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पहली रात में तीन लंड खाई

प्रेषक : सुमन,

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम सुमन है और में सासाराम के पास एक छोटे से गाँव में रहती हूँ और में अपनी नौकरी के लिए तैयारी कर रही हूँ। मेरी दो दोस्त की मुझसे पहले ही नौकरी लग चुकी है और उनमे से एक की तो कुछ समय पहले शादी भी हो गई। दोस्तों हम सभी का एक बहुत अच्छा दोस्त है जिसका नाम बिट्टू है और उसकी उम्र 25 साल, वो लंबा और पतला सा बहुत अच्छा दिखने वाला लड़का है। दोस्तों वो भले ही एक टेक्सी ड्राईवर है, लेकिन उसने करीब 9 महीने पहले हम तीनों को पहली बार चोदा था और तब से में उसे साजन ही बोलती हूँ और अब में उससे शादी करना चाहती हूँ, लेकिन मेरे घरवाले किसी भी टेक्सी ड्राइवर से मेरी शादी नहीं करेंगे और इस बात का मुझे पूरा पता है, क्योंकि मेरे पापा की हमारे पूरे गाँव में बहुत इज़्ज़त है और मेरे यह सब करने की वजह से उनकी इज्जत खराब होगी।

फिर मैंने एक दिन मन ही मन फैसला लिया कि में मेरे बिट्टू साजन के साथ ऐसे ही मज़े लेती रहूँगी और अपनी बची हुई पढ़ाई के सिलसिले में मैंने सासाराम में एक रूम ले लिया था और फिर वहाँ पर में एकदम अकेली ही रहती हूँ और हर कभी अच्छा मौका पाकर में बिट्टू से मिल भी लेती हूँ और बिट्टू की हर बात को में हमेशा मानती थी, क्योंकि उसने ही मुझे पहली बार आज से 9 महीने पहले चोदा और मुझे वो सब सुख दिया और मेरी कुंवारी चूत और गांड को फाड़ दिया था।

दोस्तों बिट्टू ने कुछ दिन पहले मुझसे कहा कि जैसे तुम तीनों लड़कियों ने 9 महीने पहले मुझसे चूत और गांड मरवाई थी वैसे ही में और मेरे दो दोस्त एक साथ मिलकर तेरी चूत और गांड को मारेंगे। मैंने उसकी यह बात सुनकर हंसकर टाल दिया और मैंने बिट्टू से कहा कि तू मेरी चूत और गांड से बदला लेगा और मेरी यह बात सुनकर वो भी हंसने लगा, लेकिन मेरे मन से यह बात निकली नहीं थी। दोस्तों मुझे बिट्टू के अलावा आज तक किसी ने नहीं चोदा था। बिट्टू के लंड में कितना दम है वो मेरी चूत और गांड के अलावा कोई नहीं जान सकता।

अब बिट्टू ने भी जितना मज़ा मेरी चूत और गांड का लिया उतना किसी का नहीं लिया था। बिट्टू जब भी मुझे चोदता तो वो अपने लंड के टोपे को मेरी चूत और गांड में फंसाकर मुझे बहुत गरम करता और उसके लंड की साईज़ 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा था और उसके लंड का टोपा 2 इंच मोटा और लाल कलर का था। अब मेरी चूत और गांड पूरी तरह से खुल चुकी थी, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं था कि 3-3 लड़के एक साथ मुझे चोदे और मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़े। अब आख़िर वो टाईम भी आ गया जब बिट्टू का प्लान पूरा होने वाला था। उसने मुझे कॉल किया कि आज सासाराम में ही रहेगी या गाँव जाएगी? तो मैंने बोला कि में तो यहीं रहूँगी और मैंने उससे कहा कि साजन मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है, प्लीज तुम आ जाओ ना। फिर वो फोन पर हंसते हुए बोलने लगा कि रानी में जरुर आऊंगा भी और आज रात में तुझे बहुत कुछ दूंगा।

