जीजा का लंड खाकर भी दो यार से चुदवाती

हाय ! मस्ताराम डॉट नेट के पाठकों मेरी यह कहानी पूरी तरह से मेरी फैनटसी पर आधारित है। दरअसल उसके बाद दीदी की शादी हो गयी और वह अपने घर चली गयी और कुछ समय बाद ही अपने पति के साथ विदेश चली गयी। अब वह अपने पति के साथ मस्त है। शुरू में तो वह अपनी फटी हुई चूत को लेकर बहुत डरी हुई थी। पर कई बार की चूदी होने के बाद भी उसके पति ने जब उस पर कोई शक नही किया या जाहिर नहीं किया तो वह नार्मल हो गयी। उसने बस इतना किया कि सुहागरात पर जीजाजी ने जब पहली बार लंड उसकी चूत में डाला तो उसने अपनी टांगें भींच लीं और तडफने का नाटक किया। फिर दो तीन बार और ऐसा किया।
अब वह सब कुछ भूल कर अपने पिया की प्यारी है। दीदी ने तय कर लिया है। कि अब वह जीजाजी के अलावा किसी और से नहीं चुदवायेगी। वह भले ही सब कुछ भूल गयी पर मैं कैसे भूलूं। मैं तो जब भी अकेला होता हूँ उसकी चुदाई की कल्पना में खो जाता हूँ। इसलिये यह मेरी फैनटसी बन गयी। अब मैं उसकी शादी को अलग रख देता हूं और कहानी आगे बडाता हूं..
तो दोस्तो हाजिर है दीदी की चुदाई के आगे का हाल…..

सूरज ने एक बार फिर दीदी को जगा दिया। महिने में एक दो चक्कर उसके लगते ही थे। जब भी आता था पापा के आफिस टाईम में समय निकाल कर आ जाता था। मेरा तो कोई बंधन था नहीं सो पूरे अधिकार के साथ बैडरूम में ले जाता था और आराम से चोदता था। पर दीदी का इस कभी कभी की चुदाई से काम नहीं चल रहा था। वह एक पक्की चुद्दकण बन चुकी थी। कहते हैं जहाँ चाह होती है वहाँ राह अपने आप मिल जाती है। इसी बीच उसके कॉलेज मे प्रतीक नाम के उसके सीनियर ने उसे लाइन मारना शुरू कर दिया। दीदी उसकी सॉलिड पर्सनलिटी पर फिदा हो गयी पर दोस्ती करने से डरती थी। प्रतीक शहर के एक बड़े आदमी का बेटा था और कॉलेज में दादागिरी के अलावा उसे और कोई काम नहीं था। वह अपनी एय्याशी के लिये बदनाम भी था। आम तौर पर शरीफ लडकियाँ उससे बचती थी। पर उसकी पर्सनलिटी और चूत की खुजली ने दीदी के डर को दबा दिया और फिर वह उसे लिफ्ट देने लग गयी। इस मामले में उसने मुझे भी अलग रखा। धीरे धीरे उनकी दोस्ती बडने लगी और वे आये दिन कैंटीन या किसी रेस्टोरेंट में साथ दिखने लगे। लेकिन यह सब कॉलेज टाईम तक ही सीमित था। एक दिन वे एक रेस्टोरेंट में बैठे थे…

सीमा अब इस दोस्ती को कुछ आगे बढायें………प्रतीक ने उसका हाथ पकड कर कहा क्या…ऐसे ही ठीक है ना…..दीदी ने अपना हाथ आराम से उसके हाथ में दे दिया चल कभी लॉग इाइव पर चलें…… क्यों…. ऐसे ही कुछ प्यार श्यार हो जाये…..वह आंख मारते हुए बोला धत्त..

अभी तो देर हो जायेगी……….दीदी ने घडी देखते हुए कहा पर वह तैयार तो थी ही । बल्कि यदि यह कहा जाये कि इसका ही इंतजार कर रही थी तो गलत नहीं होगा।

चल थोडी देर घूम कर आते हैं…और प्रतीक ने दीदी को हाथ पकड कर उठाया और फिर कार में शहर से बाहर ले गया। हाइवे पर आने के बाद उसने गाडी एक साइड लेन में डाल दी और फिर एक सूनसान स्थान पर रोक दी और दीदी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा तो वह उसकी बांहों में चली गयी। उसने अपने होंठ उसके होठों पर जमा दिये और फिर लगभग आधे घंटे तक वह उसे जगह जगह प्यार करता रहा। चूंकि समय कम था सो वे जल्दी ही वापस आगये। अब यह रोज का काम हो गया और 15 – 20 दिन में ही उनकी दोस्ती चुम्मा से शुरू होकर चूत लंड सहलाने तक पहुंच गयी। वह उसे आये दिन अपनी कार में कहीं एकांत में ले जाता था और बूब रगडता था। बतों में भी वे इस बीच खुल चुके थे। बातों ही बातों में दीदी अपने पहले से चुदे होने पर सहमति जता चुकी थी। इस तरह दीदी की बेचैनी और बढती जारही थी। प्रतीक इसे समझ रहा था पर शायद उसे पका रहा था। एक दिन वह उसे शहर से बाहर जंगल में ले गया

