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चूत को करार मिल ही गया भाग – 2

हेल्लो मै जिया आज फिर से आप सभी को अपनी कहानी का आगे का भाग लिख रही हूँ आशा करती हूँ आप सभी को बहुत मज़ा आ रहा होगा अगर सच में मज़ा आ रहा है तो कमेंट क्यों नहीं देते आप लोग | तो चलिए अब आगे की कहानी बताती हूँ | अगर आपने मेरी कहानी का पहला भाग नहीं पढ़ा तो यहाँ क्लिक कर पढ़ ले | चूत को करार मिल ही गया भाग – 1

डॉक्टर के जाने के बाद जायरा ने शबाना को दवाई दी और बाम से मालिश भी की। शाम को फ़िरोज़ और समीम घर वापस आये तो जायरा ने डोर खोला। फ़िरोज़ बाहर से ही भड़क उठा। शबाना को बेडरूम में उसकी आवाज़ सुनायी दे रही थी, “भाभी जान! आपने क्यों तकलीफ़ की… वो शबाना कहाँ मर गयी… वो दरवाजा नहीं खोल सकती थी क्या?”
जायरा: “अरे फ़िरोज़ मियाँ! इतना क्यों भड़क रहे हो… वो बेचारी तो सीढ़ियों से गिर गयी थी… चोट आयी है… उसे डॉक्टर ने आराम करने को कहा है!”

समीम ऊपर जाने से पहले शबाना के कमरे में हालचाल पूछ कर गया। समीम का अपने लिये इस तरह फ़िक्र ज़ाहिर करना शबाना को बहोत अच्छा लगा। शबाना ने सोचा कि एक उसका शौहर था जिसने कि उसका हालचाल भी पूछना जरूरी नहीं समझा। रात का खाना जायरा ने तैयार किया और फ़िरोज़ समीम को ऊपर खाना दे आया। फ़िरोज़ आज मटन लाया था जिसे जायरा ने बनाया था।

उसके बाद फ़िरोज़ और जायरा दोनों शराब पीने बैठ गये और अपनी रंगरलियों में मशगूल हो गये। थोड़ी देर बाद दोनों नशे की हालत में बेडरूम में आये जहाँ शबाना आँखें बंद किये लेटी थी और चूमाचाटी शुरू कर दी। शबाना बेड पर लेटी उनकी ये सब हर्कतें देख कर खून के आँसू पी रही थी। उन दोनों को लगा कि शबाना सो चुकी है जबकि असल में वो जाग रही थी। वैसे उन दोनों पे शबाना के जागने या ना जागने से कोई फर्क़ नहीं पड़ता था।

“फ़िरोज़ मियाँ! अब आप में वो बात नहीं रही!” जायरा ने फ़िरोज़ का लंड को चूसते हुए शरारत भरे लहज़े में कहा।

फ़िरोज़: “क्या हुआ जानेमन… किस बात की कमी है?”

जायरा: “हम्म देखो ना… पहले तो ये मेरी फुद्दी देखते ही खड़ा हो जाता था और अब देखो दस मिनट हो गये इसके चुप्पे लगाते हुए… अभी तक सही से खड़ा नहीं हुआ है!”

फ़िरोज़: “आहह तो जल्दी किसे है मेरी जान! थोड़ी देर और चूस ले फिर मैं तेरी चूत और गाँड दोनों का कीमा बनाता हूँ!”

“अरे फ़ारूक़ मियाँ अब रहने भी दो… खुदा के वास्ते चूत या गाँड मे से किसी एक को ही ठीक से चोद लो तो गनिमत है…!” जायरा ने तंज़ किया और फिर उसका लंड चूसने लगी।

थोड़ी देर बाद जायरा फ़िरोज़ के लंड पर सवार हो गयी और ऊपर नीचे होने लगी। उसकी मस्ती भरी कराहें कमरे में गुँज रही थी। शबाना के लिये ये कोई नयी बात नहीं थी लेकिन हर बार जब भी वो जायरा को फ़ारूक़ के साथ इस तरह चुदाई के मज़े लेते देखती थी तो उसके सीने पे जैसे कट्टारें चल जाती थी। थोड़ी देर बाद उन दोनों के मुतमाइन होने के बाद रुखसना को जायरा के बोलने की आवाज़ आयी, “फ़िरोज़ मैं कल घर वापस जा रही हूँ!”
फ़िरोज़: “क्यों अब क्या हो गया..?”

जायरा: “मैं यहाँ तुम्हारे घर का काम करने नहीं आयी… ये तुम्हारी बीवी जो अपनी कमर तुड़वा कर बेड पर पसर गयी है… मुझे इसकी चाकरी नहीं करनी… मैं घर जा रही हूँ कल!”

शबाना को बेहद खुशी महसूस हुई कि चलो सीढ़ियों से गिरने का कुछ तो फ़ायदा हुआ। वैसे भी उसे इतना दर्द नहीं हुआ था जितना की वो ज़ाहिर कर रही थी। उसे गिरने से कमर में चोट जरूर लगी थी लेकिन शाम तक दवाई और बाम से मालिश करने कि वजह से उसका दर्द बिल्कुल दूर हो चुका था लेकिन वो जायरा को परेशान करने के लिये दर्द होने का नाटक ज़ारी रखे हुए थी।

फ़िरोज़: “जायरा मेरे जान… कल मत जाना…!”