दोस्तों बिट्टू के साथ मैंने रात में कभी सेक्स नहीं किया था। उसके साथ जब भी सेक्स किया वो दिन में ही किया था, क्योंकि रात में चुदाई का मौका हमे कभी मिलता ही नहीं था। फिर मैंने उस दिन मेरी चूत के बाल मेरे साजन के लिए साफ कर लिए और ब्यूटी पार्लर जाकर अच्छे से तैयार हो गई और मार्केट जाकर गुलाबी कलर की नई ब्रा और पेंटी जाली वाली ले आई, क्योंकि यह कलर बिट्टू को बहुत अच्छा लगता था और चुदाई के काम में आने वाले सामान क्रीम और तेल मेरे पास पहले से ही थे, वो सब मुझे मेरी एक दोस्त गीता जो एक नर्स है उसने लाकर दिए थे और अब में अपने साजन के लिए तैयार होकर उसका इंतज़ार करने लगी।

फिर इतने में किसी ने दरवाजा खटखटाया मैंने दरवाजे के छेद में से बाहर देखा तो मुझे बाहर बिट्टू खड़ा नज़र आया और उसके साथ करीब 18-19 साल के दो लड़के और वो दोनों भी दिखने में अच्छे और तन्दुरुस्त लग रहे थे, लेकिन में अब बिट्टू के साथ दो और लड़के देखकर थोड़ा सा घबरा गई, लेकिन फिर भी मैंने मेरे बिट्टू साजन के लिए दरवाजा खोल दिया। फिर वो तीनों अंदर आ गये और मैंने तीनों को बैठाकर पानी पिलाया उस समय रात के करीब दस बज चुके थे। दोस्तों बिट्टू की तरह ही उनका भी शरीर साफ था और बिट्टू ने उनसे मेरा परिचय करवाया और उनके बारे में मुझे बताया। उनमे से एक का नाम नागेन्द्र था और वो एक सिनेमा हॉल में नौकरी करता है, दूसरे का नाम अमोद था और वो कभी कभी बिट्टू की टेक्सी चला लेता था।

दोस्तों मेरा कमरा इतना सुरक्षित है कि वहां पर किसी की नज़र नहीं पड़ती कि कौन आ रहा है और कौन जा रहा है? अब हम चारों एक दूसरे को चुपचाप देख रहे थे कि तभी मैंने महसूस किया की नागेन्द्र और अमोद को बिट्टू धोखे से मेरे रूम पर लेकर आया था, इसलिए वो मेरी जालीदार स्कर्ट जिसमे से मेरी पेंटी साफ साफ नज़र आ रही थी उसे देखकर अजीब सा महसूस कर रहे थे। अब बिट्टू ने मुझे आँख मारकर इशारा कर दिया कि आज हम तीनों तेरी प्यास को दूर करेंगे और अब मैंने ज़्यादा टाइम खराब ना करते हुए बिट्टू के प्लान को अंजाम तक पहुँचाने की शुरुआत कर दी, क्योंकि में बिट्टू की हर बात की बहुत इज्जत करती थी और बिट्टू की वजह से मुझे उन दोनों से भी कोई डर नहीं था।

अब मैंने बाथरूम में जाकर मेरी स्कर्ट के हुक को ऐसे लगाया कि अगर में उनके सामने हल्की सी भी झुक जाऊँ तो मेरी स्कर्ट अपने आप नीचे गिर जाए और फिर बाथरूम से बाहर आकर में उनके सामने जाकर पानी का गिलास उठाने के लिए झुकी तो मेरी स्कर्ट गिर गयी और उस समय मेरे चूतड़ अमोद की तरफ थे।

