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जीजू संग रासलीला

प्रेषिका : जूही

हेलो फ्रेंड्स मेरा नाम जूही है आज में आप सभी को अपने जीवन की एक सच्ची घटना सुनाने जा रही हु उम्मीद करुँगी की आप सभी को पसंद आएगी अभी में 22 साल की हु मेरा रंग गोरा और शरीर भरा भरा है ये अब तब की है जब मैंने 1st ईयर के एग्जाम दी थी मेरे कुछ दिन की छुट्टिया थी छुट्टिया थी तो मैंने कुछ दिन के लिए अपनी दीदी के घर जाने की सोची मेरी एक बड़ी बहन भी है जिसकी शादी को अभी 1 साल ही हुआ है  मेरी दीदी और जीजू दोनों अकेले रहते है मेरी दीदी का नाम मंजू  है और जीजू का नाम मुकेश  है उनकी ये लवमेरेज थी जीजू एक बड़ी कम्पनी में काम करते है जब मैंने अपनी दीदी को अपने आने की खबर दी तो वो भी खुश हो गई सुबह की ट्रैन से में निकली तो शाम तक में पहुंच गई दीदी और जीजू दोनों ही मुझे स्टेशन पर लेने आए थे उन्होंने मुझे शहर घुमाया और रात का कहना खा हम घर गए अगले दिन जीजू सुबह जल्दी ऑफिस चले गए दीदी और में घर में थे हम दोनों खूब गप्पे मरते थे ऐसे ही 2-3 दिन हो गए फिर एक दिन जीजू जब शाम को घर आये तो हमने खाना खाया और टीवी देखने लगे कुछ देर बाद जीजू उठ कर चले गए अब दीदी और में ही थे कुछ देर बाद जीजू की आवाज आई मंजू जूही को टीवी देखने दो तुम आजो कब से वेट कर रहा हु तुम्हारा अब और इंतजार नहीं हो रहा है उन की ये बात सुन कर में समझ गई की जीजू चुदाई करने की बात कर रहे है तो मैंने भी दीदी से बोली दीदी मुझे भी नींद आरही है में भी सोजती हु और आप भी चले जाओ जीजू आप को बुला रहे है तब दीदी ने टीवी बंद कर दी में अपने रूम में आगई और दीदी भी रूम में चली गई जैसे जी दीदी के कमरे की लाइट बंद हुई मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई मैंने  जल्दी से अपने कमरे की लाइट भी बंद कर दी और चुपके से दीदी के कमरे के दरवाज़े से कान लगा कर खाड़ी हो गई अंदर से फुसफुसाने की आवाज़ आ रही थी दीदी – क्यों जी आज इतने उतावले क्यों हो रहे हो ?
जीजू – मेरी जान कितने दिन से तुमने दी नहीं इतना ज़ुल्म तो ना किया करो |
दीदी – चलिए भी मैंने कब रोकी हु आप को आप को ही फुरसत नहीं मिलती अपने काम से |
जीजू – अब मंजू जी की इज़ाज़त हो तो चुदाई का प्रोग्राम आगे बढ़ाए |
दीदी – हैं राम ! कैसी बातें बोलते हो शर्म नहीं आती |
जीजू – शर्म की  बात है अब तो शादी को इतना टाइम हो गया है और तुम्हे तो पता है है  टाइम मुझे ऐसे बातें करने में कितना मजा आता है फिर अपनी ही बीबी को छोड़ने में शर्म कैसी .
दीदी – बड़े ख़राब हो तुम आआआआह्ह्ह्ह ऊऊऊफ्फ्फ्फ्फ्फ् अााहहहहहह धीरे करो न इतनी जल्दी क्या है अभी तो सारी रात बाकि है |
जीजू – कैसे धीरे करू मेरी जान इतने दिन बाद तो कर रहा हु धीरे नहीं कर सकता
दीदी – आह्ह्ह्ह्ह्ह् ऊऊऊफ्फ्फ्फ्फ्फ् अााहहहहहहहह जीजू – ले साली और ले जोर जोर से ले साली रंडी ले ले ले ले..
दीदी – तुम्हारी साली तो दूसरे कमरे में सो रही है (दीदी हँसते हुए बोली )
जीजू – उसे भी चोद दूंगा आखिर साली भी तो आधी घर वाली  
दीदी – आज तो कुछ ज्यादा ही मूड में हो तुम
जीजू – हाँ  मेरी जान ब्रा क्यों नहीं उतर रही हो मेरी जान तुम्हे पता है न मुझे पूरी तरह नंगी करके ही तो चोदने में मज़ा आता है तुम्हारी तरह खूबसूरत औरत को चोदना हर आदमी की किस्मत में नहीं होता
दीदी – अब बातें ही करते रहोगे या चोदोगे भी अंदर से दीदी के करहने की आवाज साथ साथ फुच फुच फुच जैसी आवाज़ भी आ रही थी मैं दरवाजे पर और न खाड़ी रह सकी दीदी और जीजू की ये बातें सुन कर मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था में पसीने में गीली हो गई थी और मेरी छूट में तो जैसे आग लग गई हो मे अपने कमरे में जा कर बेड पर लेट गई पर नींद मेरी आँखों से कोसो दूर थी सारी रात में जीजू के बारे में ही सोचती रही ज़िंदगी में पहली पर ऐसा कुछ सुनी थी पहली बार जीजू के बारे में सोच कर मेरी चूत गीली हुई थी अगले दिन सुबह में जल्दी ही उठ गई क्यू की रात भर तो मुझे नींद ही नहीं आई थी दीदी किचन में नास्ता बना रही थी | आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मै जब किचन में गई तो दीदी ने कहा आज बड़े जल्दी उठ गई तुम मैंने कही