Mastaram.Net

100% Free Hindi Sex Stories - Sex Kahaniyan

चूत को करार मिल ही गया भाग – 1

गतांग से आगे …

एक दिन शाम के छः बजे डोर-बेल बजी तो शबाना ने सोचा कि समीम और फ़ारूख आ गये हैं। उसने समीरा को आवाज़ लगा कर कहा कि, “तुम्हारे अब्बू आ गये है, जाकर डोर खोल दो!”

समीरा बाहर दरवाजा खोलने चली गयी। समीरा ने उस दिन गुलाबी रंग का सलवार कमीज़ पहना हुआ था जो उसके गोरे रंग पर क़हर ढा रहा था। गरमी होने की वजह से वो अभी थोड़ी देर पहले ही नहा कर आयी थी। उसके बाल भी खुले हुए थे और बला की क़यामत लग रही थी समीरा उस दिन। शबाना को अचानक महसूस हुआ कि जब समीम देखेगा तो उसके दिल पर भी समीरा का हुस्न जरूर क़हर बरपायेगा।

समीरा दरवाजा खोलने चली गयी। शबाना बेडरूम में बैठी सब्जी काट रही थी और आँखें कमरे के दरवाजे के बाहर लगी हुई थी। तभी उसे बाहर से समीम की हल्की सी आवाज़ सुनायी दी। वो शायद समीरा को कुछ कह रहा था। शबाना को पता नहीं क्यों समीरा का इतनी देर तक समीम के साथ बातें करना खलने लगा। वो उठ कर बाहर जाने ही वाली थी कि समीम बेडरूम के सामने से गुजरा और ऊपर चला गया। उसके पीछे समीरा भी आ गयी और सीधे शबाना के बेडरूम में चली आयी।

इससे पहले कि रुख्सना समीरा से कुछ पूछ पाती वो खुद ही बोल पड़ी, “अम्मी आज रात अब्बू घर नहीं आयेंगे… वो समीम बोल रहा था कि आज उनकी नाइट ड्यूटी है…!” समीरा सब्जी काटने में शबाना की मदद करने लगी। शबाना सोच में पड़ गयी कि आखिर उसे हो क्या गया है… समीम तो शायद इसलिये समीरा से बात कर रहा था कि आज फ़िरोज़ घर पर नहीं आयेगा…

यही बताना होगा उसे… पर उसे क्या हुआ था को वो इस कदर बेचैन हो उठी… अगर वैसे भी समीरा और समीम आपस में कुछ बात कर भी लेते है तो इसमें हर्ज ही क्या है… वो दोनों तो हम उम्र हैं… कुंवारे हैं और वो एक शादीशुदा औरत है उम्र में भी उन दोनों से चौदह-पंद्रह साल बड़ी।

शबाना को समीरा और समीम का बात करना इस लिये भी अच्छा नहीं लगा था कि जब से समीम उनके यहाँ रहने आया था तब से समीरा के तेवर बदले-बदले लग रहे थे… कहाँ तो हर रोज़ समीरा को ढंग से कपड़े पहनने और सजने संवरने के लिये जोर देना पड़ता था और कहाँ वो इन दिनों नहा-धो कर बिना कहे शाम को कॉलेज से लौट कर तैयार होती और आइने के सामने बैठ कर अच्छे से मेक-अप तक करने लगी थी। इन दो हफ़्तों में उसका पहनावा भी बदल गया था। यही सब महसूस करके शबाना को समीरा के ऊपर शक सा होने लगा।

फिर शबाना ने सोचा कि अगर समीरा समीम को पसंद करती भी है तो उसमें समीरा की क्या गल्ती है… समीम था ही इतना हैंडसम और चार्मिंग लड़का कि जो भी लड़की उसे देखे उस पर फ़िदा हो जाये। शबाना खुद भी तो इस उम्र में समीम पे फ़िदा सी हो गयी थी और अपने कपड़ों और मेक-अप पे पहले से ज्यादा तवज्जो देने लगी थी। शबाना उठी और समीरा को सब्जी काट कर किचन में रखने के लिये कहा। फिर आईने के सामने एक दफ़ा  अपने खुले बाल संवारे और थोड़ा मेक-अप दुरुस्त किया।

शबाना घर के अंदर भी ज्यादातर ऊँची हील वाली चप्पल पहने रहती थी लेकिन अब मेक-अप दुरुस्त करके उसने अलमारी में से और भी ज्यादा ऊँची पेंसिल हील वाली सैंडल निकाल कर पहन ली क्योंकि इन दो हफ़्तों में समीम की नज़रों से शबाना को उसकी पसंद का अंदाज़ा हो गया था। समीम की नज़र अक्सर हील वाली चप्पलों में शबाना के पैरों पे अटक जाया करती थी। सैंडलों के बकल बंद करके वो एक गिलास में ठंडा पानी लेकर ऊपर चली गयी।