अब में वापस बाथरूम में भागने का नाटक करते हुए लड़खड़ाकर बिट्टू और नागेन्द्र के बीच गिर गई और नागेन्द्र की पेंट में लंड की जगह पर मेरा एक हाथ आ गया और अब में चोर नज़र से देख रही थी कि बिट्टू के साथ साथ उन दोनों का लंड भी पेंट के अंदर ही अंदर हरकत करने लगा और इसी के साथ वो तीनों लंड मुझ पर टूट पड़े। बिट्टू मेरे बूब्स को दबा रहा था तो नागेन्द्र मेरी चूत पर हाथ रगड़ रहा था और अमोद मेरे चूतड़ दबा रहा था। अब बिट्टू ने मेरी ब्रा तो नागेन्द्र ने मेरी पेंटी को उतार दिया था। वैसे उसमे उतारना क्या था वो तो वैसे ही जालीदार थी, लेकिन उनके इरादे और मेरे प्लान के अनुसार चूत और गांड की चुदाई के लिए यह सब उतारना बहुत ज़रूरी भी था।

दोस्तों नागेन्द्र तो साला सबसे तेज लग रहा था और अमोद भी बिट्टू से कम नहीं था और मेरे बिट्टू साजन को तो मैंने पहले भी कई बार आजगीता हुआ था। अब में उनके सामने बिल्कुल नंगी थी और उन तीनों मदारचोदो ने अभी तक तो अपने अपने ऊपर के कपड़े भी नहीं उतारे थे तो मैंने नागेन्द्र की शर्ट को उतार दिया और उसकी जीन्स को खोलने के लिए उसका हुक निकाल दिया। दोस्तों पता नहीं क्यों, लेकिन आज में नागेन्द्र की तरफ कुछ ज़्यादा ही आकर्षित हो रही थी और अब मैंने उसकी पेंट को भी उतार दिया तो उसके हाथ, पैर और जांघे एकदम टाईट और मस्त लग रही थी। फिर मैंने बिट्टू की शर्ट और पेंट को भी उतार दिया और वो पीछे पलटकर मेरे चूतड़ को दबा रहा था और मैंने अमोद की टी-शर्ट और पेंट को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब अमोद भी अब बिल्कुल नंगा हो गया था, क्योंकि उसने अंदर कुछ नहीं पहना हुआ था। अब मैंने उसके लंड को छेड़ा और कहा कि क्यों नौजवान अंडरवियर नहीं पहनता? तो वो बोला कि क्या करूं यार मेरा एक दोस्त और एक गर्लफ्रेंड मुझसे मना करते है।

अमोद का लंड भी बिट्टू जैसा ही था और उसका टोपा गुलाबी नहीं होकर बिल्कुल लाल था, जिसको देखकर ऐसे लग रहा था कि जैसे खून निकलने वाला है और उसकी जांघे एकदम पतली थी, लेकिन देखते ही उसमे दम लग रहा था, क्योंकि वो अभी अभी तो जवान हुआ था। अब मैंने बिट्टू की अंडरवियर और बनियान को भी उतार दिया और उसको यह मैंने ही उसके जन्मदिन पर दी थी। मैंने बिट्टू के लंड को किस किया और उसके आंड को अपने मुहं में लेकर चूसा तो अमोद अपने लंड से मेरी गांड की दोनों दीवारों के बीच हरकत करने लगा। फिर मैंने उससे कहा कि अमोद बेटा थोड़ी तस्सली रख, अभी तो मैंने तेरे लंड को चूसा ही नहीं, इसलिए अभी मेरी गांड का नंबर नहीं आ सकता। अब वो मेरे बूब्स को दबाने लगा और नागेन्द्र ने मेरे चूतड़ दबाने शुरू कर दिए और अब नागेन्द्र का लंड उसकी वी शेप वाली अंडरवियर से एक तरफ से बाहर निकल रहा था। फिर मैंने उसकी अंडरवियर उतारकर उसको भी पूरा नंगा कर दिया।

