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गर्म भट्टी जैसी चुतो ने खा लिया साल इंच का लंड

प्रेषक: नागेन्द्र चौरसिया

यह कहानी उस वक्त की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। उत्तर प्रदेश के फ़ैजाबाद में  रहता हूँ। हमारे घर के आस पास में चारू, जैनब, और सुनैना ये तीन लड़कियाँ रहती हैं। जब वे स्कूल में थी तब उनका मेरे घर में आना जाना रहता था। अब वे २१ साल की हो चुकी हैं। जब स्कूल में थी, उस वक्त से मैं उन तीनों बहुत चाहता था और चोदा भी खूब मजे किया दोस्तों आज मस्ताराम की कहानियां पढ़ के मेरे दिल में आया क्यों न मै भी अपनी कहानी शेयर करू सो लीजिये ….
एक दिन की बात है, उस वक्त मेरे घर में मैं अकेला था, और मैं कम्प्यूटर पर ब्ल्यू फिल्म देख रहा था। तभी चारू, जैनब और सुनैना मेरे घर चली आई। उन्हें देखते ही मैंने फिल्म बंद कर दी। वे मुझे नागेन्द्र नाम से बुलाती हैं। नागेन्द्र.. तू घर पर अकेले क्या कर रहा है? ऐसे चारू ने पूछा। मैंने कहा- कुछ नहीं ! कम्प्यूटर पर काम कर रहा था… पर आज तुम तीनों मेरे घर अचानक.. एक साथ ? क्या कुछ काम था..? मैंने पूछा तो सुनैना ने कहा- कॉलेज को छुट्टी है तो तुम्हारे साथ कुछ खेल खेले ऐसा सोचकर हम चली आई ! तू भी तो अकेला है… क्या खेलें…..? तो जैनब बोली- आँख मिचौली खेलते हैं…मैंने भी कहा- ठीक है…. वैसे मेरा घर बहुत बड़ा है, चाल में हमारा घर ही बड़ा है, एक बेडरुम, किचन और हॉल – ऐसे तीन कमरे थे, जिनमें हॉल सबसे बड़ा है। चारू बोली- राज कौन लेगा….तो मैंने कहा- हम लॉटरी निकालते हैं….ठीक है- तीनों ने माना। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | फिर मैंने परची डाली और सुनैना से कहा- इनमें से एक उठाओ ! जिसका नाम आयेगा वो राज लेगी…. ठीक है !सुनैना ने परची उठाई तो जैनब पर राज आई।उस वक्त उन तीनों ने स्कूल की ड्रेस पहनी थी। घर में भी वे तीनों अक्सर स्कूल ड्रेस ही डाला करती थी। जैनब ने उस वक्त चॉकलेटी रंग का पेटिकोट और अंदर से शर्ट पहना हुआ था, सुनैना ने पंजाबी ड्रेस की तरह नीले रंग का कुरता और आसमानी रंग का पज़ामा पहना था, ऊपर से दुपट्टा लिया था और चारू ने पीले रंग का स्कर्ट और टॉप पहना था। मैं उस वक्त बरमुडा और टी-शर्ट में था। सुनैना बोली- जैनब पर राज आया है ! उसकी आँखों पर पट्टी बांधो…. मैंने कहा- सुनैना, मेरे पास तो पट्टी नहीं है…. तो चारू बोली- अरे नागेन्द्र !

