इतनी कम उम्र में जवानी की आग कैसे बुझेगी -3

प्यारे मस्ताराम के पाठको आज मै फिर से लौट आया हु अपनी कहानी को आगे बढ़ाने के लिए मुझे ढेर सारे पाठको के मेसेज आये मै रिप्लाई अभी नहीं कर पाया हु क्यों की ऑफिस के काम का लोड है और कहानी को भी आगे बढ़ाना है जल्दी ही सभी ईमेल का रिप्लाई दूंगा तब तक आगे की कहानी का मज़ा लीजिये | इतनी कम उम्र में जवानी की आग कैसे बुझेगी -2

चंदा ने सेफ मे से एक सीडी निकालकर, वही पड़े एक प्लेयर मे डाल दी और टीवी ओं कर दिया, कुछ ही पॅलो मे जो टीवी पर दिखाई देने लगा, वो देखने के बाद तो रश्मि के होश उड़ गये, उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी,…गनीमत थी की वो बेहोश नही हुए……सीडी मे वो और मॉंटी दिखाई दे रहे थे, उस रात का पूरा शटैंग था उस सीडी मे, रश्मि का चेहरा ऐसा लग रहा था मानो उसके जिस्म से पूरा खून निचोड़ लिया हो…..एकदम सफेद,….रख सा सफेद……..”ये …ये बंद करो…प्लीज़…मैं देख नही सकती…प्लीज़ बंद करो इसे”…..रश्मि ज़ोर से चिल्ला पड़ी.

“क्यू रश्मि डार्लिंग…..सिर्फ़ शुरुआत देखकर ही होश उड़ गये…..अभी आगे और है…..रोमी, लकी…और भी लड़के….पूरी रंडी बन गयी थी तुम…..जम के ले रही थी ….वो भी बड़े प्यार से…..कोई ज़बरदस्ती नही………..अगर ये सीडी मैं पूरे शहर मे बाट दू तो क्या होगा……?

“”मैं तुम्हारे पाव पड़ती हू, भीख मांगती हू……प्लीज़ ये सीडी मुझे दे दो….मेरा यकीन करो मैं किसी से कुछ नही कहूँगी……मैं अपने मा बाप की कसम खाती हू…..प्लीज़ चंदा…ये सीडी मुझे दे दो…..प्लीज़.”…..रश्मि ने सचमुच चंदा के पैर पकड़ लिए थे, वो रो रही थी, गिड़गिदा रही थी…….लेकिन चंदा पर ना कोई असर होना था ना हुआ,……उसने रश्मि के बाल पकड़ कर उसे उठाया, अपने पास बिठाया, और कहा..

” देख रश्मि, अब रोने ढोने से कुछ नही होगा,……जब तक नीलू ठीक होकर घर नही आती,…जब तक ये मामला ठंडा नही पड़ जाता,…..जब तक मुझे यकीन नही हो जाता, की तुमसे मुझे कोई ख़तरा नही, तब तक ये सी डी मेरे पास ही रहेगी,……और तब तक तू मेरी गुलाम बन कर रहेगी……मेरी पालतू कुतिया बनकर रहेगी,….जो मैं काहु वो तुम्हे करना पड़ेगा….कोई नखरे नही, कोई ना नुकुर नही……बोल मंजूर है..?”

रश्मि के पास और दूसरा क्या ऑप्षन था, हाँ कहने के सिवा….उसने गर्दन नीचे करदी और हाँ कर दी.

चंदा ने बड़े ही संतुष्टि पूर्ण तरीके से होठ चटकाए, और इंटरकम उठा के मॉंटी, रोमी को कमरे मे बुला लिया.

मॉंटी और रोमी के कमरे मे आते ही रश्मि समझ गयी, “पालतू कुतिया से चंदा का क्या मतलब था, वो और घबरा गयी, सेक्स का बुखार उसका कब का उतर चुका था, अपनी ग़लती का उसे अहसास हो चुका था, लेकिन अब देर हो चुकी थी……उस सी द का चंदा के पास होना, जाहिर करता था अब उसे, चंदा के एशारे पर नाचना था, चाहे मर्ज़ी से, चाहे मजबूरी से……अब उसे इस अधोपतन से कोई नही रोक सकता था.