फिर उसके फनफनाते हुए नाग ने मेरे चूतड़ पर ज़ोर से मारा तो मुझे ऐसे लगा जैसे उसने किसी डंडे की मारी हो। दोस्तों आप विश्वास नहीं करोगे उसका लंड तो उन तीनों में सबसे मोटा और लंबा और बिल्कुल सुडोल था और उसके टोपे पर चमड़ी तो थी ही नहीं और आगे का टोपा 3 इंच का था और टोपे का आकार मशरूम जैसा था जो किसी भी चूत या गांड में घुस जाए तो बाहर निकलते समय अंदर का सब कुछ बाहर निकल दे और इतने भयंकर टोपे के साथ ही लंड की लम्बाई 7 इंच थी। फिर मैंने ज़ोर से सिसकियाँ भरी और लंड को चूसने लगी। में अब एकदम पागल हो चुकी थी कि 18 साल का लड़का और उसका यह कमाल का लंड। मेरे मन की आवाज़ सुनकर नागेन्द्र ने बहुत धीरे से मुझसे बोला कि पगली में हर दिन 10 किलोमीटर दौड़ लगता हूँ और 1 घंटे फुटबॉल भी खेलता हूँ और जिम भी करता हूँ और मेरे नाग की भी में सांडे के तेल से लगातार मसाज करता हूँ और उसकी यह सभी बातें सुनकर तो में और भी जोश में आ गई।

अब मैंने नागेन्द्र का लंड चूसा और जीभ से उसकी गांड को भी चाटा और उसकी गांड के छेद में अपनी जीभ को फंसाने की कोशिश करने लगी। मुझे बहुत मज़ा आया और वो भी 69 पोज़िशन में आकर मेरी चूत और गांड को बारी बारी से चाटने लगा वो मेरी चूत के दाने को भी चाट रहा था और उधर अमोद मेरे चूतड़ और बिट्टू मेरे निप्पल को दबा रहा था। में नागेन्द्र की गांड पर और नागेन्द्र मेरी गांड पर मार रहा था, जिससे मेरी गांड पर उसके हाथों के निशान बन गये थे और ऐसा करने से हम दोनों को बहुत जोश आ रहा था और इतने में करीब 30-35 मिनट के बाद में हम दोनों अकड़कर झड़ गये और नागेन्द्र के लंड का गरम गरम लावा मेरे मुहं में पिचकारी की तरह निकल गया और में उसके लंड के पानी को पूरा पी गयी और अब मेरा पानी मेरी चूत से बाहर बहने लगा जिसको नागेन्द्र पीकर शांत हो गया और फिर नागेन्द्र वहीं पर लेट गया और में उसे सम्भालने लगी।

दोस्तों अब बिट्टू और अमोद मुझ पर भूखे की तरह टूट पड़े अमोद और बिट्टू ने मेरी चूत और गांड को चाटा और में उन दोनों के लंड का जूस बारी बारी से पी गई और जैसे ही में झड़ी तो मेरा जूस भी वो दोनों आधा आधा बाँटकर पी गये। दोस्तों में इस बीच दो बार झड़ चुकी थी और झड़ने के बाद अब हमने करीब दस मिनट तक थोड़ा सा आराम किया और हम सभी ने कॉफी पी, लेकिन हम सभी तब भी एकदम नंगे ही थे। उस समय तक रात के 12.30 बज चुके थे, लेकिन तब तक भी मेरी चूत और गांड की चुदाई नहीं हुई थी। फिर उन तीनों ने मिलकर मुझे डॉगी स्टाइल में करके मेरे दोनों पैर तो बेड पर रख दिए और मेरे आगे का हिस्सा कुर्सी पर एक तकिया रखकर मेरी ऐसी पोज़िशन बनाई कि यह तीनों लंड एक साथ मेरी चूत, गांड और मेरे मुहं की चुदाई कर सके और साथ ही साथ मेरे निप्पल और चूतड़ और जांघे भी एक साथ दबा दबाकर मसाज भी कर सके।

