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इतनी कम उम्र में जवानी की आग कैसे बुझेगी -1

गतांग से आगे ….

“ये ..ये आप क्या कह रहे हैं अंकल”…………….रश्मि महसूस कर रही थी की अंकल का हाथ अब धीरे धीरे स्कर्ट के उन्दर पहुँच रहा है,…..उसकी कोमल जंघाओ पर दीपक अंकल के मर्दाने हाथ का स्पर्श, उसके होश उड़ाए जा रहा था. “तुम मुझे बहोट अच्छी लगती हो रश्मि”…….दीपक अंकल का हाथ पीठ पर से फिसल ता हुआ, बगलो से गुज़रता हुआ, चुचियो तक पहुच गया था, दूसरा हाथ जंघाओ के अंदर अपना सफ़र तय कर रहा था पॅंटी की तरफ, और अंकल के होंठ रश्मि के गुलाबी गालो को लाल बनाए के लिए हल्के से छू रहे थे.

दीपक अंकल द्वारा ये ट्रिपल अटॅक, रश्मि के लिए बर्दाश्त से बाहर हो गया. कची काली पूरी तरह से खिलाने को बेताब हो गयी. उसने अपना चेहरा घुमाया, और, पतले,गुलाबी,अधखुले, थरथरते होत अंकल के होठ पर गाड़ दिए अपने प्यारे दीपक अंकल के होठ पर जो उसे अपनी बीवी बनाना चाहते थे

रश्मि का मन डोलेमान था,तराजू के दो पलड़ो मे झूल रहा था,एक पलड़े मे था उसका मन, उसका कॉशन,तो दूसरे पलड़े मे था उसका,नाज़ुक,कमसिन,बदन, जो 16 वे साल की दहलीज पर खड़ा था……….उसका मॅन उसे रोक रहा था,ये सब करने के लिए,…………और तन चाह रहा था और कुछ पाना, सूब कुछ पाना, मर्द का स्पर्श उसे उकसा रहा था, अपन सूब कुछ नौछावर करने के लिए.
मन कह रहा था……रश्मि ये ठीक नही हैं,ग़लत है,…….ग़लत वक़्त पर ,ग़लत उम्र मे, ग़लत बात हैं,इसे रोको,……………..उधर तन कह रहा था ………….रश्मि इसमे बहुत मज़ा है,स्वर्ग का सुख हैं, ये सभी करते हैं…………..तन और मन की इस कशमा काश मे जीत आख़िर तन की हुई………जैसा हमेशा होता हैं

रश्मि अपना आपा खो कर अपने राज अंकल से लिपट गयी, किसी बेली की तराहा,जो हमेशा पेड़ से लिपटी रहती हैं……….उसके नाज़ुक हॉट राज के हॉट से मसले जा रहे थे………..अत्यधिक उत्तेजना से आँखे बंद थी……..राज का हाथ उसके रेशमी जांगज्ाओ से उपर सरकने की कोशिश मे बार बार फिसल जाता……..एतनि मुलायम जाँघ……..उउउफ़फ्फ़

“रश्मि….”…………राज का हाथ अब उसकी भारी भारी, सख़्त,लेकिन तनी हुई चुचि पर था…….उसने चुचि को हल्के से दबाया

“उउउउउउउउउन्न्न्न्न्न्न्न्न्न……” रश्मि के होत दीपक के होटो की जुदाई सह नही पाए,उपर से चुचियो पर हमला हो रहा था, वो कसमसाई.

“क्या मैं तुम्हे अछा लगता हू”………..काफ़ी कोशिशो के बाद राज का हाथ रश्मि की पनटी पर पहुच गया,जब पहुच गया तो फिर वही रुक गया, उसकी उंगलिया रश्मि की बंद चूत की दरवाजे पे दस्तक देने लगी
“हाँ….अंकल आप बहुत अकचे हैं”……….चूत पे पड़ने वाली दस्तक ने रश्मि के पूरे शरीर मे आग लगा दी थी, जिसे वो ना बर्दाश्त कर सकती थी, ना,ही बुझा सकती थी……….सिर्फ़ तड़प सकती थी…..उसने टाँगे फैला दी,अंजाने मे.

