जीवनयापन के लिए लगा सेक्स का नशा

मेरा नाम सुखराज है मैं वरसोवा का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 25 वर्ष है। मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूं और मेरे पिता भी एक छोटी मोटी नौकरी करते हैं। उन्होंने आज तक हमें कभी भी किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होने दी और हमेशा ही हमारी हर जरूरतों को समय पर पूरा किया है। मेरी बहन की शादी भी उन्होंने बड़े धूमधाम से करवाई और हमारे जितने भी रिश्तेदार हमारे घर पर आए थे वह सब बहुत खुश हुए और कहने लगे कि आपने शादी बहुत ही अच्छे तरीके से की है।

मैंने भी जब से काम करना शुरू किया है तब से मैं भी अपने घर पर कुछ पैसे अपनी मां को दे दिया करता हूं, जिससे कि वह घर का राशन भरवा देती है। मैं घर पर अकेले ही रहता हूं इसलिए मुझे ज्यादातर अकेले रहना ही पसंद है और अब मैं अकेले ही रहता हूं। मैं सुबह अपने काम पर जाता हूं और शाम के वक्त मैं जल्दी लौट आता हूं। मैं जब अपने घर पर आता हूं तो उसके बाद मैं घर पर रहकर ही कुछ ना कुछ करता रहता हूं।

मुझे अपने जीवन में कुछ नया करना है लेकिन मैं अभी तक सिर्फ नौकरी ही कर पा रहा हूं और मैं अपने जीवन में कुछ भी नया नहीं कर पा रहा हूं। मैंने कई बार अपने दोस्तों से इस बारे में बात की लेकिन मुझे मेरे दोस्तों से भी किसी प्रकार की कोई मदद नहीं मिली, वह लोग भी नौकरी कर रहे हैं और नौकरी कर के ही अपना जीवन यापन कर रहे हैं लेकिन मैं अपने जीवन में कुछ अलग करना चाहता हूं। मुझे बिजनेस करना अच्छा लगता है लेकिन हमारे घर की स्थिति इतनी ठीक नहीं है कि मैं बिजनेस करू। क्योंकि मेरे पिताजी के पास जो भी पैसे बचे थे वह उन्होंने सब मेरी बहन की शादी में खर्च कर दिए और अब मैं कुछ काम कर के ही आगे बढ़ना चाहता हूं।

मैंने कॉलेज के समय से ही अपने दिल में यह बात बैठाकर रखी है कि मुझे अपना ही कोई बिजनेस करना है परंतु मुझे अभी तक कोई भी ऐसा रास्ता नहीं दिखा जिससे मैं अपना बिजनेस करू क्योंकि मेरे पास पैसे नहीं है, इस वजह से मैं इन चीजों में अपना हाथ नहीं डाल पाया। मैं सिर्फ अपनी नौकरी तक ही सिमट कर रह गया लेकिन मेरा अभी भी यह सपना है कि मैं अपना ही काम शुरू करू। मैं जिस कंपनी में काम करता हूं वहां पर एक दिन मेरा झगड़ा हो गया और वहां ने मुझे कंपनी से निकाल दिया।

उस दिन मेरी कोई भी गलती नहीं थी इसीलिए मैंने अपने बॉस से झगड़ा कर लिया और उसके बाद मैंने कंपनी छोड़ दी। अब मैं घर पर ही था लेकिन मैंने कई दिनों तक अपने पिताजी को भी यह बात नहीं बताई। मैं सुबह घर से निकल जाता था और अपने दोस्त के घर पर जाकर बैठ जाता था। शाम को ही मैं घर लौटता था लेकिन अब काफी समय हो गया था और मुझे भी लगने लगा कि मुझे यह बात अपने घर पर बता देनी चाहिए लेकिन मैं बिल्कुल भी हिम्मत नहीं कर पाया।

एक दिन मेरे पिताजी को यह बात पता चल गई और वह कहने लगे कि क्या तुमने नौकरी छोड़ दी है, मैंने उन्हें सारी बात बताई और वह कहने लगे कि यदि तुमने नौकरी छोड़ दी है तो इसमें कोई भी आपत्ति वाली बात नहीं है लेकिन तुम्हें मुझे बता देना चाहिए था। मैंने अपने पिताजी से कहा कि मुझे यह डर था कि कहीं आप मुझ पर गुस्सा ना हो जाए। मैंने जब उन्हें सारी बात बताई तो वह कहने लगे कि कोई बात नहीं, तुमने नौकरी छोड़ दी है तो तुम अब कोई दूसरी नौकरी देख लेना। मैंने उन्हें कहा कि हां मैं कोई दूसरी नौकरी देख रहा हूं।