फिर मुझे उसी पोज़िशन में तैयार करके उन्होंने तेल और क्रीम से मेरे पूरे शरीर की मसाज की और तेल और क्रीम मेरी गांड और चूत पर कुछ ज़्यादा ही लगा रहे थे। जिसकी वजह से मुझे अंदर से ठंडक महसूस हो रही थी और हल्की हल्की गुदगुदी भी हो रही थी कुल मिलाकर यह तेल और क्रीम के साथ मसाज की भी तैयारियां हो रही थी और वो सब मेरी चूत और मेरी गांड में नागेन्द्र के लंड का मोटा टोपा घुसाने की तैयारियां थी। में यह सब समझ चुकी थी और मुझे तो केवल और केवल नागेन्द्र का लंड और उसका मोटा टोपा ही नज़र आ रहा था और अब यह सब सोच सोचकर में बहुत ज़्यादा जोश में आ रही थी।

मुझे मेरी चूत की ज़्यादा टेंशन नहीं थी, क्योंकि वैसे भी हर चूत में कितना भी मोटा लंड लेने की क्षमता और लचीलापन वैसे भी कुछ ज़्यादा ही होता है और ऊपर से बिट्टू 9 महीने से मेरी गदराई हुई चूत का भोसड़ा बनाने की शुरुआत तो बहुत पहले से ही कर चुका था। अब में उनसे अपनी तरफ से कुछ भी नहीं कर रही थी, क्योंकि मुझे बिट्टू ने मना कर दिया था कि तुम तो इसी पोज़िशन में रहो, अब जो भी करेंगे हम ही करेंगे और में मेरे साजन की बात मानकर चुपचाप मज़े लिए जा रही थी। अब बिट्टू ने अपना लंड मेरे मुहं में दे दिया और नागेन्द्र ने नीचे जाकर अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया, जो बार बार गांड के छेद की तरफ जा रहा था और अमोद ने मेरे ऊपर पोज़िशन बनाकर मेरी गांड की दोनों दीवारो के बीच क्रीम के साथ अपने लंड को स्पीड से रगड़ना शुरू किया जो फिसलकर चूत की तरफ जा रहा था, लेकिन अमोद के लंड का टोपा तो फिर भी चूत और गांड के छेद पर कुछ अटक रहा था जबकि नागेन्द्र के लंड का टोपा तो ऐसे फिसल रहा था जैसे मार्बल के फर्श पर पानी में पैर फिसल रहे हो।

फिर करीब दस मिनट बाद उन सभी ने अपनी अपनी जगह बदल ली थी, जिसकी वजह से अब बिट्टू मेरे नीचे और अमोद मेरे ऊपर तो नागेन्द्र मेरे मुहं की तरफ आकर तीनों अपने अपने काम में लग गये थे, लेकिन मुहं के अलावा चूत और गांड में उनके लंड अंदर नहीं जा रहे थे और बिट्टू जानबूझ कर लंड नहीं घुसा रहा था क्योंकि वो आज मुझे नये लंड से चुदवाना चाहता था, लेकिन फिर भी बिट्टू ने मेरी गांड पर लंड का टोपा रखकर ज़ोर का धक्का मारा तो वो मेरी गांड में फंस गया और उसने क्रीम लगाकर धीरे धीरे मेरी गांड को धक्को से उन दोनों के लंड के लिए खोल दिया।

फिर करीब दस मिनट बाद फिर से उन्होंने अपनी जगह बदल ली और अब नागेन्द्र मेरी गांड पर अपना टोपा रखकर ज़ोर लगाने लगा, लेकिन मेरी टाईट गांड में उसका टाईट लंड भी अंदर नहीं जा सका और इस बीच बिट्टू ने मेरी चूत में लंड डालकर 5-6 बार रगड़कर बाहर निकाल दिया ताकि नये लंड के लिए चूत का मुहं कुछ खुल जाए। दोस्तों में एक बात तो साफ कर दूँ कि बिट्टू ने मेरी गांड और चूत में जो 5-6 धक्के लगाए थे वो मुझे चोदने के इरादे से नहीं, लेकिन उन दोनों लंड के लिए मेरी गांड और चूत में रास्ता साफ तैयार करने के लिए लगाए थे। अब वो दोनों लंड मुझे चोदने के लिए बिल्कुल तैयार थे और इतने में अमोद ने सही मौका देखकर अपने लंड का टोपा एक जोरदार धक्के के साथ मेरी गांड में डाल दिया।