ये कहां ले आये आज…यहां तो कोई भी नहीं दिख रहा…. तभी तो लाया हूं मेरी जान…ये सहलाने वहलाने से काम नही चलता…आज तो तेरी चूत की गहराई नापनी है…और प्रतीक ने उसे अपनी ओर खींचा। दीदी को तो इस दिन का इन्तजार ही था सो उसकी गोद में जा गिरी और बोली ये कोई जगह है….यहां नहीं…. पर उसका यह इंकार बनावटी था यह बात प्रतीक भी जानता था सो उसे जोर से भींच लिया। फिर कुछ देर प्यार करने के बाद वह उसे पीछे की सीट पर ले आया और पहले नीचे से नंगा किया और फिर उसका शर्ट उपर खिसका सीधे लिटा दिया। फिर उसने अपना पैंट उतारा और लंड हाथ से सहलाते हुए उपर आ गया। कुछ देर चूमने के बाद उसने लौडा चूत में उतार दिया और धीरे धीरे चोदने लगा। ज्यादा तेज चोट मारने का तो कार मे स्कोप था ही नहीं पर प्रतीक पर ज्यादा देर टिक भी नहीं पाया। उसके तो लंड का तो पानी निकल गया पर दीदी की प्यास और बढ़ गयी (यह शायद उसकी चाल ही थी) दीदी बुरी तरह से तडफने लगी….

ये क्या प्रतीक…बीच में ही छोड़ दिया…… कार में तो इतना ही हो सकता है ना……. तो कहीं और ले चलना था ना….. अरे यार आजकल होटल्स में पुलिस का बहुत डर हो गया है……. ऐसे तो फिर आगे से मैं नहीं आऊंगी …….दीदी की आवाज में एक तडफ सी थी

चल नेक्स्ट टाइम देख लेंगे …..और वह उठ गया….

किसी अच्छी जगह का इंतजाम करो….दीदी कपडे पहनते हुए बोली….. जगह तो है अगर तु मान जाये तो ……..प्रतीक ने कुटिलता से बोला ??????????? अग्नेय के घर पर…… ???????????? पर…वहाँ एक प्रॉब्लम है….

क्या…????? दीदी अब कपडे पहन चुकी थी

वो भी चोदेगा…बातों में तो पूरी तरह से खुल ही चुके थे। पर वो तो तुम्हारा अच्छा दोस्त है….इतना भी नहीं मानेगा….. अरे वो पक्का कमीना है….नहीं मानेगा ……. नहीं कोई और जगह देखो…..

वैसे वो मेरा विश्वास का दोस्त है…..

नहीं…….

मान जा इससे तुझे क्या फर्क पड़ता है….

अच्छा मैं कोई रंडी हूं क्या……

अरे यार एक और दो में क्या फर्क है…

चल आज ही चलते हैं….

तेरी चूत की खुजली मिट जायेगी और आगे के लिये भी जगह बन जायेगी…..।

नहीं………

वैसे भी वो कौनसी कोई सती सावित्री थी। दो से तो पहले ही चुदवा चुकी थी और तीसरे का लंड अभी अभी लिया है फिर बी बोली
नहीं मुझे तो घर छोड़ दो…..

हालांकि उसकी आवाज में विरोध कम और सहमति ज्यादा थी। प्रतीक ने उसे समझाया और फिर अग्नेय को फोन कर दिया। दीदी विरोध तो कर रही थी पर उसके विरोध में ज्यादा दम नहीं था। उसके लिये एक नया अनुभव था इसलिये डर और रोमांच के बीच वह झूलती रही कि प्रतीक उसे अग्नेय के फ्लैट पर ले आया। अग्नेय ने उनका स्वागत किया। प्रतीक ने दीदी का हाथ पकड़ा और बडे सोफे पर ले आया। दीदी चुपचाप बैठ गयी। प्रतीक ने अपना हाथ उसकी कमर में डाला और अपनी ओर खींचते हुए बोला…..

शरमा मत यार…ये अपना ही घर है…और अग्नेय से क्या शरमाना….इसे तो सब पता है….. इसी बीच अग्नेय कोल्ड ड्रिंक ले आया और उसकी बगल में बैठ गया। कोल्ड ड्रिंक पीते पीते अग्नेय ने उसकी जांघ पर हाथ रखकर दबाया और बोला…..

जब से इसने तेरे बारे में बताया तभी से मैं तो मिलने के लिये तडफ रहा था…..

