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चुदवाते चुदवाते मै चुदाई की मशीन बन गयी -5

गतांग से आगे ..

इतना तो साफ़ दिख रहा था कि मेरे ससुर जी सेक्स के मामले में तो सबसे अनोखे खिलाड़ी थे। जब बोतल आधी से ज्यादा खाली हो गयी तो उन्होंने बोतल मुझे पकड़ा दी और मेरे पूरे जिस्म को चाटने लगे। मैं बोतल से घूँट पीने लगी और वो मेरा जिस्म चाटने लगे। मेरा पूरा जिस्म वाईन और उनकी लार से चिपचिपा हो गया था।

उन्होंने एक झटके में मुझे अपनी बाँहों में उठा लिया और अपनी बाँहों में उठाये हुए बाथरूम में ले गये। इस उम्र में भी इतनी ताकत थी कि मुझको उठाकर बाथरूम ले जाते वक्त एक बार भी उनकी साँस नहीं फ़ूली। बाथरूम में बाथ-टब में दोनों घुस गये और एक दूसरे को मसल-मसल कर नहलाने लगे। नहाते वक्त भी मेरे पैरों में सैंडल मौजूद थे। नहाने के साथ-साथ हम एक दूसरे को छेड़ते जा रहे थे। सेक्स के इतने रूप मैंने सिर्फ तसव्वुर में ही सोचे थे। आज ससुर जी ने मेरे पूरे वजूद पर अपना हक जमा दिया। वहीं पर बाथ-टब में बैठे-बैठे उन्होंने मुझे टब का सहारा लेकर घुटने के बल झुकाया और पीछे की तरफ़ से मेरी चूत और मेरी गाँड के छेद पर अपनी जीभ फिराने लगे।

ऊऊऊऽऽऽहहहऽऽऽऽ! ताआऽऽऽहिर! जाआऽऽऽन ये क्या कर रहे हो? छीऽऽऽ नहीईं वहाँ जीऽऽभ सेऽऽऽ मत चाटो! नऽऽऽहींऽऽऽ हाँऽऽऽऽ और अंदर…. और अंदर। मैं उत्तेजना में जोर-जोर से चींखने लगी। ससुर जी ने मेरी गाँड के छेद को अपनी अँगुलियों से फैला कर उसके अंदर भी एक बार जीभ डाल दी। मेरी चूत में आग लगी हुई थी। मैं उत्तेजना और नशे में अपने ही हाथों से अपने मम्मों को बुरी तरह मसल रही थी।

बस-बस! और नहीं.. अब मेरी प्यास बुझा दो। मेरी चूत जल रही है…. इसे अपने लंड से ठंडा कर दो। अब मुझे अपने लंड से चोद दो। अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती। ये आपने क्या कर डाला….. मेरे पूरे जिस्म में आग जल रही है। प्लीऽऽऽऽज़ और नहीं…. मैं तड़प रही थी। उन्होंने वापस टब से बाहर निकल कर मुझे अपनी बाँहों में उठाया और गीले जिस्म में ही कमरे में वापस आये।

उन्होंने मुझे उसी हालत में बिस्तर पेर लिटा दिया। वो मुझे लिटा कर उठने को हुए तो मैंने झट से उनकी गर्दन में अपनी बांहें डाल दीं, जिससे वो मुझसे दूर नहीं जा सकें। अब इंच भर की दूरी भी बर्दाश्त से बाहर हो रही थी। उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरी बाँहों को अपनी गर्दन से अलग किया और अपने लंड पर बोतल में बची हुई वाईन से कुछ बूँद रेड वाईन डाल कर मुझसे कहा, अब इसे चूसो! मैंने वैस ही किया। मुझे वाईन से भीगा उनका लंड बहुत ही टेस्टी लगा। मैं वापस उनके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। उन्होंने अब उस बोतल से बची हुई वाईन धीरे-धीरे अपने लंड पर उढ़ेलनी शुरू की। मैं उनके लंड और उनके टट्टों पर गिरती हुई वाईन को पी रही थी। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