मैंने अपने सारे दोस्तों को अपना रिज्यूम भेज दिया था लेकिन कहीं पर भी कोई काम मुझे ऐसा नहीं मिल पा रहा था जहां पर मैं अच्छे से काम कर पाऊं, या फिर मुझे वहां पर अच्छी तनख्वाह मिले इसीलिए मैंने भी अपनी तरफ से कोशिश करनी शुरू कर दी और जब मैं इंटरव्यू देने गया तो मेरा एक मॉल में सिलेक्शन हो गया।

उस मॉल में मैं एकाउंट्स का काम संभालने लगा। मुझे अकाउंट का काम करने में अच्छा लग रहा था और मेरी तनख्वाह भी अच्छी थी। मुझे वहां पर काम करते हुए भी कुछ महीने हो गए थे और उसी बीच में मेरी मुलाकात एक महिला से हुई, उसका नाम सुरभि है और वह शादीशुदा है। जब मेरी उनसे मुलाकात हुई तो शुरुआत में तो मेरी उससे इतनी ज्यादा बात नहीं हो पाई लेकिन धीरे-धीरे अब मेरी सुरभि से बात होने लगी थी। मैंने सुरभि से पूछा कि आप क्या करती हैं, वह कहने लगी कि मेरा अपना बुटीक है और मैं वहां पर नए-नए डिजाइन के कपड़े खुद ही बनाती हूं।

मेरी सुरभि से अच्छी बातचीत हो गई थी और उसके बाद हम दोनों की भी कई बार मुलाकात हुई। मैंने भी उनको अपने बारे में बताया कि मुझे भी अपना काम शुरू करना है लेकिन मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए मैं काम शुरू नहीं कर पा रहा हूं। वह मुझे कहने लगी कि यदि तुम्हें काम शुरू करना है तो मैं तुम्हें कुछ पैसे देती हूं और तुम काम शुरू कर लो लेकिन उसके बदले तुम मुझे अपने साथ पार्टनरशिप में रखोगे। मैंने उसे पूछा कि आप मुझे पैसे क्यों दे रही है, आप तो मुझे अच्छे से भी नही जानती है। वह कहने लगी कि मैं इतने समय से तुम्हें देख रही हूं और तुम काम बहुत ही मेहनत से करते हो इसीलिए मैं तुम्हें पैसे दे रही हूं।

मैंने जब उससे अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताया तो वह बहुत खुश हो गई और कहने लगी ठीक है उसके लिए मैं कहीं ऑफिस देख लेती हूं। सुरभि ने अब ऑफिस देख लिया था और उसके बाद उसने मुझे एक दिन फोन किया और मुझे उसने ऑफिस दिखाने के लिए बुला लिया। जब मैं ऑफिस देखने गया तो मैंने उसे कहा कि ऑफिस की लोकेशन तो बहुत अच्छी है। अब हम लोगों ने काम शुरू कर दिया और जब मैंने काम शुरू किया तो मैं खुद के ही कुछ प्रोडक्ट निकालने लगा और मार्केट में बेचने लगा। मुझे काफी अच्छा रिस्पांस मिलने लगा और इस बात से सुरभि भी बहुत खुश हो गई।

मैं समय पर उसे पैसे दे दिया करता था। वह भी कभी कबार मेरे साथ ऑफिस में बैठ जाती थी। हम लोग मार्केट में नए प्रोडक्ट लेकर आते थे जो कि आसानी से बिक जाते थे। उसे भी नए नए कपड़े डिजाइन करने अच्छे लगते है इसीलिए वह भी अब नए कपड़े डिजाइन करने लगी और हम लोग उसे भी मार्केट में पहुंचाने लगे। हम लोग बहुत ही क्रिएटिव काम करते थे, जिस वजह से हमारे कस्टमर अब काफी होने लगे थे और सुरभि भी इस बात से बहुत खुश थी। सुरभि एक दिन मेरे साथ बैठी हुई थी और कहने लगी कि तुम बहुत ही अच्छे से काम कर रहे हो और जिस प्रकार से तुम काम कर रहे हो मुझे बहुत खुशी है। मैं भी सुरभि को समय पर पैसे दे देता था और उसे भी किसी प्रकार की मुझसे कोई दिक्कत नहीं थी।