कमरे मे आते ही मॉंटी और रोमी उसके दोनो तरफ बैठ गये,

“क्या कहती है हमारी रश्मि डार्लिंग……उस रात तो बड़ी उच्छल कूद कर रही थी, आज मूड क्यू उखड़ा है, जानेमन…….?”……मॉंटी ने उसके गले मे हाथ डाल कर अपने पास खिछा

“लगता हैं उस रात की चुदाई से हमारी रश्मि डार्लिंग का मन नही भरा……इस लिए नाराज़ है हमसे….कोई बात नही मेरी जान…चलो आज तुम्हारी प्यास बुझा देते हैं”……ये रोमी था, उसका हाथ सीधे रश्मि के स्कर्ट के उंड़र घुस चुका था

“नही…प्लीज़ ऐसा मत करो…मुझे बक्ष दो…..मैं बिल्कुल चुप रहूंगी….प्लीज़ मुझे जाने दो”…….रश्मि ने आखरी बार कोशिश की, उसकी आँखे लगातार बरस रही थी.

“नखरे मत दिखा कुतिया…..चुपचाप जैसा ये चाहते हैं, वैसा कर…वरना..!”………चंदा पूरी तरह से रश्मि पर हावी हो रही थी.

“अरे नही नही,….ऐसा जुलूम मत करो , हमारी रश्मि तो बड़े प्यार से चुदेगि…ये कोई पहली बार थोड़े ही चुद रही है….?”…..मॉंटी का हाथ अब रश्मि की चुचियो की गोलाई नाप रहा था.

“मेरे दोस्तो को तकलीफ़ हो रही है तेरे इश्स मदमस्त जवानी से खेलने मे….साली रंडी….टॉप उतार दे अपना… चंदा तो जैसे आज रश्मि को पूरी तरह से तोड़ना चाहती थी…..उसे इतना ह्युमिलियेट करना चाहती थी, की आगे कभी भी वो उसके खिलाफ कुछ भी कहा, सुनने से डरे

“मरती क्या ना करती रश्मि ने टॉप उतार दिया, पिंक ब्रा मे कसे यौवन भर, छिपाये नही छिप रहे थे…….दोनो बेसबरो ने ब्रा उतरने की भी राह नही देखी…दोनो भीड़ गये निप्पलेस चूसने मे, …ब्रा के उपर से ही..रश्मि कसमसने लगी, आज उसे मज़ा नही आ रहा था, बल्कि तकलीफ़ हो रही थी…..अब दोनो ने ही अपनी अपनी पॅंट्स की ज़िप खोल ली….रश्मि के दोनो हाथो को पॅंट के अन्दर घुसा दिया…..

“रूको अब मेरी डाइरेक्षन मे होगा ये चुदाई का प्रोग्राम…..सबसे पहले इसे नंगी करो…और तुम दोनो भी, अपने अपने कपड़े उतार दो..!
अगले ही पल दोनो ही रश्मि पर टूट पड़े….रोमी ने झटके से उअस्कि स्क्रिट और पनटी उतार दिए, और मॉंटी ने ब्रा नोच डाली…एक मजबूर लड़की को नंगा करने मे वक़्त ही कितना लगाना था…..रश्मि एक हाथ से, च्छुपाए ना च्छुपाने वाली चुचिया च्छुपाने की कोशिश कर रही थी, तो दूसरे हाथ से, अपनी नर्म,नाज़ुक,मुलायम बालो से ढाकी चूत च्छुपाने की चेस्टा कर रही थी……मॉंटी, और रोमी भी नगञा हो गये.

“रश्मि तुम कुतिया हो…है ना …चलो कुतिया बन के दिखाओ….”….डिरेक्टर चंदा ने आदेश दंडनाया.
अपने आँसू पोछति, किस्मत पर रोटी रश्मि ने आदेश का पालन किया, इश्स पोज़िशन मे उसके, चिकने, गुदाज भारी, मसल कूल्हे उपर उठ गये, हवा मे…..चूत की दोनो पंखुड़िया फैल गयी….गंद का च्छेद खुलबन्द हो रहा था……..तनी हुई चुचिया लटक रही थी….मॉंटी और रोमी के लंड अपने आप तन गये थे, अपनी पूरी लंबाई और मोटाई मे….माहौल मे बढ़ती उत्तेजना अब चंदा पर भी असर कर रही थी….. उसने भी अपने कपड़े उतरने शुरू किए…..अगले ही पल उस कमरे मे सभी नंगे थे.