” क्या मैं तुम्हे जी भर के प्यार कर सकता हू”……..चुचियो पर दबाव बढ़ता जा रहा था, राज अब खुलके चुचियो को मसल रहा था, कभी दाई,कभी बाई……..रश्मि अब बेकाबू हो रही थी, अछा,बुरा कुछ भी समझ ने की स्थिति मे नही थी…….अब उसे सिर्फ़ आग बुझानी थी, जो उसके पूरे शरीर को जला रही थी.
“हाँ..हाँ..अंकल कीजिए ना….बहुत प्यार कीजिए…….आआअहह,.. आआहह……उसकी तड़प बढ़ती ही जा रही थी………..चूत गीली हो गयी थी……..लेकिन ये गीलापन आग बुझाने के लिए काफ़ी नही था.
अब राज ने सीधी चोट करने की सोची, उसने उसे अपने बाहो मे कस लिया, रश्मि के होटो को एक बार फिर मसल दिया अपने होटो से……..फिर उसे पूछा
“रस्मी तुम शरमाओगी तो नही……..अगर मैं तुम्हा ये टॉप उतार दू…?”
पहले ही वासना की आग मे जलती, बदहवास हो चुकी,सही ग़लत का फ़र्क भूल चुकी रस्मी ने अपने प्यारे राज अंकल को जवाब दिया…………..खुद ही अपना टॉप उतार कर…!

राज ने अब देर नही की,दोपहर का वक़्त था, दोनो के ही फ्लॅट मे कोई नही था, और रश्मि भी बेहद गर्म हो चुकी थी, तड़प रही थी, मचल रही थी,………….उसने रश्मि को अपने हाथो मे उठा लिया, बड़ी ही सावधानी से,…आख़िर कच्ची कली थी, नज़ाकत ज़रूर थी.

बेडरूम मे पहुच ते ही राज ने रश्मि को बिस्तर पर लिटा दिया,उसकी आँखे बंद थी,….मस्ती से…..राज ने अपने सारे कपड़े उतार दिए,सिर्फ़ अंडरवेर छोड़ के,
क्यो की वो इस नाज़ुक कली को डराना नही चाहता था,….वक़्त से पहले..!
“रश्मि …!”
“ऊऊन्न्न्न्न्न्न्ह”
“क्या तुहमे पता है तुम कितनी खूब सूरत हो”……….राज के हाथ स्कर्ट नीचे करने मे जुटे थे.नज़रे ब्रा मैं क़ैद उन यौवन उभरो का जायज़ा ले रही थी, जो अब गहरी सांसो के साथ उठ बैठ रहे थे.
“न्न्नन्नन्न्न…नही..आआहह”….. रश्मि की कामुक सास्कारिया बढ़ने लगी थी…….स्क्रिट अब उतर चुका था……….राज पगला गया उस अनचुई कली को देख कर…….सिर्फ़ ब्रा, पनटी मे, जन्नत की हूर लग रही थी…….मासूम खूबसूरत चेहरा,सुतवा नाक, गुलाब की पंखुड़ी समान होठ, सुरहिदार गर्दन,उनके नीचे बसी यौवन घटिया,सीधी तनी हुई,नुकीली,……..पतली,घटदार कमर,कमर के नीचे दो लंबी पतली टॅंगो के बीच वो जन्नत का द्वार….राज मंत्रमुग्धा हो कर उसे देख रहा था, जैसे वो एक शापित अप्सरा थी और अपने उद्धार होने का इंतज़ार कर रही थी.

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राज उसके पास लेट गया, उसे अपनी मजबूत बाहो मे भरकर, उसके कानो मे कहा “तुम बहुत सुंदर हो,बहुत ही खूबसूरत हो”…….और वो रश्मि के जिस्म का हर हिस्सा चूमने लगा, चाटने लगा, सहलाने लगा,मसालने लगा,…………रश्मि भी पूरे जोशो ख़रोश से रेस्पोन्से देने लगी,अपने प्यारे राज अंकल की बाहो मे समाए जा रही थी………राज के हाथो ने अब रश्मि के बाकी बचे कपड़ो को उतार दिया और अपने भी………….रश्मि की आँखे अभी भी बंद थी,…..उत्तेजना से, शर्म से……….लेकिन वो इश्स आनंद दाई मज़े से उबरना भी चाहती थी.

वासना का ज्वर बढ़ता ही जा रहा था,रश्मि की चुचिया मसली जा रही थी, राज के तजुर्बेकार हाथ उसके शरीर को जैसे वीना की तरह छेड़ रहे थे, रश्मि के मूह से करहो का ,सिसकारी यो का, मधुर संगीत गूँज रहा था.आनंद की लहरो पर सवार वो आसमान मे उड़ रही थी.

