और मस्ती मेरे बदन में

मैने अपने दोस्त के कहने पर ट्यूशन प्रारम्भ किया । ट्यूशन के पीछे रुपया कमाना नहीं बल्कि कलियों के दीदार का भरपुर लाभ उठाना था वैसे ट्यूशन के सहारे मेरा दोस्त अब तक छः सात कलियों को मसल-मसल कर समय से पहले फूल बना दिया था मैं भी उसी के रास्ते पर चलते हुए
जवानी की बहार का आनंद लेना चाहता था ।

मैंने दोस्त के कहने पर, ट्यूशन का कार्य प्रारम्भ किया । वैसे तीन दिन बीत चुके थे…पर मैं हिम्मत जुटाने के वाबजुद भी उसके शवावों पर हाथ नहीं फेर पाया था जबकि मेरा दोस्त रमेश जिस लड़की को पढ़ाता था उसको रोज भलाई चखाता था ।

,मलाई खिलाने का मतलब कि चोदता था । मिलने पर जब वह शमा के साथ ही गई हरकतों को बताता – तो में उमंग से भर जाता…और स्वयं
ट्यूशन के लाभ को उठाने को तड़पता पर पहुँचने पर पर हाथ लगाने की हिम्मत नहीं होती ।।

| अब आँखों के सामने शीतल का रूप रंग हुष्ण हमेशा नाचता रहता और रह-रहकर मेरा कुआरा सिंगनल अप हो-हो कर मुझे व्याह से पहले व्याह का आनंद लेने की विवश करता ।।

मैं भी दोस्त की तरह अपनी शीतल को क्रीम लगाकर समय से पहले कली से फूल बनाने को बेताब था । | इस चक्कर में जेल का एक छोटा, टियूब हमेशा जेब में डालकर शीतल के बंगले पर जाता ।

दोस्त ने बताया था कि शीतल की उम्र की कच्ची कलियाँ जरा सा मजा पाते ही-आसानी से पूरे काम के लिये तैयार हो जाती है । । एकबार काम बनने पर वार-वार मजा देने को खुद बेकरार रहती है।

दोस्त की तरह में पूरी जवान था । हम दोनों बीए फाइनल के पढ़ रहे थे और एक ही कमरे में पार्टनर भी थे । उसी ने मुझे ट्यूशन के लिये ललकाया था । यद्यपि मेरी और उसकी दोनों की आर्थिक स्थिति ठीक थी । बस लौंडियांबाजी करने का साफ सुथरा तरीका था ट्यूशन का।

अच्छे घर की साफ सुथरी सुन्दर चीज का मजा… बिना किसी भय के आसानी के साथ मिलने लगा था । यहाँ टियूशन भी आसानी से मिल जाता था । :

उसने सांतवी की शीतल को पढ़ाने का जुगाड़ भी लगाया था। | वह उसी कालोनी के अमीर घराने की दो जुड़वा बहनों को पढ़ाता था ।

बताता था कि आजकल दोनों की फिट नेस चेक करता है । मजा लेने के लिए दोनों जुड़वा बहने – ढीले ढाले फ्राक को पहन कर पढ़ती हैं | मैं उसके मुंह से उन छोकरियों के साथ की जाने वाली हरकतों को सुन-सुन जवानी के जोश में भरता जा रहा था। । शीतल-गठीले शरीर की गोरी गोरी कमसिन कली थी | वह दो देशी कच्चे अनारों की मालकिन थी ।

उसको पढ़ाते समयं मेरा सिगनल अपने आप अप रहता ।

तीन चार दिन में मैं केवल एक बार हिम्मत करके उसके गालों पर हाथ फेरा था…बस । गाल मीसते मैं जवानी के उमगं से भर गया पर हिम्मत जुटा कर भी हाथ को उसकी चुचियों पर नहीं लगा सका था ।

पुनः मै छोकरी को फंसाने वाली हरकत को बिना अपनाए कुआरे लंड को हाथ से दबा-कर वापस आ गया था । पार्टनर मनीष ट्यूशन का असली आनंद ले रहा था । वह तो एक साथ दोनों जुड़वा बहनों को कच्ची से पक्की बना रहा था । वापस आने पर मैंने पार्टनर मनीष से शीतल के गाल पर हाथ लगाने की बात बताया तो वह चहक के साथ बोला| ” चूची दबाई “तुम उसे अकेले कमरे में पढ़ाते हो ना–

