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सामूहिक चुदाई : संत और अंकल की कामलीला

हेल्लो मेरा नाम गरिमा है, मैं बहुत गरम युवती हूँ। यूं मेरी उम्र 29 वर्ष की है,मेरी दो बेटियाँ हैं एक 9 वर्ष की ,दूसरी 2 साल की। तीन साल पहले मेरा अपने पति से तलाक हो गया, तब से मैं स्वतन्त्रता पूर्वक रह रही हूँ और मेरी मर्जी के मुताबिक सेक्स करती हूँ। वैसे तो मैं एक 52 वर्ष के अंकल से लगी हुई हूँ जो बचपन से मुझे सेक्स का अद्भुत ज्ञान दे रहे थे व मेरी आर्थिक मदद भी की। वो मेरी माँ से भी लगे हुये थे और मेरी छोटी बहन राखी उनकी ही असल संतान है, न कि मेरे अपने, सगे बाप की |

मेरे पति को पसंद नहीं था कि अंकल मेरी आर्थिक सहायता करे या मुझसे सेक्स करे। इस लिए मुझे जलील करने के लिए मुझे बिना अपनी नाराजगी का कारण बताए वे नित नयी लड़कियां ला-ला कर मेरे सामने ही उनसे संभोग करते।उनकी यह हरकत इतनी बढ़ गई कि घर एक रंडीखाना बन गया और पड़ौसी एतराज करने लगे। मैं अंकल को तो छोड़ नहीं सकती थी पर पति को जरूर छोड़ दिया।अंकल आज भी मेरी माँ को चोदते हैं और मुझे भी। मेरी दूसरी बच्ची अंकल के ही वीर्य से है।

अंकल मेरी बहन राखी को भी चोदते हैं । इस तरह से हमारा-उनका पारिवारिक संबंध है क्योंकि वो मेरी माँ-बहन को चोदे हैं और मुझे उन्होने 9 साल की उम्र में लाड़ लड़ाया मेरी बड़ी बच्ची को दो साल से अलग से प्यार करते हैं।

कहने के लिए खास बात ये है कि एक वयस्क युवती को अधिकार है कि वो अगर शादीशुदा है तो भी पराए मर्दों से अपनी बढ़ी हुई कामवासना शांत करे। मैं अंकल से सिर्फ सेक्स नहीं, प्रेम भी करती हूँ, वो मेरे पिता समान हैं।

मैं धरम-करम को भी मानती हूँ। जब से मुझे ये पता लगा कि बुड्ढे मर्द नवतरुणा ( टीनेज ) छोकरी चोदना ज्यादा पसंद करते हैं तब से मैं उनके लिए करारी, गरम और टीनेज छोरी का इंतजाम करने में रस ले रही हूँ जो कि उनकी सच्ची सेवा है।सबसे बड़ी बात ये है कि मेरे प्रेमी अंकल इसे गलत नहीं समझते । क्योंकि मैं आजकल उनके लिए नई से नई टीन टनाटन पटाका छोकरी जो ला रही हूँ और वो मेरे लिए लाते हैं |

एक से एक बढ़ कर बुड्ढे लोग ! जब से मैं एक 65 वर्ष के बुड्ढे से चुदी हूँ तबसे मैं अंकल को भी भूल गई हूँ।कामुक औरत की मस्त चूत चोदना एक कला है और मेरा खयाल है इसे कुछ चतुर बुड्ढे जानते हैं और सच कहूँ तो मैं ऐसे ही मस्तान बुड्ढों की दीवानी हूँ। वैसे कमसिन लड़कों से भी मैं चुदती रही हूँ जी हाँ !

अभी मैं एक संत से चुदी , वे सिर्फ 67 वर्ष के हैं । उनका नाम स्वामी लोलानन्द महंत बाल ब्रह्मचारी । वे रामसुख अखाड़े से हैं जो कि भक्ति चरणारविंद की रसिक शाखा है , यहाँ नित्य भोग ‘नित्य सुमंगली’ देवदासियों के मांसल शरीर से सम्पन्न होता है। स्वामी लोलानन्द सिद्ध पुरुष हैं और यह मेरा व मेरे परिवार का अहोभाग्य था कि उन्होंने कृपा की वरना वो अपने आश्रम से बाहर किसी भी रमणी को चित्त या पट कर भोगते नहीं यह सत्यवचन है। आप यह जानना चाहेंगे कि यह दिव्य लीला कैसे घटी तो बता दूँ कि यह मेरे पहले वर्णित प्रेमी अंकल के कारण सम्पन्न हुआ क्योंकि मैंने अंकल जी के लिए टंकार मारती तीन ( = 3 ) टीनेजर का इंतजाम जो किया था। तीनों कन्याओं को चोद कर अंकल जी निहाल हो गए थे। एक का नाम कीर्ति, दूसरी का वसुमती, तीसरी का प्रीति।