मुझे दर्द हुआ, क्योंकि वो बिल्कुल अनाड़ी की तरह कर रहा था और वो मेरी गांड का सत्यानाश करने पर तुला हुआ था और नीचे से बिट्टू मेरी चूत को चोद रहा था जिससे मुझे थोड़ा दर्द कम हो गया था। फिर से अनाड़ी अमोद ने मेरी गांड में जड़ तक पूरा का पूरा लंड 3-4 धक्को के साथ घुसा दिया और तेज धक्के देकर चोदने लगा और उसका लंड बिल्कुल बिट्टू जैसा था, इसलिए मुझे उससे गांड मरवाने में कोई परेशानी नहीं हुई। अब बिट्टू मेरे मुहं के पास चला गया और मेरा सपनों का राजकुमार नागेन्द्र मेरे नीचे आकर मेरी चूत को चोदने लगा तो मेरी चूत में उसका टोपा नहीं गया। फिर बिट्टू ने मेरी जगह बदलवाई, क्योंकि उसको पता था कि लड़की कैसे चुदती है और उसने मुझे सीधा लेटाकर मेरी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया और अमोद और बिट्टू ने मेरे दोनों पैरों को ऊपर करके एक साईड में फैला दिया।

अब मेरी चूत पूरी खुल गई थी और नागेन्द्र अपना लंड लेकर मेरी चूत पर आ गया और उसने अपने लंड का टोपा मेरी चूत पर रगड़ा तो पहली बार लंड मेरी चूत के छेद पर जाकर रुका और उसने ज़ोर से धक्का मारा तो मेरी चूत फिर से फट गई और दर्द के साथ उसका टोपा मेरी चूत में फंस गया, जिसकी वजह से में तड़प रही थी, लेकिन उन कुत्तों ने मुझे कसकर पकड़ रखा था और थोड़ा रुककर वो मुझे फिर से चोदने लगे थे और उन्होंने अपनी स्पीड को बड़ा दिया तो मुझे मज़ा आने लगा और मौका देखकर नागेन्द्र मुझे लेकर खड़ा हो गया और मैंने उसकी गर्दन पर हाथ डालकर उससे लटक लटककर मज़े लेने लगी और फिर वो उसी पोज़िशन में मुझसे नीचे आ गया और में उल्टी हो गई तो अब ऊपर से मेरी गांड भी खुल गई थी।

अब मौका पाकर अमोद मेरी गांड मारने लगा और अब मेरी दोनों तरफ से भयंकर चुदाई हो रही थी और मैंने भी बिट्टू का लंड मुहं में ले लिया। फिर करीब 15-20 मिनट तक हमारी चुदाई चलती रही और में बिल्कुल पागल और एकदम बेसुध हो गई थी और अचानक मुझे लगा कि में अब झड़ने वाली हूँ तो उन तीनों ने भी अपनी धक्कों की स्पीड को और भी बढ़ा दिया था और उनके लंड अब पूरे अंदर तक जा रहे थे और मुझे नागेन्द्र के धक्के सबसे ज़्यादा ख़तरनाक लग रहे थे और कुछ देर बाद उन तीनों का एक साथ पानी निकल गया और मेरी चूत और गांड और मुहं एक साथ लंड के गरम गरम लावे के सैलाब से भर गये।