अब हम दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छे से पहचाने लगे थे लेकिन सुरभि ने मुझे कभी यह बात नहीं बताई कि वह अपने पति से अलग रहती है। जब उसने मुझे यह बात बताई तो मैंने उससे कहा कि तुमने मुझे यह बात पहले क्यों नहीं बताई, वह कहने लगी कि मैं यह बात किसी से भी शेयर नहीं करना चाहती क्योंकि मैं अपनी लाइफ को अपने तरीके से जीना चाहती हूं। मेरी शादी बिल्कुल भी अच्छे से नहीं चल पाई इसलिए मैंने अपने पति को छोड़ दिया और अब मैं अकेली ही रहती हूं। मुझे जब यह बात पता चली तो मैंने उसे कहा कि तुमने मुझे यह पहले क्यों नहीं बताया। वह कहने लगी कि मुझे यह सब बताना अच्छा नहीं लगता।

अब हम दोनों साथ में ही बैठे हुए थे सुरभि भी मेरे साथ ही थी। मैंने सुरभि से पूछा कि क्या कभी तुम्हारा मन सेक्स करने का नहीं होता। वह कहने लगी कि मेरा मन तो बहुत होता है लेकिन मै किसी के साथ भी सेक्स नहीं कर सकती। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो उसे बिल्कुल भी देखा नहीं गया और उसने तुरंत ही मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया और हिलाना शुरू कर दिया। वह बड़ी तेजी से मेरे लंड को हिला रही थी और हिलाते हिलाते उसने अपने मुंह में समा लिया और काफी देर तक उसने मेरे लंड को चूसा और मेरा पानी बाहर आने लगा था और उसने वह सब अपने अंदर ही ले लिया बड़े अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी।

मैंने जब उसकी सलवार को उतारा तो उसकी बड़ी बड़ी गांड को मैने अपने हाथ से दबाना शुरू कर दिया। मैंने उसकी गांड को चाटा तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। जब मैने उसकी योनि के अंदर उंगली डाली तो उसे मजा आ रहा था। मैंने जैसे ही उसकी चूत मे अपने लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगी। मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा वह अपने मुंह से मादक आवाज निकल रही थी मैंने काफी देर तक उसे ऐसे ही चोदा।

उसके बाद मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए सुरभि की गांड के अंदर डाल दिया जैसे भी मेरा लंड सुरभि की गांड मे गया तो मुझे अच्छा लगने लगा था।  उसे भी बहुत मजा आ रहा था इसलिए वह भी अपनी गांड को मुझसे टकरा रही थी और पूरे मजे ले रही थी। मैं भी उसे बड़ी तेजी से धक्के दिए जा रहा था जिससे की उसकी चतडे पूरी लाल हो चुकी थी और मेरा शरीर भी अब गर्म होने लगा। उसकी चूतड़ों से बहुत ज्यादा गर्मी निकल रही थी लेकिन वह अपनी चूतडो को मुझसे मिलाए जा रही थी। वह मुझे कह रही थी तुम मेरी गांड बहुत अच्छे से मार रहे हो इतने अच्छे से तो मेरा पति भी कभी मुझे नहीं चोदता था।

वह कह रही थी मेरे अंदर से पूरा करंट बाहर आ रहा है मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। मैंने उसे आधे घंटे तक ऐसे ही रगड़ा और उसके बाद मेरा वीर्य उसकी गांड के अंदर गिरा तो उसे बहुत शांति मिली। उसके बाद जब मैंने अपने लंड को उसकी गांड से बाहर निकाला तो मेरा वीर्य उसकी गांड से टपक रहा था। हम दोनों ही बहुत अच्छा महसूस कर रहे थे। उसके बाद से हम दोनों के बीच कई बार सेक्स संबंध बन चुके हैं और अब हम दोनों अच्छे से काम भी करते हैं।