सुनैना का दुपट्टा कब काम आयेगा

….सुनैना बोली- ठीक है… दुपट्टा ही बांधती हूं….सुनैना ने अपना दुपट्टा निकाला और और जैनब की आँखों पर बांधा।जैनब जिसे छुएगी उसको फिर राज लेना होगा… ऐसे सुनैना ने कहा और खेल शुरू हुआ। हम तीनों इधर उधर भागे, आँख पर पट्टी बंधी जैनब हम तीनों को खोजने लगी। मैं जैनब को हाथ लगा कर पीछे हट जाता था। वैसे ही सुनैना और चारू ने शुरु किया। अचानक मेरा हाथ जैनब के स्तनों पर लग गया और उस वक्त मैं पकड़ा गया। अब मेरे बारी थी। मेरे आँखों पर सुनैना ने पट्टी बांधी। पट्टी बांधते समय सुनैना के स्तन मेरे पीठ पर छू रहे हैं, ऐसा मुझे महसूस हुआ। तभी मेरा लंड खड़ा हुआ। अब मैं तीनों को खोज रहा था। अचानक चारू बोली, अरे नागेन्द्र तुम्हारी जेब ऐसे फ़ूली क्यों है, कुछ जेब में है क्या….? मैं घबरा गया- नहीं नहीं ! कुछ नहीं ! यह तो ककड़ी है जो मैं रोज खाता हूँ…. अच्छा मुझे भी चाहिए ! चारू बोली और जिद करने लगी। देता हूँ | खेल तो पूरा होने दो ! नहीं पहले दो ! नहीं तो मैं निकाल लूंगी ! सुनैना तो जिद पर आ गई। मैं बोला- पास मत आना सुनैना ! आऊट हो जाओगी… पर सुनैना नहीं मानी, उसने जैनब और चारू से कुछ छुपी बातें की। नागेन्द्र | तुझे छूने ही नहीं दूंगी तो कैसे आऊट होऊँगी? खेल शुरु रख कर भी मैं ककड़ी निकाल सकती हूँ… सुनैना बोली। उस वक्त मैं कुछ नहीं समझा मैं तीनों को ढूँढ रहा था कि अचानक जैनब और चारू ने मेरे हाथ कस के पकड़ लिए। मैं बोला- अरे यह क्या कर रही हो…? तो चारू बोली- नागेन्द्र, तू हमें छू नहीं सकता क्योंकि हमने तुम्हारे हाथ पकड़े हैं… मैं उस वक्त डर गया। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |  तभी सुनैना ने मेरे जेब में हाथ डाला. और ककड़ी खींचने लगी… सुनैना ने ककड़ी नहीं, मेरा लंड पकड़ लिया था पर उसे कुछ नहीं पता था। इधर दोनों ने मुझे कस कर पकड़ लिया था। जैनब बोली- सुनैना ककड़ी निकालो… सुनैना बोली- नहीं निकल रही है… चारू बोली- अरे शायद नागेन्द्र ने अंदर में ककड़ी रखी होगी…. ऊपर वाली पैंट उतारो…चारू झट से बोल गई तो सुनैना शरमा गई।अरे, क्या शरमाना ! नागेन्द्र तो अपना दोस्त है….अब मेरा भांडा फ़ूटने वाला है, मैं बहुत घबरा गया क्योंकि मैंने अंडरवीअर नहीं पहना था, सिर्फ बरमुडा पहना था।तभी सुनैना ने मेरा बरमुडा खींचना शुरु किया। मैं हलचल करने लगा पर आखिर में सुनैना ने मेरा बरमुडा खींच ही लिया। बरमुडा नीचे आते ही मेरा सात इंच का लंड तीनों को सलामी देने खड़ा हुआ था। तीनों दंग रह गई। जैनब चिल्लाई- बाप रे ! कितना बड़ा है नागेन्द्र तेरा लंड…. नहीं, यह इतना बड़ा नहीं है, यह तो तुम तीनों को देखकर बड़ा हो गया है…. अब मैंने हथियार डाल दिए और सच सच बातें करने लगा। जैनब, सुनैना चारू सुनो ! मैं तुम तीनों को चाहने लगा हूँ ! तुम्हारी जवानी का रस पीने की कोशिश कर रहा हूँ !चारू बोली- कौन सा रस…?तब मैंने चारू से कहा- बुरा नहीं मानेगी तो मैं साफ बात करुँ….? तभी सुनैना बोली- अरे नागेन्द्र ! तू बिदांस बात कर…. कुछ मदद चाहिए वो भी हम देंगे….तब मैंने खुलकर बातें करना शुरू किया, मैं बोला- मैंने तुम तीनों के बहुत बार स्तन दबाये हैं और अपना लंड तुम्हारे शरीर को छुआया है। तभी मेरा लंड ऐसे ही खड़ा हो जाता है…. अभी तुम्हारे स्तन देखकर इन्हें चूसने का मन कर रहा है ! और.. जैनब बोली- नागेन्द्र और क्या…. तो मैंने कहा- मेरा लंड तुम तीनों चूसें ! ऐसी मेरी इच्छा है |

और मेरा लंड तुम्हारी चूत में डालने की इच्छा है तो चारू बोली- तो उसमें क्या है नागेन्द्र |

अभी तक तो तूने हम तीनों से ऊपरी-ऊपरी मज़े लिए, अब सच में इस नये खेल का हम आनंद उठाते हैं |

जैनब और सुनैना ने कहा- हाँ नागेन्द्र तुम जैसे चाहे हमें चोद सकते हो ! शादी के बाद तो हमारा पति हमें चोदेगा, उससे पहले कैसे चोदते हैं यह सीख लिया तो शादी के बाद परेशानी नहीं होगी। कैसे शुरुआत करें….? चारू बोली।मैंने फिर परची डाली और जैनब को कहा- एक एक कर के तीनों को उठाओ।जैनब ने उठाई तो पहली परची में सुनैना का नाम था, दूसरी में जैनब का और तीसरी में चारू का नाम आया।मैंने कहा- देखो, परची में जैसे नाम आएँ हैं, वैसे ही मैं एक एक को चोदूँगा…. ठीक है ! तीनों मान गई। सुनैना, तेरा नाम पहले आया है, तू तैयार है ना….? सुनैना बोली- हाँ, मैं तैयार हूँ, मुझे क्या करना होगा?सुनैना तू कुछ नहीं करेगी ! करुंगा तो मैं, जब करना हो तो मैं बोलूँगा। बाद में तुम खुद ही करोगी, ऐसा ही यह खेल है…. आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | सुनैना चलो, बेडरुम में चलते हैं…. मैंने कहा। तभी जैनब बोली- नागेन्द्र, क्या हम भी आ जायें ? हाँ चलो, तुम भी देख लो कि कैसे चोदते हैं। हम चारों बेडरुम में चले गये। मैंने सुनैना को बिस्तर पर लिटाया और उसके गाल चूमना शुरु किया। सुनैना ने थोड़ी हलचल की क्योंकि यह सब वह पहली बार महसूस कर रही थी। मैंने सुनैना के ओंठ पर अपने ओंठ रखे, फिर गले का चुंबन लेने लगा, फिर और नीचे आकर उसके स्तन को चूमने लगा, कपड़ों के ऊपर से मैंने उसके स्तन दबाना शुरु किए। फिर मैं सुनैना का कुर्ता उतारने लगा। सुनैना अब ब्रा पहनती थी, कुर्ता उतारते ही उसके स्तन उभर कर आगे आये। सुनैना तुम्हारे स्तन तो आम जैसे पक गये हैं ! मैंने कहा। सुनैना बोली- अब रस पी जाओ भी ? तभी मैंने सुनैना की ब्रा भी उतारी, अब स्तन पूरे खुले गये थे। मैं स्तन देखकर उन पर लपक पड़ा।

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The Author

गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें

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