सोचा कि समीम को प्यास लगी होगी तो गरमी में उसे फ़्रिज का ठंडा पानी दे आये लेकिन इसमें उसका खुद का मकसद भी छुपा था।  जैसे ही शबाना समीम के कमरे के दरवाजे पर पहुँची तो समीम अचानक से बाहर आ गया। उसके जिस्म पर सिर्फ़ एक तौलिया था… जो उसने कमर पर लपेट रखा था। शायद वो नहाने के लिये बाथरूम में जा रहा था।

शबाना ने उसकी तरफ़ पानी का गिलास बढ़ाया तो समीम ने शुक्रिया कह कर पानी का गिलास लेते हुए पानी पीना शुरू कर दिया। शबाना की नज़र फिर से समीम की चौड़ी छाती पर अटक गयी। पसीने की कुछ बूँदें उसकी छाती से उसके पेट की तरफ़ बह रही थीं

जिसे देख कर शबाना के होंठ थरथराने लगे। समीम ने पानी खतम किया और शबाना की तरफ़ गिलास बढ़ाते हुए बोला, “थैंक यू भाभी जी… लेकिन आप ने क्यों तकलीफ़ उठायी… मैं खुद ही नीचे आ कर पानी ले लेता!” शबाना ने नोटिस क्या कि समीम उसके काँप रहे होंठों को बड़ी ही हसरत भरी निगाहों से देख रहा था। समीम उसे निहारते हुए बोला, “भाभी जी कहीं बाहर जा रही हैं क्या…?”

शबाना चौंकते हुए बोली, “नहीं तो क्यों!”

“नहीं बस वो आपको इतने अच्छे से तैयार हुआ देख कर मुझे ऐसा लगा… एक बात कहूँ भाभी जी… आप खूबसूरत तो हैं ही और आपके कपड़ों की चॉईस… मतलब आपका ड्रेसिंग सेंस भी बहुत अच्छा है… जैसे कि अब ये सैंडल आपकी खूबसूरती कईं गुना बढ़ा रहे हैं। समीम से इस तरह अपनी तारीफ़ सुनकर शबाना के गाल शर्म से लाल हो गये। फ़रूक से तो कभी उसने अपनी तारीफ़ में दो अल्फ़ाज़ भी नहीं सुने थे। सिर झुका कर शरमाते हुए वो धीरे से बोली, :बस ऐसे ही सजने-संवरने का थोड़ा शौक है मुझे!” फिर वो गिलास लेकर जोर-जोर से धड़कते दिल के साथ नीचे आ गयी।

जब शबाना नीचे पहुँची तो समीरा खाना तैयार कर रही थी। समीरा को पहले कभी इतनी लगन और प्यार से खाना बनाते शबाना कभी नहीं देखा था। थोड़ी देर में ही खाना तैयार हो गया। शबाना ने समीम के लिये खाना थाली में डाला और उसने सोचा क्यों ना आज समीम को खाने के लिये नीचे ही बुला लूँ। उसने समीरा से कहा कि वो खाना टेबल पर लगा दे जब तक वो खुद ऊपर से समीम को बुला कर लाती है। शबाना की बात सुन कर समीरा एक दम चहक से उठी।

समीरा: “अम्मी समीम आज खाना नीचे खायेगा?”

शबाना: “हाँ! मैं बुला कर लाती हूँ..!”

शबाना ऊपर की तरफ़ गयी। ऊपर सन्नाटा पसरा हुआ था। बस ऊँची पेंसिल हील वाले सैंडलों में शबाना के कदमों की आवाज़ और समीम के रूम से उसके गुनगुनाने की आवाज़ सुनायी दी रही थी। शबाना धीरे-धीरे कदमों के साथ समीम के कमरे की तरफ़ बढ़ी और जैसे ही वो समीम के कमरे के दरवाजे पर पहुँची तो अंदर का नज़ारा देख कर उसकी तो साँसें ही अटक गयीं। समीम बेड के सामने एक दम नंगा खड़ा हुआ था। उसका जिस्म बॉडी लोशन की वजह से एक दम चमक रहा था और वो अपने लंड को बॉडी लोशन लगा कर मुठ मारने वाले अंदाज़ में हिला रहा था। समीम का आठ इंच लंबा और मोटा अनकटा लंड देख कर शबाना की साँसें अटक गयी। उसके लंड का सुपाड़ा अपनी चमड़ी में से निकल कर किसी साँप की तरह फुंफकार रहा था।
क्या सुपाड़ा था उसके लंड का… एक दम लाल टमाटर के तरह इतना मोटा सुपाड़ा… उफ़्फ़  हाय शबाना की चूत तो जैसे उसी पल मूत देती। शबाना बुत्त सी बनी समीम के अनकटे लंड को हवा में झटके खाते हुए देखने लगी…