कुछ देर बाद जब मैं पुरी वाईन पी चुकी तो उन्होंने मुझे लिटा दिया और मेरी टांगें अपने कंधों पर रख दीं। फिर उन्होंने मेरी कमर के नीचे एक तकिया लगा कर मेरी चूत की फाँकों को अलग किया। मैं उनके लंड के दाखिल होने का इंतज़ार करने लगी। उनके लंड को मैं अपनी चूत के ऊपर सटे हुए महसूस कर रही थी। अब तो मैं इतने नशे में थी कि मैंने आँखें बंद करके अपने आप को इस दुनिया से काट लिया था।

नशे और वासना में चूर मैं दुनिया के सारे रिश्तों को और सारी मर्यादाओं को भूल कर बस अपने ससुर जी का, अपने बॉस का, अपने ताहिर जानू के लंड को अपनी चूत में घुसते हुए महसूस करना चाहती थी। अब वो सिर्फ, और सिर्फ मेरे आशिक थे।

उनसे बस एक ही रिश्ता था; जो रिश्ता किसी मर्द और औरत के बीच जिस्मों के मिलन से बनता है। मैं उनके लंड से अपनी चूत की दीवारों को रगड़ना चाहती थी। सब कुछ एक जन्नती एहसास दे रहा था। उन्होंने मेरी चूत की फाँकों को अलग करके अपने लंड को मेरी चूत के छेद पर रखा। अब बता मेरी जान….. कितनी प्यास है तेरे अंदर? मेरे लंड को कितना चाहती है? ताहिर अज़ीज़ खान जी ने अपने लंड को चूत के ऊपर रगड़ते हुए पूछा।

आआऽऽऽहहऽऽऽ क्या करते हो…. ऊँममऽऽऽ अंदर घुसा दो इसे! मैंने अपने सूखे होंठों पर जीभ फ़ेरी।

मैं तो तुम्हारा ससुर हूँ…… क्या ये मुनासिब है?

ऊऊऽऽहहऽऽऽ राऽऽज!! ताऽऽऽहिर मेरी जाऽऽऽन मेराऽऽ इंतहान मत लोऽऽऽ। ऊँम्म डाल दो इसे….. अपने बेटे की बीवी की चूत फाड़ दो अपने लंड से….. कब से प्यासी हूँ तुम्हारे इस लंड के लिये…. ओ‍ओहहह कितने दिनों से ये आग जल रही थी। मैं तो शुरू से तुम्हारी बनना चाहती थी। ओऽऽऽहहऽऽऽ तुम कितने पत्थर दिल होऽऽऽऽ! कितना तरसया मुझे…. आज भी तरसा रहे हो! मैंने उनके लंड को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी चूत की ओर ठेला मगर उन्होंने मेरी कोशिश को नाकाम कर दिया। मेरी चूत का मुँह लंड के एहसास से लाल हो कर खुल गया था जिससे उनके लंड को किसी तरह की परेशानी ना हो। मेरी चूत से काम-रस झाग बनके निकल कर मेरे चूतड़ों के कटाव के बीच से बहता हुआ बिस्तर की ओर जा रहा था। मेरी चूत का मुँह पानी से उफ़न रहा था। अंदर कर दूँ???

हाँ ऊऊहह हाँऽऽऽ

मेरे लंड पर किसी तरह का कोई कंडोम नहीं है। मेरा वीर्य अपनी कोख में लेने की इच्छा है क्या?

हाँऽऽ ऊऊहह माँ… हाँऽऽ मेरी चूत को भर दो अपने वीर्य सेऽऽऽ! डाल दो अपना बीज मेरी कोख में! मैं तड़प रही थी। पूरा जिस्म पसीने से तरबतर हो रहा था। मेरी आँखें उत्तेजना से उलट गयी थीं और मेरे होंठ खुल गये थे। मैं अपने सूखे होंठों पर अपनी जीभ चला कर गीला कर रही थी।

फिर तुम्हारी कोख में मेरा बच्चा आ जायेगा!!

