अज़ीज़ खान जी अपने जीभ मेरे पंजों, पैरों और सैंडलों पर फिराने लगे। फिर उनकी जीभ मेरी टाँगों और जाँघों से होती हुई मेरी टाँगों के जोड़ पर घूमने लगी। उनकी जीभ मेरे घुटने पर से धीरे-धीरे आगे बढ़ती हुई मेरी टाँगों के जोड़ तक पहुँची। उन्होंने अपनी जीभ से मेरी चिकनी चूत को ऊपर से चाटना शुरू किया। वो अपने हाथों से मेरी चूत की फाँकों को अलग करके मेरी चूत के भीतर अपनी जीभ डालना चाहते थे।

नहीं! ऐसे नहीं! कहकर मैंने उनके हाथों को अपने जिस्म से हटा दिया और मैंने खुद एक हाथ की अँगुलियों से अपनी चूत को खोल कर दूसरे हाथ से उनके सिर को थाम कर अपनी चूत से सटा दिया। लो अब चाटो इसे!

उनकी जीभ किसी छोटे लंड की तरह मेरी चूत के अंदर बाहर होने लगी। शराब के नशे में मैं बहुत उत्तेजित हो गयी थी। मैं उनके बालों को अपनी मुठ्ठी में पकड़ कर उन्हें खींच रही थी, मानो उन्हें उखाड़ ही देना चाहती थी। दूसरे हाथों की अँगुलियों से मैंने अपनी चूत को फैला रखा था और साथ-साथ एक अँगुली से अपनी क्लीटोरिस को सहला रही थी। मैंने सामने आईने में देखा तो हम दोनों की हालत को देख कर अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पायी और मेरे जिस्म से लावा बह निकला। मैंने सख्ती से दूसरे हाथों की मुठ्ठी में उनके बालों को पकड़े हुए उनके सिर को अपनी चूत में दाब रखा था। उनकी जीभ मेरी चूत से बहती हुई रस धारा को अपने अंदर समा लेने में मसरूफ हो गयी। काफी देर तक इसी तरह चूसवाते हुए जब मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया तो मैंने उनके सिर को अपनी चूत से खींच कर अलग किया।

उनके सिर के कईं बाल टूट कर मेरी मुठ्ठी में आ गये थे। उनके होंठ और ठुड्डी मेरे रस से चमक रहे थे। ऊऊहहऽऽ ताआऽऽहिर! अब मैंने वासना और शराब के नशे में अपने खिताब में चेंज लाते हुए उन्हें ऊपर अपनी ओर खींचा। वो खड़े हो कर मुझ से लिपट गये और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर मेरे होंठों को अपने मुँह में खींच लिया और उन्हें बुरी तरह चूसने लगे। मैं नहीं जानती थी कि उधर भी इतनी ज्यादा आग लगी हुई है। उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी। मुँह में अजीब सा टेस्ट समा गया। मैंने ज़िंदगी में पहली बार अपनी चूत के रस का स्वाद चखा। मैंने उनके चेहरे पर लगे अपने रस को चाट कर साफ़ किया।

उन्होंने थिरकते हुए बिस्तर के साईड में रखी फ्रेंच वाईन की बोतल उठा ली। उसके कॉर्क को खोल कर उन्होंने उसमें से एक घूँट लगाया। फिर मैंने भी एक घूँट लगाया और फिर उन्होंने मुझे अपने सामने खड़ा कर दिया। फिर उस बोत्तल से मेरे एक मम्मे पर धीरे-धीरे वाईन डालने लगे। उन्होंने अपने होंठ मेरे निप्पल के ऊपर रख दिये। रेड वाईन मेरे बूब्स से फ़िसलती हुई मेरे निप्पल के ऊपर से होती हुई उनके मुँह में जा रही थी। बहुत ही एग्ज़ोटिक सीन था वो। फिर वो उस बोतल को ऊपर करके मेरे सिर पर वाईन उढ़ेलने लगे। साथ-साथ मेरे चेहरे से, मेरे कानों से और मेरे बालों से टपकती हुई वाईन को पीते जा रहे थे। मैं वाईन में नहा रही थी और उनकी जीभ मेरे पूरे जिस्म पर दौड़ रही थी। मैं उनकी हरकतों से पागल हुई जा रही थी। इस तरह से मुझे आज तक किसी ने प्यार नहीं क्या था।

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