”हां पता नहीं क्यों हिम्मत टूट जाती है

“तुम उसे अकेले कमरे में पढ़ाते हो ना

‘ हां….पता नहीं क्यों हिम्मत टूट जाती है

मनीष- बुरा तो नहीं मानोगे’

‘नहीं क्या है- मैंने मनीष से पूछा ।।

वह एक पल कुछ सोचा फिर माथे पर बल देते दबे स्वर में पूछा-सच बताओ कभी किसी को चोदे हो या नहीं। तभी घबराते हो कच्ची उम्र की लड़कियां मजा पाने पर चहक जाती है । जब तक शीतल की चुची नहीं दबाओगे- तब तक बात आगे बढ़ने वाली नहीं….गाल पर हाथ फेरने पर मुस्काई थी । चुची दबाना था उसको मजा आ रहा है तुम घबड़ाते क्यो हो

उसकी बातो से मेरे लंड तनाव आने लगा था । मेरा दोस्त मनीष इस हसीन कार्य के लिये मेरा गुरू था । हमदोनों की जवानी अभी चटख रही थी । वह ट्यूशन का भरपूर लाभ उठा रहा था ।

पुनः मनीष एक पल के लिए गंभीर हुआ फिर सोचते हुए कहा

” बेफिकर होकर शीतल की चुची पकड़ा करो–

“ठीक है…” |

” अच्छा अब सोया जाय- और पार्टनर मनीष जो अपने माल को चोद कर मजा लेकर आया था-आराम से नींद लेने लगा ।।

मैं शीतल के हुश्न और मस्ती की रंगीन कल्पना में खोया अपने प्यासे कुंवारे लण्ड को पलट कर तकिये में रगड़ता करवटे आधीरात तक बदलता रहा ।

बहुत देर बाद में नींद आई । मैं शाम को पांच बजे शीतल को ट्यूशन पढ़ाने जाता था । मनीष | कालेज- से दो बजे वापस आता – और फौरन चला जाता था | वह पंजाबी घराने में पढ़ाता था । शीतल सेठ यानी मारवाड़ी की लड़की थी ।

दोपहर कालेज से वापस आते ही मेरे सीनियर पार्टनर ने अपने आप को आइने के सामने फिट फाट करके मस्ती के साथ बोला– प्यारे तेल लगाकर आज दूसरी वाली का भी उद्घाटन करूँगा । हो सकता है आज उसकी मां घर पर न हो |

” तुम बहुत भाग्यशाली हो –  मैंने तड़प के साथ कहा तो मनीष अपने वालो पर कंधी मारता बोला |

“मजा पाकर दोनों मस्त है अगर मम्मी नहीं होगी तो मजा आ जायेगा ।

बात मनीष कर रहा था और मस्ती मेरे बदन में दौड़ रही थी लंड गुदगुदाने लगा था लूट ले मजा अकेले अकेले प्यारे इसपर मनीष कंधे पर हाथ रखता बोला माल तो तुम्हारा हमारे माल से चोखा हैं प्यारे हम होते तो अब तक बहुत कुछ कर चुके होते |

आज चुची जरूर मसलो-माडवाडी लड़कियां तो और सेस्सी होती हे मजा आने पर यार को खुब खिलाती पिलाती भी है |

धीरे से गाल पर हाथ फेरना उसी हाथ को चुची पर लाना थोड़ा सिकुडे तो चुची को धीरे से मीसते हुये- दूसरे हाथ को चढ्ढी पर लाकर उंगली से बुर को धीरे धीरे खोदना चुप रहेगी-तो चार पांच बार करने के बाद फिर पढ़ाने लगना |

फिर इसी तरह थोड़ी देर बाद जब दूसरी बार भी विरोध न करे-तो गोद में बैठा कर दोनों चूची को एक साथ मीसना गाल से गाल रगडना फिर समझो फस गयी और जो जो बताया है। उस क्रिया को पारी पारी में करना चार पांच दिन खाली चुमो चाटो चढ्ढि में हाथ डालकर बुर से खुब खेलो-उंगली से धीरे धीरे चोदो – |