फिर में बिट्टू का पूरा पानी पी गई और अमोद का पानी मेरी गांड में भरकर मुझे अच्छा लग रहा था और उसी मस्ती में चूत ने भी पानी निकाल दिया जो नागेन्द्र के लंड के टोपे की वजह से अंदर ही रुका हुआ था और हम सभी 5 मिनट तक इस पोज़िशन में रहे और जैसे ही हम अलग हुए तो नागेन्द्र के टोपे के मेरी चूत से बाहर निकलते ही मेरी चूत से मेरी चूत के जूस और नागेन्द्र के लंड के पानी का लावा बाहर निकलने लगा। अब मैंने थोड़ा संभलकर बिट्टू, अमोद और नागेन्द्र के लंड को चाटकर साफ किया और फिर तब तक रात के 2.45 हो चुके थे और उस ताबड़तोड़ चुदाई से में भी बहुत थक चुकी थी। फिर हमने करीब 30 मिनट तक आराम कर लिया। फिर बिट्टू ने हम सबके लिए चाय बनाई और तब तक नागेन्द्र मेरे सर को गोद में लेकर सहलाता रहा और अमोद भी बहुत प्यार से अपने मुलायम मुलायम हाथों से मुझे सहला रहा था।

जिससे मुझे ऐसा लग रहा था कि उनको मुझसे लगाव हो गया है और नागेन्द्र तो कुछ ज्यादा ही भावुक हो रहा था, लेकिन हमारे पास आज की चुदाई के लिए 5 बजे तक का ही समय बचा था। फिर चाय पीकर फिर से मेरी एक और चुदाई होने वाली थी और में इतने लंड लेकर भी भूखी शेरनी की तरह उनके लंड फिर से लेने के लिए बैताब थी और वो तीनों लंड भी इसी फिराक में थे, क्योंकि अमोद को मेरी चूत लेनी थी और नागेन्द्र को मेरी गांड लेनी थी। अब हमने तेल और क्रीम से एक दूसरे की मसाज करनी शुरू की तो वो अपने लंड से मेरी गांड और चूत में क्रीम और तेल से उंगली कर रहे थे और यह सब देखकर मैंने भी क्रीम और तेल से उनकी भी गांड में उंगली डाल दी और मैंने महसूस किया कि बिट्टू और नागेन्द्र की गांड बहुत टाईट थी, लेकिन अमोद की गांड में उंगली बहुत आराम से चली गयी और उसको मज़ा भी आने लगा तो मुझे ऐसा लगा कि वो अपनी गांड भी मरवाता है। अब वैसे उससे मुझे क्या करना था? वो उसकी गांड थी जो करे वो करे और में भी तो तीन तीन लंड से गांड मरवा रही थी।

फिर ऐसा करते करते 4 बज गये थे और हमारे पास चुदाई के लिए अब एक घंटा ही बचा था। फिर बिट्टू ने शुरुआत की और उसने मेरी चूत में लंड के 8-10 धक्के दे दिए फिर उसने मेरी गांड में भी 10-12 धक्के दिए और इतने में अमोद ने मेरी चूत पर अपना लंड टिका दिया और उसने एक ज़ोर का धक्का मारा तो बहुत आसानी से उसका लंड मेरी चूत के अंदर चला गया, क्योंकि जहाँ नागेन्द्र के लंड का टोपा चला जाए वहां पर कुछ नहीं बचता, लेकिन उसका लंड मुझे दर्द से तड़पा रहा था और उसने मेरी चूत के अंदर की दीवारों को अच्छे से रगड़ दिया।

फिर अच्छा मौका पाकर नागेन्द्र मेरी गांड पर सवार हो गया और मेरी गांड की असली परीक्षा तो अब थी कि कैसे उसके लंड का टोपा मेरी गांड सहन करेगी? बिट्टू सबकी हेल्प कर रहा था और उसने क्रीम और तेल मिक्स करके मेरी गांड और नागेन्द्र के लंड पर लगाया तो हम दोनों पागल हो गये और इस पागलपन के बीच नागेन्द्र ने अपने लंड का टोपा मेरी गांड के छेद पर रखा और पूरा ज़ोर लगाकर एक धक्का मारा तो मेरी गांड को चीरते हुए उसके लंड का टोपा अंदर चला गया और मेरी गांड में फंसकर जाम हो गया। फिर बिट्टू ने जल्दी से क्रीम लगाई और नीचे से मेरी चूत को गांडू अमोद चोद ही रहा था और अब अमोद को में गांडू कहने लगी थी, क्योंकि वो गांड मरवाता था और उसकी गांड में मेरी उंगली गई तो उसको बहुत मज़ा आ रहा था। अब इफारन ने फिर से 3-4 धक्के लगाए तो पूरा लंड मेरी गांड के अंदर पहुंच गया और वो मुझे 30-35 मिनट तक लगातार चोदते रहे और अब मेरी गांड और चूत को बहुत ज़्यादा मज़ा आ रहा था।