इस बात से अंजान कि वो एक पराये जवान लड़के के सामने उसके कमरे में खड़ी है… वो लड़का जो इस वक़्त एक दम नंगा खड़ा है। तभी समीम एक दम उसकी तरफ़ पलटा और उसके हाथ से लोशन के बोतल नीचे गिर गयी। एक पल के लिये वो भी सकते में आ गया। फिर जैसे ही उसे होश आया तो उसने बेड पर पड़ा तौलिया उठा कर जल्दी से कमर पर लपेट लिया और बोला,  “सॉरी वो मैं… मैं डोर बंद करना भूल गया था…!”

अभी तक शबाना यूँ बुत्त बन कर खड़ी थी। समीम की आवाज़ सुन कर वो इस दुनिया में वापस लौटी। “हाय अल्लाह!” उसके मुँह से निकला और वो तेजी से बाहर की तरफ़ भागी और वापस नीचे आ गयी।

शबाना नीचे आकर कुर्सी पर बैठ गयी और तेजी से साँसें लेने लगी। जो कुछ उसने थोड़ी देर पहले देखा था… उसे यकीन नहीं हो रहा था। जिस तरह से वो अपने लंड को हिला रहा था… उसे देख कर तो शबाना के रोंगटे ही खड़े हो गये थे… उसकी चुत में हलचल मच गयी थी और गीलापन भर गया था। तभी समीरा अंदर आयी और उसके साथ वाली कुर्सी पर बैठते हुए बोली, “अम्मी समीम नहीं आया क्या?”

शबाना: “नहीं! वो कह रहा है कि वो ऊपर ही खाना खायेगा!”

समीरा: “ठीक है अम्मी… मैं खाना डाल देती हूँ… आप खाना दे आओ…!”

शबाना: “समीरा तुम खुद ही देकर आ जाओ… मेरी तबियत ठीक नहीं है…!” समीम के सामने जाने की शबाना की हिम्मत नहीं हुई। उसे यकीन था कि अब तक समीम ने भी कपड़े पहन लिये होंगे… इसलिये उसने समीरा से खाना ले जाने को कह दिया।

समीरा बिना कुछ कहे खाना थाली में डाल कर ऊपर चली गयी और समीम को खाना देकर वापस आ गयी और शबाना से बोली, “अम्मी समीम पूछ रहा था कि आप खाना देने ऊपर नहीं आयीं… आप ठीक तो है ना…?”

शबाना ने एक बार समीरा की तरफ़ देखा और फिर बोली, “बस थोड़ी थकान सी लग रही है… मैं सोने जा रही हूँ तू भी खाना खा कर किचन का काम निपटा कर सो जाना!” समीरा को हिदायत दे कर शबाना अपने बेडरूम में जा कर दरवाजा बंद करके बेड पर लेट गयी। उसके दिल-ओ-दिमाग पे समीम का लौड़ा छाया हुआ था और वो इस कदर मदहोश सी थी कि उसने कपड़े बदलना तो दूर बल्कि सैंडल तक नहीं उतारे थे।

ऐसे ही समीम के लंड का तसव्वुर करते हुए बेड पर लेट कर अपनी टाँगों के बीच तकिया दबा लिया हल्के-हल्के उस पर अपनी चूत रगड़ने लगी। फिर अपना हाथ सलवार में डाल कर चूत सहलाते हुए उंगलियों से अपनी चूत चोदने लगी। आमतौर पे फिर जब वो हफ़्ते में एक-दो दफ़ा खुद-लज़्ज़ती करती थी तो इतने में उसे तस्क़ीन हासिल हो जाती थी लेकिन आज तो उसकी चूत को करार मिल ही नहीं रहा था।

थोड़ी देर बाद वो उठी और बेडरूम का दरवाजा खोल कर धीरे बाहर निकली। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | अब तक समीरा अपने कमरे में जा कर सो चुकी थी। घर में अंधेरा था… बस एक नाइट-लैम्प की हल्की सी रोशनी थी। शबाना किचन में गयी और एक छोटा सा खीरा ले कर वापस बेडरूम में आ गयी। दरवाजा बंद करके उसने आनन फ़ानन अपनी सलवार और पैंटी उतार दी और फिर वो बेड पर घुटने मोड़ कर लेटते हुए खीरा अपनी चूत में डाल कर अंदर बाहर करने लगी। उसकी बंद आँखों में अभी भी सूनील के नंगे जिस्म और उसके तने हुए अनकटे लौड़े का नज़ारा था।