हाँऽऽ हाँऽऽऽ मुझे बना दो प्रेगनेंट। अब बस करोऽऽऽ। मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ…. और मत सताओ! मत तड़पाओ मुझे! मैंने अपनी दोनों टाँगें बिस्तर पर जितना हो सकता था फैला लीं, देखो तुम्हारे बेटे की दुल्हन तुम्हारे सामने अपनी चूत खोल कर लेटी तुमसे गिड़गिड़ा रही है कि उसकी चूत को फाड़ डालो। रगड़ दो उसके नाज़ुक जिस्म को। मसल डालो मेरे इन मम्मों को…. जिन पर मुझे नाज़ है! ये सब आपके छूने…. आपकी मोहब्बत के लिये तड़प रहे हैं। मैं बहकने लगी थी। अब वो मेरी मिन्नतों पर पसीज गये और अपनी अँगुलियों से मेरी क्लिटोरिस को मसलते हुए अपने लंड को अंदर करने लगे। मैं अपने हाथों से उनकी छातियों को मसल रही थी और उनके लंड को अपने चूत की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर दाखिल होते महसूस कर रही थी।

हाँऽऽ मेरे ताहिर! इस लुत्फ का मुझे जन्मों से इंतज़ार था। तुम इतने नासमझ क्यों हो! मेरे दिल को समझने में इतनी देर क्यों कर दी!

उन्होंने वापस मेरी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। उनके दोनों हाथ अब मेरे दोनों बूब्स पर थे। दोनों हाथ मेरी छातियों को जोर-जोर से मसल रहे थे और वो मेरे निप्पलों को अँगुलियों से मसल रहे थे। मेरी चूत बुरी तरह से गीली हो रही थी इसलिये उनके लंड को दाखिल होने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। उनका लंड पूरी तरह मेरी चूत में समा गया था। फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपने लंड को पूरी तरह से बाहर खींच कर वापस एक धक्के में अंदर कर दिया। अब उन्होंने मेरी टाँगें अपने कंधों से उतार दीं और मेरे ऊपर लेट गये और मुझे अपनी बाँहों में भर कर मेरे होंठों को चूमने लगे। सिर्फ उनकी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी। मेरी टाँगें दोनों ओर फ़ैली हुई थीं। कुछ ही देर में मैं उत्तेजित होकर उनके हर धक्के का अपनी कमर को उनकी तरफ़ उठा कर और उछाल कर वेलकम करने लगी। मैं भी नीचे की ओर से पूरे जोश में धक्के लगा रही थी। एयर कंडिशनर की ठंडक में भी हम दोनों पसीने-पसीने हो रहे थे। कमरे में सिर्फ एयर कंडिशनर की हमिंग के अलावा हमारी ऊऊऽऽहहऽऽ ओ‍ओऽऽहहऽऽ की आवाज गूँज रही थी। साथ में हर धक्के पर फ़च फ़च की आवाज आती थी। हमारे होंठ एक दूसरे से सिले हुए थे। हमारी जीभ एक दूसरे के मुँह में घूम रही थी। मैंने अपने पाँव उठा कर उनकी कमर को चारों ओर से जकड़ लिया।

काफी देर तक इसी तरह चोदने के बाद वो उठे और मुझे बिस्तर के किनारे खींच कर आधी-लेटी हालत में लिटा कर मेरी टाँगों के बीच खड़े होकर मुझे चोदने लगे। उनके हर धक्के के साथ पूरा बिस्तर हिलने लगता था। मेरी चूत से दो बार पानी की बौंछार हो चुकी थी। कुछ देर तक और चोदने के बाद उन्होंने अपने लंड को पूरी जड़ तक मेरी चूत के अंदर डाल कर मेरे दोनों मम्मों को अपनी मुठ्ठी में भर कर इतनी बुरी तरह मसला कि मेरी तो जान ही निकल गयी। ले! ले मेरा बीज मेरा वीर्य अपने पेट में भर ले।

ले-ले मेरे बच्चे को अपने पेट में। अब नौ महीने बाद मुझसे शिकायत नहीं करना। उन्होंने मेरे होंठों के पास बड़बड़ाते हुए मेरी चूत में अपना वीर्य डाल दिया। मैंने उनके नितंबों में अपने नाखून गड़ा कर अपनी चूत को जितना हो सकता ऊपर उठा दिया और मेरा भी रस उनके लंड को भिगोते हुए निकल पड़ा। दोनों खल्लास होकर एक दूसरे की बगल में लेट गये। हम कुछ देर तक यूँ ही लंबी-लंबी साँसें लेते रहे। फिर उन्होंने करवट लेकर अपना एक पैर मेरे जिस्म के ऊपर चढ़ा दिया और मेरे मम्मों से खेलते हुए बोले, ओ‍ओऽऽफफऽऽ माहिरा तुम भी गजब की चीज़ हो। मुझे पूरी तरह थका दिया मुझे।

अच्छा?

