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जीजा ने नशे में मुझे मजा दिला दिया

गतांग से आगे …..

उन्होंने अपनी टाँगें सोफे पर फ़ैलाई और आँखें बन्द करके लेट गए। उन्होंने अपने जूते, कपड़े ऐसे ही पहने हुए थे और वो सो गए। मैंने कहा भी यह सब उतारने के लिए लेकिन वो कुछ बोले ही नहीं, वो शायद नशे में सो चुके थे।

मैंने सोचा चलो मैं ही जीजा के जूते उतार देती हूँ। मैंने जीजा के पाँव अपनी गोद में लिए और जूते की डोरी खोल कर उतार फेंके। मैंने देखा कि जीजे की पैंट के ऊपर की बेल्ट बहुत टाईट बंधी हुई थी, मैंने सोचा कि इसे भी खोल दूँ। मैं बेल्ट को खोल रही थी, तभी मेरी नजर उसके नीचे पड़ी जहाँ एक बड़ा पर्वत जैसा आकार बना हुआ था।

क्या जीजा का लौड़ा इतना बड़ा था..!?!

पता नहीं क्यूँ, पर मेरे मन में गुदगुदी होने लगी, मेरा मन कूद रहा था अंदर से ही ! मैंने इससे पहले लौड़ा सिर्फ नंगी मूवीज में ही देखा था लेकिन जीजा का लौड़ा तो पैंट के ऊपर इतना बड़ा आकार बना कर बैठा था कि देख कर ही मुझे ख़ुशी मिल रही थी।

 

मैंने बेल्ट को खोलने के साथ साथ उनके लौड़े के ऊपर हल्के से अपने हाथ का पीछे वाला हिस्सा लगा दिया। जीजाजी का लौड़ा बहुत सख्त लग रहा था। उनके लौड़े को छूने के बावजूद जीजा हिले नहीं और इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई, मैंने अब अपना हाथ पूरा रख के लौड़े को अहसास लिया। लौड़ा काफी गरम था और मुझे उसको हाथ लगाते ही चूत के अंदर खुजली होने लगी।

मैं तब तक तो कुंवारी ही थी, मैंने केवल उंगली डाल कर हस्तमैथुन किया था बस !

सच में बड़ा भारी लौड़ा था ! खोल के देख लूँ? जीजा तो नशे में थे !

मेरे मन में लौड़ा देखने के भयानक विचार आने लगे। मैंने सोचा कि जीजा तो वैसे भी नशे में हैं तो पैंट खोली तो उन्हें थोड़े ही पता चलेगा। मैंने धीरे से उनकी ज़िप खोली और देखा कि लौड़ा अंदर अंडरवीयर में छिपा बैठा था। मैंने बटन खोल कर जीजा की पैंट उतार दी।

पता नहीं मुझे क्या हुआ था, मुझे अच्छे बुरे की कोई समझ नहीं रही थी, मैं अपने हाथ को लौड़े के ऊपर रख कर उसे दबाने लगी, फिर मैंने धीरे से अंडरवीयर को खींचा और बालों के गुच्छे के बीच में विराजमान महाराजा को देखा। अच्छा तो यह है लौड़ा !

मैंने पहली बार लाईव लौड़ा देखा था, बिल्कुल मेरी आँखों के सामने जो आधे से भी ज्यादा तना हुआ था। मेरे हाथ रुके नहीं और मेरे दिल में आया कि उसे छू लूँ एक बार !

जैसे ही मैंने लौड़ा हाथ में लिया, जीजा की आँख खुल गई और वो बोले- कोमल, क्या कर रही है?

मैं- कुछ नहीं जीजा जी, आप के कपड़े खोल रही थी. आप नींद में थे और आपने जूते वगैरह कुछ नहीं उतारे थे।

जीजा- मुझे पता है कि तू क्या कर रही थी। मैं सोया था लेकिन तूने हाथ लगा कर सहलाया तब मेरी नींद उड़ गई थी और फिर मैं सिर्फ आँखें बंद करके लेटा हुआ था। दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

मैं डर गई कि कहीं जीजा दीदी को ना बता दें।

लेकिन उसके बाद जीजा जो बोले, वो बहुत ही अलग और आश्चर्यजनक था।

जीजा- इतना ही लौड़ा लेने का शौक है तो कपड़े उतार दे देता हूँ।

मैं क्या बोलती, मुझे लौड़ा सिर्फ देखना था लेकिन अब जीजा थोड़े ही मानने वाला था। मुझे कभी ना कभी तो नथ उतरवानी थी, फिर आज क्यों नहीं, मैं कुछ नहीं बोली।

लेकिन जीजा के हाथ अब मेरे चूचों के ऊपर थे और वो उन्हें जोर से दबा रहे थे। मैंने आँखें बंद कर ली।

जीजा सोफे से खड़े हुए और शर्ट उतारने लगे। वो बिल्कुल नंगे हो गए और उसने मुझे कंधे से पकड़ के मेरी नाईटी उतारने के लिए हाथ ऊपर करवा दिए। मैं अगले ही मिनट में उसके सामने नंगी हो गई।

जीजा मेरे चूचों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। उनके गरम गरम होंठ का अहसास जान निकाल देने वाला था। मुझे अजीब सी खुमारी छा रही थी। मैंने देखा कि जीजा के हाथ अब कमर के ऊपर होते हुए मेरे चूतड़ों तक पहुँचे और मुझे अपनी तरफ खींचा।

जीजा का लौड़ा मेरी चूत वाले हिस्से के बिल्कुल नजदीक आ गया और मुझे जैसे 1000 वाट का करंट लगा हो। जीजा ने अपने होंठ मेरे होंठों से लगाये और मेरे मुँह में व्हिस्की की गन्ध भर गई। वो मुझे चूसते हुए सोफे के ऊपर बैठ गये। मैं अब जीजा की दोनों टांगों के बीच में थी, उन्होंने मेरे हाथों को दोनों तरफ से पकड़ा और मेरा चेहरा लौड़े की तरफ ले गया !

मैं प्रश्न के अंदाज से उन्हें देखने लगी। जीजा ने मेरा मुँह अपने सुपाड़े पर लाकर मुझे छोड़ दिया। मैंने लौड़ा हाथ में लिया और उसकी गर्मी का अहसास लेने लगी। जीजा ने पीछे से मुँह को धकेला और मेरे मुँह खोलते ही उसका लौड़ा आधा मेरे मुँह के अंदर चला गया। ओह माय गॉड ! यह तो बिल्कुल मुँह फाड़ रहा था मेरा ! उसकी तीन इंच की मोटाई मेरे मुँह के लिए बहुत ज्यादा थी. लेकिन फिर भी मैंने आधे लौड़े को चूसना चालू कर दिया। जीजा ने लंड के झटके मुँह में देने चाहे लेकिन मैंने उनकी जांघें थामे उन्हें नाकाम कर दिया।

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