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दिमाग और नजर सिर्फ चोदने के फ़िराक में

हेल्लो दोस्तों, मेरी प्यारी चूत की रानियों आप सभी की चूत में खलबली मचा देने वाली कहानी मैं आज आप सभी के सामने पेश करने जा रहा हूँ. लंड देवताओ टेंशन न लो ये कहानी आप सभी के लिए ही है…चलिए कहानी पर आते है….

मेरा नाम रेहान है और हमारा बहुत छोटा सा परिवार है, जिसमें मैं, मेरी बड़ी बहन और मेरी मॉम हैं। मेरी बड़ी बहन ममता दिल्ली में रहती है और हम दोनों यहाँ चंडीगढ़ में हैं। मेरी मॉम का नाम कृष्णा है और वो दिखने में एकदम पटाखा माल हैं.. उनकी उम्र 42 साल की है व 32-28-36 का फिगर है। मेरे मोहल्ले के सभी लड़के और अंकल लोग उनके हुस्न के दीवाने हैं।

यह बात उस वक्त की है, जब मैं 19 साल का था, मतलब आज से 3 साल पहले का किस्सा है। मैं शुरू से ही सेक्स का शौकीन था और मुझे सेक्स करना बहुत पसंद था। मेरे फादर हम सभी बचपन में ही छोड़ कर चले गए थे इसलिए मेरी मॉम घर चलाने के लिए एक बुटीक चलाती थीं, जिससे हमारा घर का गुज़ारा मुश्किल से होता था।

मैंने अपनी मॉम को कभी भी बुरी नजर से नहीं देखा था, पर उस दिन के बाद जब मैंने अपनी मॉम को नहाते हुए देखा तो मेरी तो ज़िंदगी ही बदल गई और मैंने अपनी मॉम को हर वक़्त गंदी नजर से देखना शुरू कर दिया।

अब मेरे दिमाग में बार-बार उन्हें चोदने के मौके में घूमते रहते थे। मेरी मॉम को गर्मी बहुत लगती थी, इसलिए वो घर पर अक्सर खुले से छोटे-छोटे कपड़े पहनती थीं। मेरी मॉम को देखने के बहाने मेरे सारे दोस्त मेरे घर पर आया करते थे और अपने-अपने घर जा कर मुठ मारा करते थे।

सभी मेरी पीठ के पीछे मेरी मॉम के बारे में बातें किया करते थे, उनमें मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त भी था, जिसका नाम धर्म था। उसका बड़ा भाई एक नम्बर का बदमाश था और वो भी अपने भाई के नक्शेकदम पर ही चल रहा था।

एक दिन उसका फोन मेरे पास मेरे घर पर ही रह गया था। मैंने जब उसके फोन को चलाया तो मैंने अपनी मॉम के नहाते हुए की वीडियो देखी तो में दंग रह गया और सीधा उसके पास गया।

पहले तो वो वीडियो देख कर थोड़ा डर गया और कहने लगा- पता नहीं यह कहाँ से आई है!
मैं- डरने की कोई जरूरत नहीं है.. सच-सच बता कहाँ से आई है?
धर्म- मुझे माफ़ कर दे यार.. मेरे बड़े भाई निर्मल ने मुझे वीडियो बनाने को कहा था।
मैं- अच्छा चल मुझे अपने भाई के पास ले के चल!
धर्म- रहने दे यार वो मुझ पर गुस्सा करेगा।
मैं- चिंता मत कर.. मुझे उनसे कोई और बात करनी है।

फिर हम दोनों उसकी बाइक पर बैठ कर उसके भाई से मिलने चले गए। उसका भाई अपने दो दोस्तों के साथ बैठा शराब पी रहा था। मैं बाइक से उतरा और मैंने धर्म के भाई पर दबाव बनाने के नजरिए से सीधा निर्मल पर अपनी चप्पल मारी।

उसको गुस्सा आ गया और वो मुझे मारने लगा।

मैंने कहा- साले तुमने मेरी मॉम की वीडियो क्यों बनवाई?

वो एकदम से चौंक गया और धर्म की तरफ देखने लगा। उसने मुझे मारना बंद किया और साफ़-साफ़ कहा- मैं और मेरे दोस्त तेरी मॉम के साथ रात गुज़ारना चाहते हैं और इसके लिए तुझे पैसे भी मिलेंगे।

पहले तो मैं नहीं माना, फिर उन्होंने पैसे बढ़ा दिए, तो मेरा मन ललचा गया। अन्दर ही अन्दर मेरा मन भी अपनी मॉम को चोदने का कर रहा था इसलिए मुझे लगा कि एक बार रास्ता खुल गया तो मुझे भी मजा मिल सकेगा।

मैंने हामी भर दी और उधर से चला आया।

फिर अगले दिन मैं उठा और सीधा निर्मल के घर गया तो उसने मुझे पैसे दिए और शराब भी पिलाई।

दारु की टुन्नी में मैंने उससे कहा- मैं भी तुम्हारे साथ अपनी मॉम को चोदूंगा!
तो वो यह सुनकर हंसने लगा और उसने कहा- ठीक है..