इसी तरह अगर अक्सर चलता रहा तो बहुत जल्दी ही मुझे दवाई लेनी पड़ेगी…. ताकत की।

मजाक मत करो! अगर दवाई की किसी को जरूरत है तो मुझे, जिससे कहीं प्रेगमेंट ना हो जाऊँ।

हम दोनों वापस एक दूसरे से लिपट गये और उस दिन सारी रात एक दूसरे से खेलते हुए गुजर गयी। उन्होंने उस दिन मुझे रात में कईं बार अलग-अलग तरीके से चोदा।

सुबह उठने की इच्छा नहीं हो रही थी। पूरा जिस्म टूट रहा था। आज रोयन और शाबा भी हमारे साथ मिल गये। रोयन मौका खोज रहा था मेरे साथ चुदाई का। लेकिन अब मैं ताहिर अज़ीज़ खान जी के ही रंगों में रंग चुकी थी। मेरा रोमरोम अब इस नये साथ को तरस रहा था। उस दिन भी वैसी ही चुहल बाजी चलती रही। मैंने स्विमिंग पूल पर अपनी सबसे छोटी बिकिनी पहनी थी। मेरा आशिक तो उसे देखते ही अपने होश खो बैठा। रोयन के होंठ फ़ड़क उठे थे। रोयन ने पूल के अंदर ही मेरे जिस्म को मसला। शाम को हम डाँस फ़्लोर पर गये तो मैं नशे में झूम सी रही थी। उस दिन शाम को भी रोयन के उकसाने पर मैंने काफी ड्रिंक कर रखी थी। डाँस फ़्लोर पर कुछ देर रोयन के साथ रहने के बाद ताहिर अज़ीज़ खान जी ने मुझे अपने पास खींच लिया। शाबा भी उनके जिस्म से चिपकी हुई थी।

हम दोनों को अपनी दोनों बाजुओं में कैद करके ताहिर अज़ीज़ खान जी थिरक रहे थे। रोयन टेबल पर बैठा हम तीनों को देखते हुए मुस्कुराता हुआ अपनी कॉकटेल सिप कर रहा था। हम दोनों ने ताहिर अज़ीज़ खान जी की हालत सैंडविच जैसी कर दी थी। मैं उनके सामने सटी हुई थी तो शाबा उनकी पीठ से चिपकी हुई थी। हम दोनों ने उनके जिस्म से शर्ट नोच कर फ़ेंक दी थी। ऊन्होंने भी हम दोनों को टॉपलेस कर दिया था। हम अपने मम्मों और अपने सख्त निप्पलों को उनके जिस्म पर रगड़ रही थीं। कुछ देर बाद रोयन भी स्टेज पर आ गया। उसके साथ कोई और लड़की थी। ये देख कर शाबा हम से अलग होकर रोयन के पास चली गयी। जैसे ही हम दोनों अकेले हुए, ताहिर अज़ीज़ खान जी ने अपने तपते होंठ मेरे होंठों पर रख कर एक गहरा चुंब्बन लिया। आज तो तुम स्विमिंग पूल पर गजब ढा रही थीं।

अच्छा? मिस्टर ताहिर अज़ीज़ खान – एक स्टड ऐसा कह रहा है! जिसपर यहाँ कईं लड़कियों की आँखें गड़ी हुई हैं। जनाब ..जवानी में तो आपका घर से निकलना मुश्किल रहता होगा?