राज उसकी कमसिन चूत को देख कर एक बार सोच मे पड़ गया…….क्या ये सह पाएगी उसके मेट्यूर्ड,तगड़े लंड को..?……….लेकिन ये सोच कुछ ही पल टिकी….उसने धीरे धीरे रश्मि को कली से फूल बनाने की राह पर डाल दिया……प्यार से, सहलाते हुए, चुचियो को चुसते हुए…….वो उसकी टॅंगो के बीच मे आया …………रश्मि समझ रही थी अब क्या होने वाला हैं …..एक पल के लिए ही सही उसका मन जाग उठा, लेकिन तूरंत वासना ने उसपर काबू पा लिया ………अब वो हमला झेलने के लिए तैय्यार थी………..राज के शुरुआती हलके झटके,कुछ मसलन,कुछ चूमा चाटि के बीच लंड आधा अंडर घुस गया ,…….आनंद और दर्द के लहरो पर झुअलते हुए रश्मि ने सब सहन कर किया………चूत का बहता हुआ रस लूबराइकंट का काम कर रहा था………..आख़िर मे लंड ने चूत पर फ़तह हासिल कर ही ली…………..अब तो आनंद ही आनंद था, मज़ा ही मज़ा था, नशा ही नशा था………..रश्मि समझो बादलो पर उड़ रही थी………..राज का लंड अब पिस्टन की तरह आ जा रहा था .

और वो वक़्त भी आया लंड की तेज बौछार ने रश्मि के अंदर भड़की आग को बुझा दिया.
कली अब खिल कर फूल बन गयी थी
दोनो निढाल हो कर काफ़ी देर वैसे ही पड़े रहे, एक दूसरे की बाहो मे.

“रश्मि…..!” मा की आवाज़ सुनते ही, रश्मि अपने राज अंकल के ख्वाबो से निकल कर वास्तविक दुनिया मे आई.उसने तुरंत पनटी मे से हाथ निकाल लिया राज के साथ बिताए रंगीन पॅलो ने उसकी चूत को पनटी मे ही रुला दिया था. वो उठ कर बाथ रूम की तरफ भागी.
“मैं बाथरूम मे हू मम्मी…!”……..बाथरूम मे घुसते ही वो चिल्ला कर मम्मी को बोली………अपनी पहली चुदाई के बाद,वो राज से काफ़ी खुल गयी थी,लेकिन राज एक सुलझे हुए व्यक्तित्वा का मालिक था, वो जानता था, कच्ची उम्र मे मिला सेक्स का अनुभव रश्मि को बहका सकता था. उस दिन तो वो अपनी बीवी के कारण फ्रसटेटेड था,और रश्मि की खिलती हुई जवानी ने उसके उंड़र छिपी हुई वासना को जगा दिया था,रश्मि तो थी ही अल्हड़,वो भी बहक गयी,लेकिन बाद मे दोनो को ही अहसास हुआ, अपनी ग़लती का……..रश्मि अभी भी राज के ही ख़यालो मे डूबी हुई थी……………उस घटना के बाद राज ने उसे समझाया था, जो भी हुआ था एक, अचानक आया तूफान था,जिसमे वो दोनो ही लापेट मे आ गये थे.अपना काबू खो दिया,लेकिन अब आगे उःने अपने आप पर काबू रखना होगा,…………….राज तो मेट्यूर्ड था,वो बात की नज़ाकत को समझ सकता था, लेकिन रश्मि…………उसकी उम्र, नादान थी………और ग़लत वक़्त पे ग़लत फल खा चुकी थी,……….तीर छूट चुका था, आग लग चुकी थी…………….लेकिन तभी राज का ट्रान्स्फर हो गया, दूसरे शहर मे……..बहुत दूर.

बाथरूम मे अपने गीली पनटी और चूत को साफ कर चुकी रश्मि ने एक आआह सी भारी राज की याद मे…………राज के जाने बाद, रश्मि की भी हिम्मत नही हुए किसी और से संबंध बनाने की……….कई बाते थी, बदनामी का डर तो त ही,लेकिन राज उसे अछा लगता था,उसके प्रति एक सॉफ्ट कॉर्नर था, उसकी बीवी की वजह से,…………..वैसा किसी और के लिए दिल धड़क नही सका था…………धीरे धीरे रश्मि सामानया हो गयी.
लेकिन आज नीलू की बातो ने उसकी सोई हुई सेक्स की भावनाओ को जगा दिया था………..उसे एक बेचैनी सी महसूस होने लगी………..पूरे शरीर मे सनसनी फैल रही थी……….पहला सेक्स का अनुभव उस पर हावी हो रहा था………अब उसे वो सब चाहिए था………वो मसलाना, सहलाना……..होत को चूसना काटना……..सबसे ज़्यादा उसे चाहिए था वो मीठा सा,…हसीन सा दर्द…….जो उसे उसकी टाँगे फैला कर, चूत के होठ खोलकर, उसके अधपके अनारो को दबाते दबाते. अंदर बाहर होने वाला लंड देता था……….. हहययययई..एक सिसकारी निकल गयी.