मैं रात होने का इंतज़ार कर रहा था.. शाम के सात बज चुके थे और रोज की तरह मॉम बुटीक से घर आ चुकी थीं।

मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे।

करीब 8 बजे हम दोनों ने खाना खा लिया, तभी मॉम बर्तन धोकर नहाने चली गईं।

उसी वक़्त मैंने निर्मल को फोन कर दिया.. निर्मल 5 मिनट बाद अपने दो हट्टे-कट्टे काले दोस्तों के साथ आ गया। उन दोनों ने अपने हाथों में शराब की बोतल पकड़ी हुई थी।

फिर उसने मुझे अपने दोस्तों से मिलवाया और कहा- ये भी तुम्हारी मॉम के साथ रात गुज़ारेंगे।

उनका नाम हरीश और लक्ष्मीकांत था।

तभी हम सब चुपचाप मेरी मॉम के रूम में घुस गए। हम सब आराम से बातें करते हुए मेरी मॉम के बाथरूम से बाहर निकलने का इंतज़ार कर रहे थे।

जब मेरी मॉम बाथरूम से बाहर आईं, तो वो हम सबको देख कर डर गईं और हम पर चिल्लाने लगीं।

तभी लक्ष्मीकांत ने मेरी मॉम का पीछे से पकड़ा और उनका तौलिया खींच कर उतार दिया। वो ऊँची आवाज में चिल्लाने लगीं और कहने लगीं- निर्मल तुम मेरे दोस्त हो, तुमने मेरे साथ सब कुछ किया है.. पर आज मेरे बेटे के सामने ऐसा क्यों कर रहे हो?

अपनी मॉम के मुँह से ये बात सुनते ही मुझे सब माजरा समझ आ गया कि मेरी मॉम की चुत निर्मल के लंड से चुद चुकी है।

तभी निर्मल ने कहा- अरे डार्लिंग तुमको छिप कर चोदने में मजा नहीं आता, इसलिए अब तुम अपने बेटे के साथ भी खुल जाओ, ये भी तुमको चोदना चाहता है। जब सब चुत लंड का खेल खेलना ही चाहते हैं.. तो फिर ये छुपना-छुपाना कैसा!

अब मॉम मुस्कुरा दीं और उन्होंने मेरी ओर देखते हुए मुझे आँख मारी तो मैंने भी आगे बढ़ मॉम को अपने गले से लगाते हुए उनकी चूचियां मसल दीं।

फिर क्या था.. वे सभी अपने कपड़े उतारने लगे और मैं लक्ष्मीकांत के साथ शराब पीने लगा। निर्मल ने वक़्त खराब ना करते हुए मॉम के मुँह में अपना लम्बा लंड दे डाला और नीचे से हरीश मॉम की चुत को चाटने लगा।

फिर मैं और लक्ष्मीकांत पैग बना कर पीने लगे। कुछ मिनट अपना लंड चुसवाने के बाद निर्मल ने मॉम की चुत पर अपना घोड़े जैसा लंड रखा और अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।

मॉम ने दर्द से कराहते हुए कहा- जान धीरे करना.. तुम्हारा बहुत बड़ा है, मुझे बहुत दर्द होता है।
निर्मल नशे में बोला- मेरी जान.. आज तो पूरी रात तेरी चुत मारूँगा और मज़े लूँगा!

साथ में ही हरीश भी अपना लम्बा लंड मॉम के मुँह डाल कर चुसवाने लगा.

निर्मल का लंड बड़ा होने के कारण मॉम की चुत में जा ही नहीं रहा था, फिर उसने अपने लंड पर थोड़ा सा तेल लगाया और 2-3 झटकों में पूरा लंड अन्दर डाल दिया। मेरी मॉम दर्द के मारे छटपटाने लगीं, पर उनको निर्मल से खुद को चुदवाने का मजा भी लेना था इसलिए वे दर्द को सहन करती रहीं।

निर्मल ने अपना मूसल पेलते हुए नशे की टुन्नी में गाली दी- मादरचोदी आज तुझे तेरी मम्मी तक की याद दिला दूँगा.. आज तुझे सारी रात चोदूंगा।

मॉम के मुँह में हरीश का लंड होने के कारण मॉम कुछ बोल नहीं पा रही थीं।

करीब पाँच मिनट बाद हरीश ने अपना लंड निकाला और मॉम को खड़ा किया, वो खुद मॉम के नीचे आ गया।

मॉम उनके प्लान को समझ चुकी थीं और वो अपने आपको दोनों तरफ से चुदवाने की तैयारी करने लगीं।

निर्मल ने मेरी मॉम के चूतड़ों में जोर से 2 झापड़ मारे और उनको लक्ष्मीकांत के ऊपर लिटा दिया। फिर उन दोनों ने मॉम को दोनों छेदों को चोदना शुरू कर दिया। मॉम की हालत बहुत खराब हो गई थी और वो बेहोश सी होने लगीं, पर निर्मल लगातार साथ में मॉम के छेद में झटके मारता रहा और मॉम मुझे देख कर मुस्कुराती रहीं।