दीदी चुपचाप बैठी रही। थोड़ी देर में ही उन्होंने दीदी को तैयार कर लिया और उसे अपने जांघों पर लिटा लिया। उसका सर अग्नेय की गोद में था और पैर प्रतीक की में। अग्नेय ने अपना चेहरा झुकाया और अपने होंठ उसके होठों पर जमा दिये तथा प्रतीक ने जांघ सहलाना शुरू कर दिया। इसी के साथ दोनों ने एक एक चूची संभाल ली। अग्नेय उसके होठ चूस रहा था तो प्रतीक का हाथ सलवार के उपर से ही उसकी चूत को रगड़ रहा था। जल्दी ही दोनों गरम होगये तो उनके प्यार में सख्ती आगयी। अब दीदी बिलबिलाने लगी और छूटने की कोशिश करने लगी। वह जैसे तैसे छूटी और उनकी गोद से फिसलकर नीचे गिर गयी। वह हॉफ रही थी और वे भूखी नजरों से देख रहे थे। वे दोनों उठे और फिर अग्नेय ने उसकी कमर पकड कर उठाया और बोला… क्या हुआ रानी… ये क्या कर रहे हो…मेरी तो सांस ही रुक गयी थी…… क्या करें रानी तू है ही इतनी हसीन……प्रतीक ने उसे चूमते हुए कहा। कहाँ चुदवायेगी…यहीं या बैडरूम में अग्नेय ने पीछे से ही उसकी चूची थाम लीं

पर एक साथ नहीं एक बार में एक ही लंड जायेगा बहन के लौंडी चिंता मत कर…

और वे उसे बैडरूम में ले गये। अन्दर आते ही उन्होंने सबसे पहले दीदी को पूरा नंगा किया और बिस्तर पर पटक दिया। दीदी ने आंखें बन्द करलीं। फिर वे भी नंगे होगये। दोनों के लंड खडे हुए थे। अग्नेय सीधे दीदी के मुंह के पास आया और अपना लंड उसके गाल पर लगा दिया। दीदी चिंहुक पडी और उसे दूर हटाया।

ये क्या बदतमीजी है…..वह गुस्से से बोली क्यों चूसेगी नहीं…..अग्नेय बोला छिः…ये गन्दा काम में नहीं कर सकती… ये क्या यार प्रतीक …तुने इसे ढंग से ट्रेनिंग नहीं दी लगता है…..

अग्नेय हँसते हुए बोला आज पहली बार ही तो चोदी है…सब सीख जायेगी…यारों के साथ रहेगी तो…. प्रतीक भी हँसा। बकवास मत करो….एक को तुम्हारी बात मान कर यहाँ आगयी हूं..उपर से तुम्हारे दोस्त को भी झेलू ……। अच्छा ..दो दो लौड़े का मजा भी तो लेगी रंडी…..प्रतीक ने जोर से उसकी चूची दबाई अरे यार नाराज मत हो….अग्नेय उसकी बगल में लेटकर उसे चूमते हुए बोला। ?????????? बस खुलकर दिखादे अपनी मस्त चूत के जलवे….अग्नेय ने अपनी टांग उसकी टांगों पर रखदी। इसी बीच प्रतीक भी बगल में आगया और उसके बूब्स से खेलने लगा। उनके फनफनाते लंड भी उसके शरीर पर जगह जगह छेद करने की कोशिश कर रहे थे। दीदी भी अब शुरू होने लगी। उसने उनके लंड अपने एक एक हाथ में थाम लिये और उपर नीचे करने लगी। थोड़ी ही देर में तीनों ही गरम होगये।

चलो अब शुरू करो ना…दीदी ने धीमे से कहा ऐसी क्या जल्दी है मेरी जान……प्रतीक ने उसकी चूत पर हाथ रखते हुए कहा तो अग्नेय उसके उपर आया और बोला चल बहन के लौडी ..टांग खोल दीदी ने अपनी टांगें फैला ली और फिर अग्नेय का लंड पकड कर चूत पर टिका दिया तो अग्नेय ने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा लन्ड चूत में उतार दिया और फिर बिना रुके ही दनादन चोदने लगा। दीदी हाय हाय करती रही और वह पूरी ताकत से चोदता रहा। थोड़ी देर चोदने के बाद व हट गया और प्रतीक ने उसकी टांगें अपने कंधों पर रखकर पेलना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद वह हट गया और अग्नेय ने मोर्चा सम्भाल लिया। दरअसल जैसे ही वो झड़ने को होते वे अपना लंड खींच लेते थे। दीदी अब भर चुकी थी और उसे सहन नहीं हो रहा था

आअह्ह्ह्ह्ह …उउउह्ह …ये क्या कर रहे हो ..अब बस खतम करो…..। रुक जा चुद्दकड ऐसे कैसे खतम कर दें …आज तेरी चूत का हलवा नही बनाया तो कहना…और फिर उन्होंने उसे चौपाया बनाया और फिर पिल पडे। दीदी ज्यादा सहन नहीं कर पायी और झड गयी और औंधे मुंह बिस्तर पर पड गयी। पर वो कहाँ मानने वाले थे उन्होंने उसे सीधा किया और फिर अग्नेय ने उसकी चूत पौंछी। झडने के बाद चूत टाइट हो गयी और जब अग्नेय ने वापस लौडा डाला तो दीदी की चीख निकल गयी।

वह चीखती रही और वे चोदते रहे। आखिर दोनों ने अपने अपने लन्ड खाली कर दिये। दीदी बुरी तरह से निढाल हो चुकी थी। उसके बाद तो वह उनकी रंडी बन गयी। आये दिन वे उसे बुलाने लगे और पूरी मस्ती और अधिकार के साथ चोदते।