शैतान मेरी खिंचायी कर रही है! ताहिर अज़ीज़ खान जी मुझे अपनी बाँहों में लिये-लिये स्टेज के साईड में चले गये। चलो यहाँ बहुत भीड़ है। स्विमिंग पूल पर चलते हैं…. अभी पूल खाली होगा।

लेकिन पहले बिकिनी की ब्रा तो ले लूँ।

उसकी क्या जरूरत? वो बोले। मैंने उनकी तरफ़ देखा तो वो बोले, आज मूनलाईट में न्यूड स्विमिंग करेंगे। बस तुम और मैं।

उनकी प्लैनिंग सुनते ही उत्तेजना में मेरा रोम-रोम थिरक उठा। मैंने कुछ कहा नहीं बस चुपचाप ताहिर अज़ीज़ खान जी का सहारा लेकर उनकी कमर में हाथ डाले मैं नशे में लड़खड़ाती हुई उनके साथ हो ली। हम लोगों से बचते हुए कमरे से बाहर आ गये। स्विमिंग पूल का नज़ारा बहुत ही दिलखुश था। हल्की रोशनी में पानी का रंग नीला लग रहा था। तब शाम के नौ बज रहे थे, इसलिये स्विमिंग पूल पर कोई नहीं था और शायद इसलिये रोशनी कम कर दी गयी थी। ऊपर पूरा चाँद ठंडी रोशनी बिखेर रहा था। हम दोनों वहाँ पूल के नज़दीक पहुँच कर कुछ देर तक एक दूसरे को निहारते रहे फिर हम दोनोंने एक दूसरे के कपड़े उतारने शुरू किये। मैंने ड्रेस कोड के मुताबिक पैंटी नहीं पहन रखी थी। इसलिये जैसे ही वो मेरी स्कर्ट को खींचने लगे मैंने उन्हें रोका। प्लीऽऽऽज़! इसे नहीं। किसी ने देख लिया तो?

यहाँ कोई नहीं आयेगा और किसे परवाह है? देखा नहीं हॉल में सब नंगे नाच रहे थे। कहते हुए उन्होंने मेरी स्कर्ट खींच दी और मेरे सैंडलों के अलावा मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया और खुद भी बिल्कुल नंगे हो गये। सबसे पहले ताहिर अज़ीज़ खान जी पूल में दाखिल हुए। मैं वो हाई-हील के सैंडल पहने नशे में किनारे खड़ी झूम सी रही थी तो उन्होंने मुझे हाथ पकड़ कर अंदर खींच लिया। मैं खिलखिला कर हँस पड़ी। मैंने अपनी हाथों में पानी भर कर उनके चेहरे पर फ़ेंका। तो वो मुझे पकड़ने के लिये मेरे पीछे तैरने लगे। हम दोनों काफी देर तक चुहल बाजी करते रहे और एक दूसरे के जिस्म से खेलते रहे। हम दोनों कसके एक दूसरे से लिपट जाते और एक दूसरे के जिस्म को चूमने लगते। ताहिर अज़ीज़ खान जी ने मेरे जिस्म का कोई हिस्सा नहीं छोड़ा जहाँ उनके होंठों ने छुआ ना हुआ हो।

मैंने स्विमिंग पूल के किनारे को पकड़ कर अपने आप को स्टैडी किया। ताहिर अज़ीज़ खान जी पीछे से मेरे जिस्म से लिपट कर मेरे गीले मम्मों को मसल रहे थे। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैं अपनी गर्दन पीछे घूमा कर उनके होंठों को अपने दाँतों से काट रही थी। उनका लंड मेरे दोनों चूतड़ों के बीच सटा हुआ था। मैंने अपने एक हाथ से उनके लंड को थाम कर देखा। लंड पूरी तरह तना हुआ था। आ जाओ जान! पानी भी मेरे जिस्म की आग को बुझा नहीं पा रहा है। जब तक तुम मेरे जिस्म को शांत नहीं करोगे, मैं ऐसे ही फुँकती रहुँगी। मैंने उनके बालों को अपनी मुठ्ठी में भर कर अपनी तरफ़ मोड़ा और उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।

तुम बहुत ही गरम हो और शराब पी कर नशे में तुम और भी नशीली हो जाती हो!