फिर लक्ष्मीकांत उठा और उसने अपना मूसल किस्म का मोटा और लम्बा काला लंड मॉम के मुँह में जबरदस्ती ठूंस दिया। मॉम उसके लंड के कारण अच्छी तरह से सांस भी नहीं ले पा रही थीं।

कुछ देर बाद मॉम बड़ी मस्ती से उनका साथ देने लगीं। मैंने इसी बीच 3 बार मुठ मार कर अपना पानी निकाला था.. क्योंकि मेरा नम्बर ही नहीं आ पा रहा था, वे तीनों सांड़ इतनी जल्दी कहाँ मानने वाले थे।

करीब 10 मिनट बाद निर्मल ने लक्ष्मीकांत के साथ अपनी जगह बदल ली। अंकुर का पानी निकल गया था, उसने अपना सारा पानी मॉम के मुँह में ही निकालते हुए उन्हीं को पिला दिया था।

कुछ मिनट बाद हरीश ने भी अपना सारा पानी मॉम के मुँह में निकाल दिया। अब वो दोनों मेरे साथ बैठ कर शराब पीते हुए मेरी मॉम की चुदाई का वीडियो बनाने लगे थे।

फिर जैसे ही लक्ष्मीकांत ने अपना लंड मॉम की गांड में डाला तो मॉम एकदम दर्द से छटपटा गईं और ऊँची आवाज चीख पड़ीं- उऊईई मॉम.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मर गई मैं तो.. मादरचोदों रंडी समझ लिया है क्या.. बस भी करो.. जरा प्यार से करो.. मुझे दर्द हो रहा है।

यह सुनते ही हम सब हंसने लगे और उनकी चीख के साथ ही लक्ष्मीकांत ने अपनी स्पीड बढ़ा दी।

कुछ ही देर में मॉम दो बार और झड़ चुकी थीं.. पर वो हरामी झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। मॉम ने मेरी तरफ देखा तो मैंने मॉम की तरफ दारु का गिलास बढ़ा दिया, मॉम ने गट-गट करके एक ही झटके में गिलास खाली कर दिया और अब मॉम भी लक्ष्मीकांत की चुदाई का मजा लेने लगीं।

मैंने इस बीच मॉम को दो पैग और पिला दिए थे।

फिर लक्ष्मीकांत मॉम को डॉगी स्टाइल में करके उनकी गांड मारने लगा। मॉम भी शराब के नशे में मस्त हो चुकी थीं। उसने मॉम के मम्मों को जोर से मसला, तो वो एकदम से सीत्कारने लगीं और चिल्लाते हुए और जोर से चोदने की कहने लगीं।

करीब 5 मिनट बाद वो झड़ गया और उसने अपना सारा पानी मॉम के चेहरे पर ही निकाल दिया।

अब रात के करीब 1 बज चुके थे और मैंने अपनी मॉम को हाथ तक नहीं लगाया था। मॉम समेत हम सब बैठ कर शराब पी रहे थे। तभी मैं उठा और मैंने अपनी मॉम को गोद में उठाया और बाथरूम में ले गया। वो नशे में मजे से मचल रही थीं और मुझे चोदने के लिए कहे जा रही थीं।

मैंने बाथरूम में उनको नीचे बैठाया और उनके ऊपर पेशाब करने लगा। उन्होंने मेरे लंड को अपने मुँह से लगा लिया, इससे मुझे बहुत मजा आया और मैं मस्ती से उनके मुँह में मूतने लगा।

मॉम मेरा मूत पीते हुए कहने लगीं- अब आया ना मजा, अब तू मुझे रोज चोदना.. मुझे किसी से कोई डर नहीं रहेगा।
मैंने भी नशे में कहा- हाँ कृष्णा डार्लिंग अब मैं तुमको रोज चोदूंगा।

मैंने मॉम को खड़ा किया और दीवार के साथ लगा दिया। फिर मैंने उनकी टांग उठा कर अपना काला लंड उनकी चुत में पेल दिया।

मॉम- आह्ह.. चोद दे साले मैं तेरी मॉम नही हूँ, बीवी हूँ.. और जोर से कर.. मुझे बहुत मजा आ रहा है।
मैं- ले साली.. हर रोज तुझे चोदने का मौका ढूँढा करता था.. आज मजा मिला है, आज से तो तू मेरी रंडी बन कर रहेगी।
मॉम- आहह आहहाआ.. मुझे चोद दो, हाँ मैं तेरी रंडी हूँ.. ओह्ह.. मजा आ गया.. पेल दे पूरा.. अह..!
मैं- अभी तो यह शुरूआत है साली.. आज तेरे साथ और भी मजे लेने हैं।
मॉम- मुझे चोद दो.. आह.ह..

मॉम की आवाजें सुन कर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा ली और उनकी चुत में ही अपना पानी निकाल दिया।

कई बार चुदने के कारण मॉम की हालत बहुत खराब हो चुकी थी और वो मेरे सीने से लिपट गई थीं। मैंने उनको बांहों में पकड़ा और कमरे में ले जाकर बिस्तर पर गिरा दिया और शराब पीने लगा।

इसके बाद निर्मल और उसके दोस्त अपने लंड हिलाते हुए फिर से तैयार हो चुके थे।

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