करीब आठ-दस मिनट चूत को खीरे से खोदने के बाद उसका जिस्म झटके खाने लगा और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। उसके बाद शबाना आसूदा होकर सो गयी।

अगले दिन सुबह सुबह जब शबाना की आँख खुली तो खुद को बिस्तर पे सिर्फ़ कमीज़ पहने हुए नंगी हालत में पाया। समीम के लिये जो पेंसिल हील के सैंडल पिछली शाम को पहने थे वो अब भी पैरों में मौजूद थे। बिस्तर पे पास ही वो खीरा भी पड़ा हुआ था जिसे देख कर शबाना का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसकी सलवार और पैंटी भी फर्श पर पड़े हुई थी।

उसने कमरे और बिस्तर की हालत ठीक की और फिर नहाने के लिये बाथरूम में घुस गयी। इतने में फ़िरोज़ वापिस आ गया और समीरा और शबाना से बोला कि समीरा की मामी की तबियत खराब है और इसलिये वो समीरा को कुछ दिनो के लिये अपने पास बुलाना चाहती है। फ़िरोज़ ने समीरा को तैयार होने के लिये कहा। शबाना ने जल्दी से नाश्ता तैयार किया और नाश्ते की ट्रे लगाकर समीरा से कहा कि वो ऊपर समीम को नाश्ता दे आये। आज समीरा और भी ज्यादा कहर ढा रही थी।

शबाना ने गौर किया कि समीरा ने मरून रंग का सलवार कमीज़ पहना हुआ था। उसका गोरा रंग उस मरून जोड़े में और खिल रहा था और पैरों में सफ़ेद सैंडल बेहद सूट कर रहे थे। शबाना ने सोचा कि आज तो जरूर समीम समीरा की खूबसूरती को देख कर घायल हो गया होगा। समीरा नाश्ता देकर वापस आयी तो उसके चेहरे पर बहुत ही प्यारी सी मुस्कान थी। फिर थोड़ी देर बाद समीम भी नीचे आ गया। शबाना किचन में ही काम कर रही थी कि फ़िरोज़ किचन मैं आकर बोला, “शबाना! मैं शाम तक वापस आ जाऊँगा… और हाँ आज जायरा भाभीजान आने वाली हैं… उनकी अच्छे से मेहमान नवाज़ी करना!”

ये कह कर समीरा और फ़िरोज़ चले गये। रूखसाना ने मन ही मन में सोचा कि “अच्छा तो इसलिये फ़िरोज़ समीरा को उसकी मामी के घर छोड़ने जा रहा था ताकि वो अपनी भाभी जायरा के साथ खुल कर रंगरलियाँ मना सके।” समीरा समझदार हो चुकी थी और घर में उसकी मौजूदगी की वजह से फ़िरोज़ और जायरा को एहतियात बरतनी पड़ती थी। शबाना की तो उन्हें कोई परवाह थी नहीं।

फ़िरोज़ के बड़े भाई उन लोगों के मुकाबले ज्यादा पैसे वाले थे। वो एक प्राइवेट कंपनी में ऊँचे ओहदे पर थे। उनका बड़ा लड़का इंजिनियरिंग कर रहा था और दो बच्चे बोर्डिंग स्कूल में थे। उन्हें भी अक्सर दूसरे शहरों में दौरों पे जाना पड़ता था इसलिये जायरा भाभी हर महीने दो-चार दिन के लिये फ़िरोज़ के साथ ऐयाशी करने आ ही जाती थी। कभी-कभार फ़िरोज़ को भी अपने पास बुला लेती थी। जायरा वैसे तो फ़िरोज़ के बड़े भाई की बीवी थी पर उम्र में फ़िरोज़ से छोटी थी। जायरा की उम्र करीब बयालीस साल थी लेकिन पैंतीस-छत्तीस से ज्यादा की नहीं लगती थी।

शबाना की तरह खुदा ने उसे भी बेपनाह हुस्न से नवाज़ा था और जायरा को तो रुपये-पैसों की भी कमी नहीं थी। फ़रूक को तो उसने अपने हुस्न का गुलाम बना रखा था जबकि शबाना हुस्न और खूबसूरती में जायरा से बढ़कर ही थी।

अभी कुछ ही वक़्त गुजरा था कि डोर-बेल बजी। जब शबाना ने दरवाजा खोला तो बाहर उसकी सौतन जायरा खड़ी थी। शबाना को देख कर उसने एक कमीनी मुस्कान के साथ सलाम कहा और अंदर चली आयी। शबाना ने दरवाजा बंद किया और ड्राइंग रूम में आकर जायरा को सोफ़े पर बिठाया। “और सुनाइये जायरा भाभी-जान कैसी है आप!” शबाना किचन से पानी लाकर जायरा को देते हुए तकल्लुफ़ निभाते हुए पूछा।

जायरा: “मैं ठीक हूँ… तू सुना तू कैसी है?”