तीनों का मुखड़ा व चेहरा बहुत अबोध, मासूम व भोलाभाला था पर तीनों की जवानी अलग-अलग रंग में ठसकदार थी। कीर्ति के मम्मों का साइज 38-डी था, पटाका। प्रीति की गांड, आह, वाह, 38 इंच की गोल , चौड़ी-चकली, कड़क व कसी हुई, सेक्स बम । और वसुमती की चूत यानी फुद्दी , वो वाह जी वाह, मोटे-चौड़े पान के पत्ते -सी, हलकी झांटदार, एकदम अश्लील!तीनों की कमर 23-24 , 23-24 पेट कोमल, चिकना, लचकदार।टांगें जैसे सफ़ेद घोड़ी , गाल फूले हुये जैसे नौ साल की बालिका हो।

अंकल ने जब उनका मज़ा लिया तब वे एक हाफ पेंट यानी निकर में थे, ज़िप खुली भीतर अंडरवियर नहीं।मैंने तीनों को लाइन में खड़ा किया एक ने स्कर्ट-टॉप्स, दूसरी ने जीन्स- टी-शर्ट व तीसरी ने द्रौपदी जैसी साड़ी यूं कसी हुई थी |

जिसमें उसके नितंब, फुद्दी व मम्मों के उभार साफ-साफ दिख रहे, हाँ। अंकल के पास इन छोरियों से निपटने को तीन लंबे डंडे थे : एक सुर्ख लाल-लाल रंग का, दूसरा कालास्याह, तीसरा बैंगनी रंग का।बेंगनी रंग का डंडा उन्होंने कीर्ति के मम्मों के ऊपर घोंपा जो कि उस वक्त बिन -ब्रा सिर्फ टी-शर्ट में थी।थोड़ी देर रगड़ा-रगड़ी की, फिर टी-शर्ट के भीतर धंसा कर नंगे-नंगे मम्मों के मांस पर घोंपा,घोंप मारा। कीर्ति शर्म से लाल हो गई, सांस तेज चलने लगी उसकी।मैंने प्रीति को ललकारा, बोली : ‘ चल प्रीति, अंकल जी को अपनी गुदाज गांड दिखा !

मेरे कहने पर प्रीति घूमी और अंकल जी के नेत्र उस के नितंबों के उभारों पर गड़े। मैंने प्रीति को फिर हिदायत दी: ‘बेटी, अंकल जी को उकड़ू हो अपनी गांड उठा कर दिखा, मेरी बच्ची!’ मेरे प्यार से कहने पर उसने कुहनी के बल झुक कर मुंह नीचा और गांड ऊपर कर दी वो स्कर्ट पहने थी इसलिए अंकल ने काले-स्याह डंडे से उसका स्कर्ट उघाड़ा, और प्रीति ललना की पेंटी पर डंडे की चोट करने लगे।

उस समय अंकल के निकर की खुली ज़िप से उनका रक्ताम्बर लौड़ा बाहर निकल चुका था, कोई तीन इंच। काले डंडे की नोंक पर पीतल की तेज धार थी जिससे प्रीति की पेंटी फट गयी और डंडा तड़-तड़-तड़ तीन बार प्रीति की गदराई गांड पर टूट पड़ा।इस प्रक्रिया से अंकल का लंड बहुत ज्यादा तन गया। अब बारी आई वसुमती की। वाह, क्या करारा माल थी वो। लो-कट ब्लाउज में से उसके आधे मम्मे बाहर निकले हुये थे , मम्मों का आकार ऐसा जैसे दूधवती स्त्री का हो।