रात में नींद ही नहीं आई अच्छे से दीदी ने मुझे क्या हुआ तो मैंने उस बात को टाल दी फिर दीदी ने कहा जाओ जार देखो तो तुम्हारे जीजू ऑफिस के लिए तैयार हुए या ही तो मैंने दीदी के कमरे की तरफ गई और जो मैंने दिखी वो देख कर में हैरान हो गई में कमरे के दरवाजे पर ही थी  और जीजू कमरे में ड्रेसिंग टेबल के सामने बिलकुल लगे खड़े थे और अपने लण्ड को सहला रहे थे बॉडी एक दाम कासी हुई थी उनका लण्ड एकदम खड़ा हुआ था जीजू  देख कर तो मेरा दिल फिर से जोर जोर से धड़कने लगा जीजू का लण्ड 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा तो होगा ही मेरी चूत फिर से गीली होने लगी फिर जीजू अपने कपडे पहनने लगे और ऑफिस के लिए तैयार हो गए तब में कमरे के अंदर गई और जीजू से बोली की दीदी नास्ते के लिए बुला रही है जीजू नास्ता कर के ऑफिस चले गए मुझे भी अब जीजू से चुदवाने का मन करने लगा था अब तो मुझे जब भी मौका मिलता में जीजू को अपने बूब्स दिखने की कोशिश करती कभी उनसे चिपक कर बैठती तो कभी कुछ ओर करती में हमेशा जीजू को उकसाने की कोशिस करने लगी जीजू भी मेरी इन हरकतों से कुछ कुछ तो समझ चुके थे फिर एक दिन में अपने कमरे में कपडे बदल रही थी में एक दम नंगी थी की तभी जीजू आये और मुझे इस एकदम नंगी देख कर वापस पीछे मुड़ गए और कहा की दरवाजा तो बंद कर लेती जूही जीजू मुझे तिरछी नज़रो से देख रहे थे मैंने कही ओह्ह सॉरी जीजू मेंने सोची की यहाँ दीदी और मेरे अलावा ही ही कौन इस लिए नहीं की थी आप को कुछ काम था क्या जीजू बोले तुम्हारी दीदी बुला रही है तुम्हे जीजू अभी भी मुझे तिरछी नजरो से देख रहे थे में भी उन्हें अपजिस्म की ख़ूबसूरती दिखना चाहती थी फिर मैंने कही की जीजू आप चलए अभी कपडे पहन कर आती हु 2-3 दिन और बीत गए अब तो जीजू भी मेरे साथ छेड़ छाड करने लगे थे फिर एक दिन सन्डे को जीजू ने दीदी कहा की मंजू आज मेरा टेनिस का मैच है ( जीजू एक स्पोर्ट्स प्लेयर है उन्हें टेनिस खेलने का बहोत शोक है) और आज ऑफिस में भी थोड़ा कुछ काम है में वो करके ही आऊंगा और जीजू बोले तुम दोनों भी चलो मेरे साथ मेरे टेनिस का मैच देखने तो दीदी ने कहा नहीं मुझे तो घर के कुछ काम करना है और वैसे भी मुझे ये टेनिस बिलकुल भी पसंद नहीं है तुम जूही को लेकर चले जाओ कितने दिन से वो घर में ही है वो कही घूमने भी नहीं गई तब जीजू ने मुझे से चलने के लिए कहा तो में तैयार हो गई फिर हम कार में बैठ कर निकल गए जब हम टेनिस हॉल पहुंचे तो जीजू  दोस्त जीजू का ही वेट कर रहे थे फिर जीजू ने अपने दोस्तों मुझे इंट्रीडुसे करवाया जीजू का मैच 2 घंटे तक चलता रहा और अब में बोर होने लगी थी तब मैंने जीजू कहा की में बहोत बोर हो रही हु तो उन्होंने मैच तो थोड़ी देर और चलेगा में एक काम करता हु तुम को मेरे ऑफिस छोड़ देता हु | आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | तुम वहां लेपटॉप पर गेम खेल लेना में कुछ देर बाद आ जाऊंगा मैंने कही ठीक है तब जीजू ने मुझे उनके ऑफिस जो की टेनिस हॉल के बाजु में ही था वहां छोड़ कर वापस टेनिस हॉल चले गए और में ऑफिस में जीजू के केबिन में बैठ कर लेपटॉप में गेम खेलने लगी करीब आधे घंटे बाद जीजू अंदर आये और केबिन का दरवाजा बंद कर दिया उनका बदन पसीने से भीगा हुआ था उन्हें देख कर मेरी चूत मचल उठी लेकिन मैंने फिर अपनी नज़र लेपटॉप पर घुमा ली जीजू ने अपनी टी – शर्ट उतर दी क्यू की वो पसीने में भीग चुकी थी अब जीजू सिर्फ एक निक्कर में थे तब मैंने जीजू से कही जीजू की निक्कर भी तो पसीने में पूरी तरह गीली है उसे भी उतर कर सुख लिजिसे जीजू कहा तुम बहोत बदमाश हो गई हो मेरे पास कोई दूसरे कपडे नहीं है इसे भी उतर दूंगा तो फिर क्या पहनुगा मैंने कही अंडरवेअर तो पहने ही होगे जीजू पाने उतर दो निक्कर को 10 -15 मिनट सुख जाएगी जीजू कहा की तुम्हारे सामने सिर्फ आ=अंडरवेअर में कैसे रहूँगा तो मैंने कही इसमें इतना शर्मा क्यू रहे हो जीजू आप मेरे अलावा यहाँ है ही कौन और में तो साली हु आप की और  आधी घर वाली ही होती है.

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The Author

गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें

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