शबाना: “मैं भी ठीक हूँ भाभी जान… कट रही है… अच्छा क्या लेंगी आप चाय या शर्बत?”

जायरा: “तौबा शबाना! इतनी गरमी में चाय! तू एक काम कर शर्बत ही बना ले!”

शबाना किचन में गयी और शर्बत बना कर ले आयी और शर्बत जायरा को देकर बोली, “भाभी आप बैठिये, मैं ऊपर से कपड़े उतार लाती हूँ…!” शबाना ऊपर छत पर गयी और कपड़े ले कर जब नीचे आ रही थी तो कुछ ही सीढ़ियाँ बची थी कि अचानक से उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो सीढ़ियों से नीचे गिर गयी। गिरने की आवाज़ सुनते ही जायरा दौड़ कर आयी और शबाना को यूँ नीचे गिरी देख कर उसने शबाना को जल्दी से सहारा देकर उठाया और रूम में ले जाकर बेड पर लिटा दिया। “हाय अल्लाह!

ज्यादा चोट तो नहीं लगी शबाना! अगर सलाहियत नहीं है तो क्यों पहनती हो ऊँची हील वाली चप्पलें… मेरी नकल करना जरूरी है क्या!”

जायरा का ताना सुनकर शबाना को गुस्सा तो बहोत आया लेकिन दर्द से कराहते हुए वो बोली, “आहहह हाय बहोत दर्द हो रहा है भाभी जान! आप जल्दी से डॉक्टर बुला लाइये!” ये बात सही थी कि शबाना की तरह जायरा को भी आम तौर पे ज्यादातर ऊँची ऐड़ी वाले सैंडल पहनने का शौक लेकिन शबाना उसकी नकल या उससे कोई मुकाबला नहीं करती थी।

जायरा फ़ौरन बाहर चली गयी! और गली के नुक्कड़ पर डॉक्टर के क्लीनिक था… वहाँ से डॉक्टर को बुला लायी। डॉक्टर ने चेक अप किया और कहा, “घबराने की बात नहीं है… कमर के नीचे हल्की सी मोच है… आप ये दर्द की दवाई लो और ये बाम दिन में तीन-चार दफ़ा लगा कर मालिश करो… आपकी चोट जल्दी ही ठीक हो जायेगी!”

कहानी जारी रहेगी … अगले भाग में पढ़ते रहिये मस्ताराम डॉट नेट पर लाखो मस्त मस्त कहानियां है ..|

आप इन सेक्स कहानियों को भी पसन्द करेंगे:

Disclaimer: This site has a zero-tolerance policy against illegal pornography. All porn images are provided by 3rd parties. We take no responsibility for the content on any website which we link to, please use your won discretion while surfing the links. All content on this site is for entertainment purposes only and content, trademarks and logo are property fo their respective owner(s).

वैधानिक चेतावनी : ये साईट सिर्फ मनोरंजन के लिए है इस साईट पर सभी कहानियां काल्पनिक है | इस साईट पर प्रकाशित सभी कहानियां पाठको द्वारा भेजी गयी है | कहानियों में पाठको के व्यक्तिगत विचार हो सकते है | इन कहानियों से के संपादक अथवा प्रबंधन वर्ग से कोई भी सम्बन्ध नही है | इस वेबसाइट का उपयोग करने के लिए आपको उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए, और आप अपने छेत्राधिकार के अनुसार क़ानूनी तौर पर पूर्ण वयस्क होना चाहिए या जहा से आप इस वेबसाइट का उपयोग कर रहे है यदि आप इन आवश्यकताओ को पूरा नही करते है, तो आपको इस वेबसाइट के उपयोग की अनुमति नही है | इस वेबसाइट पर प्रस्तुत की जाने वाली किसी भी वस्तु पर हम अपने स्वामित्व होने का दावा नहीं करते है |

Terms of service | About UsPrivacy PolicyContent removal (Report Illegal Content) | Disclaimer | Parental Control