मगर अंकल की आँख उसकी पावरोटी -सी फूली तिकोनी उभरी हुई ‘चूत ‘ पर था। अंकल ने लाल-लाल डंडे से उसकी चूत की ओर भद्दा व गंदा इशारा कर डंडा हवा में सरकाया -लहराया, फिर थोड़ा आगे बढ़े और डंडे को कस कर वसुमती की साड़ी पर उस जगह रगड़ने लगे जिसके नीचे उसकी चू त थी चूत,प्यारी-प्यारी चूत! वसुमती के सारे अंग गदराए व लंड को आमंत्रण देने वाले थे, अंकल का लौड़ा अब फूल कर ज़िप से पाँच इंच बाहर निकल पड़ा था, वे उसी अवस्था में आगे बढ़े और वसुमती का चीरहरण करने लगे। चीरहरण करते हुए उन्होंने दो धौल उसकी सुंदर गांड पर मारे, फिर साड़ी उतार-फाड़ फेंकी, फिर पेटीकोट का नाड़ा खींचा, आह, आह, जैसे ही पेटीकोट टांगों के नीचे खिसक पड़ा मैंने लपक के उसे उसकी टांग उठा निकाल लिया। शाबाश! अंकल उसकी अश्लील चूत आँख फाड़-फाड़ कर देखने लगे । आप यह हिंदी सेक्स स्टोरी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

हलकी झांटदार पान के चौड़े पत्ते-सी वसुमती की चौड़ी चकली चू त । मुझे लगा अब अंकल जी वसुमती को चोद मारेंगे मगर अंकल ने हँसते हुये कहा – ‘ मैं पहले प्रीति व कीर्ति को ठोकुंगा – प्रीति की तो गांड, वाह, क्या बदमस्त, उसकी तो मैं गांड मारूँगा ही मारूँगा !

इसके साथ ही अंकल ने निकर वगैरह सब निकाल फेंके, वो पूर्ण मादरजात नंगे हो दमदमाते हुये प्रीति की गांड पर चढ़ गए। प्रीति के निकट कीर्ति को बिठाया, वो कीर्ति के मम्मों को मसोसते हुये प्रीति की गांड मारने लगे। उन्होंने पहले थूक दागा , अंगुल से गांड के छेद को चौड़ा किया फिर लौड़ा भीतर ठरका दिया – – ठक-ठक , ठोक-ठोक !

जब अंकल प्रीति की गांड मार ही रहे थे मैं भी पीछे से अंकल की गांड से सट गयी और धक्का लगाने लगी, ज़ोर लगा के हई-सा! इस से प्रीति की कमसिन गांड में अंकल 7 इंच आगे तक अपना लंड पेल गए । ओह, क्या नज़ारा था।

उधर अंकल जी कीर्ति के मम्मों को भी मुंह से काट रहे थे, है ना! मैंने अंकल जी का ध्यान वसुमती की भोसड़ी की ओर दिलाया। इस प्रक्रिया में मैंने खुद वसुमती की फुद्दी को चौड़ा किया तब अंकल ने एक सटकारे में ही 9 इंच आगे तक लंड फंसा कर आगे-पीछे धक्काधक्क करते हुये वो उसे रगड़ने लगे। लंड से छोरी चोदने के साथ अंकल जी फिस्टिंग भी कर रहे थे जिससे कोमल कन्या वसुमती की चूत की सारी झिल्लियाँ उन्होंने तरोड-मरोड़ मसल-कुचल डाली।अंकल जोश में अपनी गांड उछाल-उछाल चुदाई कर रहे थे। कोई तीन घंटे तक अंकल तीनों की गां ड , फुद्दी व मुंह में लौड़ा ठूँसते रहे, ठूँसने के बाद जब तीनों कन्याएँ अधमरी हो गई तब उन्हें छोड़ा ।

मेरे इस एहसान के चलते अंकल जी ने मेरे लिए 67-वर्ष के बुड्ढे धर्म गुरु का प्रबंध किया: सतगुरु स्वामी महंत संत श्री लोलानन्द गुरुघंटाल।ये भारी बदन के, मोटा-मोटा माथा, सिर रुंडमुंड, बाँहें बलिष्ट, जांघें चौड़ी, और शिश्न अत्यंत मोटा-तगड़ा शिश्न अर्थात ‘लंड, लौड़ा ‘।चोदाई कला में संत श्री को अश्लील या गंदा बोलने में कोई भ्रम या शर्म नहीं।

निपट देहाती भाषा में जो मैं फुर-से समझ सकूँ वो ही वो बोले , जय हो। मैं उनसे 38 वर्ष छोटी थी इस लिए वो मुझे भी बालिका कह देते। वैसे मैं तरुणी थी। सो, हाए, आगे क्या बताऊँ। संत श्री जब पधारे तब वे झीनी लुंगी में थे, उनकी कठोर छाती पर कोई कपड़ा नहीं था उनका लंड तो काफी बड़ा था पर अंडकोश भी तगड़े व भोत मोटे थे जिनको देख मुझे नशा आ गया। उनके साथ एक सेवा दासी भी थी , कन्या-किशोरी। आते ही उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ मारा और बोले: पहले तेरी माँ को चोदूँ या बहिन को ?

