तीन गोरो से मेरी महराष्ट्रियन चुत चुदी

गतांग से आगे …..

दूसरे गोरा जब कस कर मेरी चूत में धक्के मारने लगा.. तब मैं समझ गई कि वह झड़ने वाला है और जब वो झड़ा तब मैं मानसिक रूप से थक गई थी और उसके हटते ही मैंने उठना चाहा.. लेकिन तभी तीसरे वाले ने मेरी कमर पकड़ ली और बिना कंडोम के मेरी बिलबिलाई चूत में अपना मोटा मुसंड लंड डाल दिया।

अब मैं अपने पति नागेश को कोसने लगी और मैंने उसको रोकने की कोशिश की। मैं ‘स्टॉप स्टॉप’ कहती रही.. लेकिन उसको भी शराब चढ़ी हुई थी और वो मुझे बेदर्दी से जबर्दस्ती चोदने लगा। वो मेरे इंकार को देख कर जल्दी ही झड़ गया.. लेकिन झड़ने से पहले उसने लंड मेरी चूत से निकाल लिया था।

इस जबर्दस्त चुदाई के बाद मेरा मन वहाँ से जाने का कर रहा था.. लेकिन उन्होंने एक और ड्रिंक लेने को कहा.. जो मना करने के बाद भी मैंने एक गिलास व्हिस्की का ले लिया। वो लोग मुझे मनाने लगे.. कहने लगे- यू आर ए ग्रेट स्लट.. लेट्स फ़क मोर..

पहले वाले गोरे ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और अपने तब तक खड़े हो चुके लंड पर बैठा दिया। मैं उसके ऊपर झूलने लगी.. मेरी बड़ी-बड़ी चूचियाँ इधर-उधर झूलने लगी थीं। मेरे लम्बे बाल पूरी तरह बहके हुए थे और उस वक्त वहाँ का दृश्य बिल्कुल मादक था।

बाक़ी दोनों अगल-बगल आ गए और मेरे हाथ में दोनों ने अपने लंड पकड़ा दिए। इसी बीच तीसरे गोरे ने मेरी गांड में उंगली डाल दी.. जिसको मैंने नाराजगी से मना कर दिया.. जिस पर वह मान गया। मैं तब तक पहले वाले के लंड पर कूदते हुए थक गई थी.. मेरी हालत देख कर नीचे वाला मेरे नीचे से हट गया और उसकी जगह दूसरा लेट गया और मुझे चूमता हुआ मुझे अपने लंड पर चढ़ा दिया।

अब यह चुदाई मेरी सीमा से बाहर की हो चुकी थी.. मेरी चूत दर्द से परपराने लगी थी और मेरे निप्पल सूज गए थे। थोड़ी देर बाद दूसरा भी झड़ गया.. जब वो हाँफ रहा था और मैं उसके ऊपर गिरी हुई थी.. और बस इस कहानी को खत्म करना चाहती थी.. तभी तीसरे वाले ने कंडोम में भरे हुए वीर्य को मेरे चेहरे पर डाल दिया और अपना लंड मेरे मुँह को दबा खोल कर डाल दिया।

वो मेरे मुँह को ही चोदने लगा.. उसका इतना मोटा लंड था कि उसका आधा लंड मुँह में समाना ही किसी औरत के बस की बात नहीं थी। वो हवस में पूरा लंड मेरे गले तक देना चाहता था। वो मेरा गला बिल्कुल चोक कर रहा था और मेरा थूक मेरे मुँह से पानी की तरह बाहर आ रहा था।

वो कसके मेरा सर पकड़ कर मेरा मुँह चोद रहा था और मैं केवल चुद रही थी। उसके जब झड़ने का समय आया.. तब उसने मेरे मुँह में ही अपना पानी निकाल दिया और मैं कुछ भी नहीं कर सकी।

उसने अपना लंड मेरे मुँह में ही झाड़ दिया। मुझे लगा मैं इन तीनों गोरों की पर्सनल रांड बन चुकी हूँ। इसके बाद मिशनरी पोजीशन में मेरी चूत को इन तीनों ने बारी-बारी चोदा.. मैं अब बिल्कुल शिथिल हो चुकी थी और कुछ भी सोचने-समझने की स्थिति में नहीं थी। इसके बाद तीनों ने अपनी गांड और उसके छेद को मुझसे चाटने को कहा.. जो मैंने किया।

जब तीनों आखिरी बार झड़े तो मेरे चेहरे पर अपना पानी डाल दिया। इस सबके बाद मेरा बदन.. और मेरा मन थक चुका था। उनका झड़ा हुआ पानी मेरे ऊपर लगा था और मेरे बाल उन सबके माल से सने हुए थे। मुझमें चलने की भी हिम्मत नहीं थी.. कपड़े पहनने की कोशिश भी नहीं कर पा रही थी। वो तीनों गोरे हँस रहे थे और मैं वैसे ही चादर को अपने ऊपर डाल कर सो गई।

उन तीनों गोरों ने जो किया.. वो मैं जीवन भर भूल नहीं सकती। सोचा था कि कभी नहीं करूँगी.. लेकिन एक साल बाद फिर मन कर रहा है कि वो तीनों फिर आ जाएँ और मेरी फ़ुद्दी फाड़ दें