“क्या हुआ बेटी…..”…….उसकी सिसकारी सुनकर मम्मी ने पूछा.
” कुछ नही मम्मी…….बस पैर थोड़ा फिसल गया ….”…………………. सचमुच पैर फिसल ही तो गया था उसका
अभी और फिसल ने वाला था……….वो गिरने वाली थी…..पता नही…….कहा तक…कब तक.

उधर नीलू जब अपने घर पहुचि, तो उसने पाया चंदा उसके घर से बाहर निकल रही थी.
चंदा एक बहुत बड़े घर की बिगड़ी हुई,आय्याश किस्म की लड़की थी, जो नीलू और रश्मि से एक साल सीनियर थी, हमेशा बाय्फरेंड्स बदलते रहती, शहर के नाइट लाइफ की जानी मानी हस्ती थी,……..कपड़ो की तो उसे एयिलर्जी थी……..जितने पहनना ज़रूरी हो, उतने भी बड़ी मुश्किल से पहन ती थी……..कपड़े उतारने की कॉंपिटिशन लगाई जाए, तो चंदा के जीतने की गॅरेंटी थी………नीलू ने सुन रखा था की चंदा ड्रग्स भी लेती हैं………..!.
ये लड़की मेरे यहा क्या कर रही हैं……..?

“हे डार्लिंग……..मैं तुमसे ही मिलने आई थी…”……….चंदा ने चहकते हुए कहा…….खीच कर ज़बरदस्ती नीलू को बाहो मे भर लिया, और उसके गालो पर एक किस जड़ दिया…………ये था चंदा का लड़कियो से मिलने का तरीका……….अब लड़को से कैसे मिलती होगी………?…….जस्ट इमॅजिन.

क्या बात आज मेरी याद कैसी आई नीलू को पता था ये नकचाढ़ि लड़की, उसकी और रश्मि की दोस्ती से जलती हैं. आज मैने एक पार्टी रखी हैं,सभी दोस्त आएँगे. तुम्हे भी इन्वाइट करने आई हू……और हाँ रश्मि को भी साथ ले आना, मैं उसे फोन कर दूँगी” “किस खुशी मैं पार्टी हो रही हैं नीलू ने उत्सुकता वॉश पूछा. “मेरी जान पार्टी के लिए कोई बहाना चाहिए क्या….?…सोचा दोस्तो के साथ थोड़ी मस्ती की जाए…तुम ज़रूर आना, और रश्मि को भी याद से लाना…….शाम 7.30 मेरे घर पर……….ओक, मैं चलती हू.” चंदा जैसे आँधी की तरह आई और तूफान की अत्रह चली गयी नीलू सोच मे डूबी हुई सोचने लगी……….उसे पार्टी मे जाना चाहिए या नही…………रश्मि से बात करके देखूँगी…..नीलू ने सोचा नीलू खुद एक आमिर परिवार से ताल्लुक रखती थी, पार्टिया उसके लिए नयी नही थी. लेकिन चंदा के घर पार्टी का मतलब था, मौज मस्ती, डॅन्स और बहुत कुछ. नीलू और चंदा के परिवार काफ़ी मिले हुए थे, बज़ाइनेस रिलेशन्स की वजह से इश्स लिए घर मनाही की कोई वजह भी नही थी. और वैसे भी नीलू के घरवालो को इश्स बात से लो मतलब नही था की उनकी जवान बेटी क्या करती हैं , कहा जाती हैं वो तो बस अपने बज़ाइनेस मीटिंग,टूर्स, पारटइयो मे मसरूफ़ थे. नीलू ने रश्मि को फोन लगाया.
“हे रश्मि क्या कर रही हो…?”
“कुछ खास नही,….तुम बताओ कैसे फोन किया रश्मि अपना बाथरूम एपिसोड ख़त्म करके टीवी के सामने बैठी थी. “अभी अभी चंदा आई थी,मेरे यहा आज शाम उसने पार्टी रखी हैं, अपने दोस्तो के साथ,हमे भी बुलाया हैं,……बहुत फोर्स कर रही थी…..”………..नीलू ने एक ही बार मे पूरी बात बता दी “हमे से मतलब रश्मि जानती थी चंदा सिर्फ़ अपने लेवेल के लोगो से ही संबंध रखती थी.