अभी तेरे मम्मों में दूध उतर रहा है क्या? तेरी छोटी बच्ची तो अब भी दूध पी रही होगी तेरा? अंकल की तरह मेरे लिए भी अपने मन से टीनेज छोकरी का इंतजाम कर ना? कोई स्कूल गर्ल ! ये देख मेरा मोटा-मोटा लंड , देख, और अपनी माँ -बहन को भी दिखा, देख-देख संत का लौड़ा |

मैंने नीची नजर की व उनके लौड़े को देख जीभ बाहर निकाल अश्लील इशारा किया और बोली:’ बहन 19 की है पर दिखती 17 की अभी गर्भवती है। माँ 47 की है पर दिखती 40 की है, उसकी गांड भारी है… ‘ आगे कुछ बोलती कि संत बोले: ‘तेरी माँ की गांड मारुंगा ‘। अब तक मैं संत श्री की गोद में सरक चुकी थी और वे मेरी गांड में अंगुल गड़ाए जा रहे थे। तभी राखी आ गई, मेरी छोटी बहन राखी , उसके 5-महीने का गर्भ। उसने संत श्री को प्रणाम किया, चरणस्पर्श, दंडवत ।

संत बोले ‘ सही प्रणाम ये नहीं होता, सही ‘ये’ ” ये” होता है, मेरा लंड चूँस, सही कहा तेरी बड़ी भेन ने कि तू दिखती 17 साल की ही है, ले मेरा लंड चूँस, मेरा लौड़ा ! संत ने बलात उसका मुंह पकड़ अपने लौड़े पर टिका दिया,तब उसको मुंह खोल संत का लंड जीभ नीचे लेना ही पड़ा। संत श्री ने राखी का पेट टटोल पूछा, ‘गर्भ किसका है?’

मैंने जवाब दिया, ‘अंकल का, वो इसको चोदे हैं। ‘ ” ठीक है, मैं भी इसके पेट पर चढ़ इसे चोदूंगा ”।राखी मन लगा कर और तन भिड़ा कर संत श्री का लौड़ा जड़ समेत मुंह मे ले चूँस रही थी , फिर उसने उनका अंडकोश भी चाटा व चूँसा। संत इतने भर से सन्तुष्ट नहीं हुये उन्होंने कहा, ‘ राखी मुन्नी, तू अब मेरी गांड का छेद भी चाट फिर मैं तेरी गांड निरखूंगा।

मैंने बात बदलते हुये कहा – ” स्वामी जी , क्या आप सच में मेरी माँ को चोदेंगे ?” वो बोले – ” हाँ, हाँ, मैं तुम्हारी माँ की चूत बजाऊँगा, और उसकी गांड भी मारूँगा ” ” तो आप मेरी फुद्दी कब मारेंगे ? मैं तो आपसे ही मरवाना चाहती हूँ। ” संत बोले – ‘नहीं, पहले तू मेरे लिए एक ताज़ा , कमसिन, अल्हड़ जवानी की स्कूल गर्ल ला, उसकी फ्रॉक उठा के उसकी गांड, मम्मों व चूत का सुख लूटूंगा फिर तुम पर टूटूंगा | दर असल मैं चाहती थी कि संत आज ना केवल मुझे चोदे बल्कि गर्भवती भी करे, इसलिए मुझे संत का मान रखने के लिए एक 17-साल की स्कूल गर्ल का इंतजाम करना पड़ा। उसका नाम बिब्बो था | आप यह हिंदी सेक्स स्टोरी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | वो शुद्ध 17 वर्ष की थी पर दिखने में 15 से ज्यादा की नहीं लगती थी।संत ने पहले तो उसके मम्मों के कबूतरों को नोंचा , उसकी बालिका-चूंची कुतरी और फिर फ्रॉक खोल चड्डी सरकाने लगा।

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