उस जगह पर पानी कम था। उन्होंने पानी में खड़े होकर मुझे उठा कर स्विमिंग पूल के ऊपर बिठा दिया। मेरी टाँगें पूल के किनारे पर झूल रही थीं। वो अपने दोनों हाथों से मेरी टाँगों को फैला कर मेरी टाँगों के बीच आ गये। मैंने अपनी टाँगें उठा कर उनके कंधों पर रख दी। इससे मेरी चूत ऊपर उठकर उनके चेहरे के सामने हो गयी। उन्होंने मेरी चूत पर अपने होंठ टिका दिये और अपनी जीभ को चूत के ऊपर फिराने लगे।

आआऽऽहहहऽऽऽ ममऽऽआआआ ऊँऊँऽऽऽऽऽ आआऽऽऽ मैंने उनके सिर को अपने एक हाथ से पकड़ा और दूसरे हाथ को जमीन पर रखते हुए उनके सिर को अपनी चूत पर दबा दिया। वो अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर डाल कर उसे आगे पीछे करने लगे। मैंने उत्तेजना में अपने दोनों हाथों से ताहिर अज़ीज़ खान जी को पकड़ लिया और अपनी कमर को उनके मुँह की तरफ़ ठेलने लगी। उन्होंने मेरे दोनों चूतड़ों पर अपनी अँगुलियाँ गड़ा दीं और मेरी क्लिटोरिस को अपने दाँतों के बीच दबा कर हल्के-हल्के से कुतरने लगे।

वो इस हालत में पीछे हटे तो मैं उनको पकड़े-पकड़े ही वापस स्विमिंग पूल में उतर गयी। मैंने अपनी टाँगों को कैंची की तरह उनके जिस्म को चारों ओर से जकड़ लिया था। फिर उनके सिर को थामे हुए अपनी टाँगों को हल्का सा लूज़ करते हुए उनके जिस्म पर फ़िसलती हुई नीचे की ओर खिसकी। जैसे ही मैंने अपने जिस्म पर उनके लंड की रगड़ महसूस की तो अपने हाथों से उनके लंड को अपनी चूत पर सेट करके वापस अपने जिस्म को कुछ नीचे गिराया।

उनका लंड मेरी चूत के दरवाजे को खोलता हुआ अंदर घुसता चला गया। उन्होंने मेरी पीठ को स्विमिंग पूल के किनारे से सटा दिया मैंने अपने हाथों से पीछे की ओर स्विमिंग पूल के किनारे का सहारा लेकर अपने जिस्म को सहारा दिया। वैसे मुझे सहारे की ज्यादा जरूरत नहीं थी क्योंकि मेरी टाँगों ने उनके जिस्म को इस तरह जकड़ रखा था कि वो मेरी इच्छा के बिना हिल भी नहीं पा रहे थे। उन्होंने जोर-जोर से धक्के देना शुरू किया।

आआऽऽहहऽऽऽ आआऽऽहहऽऽऽ ताहिर…. ताऽऽहिर….. हाँआँऽऽऽऽ हाँआँऽऽ और जोर सेऽऽऽऽ ममऽऽऽ मज़ाऽऽऽऽ आ गयाऽऽऽ ऊऊफफऽऽऽ जोरों सेऽऽऽ ऊँऊँऽऽआआऽऽऽ…. मैंने अपनी बाँहों का हार उनके गले में डाल दिया और उनके होंठों से अपने होंठ चिपका दिये। मैं उनके होंठों को कुतर रही थी।

ले! ले ले! अंदर लेले अंदर! पूरा….. आआऽऽहहऽऽऽ क्याऽऽऽ चीज़ है ऊँऽऽ, कहते हुए उन्होंने मुझे सख्ती से अपनी बाँहों में जकड़ लिया और अपने रस की धार मेरी चूत में बहाना शुरू किया। मैंने इस मामले में भी उनसे हार नहीं मानी। मेरा रस भी उनके रस से मिलने निकल पड़ा। हम दोनों अपने जिस्म को दूसरे के जिस्म में समा देने के लिये जी तोड़ कोशिश करने लगे। दोनों एक दूसरे से इस तरह लिपट रहे थे कि पानी से भाप उठना ही बाकी रह गया था। हम दोनों झड़ कर स्विमिंग पूल में कुछ देर तक मछलियों की तरह अठखेलियाँ करते रहे। उसके बाद हमने पानी से निकल कर एक दूसरे के जिस्म को साथ के बाथरूम में जाकर पोंछा और फिर हम अपने कमरे में वापस लौट गये। खाना कमरे में ही मंगा कर खाया। ताहिर अज़ीज़ खान जी कुछ ज्यादा ही रोमैंटिक हो रहे थे। उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठा कर अपने हाथों से खिलाया।