मनीष तो लौडियों वाजी का पूरा ज्ञान दे गया ।। | वह गया तो मैं आज शीतल की चुची मसलने की बात बार बार सोचता समय से पहले सेठ की आलसान कोठी पर पहुँचा ।

हमको देखते ही दरबान ने मास्टर जी कहकर नमस्कार किया ।

मासूम गोरी गोरी गुलाब की फुल सी मनमोहर शीतल के नशे ने आज रास्ते में ही जवान लंड को पैंट में जवान कर दिया था ।

उसकी उभरती छोटे संतरे के आकार की कच्ची चुचियाँ आंखों में। अभर उभर कर मेरे पूरे बदन में सनसनी दौड़ा रही थी ।। | पार्टनर मनीष इस
समय दोनों कन्याओं से मजा लूट रहा होगासोचते ही पूरे बदन में लड़की पन की भूख जाग गयी ।

‘मास्टर जी नमस्ते ।

“नमस्ते ….ठीक हो ना-मैने दरबान की ओर देखा ।।

‘शीतल बिटिया तो अभी अभी स्कूल से आई है….” दरबान ने कहा

उस समय मेरा लण्ड अंडरवियर में सकर पकंर कर रहा था ।आज | हमें शीतल की चुची दबा बुर को खोद जवानी का पहला मज़ा लेना ही था। | मैंने
कोठी में जाना चाहा कि वह अधेड़ दरवान अपने वालों को खुजलाता बोला- मास्टर जी रुकिये- मालकिन से मिल लीजिये । वह कही थी कि मास्टर को हमसे मिलवाओ| इस समाचार से मेरा नशा ढीला हो गया । मन संदेह से भर गया । खड़ा लंड फौरन डाउन हो गया । मैंने सोचा कि कल शीतल के गाल। पर हाथ फेरा था कही उसने मेरी शिकायत तो नही कर दिया ।।

कहावत संच ही है कि चोर की दाढी में तिनका ।। “मालकिन ”

” हां मास्टर जी आप रूकिये हम पूछ कर आते है ”

वह भीतर गया ।। | मैं थोड़ा घबड़ाया फिर मन को कड़ा किया अपने हृदय की बढ़ी हुई गति को संभालता दरवान की वापसी का इंतजार करने लगा।

वह वापस आया और कहा–जाइये मास्टर जी आप का भाग्य चमक गया-मालकिन बहुत खुश है

मैने उस दरवान के कंधे पर हाथ रख पुछा- ” लगता है। कोई खास बात है | ”

” हिम्मत से काम लेना-घबराना नहीं मालकिन को खुश कर दोगे तो फिर किसीबात की कमी नही होगी ”

इस पर अनिल दरवान इधर उधर देख हमको पोर्टीको में खड़ी कार के पीछे ले जा-अपने होठों पर जीभ फेरते कहामेरी मालकिन बड़ी शौकीन हैं तुम्हारी उम्र के छोकरे की अभी शादी नहीं हुयी होगी ।

” नहीं नहीं में समझा नहीं अनिल ।”

“हमको कुछ फायदे में से देने को कहो तो खोलकर बता दे ”।।

” देगें-देगे  ”

मालकिन को अयाशी का शौक है…लडको को अच्छा खासा पैसा देती है और नई-नई छोटी उम्र की लड़कियों को जवान करने का शौक लगता हैं-
आज तुम्हें अपने साथ अनाथलय ले जायेगी समझे ”

मेरे बदन में सनसनी तो दौड़ी पर अजीब सा महसुस कंर उसकी ओर देखा तो अनिल बोला- इस काम के लिये मालकिन नोट देगी….
अनाथालया में चार पांच लड़कियां गदरा गई है चलो देर हो रही है।

अनिल की बातों से पुन: मेरे शरीर में सनसनी दौंडी और अंदर से गुदगुदा कर मैं सेठानी के अनोखे अखाड़े में कूदने को कमर कस कर अनिल से बोला – ” हम इनाम में तुमको देगें– | ”

” मालकिन को कमसीन लड़कियों केकी बुर से लाल पानी निकलते देखने का बड़ा शौक है डरना नहीं जो कहे फौरन करना मजा भी पाओगे
| और रूपया भी,, वह चलते चलते बोला ।।