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“अरे वो तुम्हे लाने को कह रही थी……..बहुत ज़ोर दे कर.”
रश्मि भी चंदा की पेरटियो के बारे मे जानती थी नीलू ही बताया करती थी, और उत्सुकता वा एक बार ऐसी पार्टी मे जाना भी चाहती थी
“यार लेकिन….वो बहुत आमिर हैं, मैं उस माहौल मे ओल्ड लगूंगी”
“तू चिंता मत कर……..मैं हू ना तेरे साथ”
“फिर मेरे घर वाले भी नही मानेंगे”………….रश्मि की बात सही थी
“वो सब तू मुझ पे छोड़ दे, मैं मना लूँगी तेरे मम्मी पापा को”
“ठीक हैं, अगर तू पर्मिशन निकाल लेगी, तो मुझे कोई ऐतराज़ नही”
“तो फिर मैं तुम्हे लेने आऊँगी,शाम को…….7.30 बजे, तैय्यर रहना.”…………..कहकर नीलू ने फोन काट दिया

रश्मि मान ही मन उधेड़बुन मे फासी हुई थी,…पार्टी का अट्रॅक्षन भी था,और थोड़ा डर भी……..वाहा क्या होगा…?

जो होगा देखा जाएगा…………सिर को झटका दे कर, दिमाग़ मे चल रही उधेड़बुन को झटक दिया.

रश्मि और नीलू जब चंदा के घर पहुचि, तो 8.00 बाज चुके थे, कॉंपाउंड मे कई आलीशान गाडिया खड़ी थी, जो साबित करती थी समाज की क्रीम वाहा मौजूद थी.रश्मि और नीलू ने बंगलो मे प्रवेश किया, वेहा उन्हे बताया गया, की पार्टी पिछे लॉन मे चल रही हैं

रश्मि ब्लू डेनिम जीन्स पर ब्लॅक स्लीवलेशस टॉप पहने हुए थी, जिसमे उसके सभी अंग उभरकर दिख रहे थे, भारी भारी कातिल चुचिया, सुघड़ कमर, चलते वक़्त देखने वालो की धड़कने तेज़ करने वाले कूल्हे, सब कुछ उसकी 54” की हिगत के अनुपात मे ढले थे. नीलू बड़े घर की थी, सो उसका ड्रेस भी उसके लेवेल का था, वो शॉर्ट स्कर्ट पे खुले गले का टॉप पहने हुए थी, लो कट टॉप से उसकी चुचियो का नज़ारा देखा जा सकता था, जो किसी के भी मूह से लार टपका सकता था, हाइ हील्स की जूती,चलते वक़्त उसके कुल्हो मे जो थिरकन पैदा करते थे, वो दिलो को आंदोलित करने के लिए काफ़ी थे

दोनो जैसे ही पार्टी मे दाखिल हुए, चंदा तेज़ीसे उनकी तरफ दौड़ी चली आई, जैसे वो दोनो कोई बड़ी हस्तिया हो और पार्टी मे उन्ही का इंतज़ार हो रहा हो.
“वेलकम…..डार्लिंग,….. वेलकम रश्मि, तुम्हे देखा कर मुझे खुशी हुई, मुझे डर था तुम आओगी भी या नही……….आओ मेरे साथ…..लेट्स एंजाय दा नाइट”……….चंदा के इश्स वॉर्म वेलकम ने रश्मि के दिल मे बसी हिचक को दूर कर दिया………….( लेकिन उस बेचारी को क्या पता था, चंदा के इश्स “वॉर्म” वेलकम पीछे क्या था)
वो उन दोनो के हाथ पकड़ कर अपने खास ग्रूप के पास ले आई

“फ्रेंड्स प्लीज़ मीट & वेलकम और स्पेशल गेस्ट टुडे, ये नीलू हैं, और ये रश्मि, और स्वीट एंजल्ज़…………और ये मेरे ख़ास्स दोस्त हैं….ये हैं रोमी, ये लकी, ये मॉंटी, ये रूचि, ये प्रिया………”………चंदा उन दोनो को ही बड़ी स्पेशल ट्रीटमेंट दे रही थी, उसकी आँखे एक ख़ास्स अंदाज मे चमक रही थी.
सब ने एक दूसरे से ही,हाला की…………वैसे तो पार्टी मे मौजूद सभी की ( ख़ास्स तौर से लड़को की ) नज़ारे उन्ही पर टिकी हुई थी…….नया माल देख कर सभी के मन मे एक ही सवाल था…………. मेरा नुंबर कब आएगा”
चंदा के ख़ास्स दोस्त रोमी, लकी, और मॉंटी उन दोनो को ऐसे घूर रहे थे जैसे कसाई बकरे को घुरता हैं ये सोचते हुए की इसे काटने पर कितना माँस निकलेगा |

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