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Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

सर मेरी गांड में अपना लंड डाल कर चोदा

हेल्लो दोस्तों, नमस्कार और गुरूजी को भी धन्यवाद मेरी कहानी जरुर पोस्ट करे | आज से में आपको अपने जीवन की वो सच्चाई बताने जा रहा हु जिसे सुन कर थोड़ा झटका तो लगेगा पर बुरा ना मानना बस मजे के लिए कर दिया दोस्तों जब मेरी बहन स्वेता १९ साल की और में २० साल का था।हम दोनों एक ही स्कूल में और एक ही क्लास में पड़ते थे। हम दोनों पढने लिखने में ज्यादा होशियार नही थे बस एवरेज थे. हमारे एक टीचर थे शुक्ला सर ,उनके लिए मशहूर था की वो जन करके अपने स्टूडेंट को फ़ैल कर दिया करते थे ताकि वो उनके पास जाये और वो फिर उसका फायदा उठा सके इसे स्कूल में कई किस्से थे जिसमे पहले फ़ैल हुए छात्र ,छात्रा शुक्ला सर से मिलने के बाद पास हो गए. इस बार हमे भी पता चला की हम दोनों भाई बहन भी फ़ैल हो गए हे और हमे अगर पास होना ही हे तो शुक्ला सर से मिलना पड़ेगा। मैंने स्वेता से कहा की हम दोनों को शाम को शुक्ला सर के पास चलना पड़ेगा ताकि हम पास हो सके।लेकिन शुक्ला सर पास करनी की क्या कीमत लेंगे ये हमें पता नही था।शाम को हम दोनों शुक्ला सर के घर गए तो वो कमरे में लुंगी पहने अकेले ही बेठे हुए थे।उन्होंने हम दोनों को आने का कारण पूछा तो हमने बताया । मैंने देखा की बातचीत के दौरान शुक्ला सर की निगाहे स्वेता पर ही लगी रही । उन्होंने पूरी बात सुन ने का नाटक किया और कहा की पास तो में करवा दूंगा पर इसके लिए तुम्हे कीमत देनी होगी।हमने कहा की हमारे पास देने को कोई पैसा नही है तो उन्होंने कहा की उन्हें पैसे नही बल्कि जो चाहिए वो हमारे पास हे। हम दोनों भाई बहन ने एक दुसरे की और देखा फिर सहमती में गर्दन हिला दी। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | शुक्ला सर ने मुझसे कहा की में कल अकेले आकर उनसे मिलु, फिर वो बताएँगे की हम केसे पास हो सकते है. अगले दिन में शुक्ला सर के पास गया तो वो जेसे मेरा ही इंतजार कर रहे थे |