अब नागेन्द्र ने मेरे बाल पकड़कर मुझे उल्टी घोड़ी बनाकर मेरे बाल खींचे और मेरे कूल्हों पर हाथ से मारने लगा, जिसकी वजह मुझे और भी ज़्यादा जोश आ रहा था और अब भी उसने मेरी गांड की चुदाई बंद नहीं की थी और इतने में मौका पाकर बिट्टू ने अमोद के नीचे घुसकर उसकी गांड पर क्रीम लगाकर अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया तो अमोद ने गांड में लंड जाने से गरम होकर मेरी चूत में ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। अब हम सभी आपस में चुद रहे थे कि तभी अचानक सभी ने ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने शुरू किए और पसीने की वजह से चूतड़ आपस में टकराकर थप थप थपाथप की आवाज़ कर रहे थे और फिर हम सभी एक एक करके झड़ने लगे।

अब बिट्टू ने अमोद की गांड में तो अमोद ने मेरी चूत में लंड का पानी डाल दिया और शांत हो गये, लेकिन में और नागेन्द्र शांत नहीं हुए थे। फिर 20-25 धक्के लगते ही हम दोनों भी झड़ गये और उसने मुझे घूमकर कसकर पकड़ लिया और 5 मिनट तक हम सभी ऐसे ही रहे। तीनों ने मेरी चूत और गांड को चाटा और मैंने भी उनके लंड को चाटा और फिर सभी ने कपड़े पहने और मुझे ऐसे ही नंगी छोड़कर चले गये। फिर नागेन्द्र के चले जाने से में सबसे ज़्यादा दुखी थी और मुझे कब नींद आई पता ही नहीं चला और 11 बजे मेरी नींद खुली तो मेरी गांड और चूत में बहुत दर्द हो रहा था। में जैसे ही बाथरूम में जाने के लिए खड़ी हुई तो मुझसे ठीक तरह से चला भी नहीं जा रहा था, लेकिन मुझे मेरे रूम में चुदाई की खुशबू आ रही थी और में अब नागेन्द्र से मिलने को बहुत बैताब थी। बिट्टू ने 9 महीने में मुझे चोद चोदकर चूत और गांड को कुछ ढीला कर दिया था और मेरा बदन भी थोड़ा गदराया हुआ लगने लगा था और चूतड़ तो और भी ज़्यादा सेक्सी लगने लगे थे।

फिर में जब भी अपनी कोचिंग सेंटर के लिए बाहर निकलती थी तो चलते समय मेरे चूतड़ हिलते थे तो बाहर के सभी लड़के मुझ पर ताने मारते थे और वो बहुत गंदा गंदा बोलते थे। दोस्तों अब तो मेरे सपनों के राजा नागेन्द्र ने मेरे साजन बिट्टू और गांडू अमोद के साथ मिलकर मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया था और गांड को फाड़ दिया था, जिसके कारण मेरे चूतड़ और ढीले हो गए थे जो चलते टाइम और भी ज़्यादा हिलने लगे थे ।।

धन्यवाद …

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The Author

Ruby

मै रूबी हूँ मेरी उम्र २२ साल है | मुझे सेक्सी कहानिया लिखना और पढ़ना अच्छा लगता है | अगर आप लोगो को मेरी कहानियां पसंद है तो निचे कमेंट बॉक्स में अपने अपने विचार जरुर लिखे ताकि मै आगे की कहानियो में सुधार कर सकू | थैंक यू सो मच |

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