अगले दिन रोयन और शाबा पीछे ही पड़ गये और हम दोनों को अलग नहीं छोड़ा। हमने उनके साथ ही ग्रुप सेक्स का मज़ा लिया। हम जितने भी दिन वहाँ ठहरे, हमने खूब इंजॉय किया। ससुर जी से छिपा कर अगर मौका मिलता तो मैं कॉनफ्रेंस में मौजूद दूसरे मर्दों से चुदवाने से नहीं चूकती थी। मैं भी क्या करती। माहौल ही ऐसा था। दिन भर शराब और हर तरफ नंगापन और चुदाई…. मैं खुद को रोक नहीं पाती थी। अलग- अलग देशों के मर्दों के तरह-तरह के छोटे, लंबे, मोटे लंड, हर तरफ दिखायी देते थे।

ऐसे ही एक शाम मैं नशे में स्टेज पर डाँस कर रही थी। बहुत ही उत्तेजक और तेज़ म्यूज़िक चल रहा था और स्टेज नाचने वाले लोगों से खचाखच भरा हुआ था। सभी नंग-धड़ंग हालत में झूम रहे थे और बहुत से तो पूरे नंगे थे और कईं जोड़े चुदाई में भी लगे थे। ताहिर अज़ीज़ खान जी पहले तो वहीं मौजूद मेरे पास ही डाँस रहे थे पर जब डाँस खत्म हुआ तो वो कहीं दिखायी नहीं दिये। हर तरफ कितने ही जोड़े नंगे होकर चुदाई में मसरूफ थे। शाबा और रोयन भी चुदाई का मज़ा ले रहे थे और मेरी चूत भट्ठी की तरह जल रही थी।

मेरे जिस्म पर सिर्फ छोटी सी स्कर्ट थी और मेरे मम्मे पूरे नंगे थे क्योंकि डाँस करते वक्त मेरे जिस्म से भी किसी ने मेरा टॉप खींच दिया था और अब उस टॉप के मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी। डी-जे ने नया म्यूज़िक चालू किया तो मैं नशे में लड़खड़ाती हुई स्टेज से उतरी और उन नंगे लोगों की भीड़ में ससुर जी को खोजने लगी और अचानक हाई-हील सैंडल में मेरा संतुलन बिगड़ गया और मैं गिरने लगी तो किसी के मजबूत हाथ ने मुझे थाम लिया और गिरने से रोका। मैंने देखा एक हट्टा-कट्टा आफ्रिकी काला आदमी मेरे पीछे से मुझे थामे मुस्कुरा रहा था। मुझे अपने चूतड़ों के बीच कुछ ठोस चीज़ चुभती हुई महसूस हुई पर अगले ही पल मुझे एहसास हुआ कि वो और कुछ नहीं बल्कि उसका हलब्बी लंड था।

थैंक यू सो मच! मैंने संभलते हुए उसकी तरफ मुड़कर कहा।

मॉय प्लेज़र…. वो मुस्कुराता हुआ बोला। मैं अभी भी उसकी मजबूत बाँह की गिरफ़्त में थी और उसके इतनी करीब थी कि उसका लंड मेरी नाभी के ऊपर चुभ रहा था। मेरी नज़र उसके काले लंड पर पड़ी तो मेरी आँखें फटी रह गयीं और मन-ही-मन में मैं सिसक उठी। इतना बड़ा लंड तो मैंने ज़िंदगी में नहीं देखा था। ऐसा लग रहा था किसी घोड़े का लंड हो और वो आदमी स्वयं भी बहुत ही ताकतवर और हट्टाकट्टा था। वो इतना लंबा था कि मेरे साढ़े-चार-पाँच इंच ऊँची हील के सैंडलों के बावजूद उसका लंड मेरी नाभी के ऊपर था।

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