“रोमी इससके होत देखो कितने प्यारे हैं,बिल्कुल गुलाब की तरह…क्या तुम देखना नही चाहते ऐसे होतो मे तुम्हारा लंड कैसा दिखता है…..और मॉंटी तुम, ज़रा इस खूबसूरत चूत को देखो, क्या तुम इसे सूंघ कर, चट कर नही देखना चाहते हो……आख़िर हमारी प्यारी सहेली है, इसकी खूबसूरती का मज़ा हम नही लूटेंगे, तो कौन लूटेगा”……..कहते कहते चंदा के हाथ खुद अपनी चूत को कुरादाने लगे.

चंदा का कहना था की दोनो ने अपनी अपनी पोज़िशन सम्हल ली, रोमी का लंड रश्मि के होठ के बीच फसा था, तो मॉंटी की जीभ चूत की गहराई नाप रही थी…चंदा रश्मि के चारो पैरो(?) मे लेट कर, उसकी चुचियो को मसल रही थी, खिच रही थी………..काफ़ी देर तक रश्मि की चूत चाटने के बाद,मॉंटी से रहा नही गया, और उसने, अपना खड़ा टाइट लंड उसकी चूत मे एक ही झटके मे घुसा दिया…..रोमी का लंड मूह मे होने से रश्मि चीख भी ना सकी……..अब उसकी दोनो तरफ से चुदाई हो रही थी

रोमी तो पहले से ही इतना गर्म हो चुका की रश्मि के मूह मे 15 मिनट से ज़्यादा नही टिक पाया, वही झाड़ गया. लेकिन उसने तब तक लंड बाहर नही निकाला जब तक पूरा माल रश्मि के पेट मैं ना जा पहुचा

रोमी के झदने के बाद चंदा का अगला आदेश………..

मॉंटी तुम अपना लंड निकाल लो और सोफे पर जा बैठो…घबराव नही मैं तुम्हारे साथ क्ल्प्ड नही करूँगी……..अब मॉंटी सोफे पर जा बैठा…….”रश्मि तुम अब मॉंटी के लंड पर बैठो…..अपने हाथ से मॉंटी का लंड लेलो अपनी चूत मे…….और उच्छल कूद शुरू करो”……डाइरेक्टर का आदेश था, मानना तो था ही……अपमान से जलती रश्मि ने,अपनी भाव नाओ पर काबू करके वैसा ही किया…मॉंटी का दिल बागबाग हो उठा…..उसने रश्मि की चुचिया कस के पकड़ ली, और पूरी ताक़त से मसल ने लगा, निप्पल्स उमेटाने लगा…..रश्मि के मुलायम जिस्म का घर्षण उसमे और जोश भर रहा था……..अब रश्मि को और जलील करने की नियत से चंदा अपनी क्लीन शेव्ड, बहुत ज़्यादा चोदे जाने से फैली हुए चूत लेकर, रश्मि के सामने खड़ी हो गयी……रश्मि के बालो को पकड़ कर, उसका मूह अपनी चूत से सताती, बोल पड़ी…”चल चाट इसे…अच्छे से साफ कर…जैसे ही रश्मि की जीभ का स्पर्श चंदा की चूत पे हुआ…..उसके मूह से कामुक सिसकारिया निकल ने लगी

अब झदने की बारी मॉंटी की थी….जैसे ही राशमी ने महसूस किया, की मॉंटी झदने वाला है, वो फिर से गिड़गिदने लगी…..”प्लीज़ मॉंटी अंदर मत गिराना, मैं प्रेग्नेंट हो जौंगी…..चंदा प्लीज़ समझाओ इसे…मैं तुम्हारी हर बात मान रही हू…तुम मेरी इतनी बात मानो प्लीज़……वरना मुझे ख़ुदकुशी के अलावा कोई रास्ता नही बचेगा…प्लीज़”

रश्मि के मूह से ख़ुदकुशी शब्द निकलना था की चंदा ने मॉंटी को इशारा किया,….मॉंटी ने बड़ी ही अनिच्छा से रश्मि को लंड पर से उठाया,….गुस्से से उसके मूह को चोदने लगा……रश्मि के पेट मे वीर्या की दूसरी किश्त पहुच गयी

अगले दो घंटे तक मॉंटी और रोमी पोज़िशन बदल बदल के उसे चोदते रहे, रश्मि के शरीर पे एक भी ऐसा च्छेद बाकी नही रहा जहा लंड जा सकता हो लेकिन डाला ना गया हो…..वो चीखती रही कराहती रही, रहम की भीक मांगती रही..लेकिन ना किसी को रहम आना था ना आया

इनस्पेक्टर राजपूत और आमिर एक बार फिर, डेंजर ज़ोन मे बैठे थे, राजपूत के सामने, कोई सॉफ्ट ड्रिंक था, तो आमिर के सामने बियर की बोतल. आमिर ने राजपूत को उसके और तरुन्य के बीच हुई बातचीत के बारे मे डीटेल मे बता दिया था,…..जिसे सुनकर राजपूत के माथे पर गहन चिंता की सलवते उभर आई थी.

