तीन गोरो से मेरी महराष्ट्रियन चुत चुदी

गतांग से आगे …..

उन दोनों ने भी अपनी टी-शर्ट और बरमूडे उतार दिए और मुझे कस कर पकड़ लिया, मेरी चूचियाँ चूसने लगे। मुझे अपनी चूचियाँ चुसवाने में बड़ा मज़ा आ रहा था। मेरे बदन से खेलते हुए उन्होंने मेरी जीन्स भी उतार दी, अब मैं उनके सामने सिर्फ एक रेड पैंटी में थी।

एक गोरा मेरे पीछे आया और मेरे चूतड़ चूमने लगा, दूसरे ने अपना अंडरवियर उतार दिया और उसका तना लंड हवा में झूल गया। वो लंड शायद 8 इंच का था और बहुत मोटा था। मेरे पति का इतना मोटा नहीं है.. यहाँ तक कि मैंने इतना मोटा लंड आज तक किसी का भी.. कभी भी नहीं देखा था। वो दोनों सोफे पर बैठ गए और मुझे इशारों में लंड चूसने का कहा।

मैं अपने घुटने के बल झुक कर बैठ गई और उसके मोटे लंड को चूसना शुरू किया। मैं उसके लंड को आधा ही अपने मुँह में ले पा रही थी। वो मेरे सर पर हाथ रख कर कुतिया की तरह मुझे पुचकार रहा था। दूसरे गोरे के लंड को मैंने अपने हाथ में लिया और उसके लंड को मुठियाने लगी। पहले गोरे ने अपना लंड पूरा का पूरा मेरे मुँह में डालने की कोशिश करना चाही.. लेकिन मेरा हलक उसका लंड चोक करने लगा। मेरे मुँह से थूक बराबर बाहर निकलने लगा।यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

मैंने सांस लेने की गरज से अपना मुँह उसके लंड से हटाया और दूसरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। इस तरह मैं बारी-बारी से दोनों लौड़ों को चूसने लगी और दोनों गोरे आँख बंद किए जन्नत का मजा लेने लगे। थोड़ी देर बाद मुझे सोफे के किनारे पर मुझे लिटा दिया और मेरी पैंटी उतार दी। उन दोनों में से किसी एक ने मेरी भारी जाँघों को फैला दिया।

अब मेरी चूत उन दोनों अजनबी गोरों के सामने खुली पड़ी थी। मैंने इधर-उधर नज़र दौड़ाई.. लेकिन नागेश नज़र नहीं आया.. वो उस गोरी को लेकर बगल के कमरे में चला गया था। यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है। मुझे नशा चढ़ रहा था और कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

एक गोरे ने अपना मुँह मेरी चूत में डाल दिया और चूसने लगा और साथ में मेरी चूत में उंगली भी डालने लगा। दूसरा मेरे बगल में खड़ा हो गया और अपना खड़ा लंड मेरे मुँह में डाल कर मेरे मुँह को चोदने लगा। उसका लंड इतना कड़क था कि मेरे दांत उसके लंड को रगड़ रहे थे। वो बराबर मुझे अपना मुँह और खोलने के लिए कह रहा था। मैं उसी हालत में अपना मुँह उस बड़े लंड से चुदवाती रही। नीचे मेरी चूत जीभ से चुद रही थी.. ऊपर मुँह को लण्ड चोद रहा था।

इसी बीच मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.. जो गोरा मुझे मुँह में चोद रहा था.. उस पर कोई असर नहीं हुआ था.. वो झड़ ही नहीं रहा था.. ऐसी तगड़ी स्टैमिना वाला मर्द पहली बार मैंने देखा था। मेरे पानी छोड़ने पर चूत छोड़ कर नीचे वाला गोरा मेरे पास आ गया और अपना लंड चुसवाने लगा। मोटे लंड वाले ने उसकी जगह ले ली और मेरी चूत को चाटने लगा।

फिर उन्होंने मुझे बिस्तर पर ले जाकर उल्टा लेटा कर कुतिया बना दिया। मेरी चूत तब तक गरम और गीली हो कर चुदने को तैयार हो चुकी थी।

मोटे लंड वाले गोरे ने अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया और पीछे से आकर मेरी चूत में घुसेड़ दिया। वो धीरे धक्के लगा रहा था.. उसको अपने बड़े और मोटे लंड का एहसास था और वह हर दो-तीन मिनट बाद कस कर मेरी चूत में धक्का मारता था। उसका हर धक्का मुझे मस्ती दे रहा था। दूसरा गोरा मेरे सामने पहले नंगा बैठा रहा.. फिर आगे आया और मैं उसके लंड और उसके पोतों को चाटने लगी।

मेरे कमर तक के लम्बे बाल खुल चुके थे और उनको पीछे वाला गोरा पकड़े हुए था। मुझे बहुत ही सब कुछ मस्त लग रहा था और मैं जम कर अपनी चुदाई का मजा ले रही थी। इतने में मुझ एहसास हुआ कोई हाथ मेरी चूचियों को जोर से मसल रहा है.. मैंने बगल में देखा कि तीसरा वाला गोरा.. जो अब तक मेरी नज़र से ओझल था और जिसको मैं चला गया हुआ मान चुकी थी.. वह नंगा अपना लंड खड़ा किए मुस्करा रहा था।

मैं बिल्कुल भी समझ नहीं पा रही थी। एक तो वोदका का नशा था.. दूसरा चुदाई का नशा और तीसरा झटका ये कि तीसरे के लिए मैं तैयार ही नहीं थी।

जब मोटे लंड वाला मुझे चोद चुका.. वो झड़ गया था.. तब वो बिस्तर के किनारे बैठ गया और सामने वाला उसकी जगह आ गया। उसने भी मुझे कुतिया ही बनाए रखा और मुझे चोदने लगा, मुझे उससे से चुदवाने में भी उतना ही मजा आ रहा था।यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

तीसरे गोरे ने और पास आकर मेरे हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया.. मैंने बड़े अनमने मन से उसका लंड हाथ में लिया.. क्योंकि एक तो मैं चूत में धक्के खा रही थी और दूसरे मैं तीसरे को मानसिक रूप से स्वीकार नहीं कर पा रही थी।

जब उसका लंड मेरी हथेली में आया तो एहसास हुआ कि इसका तो लंड उन दोनों गोरों से भी बड़ा और मोटा था। बिल्कुल ब्लू-फ़िल्म में दिखने वाले पोर्न स्टार के जैसा लवड़ा था। वह आदमी गंजा था और उसकी निगाहें और देखने का ढंग बड़ा ज़ालिम था। मुझे अब चुदाई ज्यादा भारी पड़ रही थी, मैं थक गई थी।

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