सर ने सहला सहला कर मेरी गांड मार दी |

उन्होंने मुझसे कहा की वो मेरे साथ जो उसका में बुरा तो नही मानुगा ,मैंने न में अपना सर हिल दिय। ,शुक्ला सर ने मुझे अपने पास बुलाया और वो मेरे निकर के उप्पर से ही मेरे चुत्डो को सहलाने लगे,में समझ गया की आज शुक्ला सर मेरे साथ क्या करेंगे .उन्होंने मेरा निकर उतारा और मुझे बिस्तर पर सुला कर मेरा लंड सर ने प्यार से मुंह में लिया और चूसने लगे. एक हाथ बढ़ाकर उन्होंने थोड़ा नारियल तेल अपनी उंगली पर लिया और मेरे गुदा पर चुपड़ा. फ़िर मेरा लंड चूसते हुए धीरे से अपनी उंगली मेरी गांड में आधी डाल दी. “ओह … ओह ..” मेरे मुंह से निकला. “क्या हुआ, दुखता है?” सर ने पूछा. “हां सर … कैसा तो भी होता है” “इसका मतलब है कि दुखने के साथ मजा भी आता है, है ना? यही तो मैं सिखाना चाहता हूं अब तुझे. गांड का मजा लेना हो तो थोड़ा दर्द भी सहना सीख ले” कहकर सर ने पूरी उंगली मेरी गांड में उतार दी और हौले हौले घुमाने लगे. पहले दर्द हुआ पर फ़िर मजा आने लगा. लंड को भी अजीब सा जोश आ गया और वो खड़ा हो गया. सर उसे फ़िर से बड़े प्यार से चूमने और चूसने लगे “देखा? तू कुछ भी कहे या नखरे करे, तेरे लंड ने तो कह दिया कि उसे क्या लुत्फ़ आ रहा है” पांच मिनिट सर मेरी गांड में उंगली करते रहे और मैं मस्त होकर आखिर उनके सिर को अपने पेट पर दबा कर उनका मुंह चोदने की कोशिश करने लगा. सर मेरे बाजू में लेट गये, उनकी उंगली बराबर मेरी गांड में चल रही थी. मेरे बाल चूम कर बोले “अब बता मुकेश बेटे, जब औरत को प्यार करना हो तो उसकी चूत में लंड डालते हैं या उसे चूसते हैं. है ना? अब ये बता कि अगर एक पुरुष को दूसरे पुरुष से प्यार करना हो तो क्या करते हैं?” “सर … लंड चूसकर प्यार करते हैं?” मैंने कहा. “और अगर और कस कर प्यार करना हो तो? याने चोदने वाला प्यार?” सर ने मेरे कान को दांत से पकड़कर पूछा. मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था. “सर, गांड में उंगली डालते हैं, जैसा मैंने किया था और आप कर रहे हैं” “अरे वो आधा प्यार हुआ, करवाने वाले को मजा आता है. पर लंड में होती गुदगुदी को कैसे शांत करेंगे?” मैं समझ गया. हिचकता हुआ बोला “सर … गांड में …. लंड डाल कर सर?” “बहुत अच्छे मेरी जान. तू समझदार है. अब देख, तू मुझे इतना प्यारा लगता है कि मैं तुझे चोदना चाहता हूं. तू भी मुझे चोदने को लंड मुठिया रहा है. अब अपने पास चूत तो है नहीं, पर ये जो गांड है वो चूत से ज्यादा सुख देती है. और चोदने वाले को भी जो आनद आता है वो …. बयान करना मुश्किल है बेटे. अब बोल, अगला लेसन क्या है? तेरे सर अपने प्यारे स्टूडेंट को कैसे प्यार करेंगे?” “सर … मेरी गांड में अपना लंड डाल कर …. ओह सर …” मेरा लंड मस्ती में उछला क्योंकि सर ने अपनी उंगली सहसा मेरी गांड में गहराई तक उतार दी. “सर दर्द होगा सर …. प्लीज़ सर ” मैं मिन्नत करते हुए बोला. मेरी आंखों में देख कर सर मेरे मन की बात समझ गये “तुझे करवाना भी है ऐसा प्यार और डर भी लगता है, है ना?” “हां सर, आपका बहुत बड़ा है” मैंने झिझकते हुए कहा. “अरे उसकी फ़िकर मत कर, ये तेल किस लिये है, आधी शीशी डाल दूंगा अंदर, फ़िर देखना ऐसे जायेगा जैसे मख्खन में छुरी. और तुझे मालूम नहीं है, ये गांड लचीली होती है, आराम से ले लेती है. और देख, मैंने पहले एक बार अपना झड़ा लिया था, नहीं तो और सख्त और बड़ा होता. अभी तो बस प्यार से खड़ा है, है ना? और चाहे तो तू भी पहले मेरी मार सकता है.” मेरा मन ललचा गया. सर हंस कर बोले “मारना है मेरी? वैसे मैं तो इसलिये पहले तेरी मारने की कह रहा था कि तेरा लंड इतना मस्त खड़ा है, इस समय तुझे असली मजा आयेगा इस लेसन का. गांड को प्यार करना हो तो अपने साथी को मस्त करना जरूरी होता है, वैसे ही जैसे चूत चोदने के पहले चूत को मस्त करते हैं. लंड खड़ा है तेरा तो मरवाने में बड़ा मजा आयेगा तेरे को” “हां सर.” सर मुझे इतने प्यार से देख रहे थि कि मेरा मन डोलने लगा ” सर … आप … डाल दीजिये सर अंदर, मैं संभाल लूंगा” “अभी ले मेरे राजा. वैसे तुम्हें कायदे से कहना चाहिये कि सर, मार लीजिये मेरी गांड!” “हां सर …. मेरी गांड मारिये सर …. मुझे …. मुझे चोदिये सर सर मुस्कराये “अब हुई ना बात. चल पलट जा, पहले तेल डाल दूं अंदर. तुझे मालूम है ना कि कार के एंजिन में तेल से पिस्टन सटासट चलता है? बस वैसे ही तेरे सिलिंडर में मेरा पिस्टन ठीक से चले इसलिये तेल जरूरी है. अच्छा पलटने के पहले मेरे पिस्टन में तो तेल लगा” मैंने हथेली में नारियल का तेल लिया और सर के लंड को चुपड़ने लगा. उनका खड़ा लंड मेरे हाथ में नाग जैसा मचल रहा था. तेल चुपड़ कर मैं पलट कर सो गया. डर भी लग रहा था. तेल लगाते समय मुझे अंदाजा हो गया था कि सर का लंड फ़िर से कितना बड़ा हो गया है. सर ने भले ही दिलासा देने को यह कहा था कि एक बार झड़कर उनका जरा नरम खड़ा रहेगा पर असल में वो लोहे की सलाख जैसा ही टनटना गया था.

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