“यार आमिर ये बता….ये अग्रवाल का…..इतने बड़े बज़ाइनेस मेन का….नेल्लु के केस मे, इतना गहरा इंटेरेस्ट लेना समझ मे नही आ रहा……माना की वो मल्होत्रा परिवार से काफ़ी जुड़ा है…..लेकिन फिर भी…..कुछ तो गड़बड़ है”……..राजपूत को अग्रवाल की इस केस मे दिलचस्पी काफ़ी उलझन मे डाले हुए थी,….आख़िर जब इतने बड़े लोग किसी केस मे उलझ जाते हैं, तो सबसे बड़ी कसौटी, पुलिसे वालो की होती है……उनपर हर तरफ से दबाव जो डाला जाता है.

“हाँ यार…कुछ तो लॅफाडा ज़रूर है,….ड्रग्स का पाया जाना…….नीलू के बदन पर खरोनछे, जखम पाए जाना…… इशारा तो किसी गांग रेप की तरफ करते हैं…..और ऐसे मे अग्रवाल की दिलचस्पी, सिर्फ़ परिवारिक रिलेशन्स की बदौलत नही हो सकती”….आमिर भी कुछ विचलित था.

“देखो तुम एक काम करो, तुम नीलू के स्कूल मे जाकर जानकारी हासिल करने की कोशिश करो,…मैं हॉस्पिटल मे अपने आदमी लगा देता हू,…जो वाहा घुलमिल कर जानकारी हासिल करेंगे…….डरो मत, मैं डिपार्टमेंट के आदमी नही भेजूँगा……..हमारे पास ऐसे कामो के लिए अलग आदमी होते हैं…….लेकिन तुम भी सावधानी से कम लेना…….बात उँचे रसुख वेल लोगो की है……कही लेने के देने ना पद जाए.”…………राजपूत ने आमिर को आक्षन प्लान समझाया, आमिर ने बची हुए बियर गले मे उतार ली, और राजपूत से हाथ मिला कर वो बाहर निकल गया.

राजपूत थोड़ी देर वही बैठा रहा, मोबाइल से उलझा हुआ, उसने वाहा बैठे बैठे ही अपने खास आदमी कम पर लगा दिए.

इधर चंदा के घर से रोती, बिलखती, अपमान मे जलती, रश्मि बाहर निकली तो उसका चेहरा पत्थर सा सख़्त हो चुका था, एक एक करतूत, जो चंदा और उसके दोस्त ने उसके साथ की थी,….उसके नाज़ुक दिल पर, उसके दिमाग़ पर, जिस्म पर, नासूर बन कर रह गयी थी…….आँखो से क्रोध की ज्वाला निकल रही थी…….उसका रोम रोम तड़प रहा था., सुलग रहा था…..चंदा और उसके दोस्तो को सबक सिखने के लिए……..लेकिन कैसे…..वो किसी से कुछ कह नही सकती थी, किसी को अपने नासूर दिखा नही सकती थी…….किसी से मदद नही माँग सकती थी, ना घर वालो से, ना पुलिसे से, ना और किसी से……वो करे तो क्या करे………इसी उधेड़बुन मे वो कब ऑटो को रोक कर, उसमे बैठी, कब घर पहुचि, उसे पता ही नही चला.

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घर पहुचते ही, जब उसकी मा ने पुचछा, वो इतनी देर कहा थी, तो उसने तबीयत ठीक ना होने का बहाना बना दिया, और अपने कमरे मे जाके सोने की चेष्टा करने लगी, लेकिन जब तकदीर ने साथ छोड़ दिया हो, तो नींद भी कहा साथ देने वाली थी………एक ग़लती,….वासना के जाल मे फसने की, अपने आप पर काबू ना पाने की….एक पल का मोह, शारीरिक संतुष्टि का…..उसे कहाँ ले आया था.

उधर आमिर नीलू के स्कूल पहुचा, हरफ़नमौला होने की वजह से, कोई दिक्कत नही आई, अपने आप को सीनियर स्टूडेंट स्थापित करने मे, वो स्कूल मे इधर उधर घूमता रहा, कभी नोटीस बोर्ड के पास, तो कभी लाइब्ररी मे, कभी लड़के लड़कियो के जमघट के पास, कान को मोबाइल लगाके खड़ा रहता, पूरे दो घंटे वो स्कूल मे घूमता रहा, लेकिन किसी ने उसे टोका नही……..क्यो की नीलू का स्कूल जूनियर कॉलेज था, और सीनियर कॉलेज भी उसी कॅंपस मे था.

पूरे स्कूल मे नीलू की ही चर्चा थी, उसके कोमा मे होने से, हर कोई अपनी अपनी बुद्धि के अनुसार, अटकले लगा रहा था, अपने अपने तर्क दे रहा था…….कुलमिला कर नीलू के साथ सिंपती का माहौल था, हर किसी को दुख था………..दो घंटे बाद जब आमिर स्कूल से बाहर निकाला तो, उसके पास एक नाम था………नीलू की बेस्ट फ्रेंड,……..रश्मि

और रश्मि का स्कूल मे कही पता नही था….!

आमिर उलझन मे था, रश्मि को वो नही जानता था , सीधे से किसी को पुच्छ भी नही सकता था, ख्वंख़्वाह शक पैदा हो जाता, क्यू की मामला सेन्सिटिव था,……कुछ देर वो वही सोचता रहा……फिर अचानक उसकी दिमाग़ की बत्ती जली.
वो दौड़ता हुआ, नज़दीक के एक बुक स्टाल मे गया, कुछ किताबे खरीदी, उन्हे अच्छे से पॅक करवाया,…..उसपर रश्मि का नाम लिखा, और पता लिखा स्कूल का…….फिर उसने एक कपड़े की दुकान से एक टी-शर्ट और एक साधारण सी जीन्स खरीदी…..(ये सब खर्चा, राजपूत से मिले उन पैसो से हो रहा था, जो आमिर ने बतौर उधर लिए थे, फाइनल सएतटेल्मेंट से काटने की शर्त पर)…..अपने बालो का स्टाइल बदल कर, उसने काफ़ी हद तक अपना हुलिया चेंज कर लिया, अब वो आसानी से नही पहचाना जा सकता था.

किताबो का वो पॅकेट ले कर वो फिर से रश्मि के स्कूल मे गया,……सीधा प्रिन्सिपल के कमरे मे
मे आइ कम इन मेडम”
“एस प्लीज़…..आप..?”…….प्रिन्सिपल, जो एक अधेड़ उमरा की महिला थी, उसने प्रश्नार्तक नज़ारो से पुचछा
“मैं एक पार्सल लाया हूँ, मिस रश्मि शर्मा के नाम, स्कूल मे पता चला की वो, आज आई नही हैं, तो सोचा उअनके घर डिलीवेरी दे दू……क्या आप मुझे उनके घर का पता बता सकती हैं…?……..आमिर ने बड़ी विनम्रता से पुचछा.
“क्या हैं पार्सल मे, कहा से आया है…?”…….
” मुझे पता नही मेडम, लेकिन च्छुने से लगता हैं, कितबे होनी चाहिए, देल्ही के किसी पब्लिशर ने भेजी हैं, ज़्यादा कुछ तो मैं नही जानता”………आमिर ने उसी नाम्रता से कहा.

प्रिन्सिपल कुछ देर सोचती रही,…..शायद सोच रही थी पता बताना चाहिए या नही,…कुछ सोच कर….उन्होने घंटी बजाई……चपरासी दौड़ता हुआ आया…

“इन्हे,..नायडू के पास ले जाओ…..उसे कहो इन्हे रश्मि शर्मा का पता देना है….मैने कहा है”………शायद आमिर की अच्छी शकला का उनपर अच्छा प्रभाव पड़ा था.

आमिर का काम बन गया, उसने नायडू के पास से रश्मि के घर का अड्रेस्स लिया, और फ़ौरन स्कूल के बाहर निकल गया……..वापस उसी कपड़े की दुकान मे जाकर उसने अपने कपड़े चेंज किए…..पुराने कपड़े उसने वही छ्चोड़ दिए थे…बालो को फिर से सेट किया……..अब उसे मिलना था रश्मि से…….और उससे जानकारी हासिल करना उसे टेढ़ी खीर लग रही थी……..वो रश्मि के घर के सामने एक चाय की टॅपारी पे जम गया……वो पहले रश्मि को देखना, परखना चाहता था………ता की अंदाज़ा हो जाए, बात कैसे च्छेड़नी है.

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