जायरा: “क्यों… मैंने कहा नहीं था तुम्हें कि तुम मेरे घर आ जाओ… तुम्हें तो पता है तुम्हारे भाई जान दिल्ली गये हैं… दस दिनों के लिये घर पर कोई नहीं है!”

फ़िरोज़: “तो ठीक है ना कल तक रुक जओ… मैं कल स्टेशान पे बात करके छुट्टी ले लेता हूँ… फिर परसों साथ में चलेंगे!”

उसके बाद दोनों सो गये। शबाना भी करवटें बदलते-बदलते सो गयी। अगली सुबह जब उठी तो देखा जायरा ने नाश्ता तैयार किया हुआ था और फ़िरोज़ डॉयनिंग टेबल पर बैठा नाश्ता कर रहा था। फ़िरोज़ ने जायरा से कहा कि ऊपर समीम को थोड़ी देर बाद नाश्ता दे आये। दर असल उस दिन समीम ने छुट्टी ले रखी थी क्योंकि समीम को कुछ जरूरी सामान खरीदना था।

फ़िरोज़ के जाने के बाद जायरा ने नाश्ता ट्रे में रखा और ऊपर चली गयी। थोड़ी देर बाद जब जायरा नीचे आयी तो शबाना ने नोटिस किया कि उसके होंठों पर कमीनी मुस्कान थी। पता नहीं क्यों पर शबाना को जायरा के नियत ठीक नहीं लग रही थी।

शबाना की कमर का दर्द आज बिल्कुल ठीक हो चुका था लेकिन वो नाटक ज़ारी रखे हुए बिस्तर पे लेटी रही। जायरा से उसने एक-दो बार बाम से मालिश भी करवायी। इस दौरान शबाना ने फिर नोटिस किया कि जायरा सज-धज के ग्यारह बजे तक बार-बार किसी ना किसी बहाने से चार पाँच बार ऊपर जा चुकी थी। शबाना को कुछ गड़बड़ लग रही थी।

फिर समीम नीचे आया और शबाना के रूम में जाकर उसका हाल चल पूछा। शबाना बेड से उठने लगी तो उसने शबाना को लेटे रहने को कहा और कहा कि वो बाज़ार जा रहा है… अगर किसी चीज़ के जरूरत हो तो बता दे… वो साथ में लेता आयेगा। शबाना ने कहा कि किसी चीज़ की जरूरत नहीं है। समीम बाहर चला गया और दोपहर के करीब डेढ़-दो बजे वो वापस आया।

उसके बाद शबाना की भी बेड पे लेटे-लेटे आँख लग गयी। अभी उसे सोये हुए बीस मिनट ही गुजरे थे कि तेज प्यास लगने से उसकी आँख खुली। उसने जायरा को आवाज़ लगायी पर वो आयी नहीं। फिर वो खुद ही खड़ी हुई और किचन में जाकर पानी पिया। फिर बाकी कमरों में देखा पर जायरा नज़र नहीं आयी। बाहर मेन-डोर भी अंदर से बंद था तो फिर जायरा गयी कहाँ!

तभी उसे जायरा के सुबह वाली हर्कतें याद आ गयी… हो ना हो दाल में जरूर कुछ काला है… कहीं वो समीम पर तो डोरे नहीं डाल रही?

ये सोचते ही पता नहीं क्यों शबाना का खून खौल उठा। वो धड़कते दिल से सीढ़ियाँ चढ़ के ऊपर आ गयी। जैसे ही वो समीम के दरवाजे के पास पहुँची तो उसे अंदर से जायरा की मस्ती भरी कराहें सुनायी दी, “आहहह आआहहह धीरे समीम डर्लिंग… आहहह तू तो बड़ा दमदार निकला… मैं तो तुझे बच्चा समझ रही थी…. आहहह ऊहहह हायऽऽऽ मेरी फुद्दी फाड़ दीईई रे…. आआहहहह मेरी चूत… समीमलल!”

ये सब सुन कर शबाना तो जैसे साँस लेना ही भूल गयी। क्या वो जो सुन रही थी वो हकीकत थी! शबाना समीम के कमरे के दरवाजे की तरफ़ बढ़ी जो थोड़ा सा खुला हुआ था। अभी वो दरवाजे की तरफ़ धीरे से बढ़ ही रही थी कि उसे समीम की आवाज़ सुनायी दी, “साली तू तो मुझे नामर्द कह रही थी… आहहह आआह ये ले और ले… ले मेरा लौड़ा अपनी चूत में साली… आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | अगर शबाना भाभी घर पर ना होती तो आज तेरी चूत में लौड़ा घुसा-घुसा कर सुजा देता!”

जायरा: “हुम्म्म्म हायऽऽऽ तो सुजा दे ना मेरे शेर… ओहहह तेरी ही चूत है… और तू उस गश्ती शबाना की फ़िक्र ना कर मेरे सनम… वो ऊपर चढ़ कर नहीं आ सकती…. और अगर आ भी गयी तो क्या उखाड़ लेगी साली!”

शबाना धीरे- धीरे काँपते हुए कदमों के साथ दरवाजे के पास पहुँची और अंदर झाँका तो अंदर का नज़ारा देख कर उसके होश ही उड़ गये। अंदर जायरा सिर्फ़ ऊँची हील के सैंडल पहने बिल्कुल नंगी बेड पर घोड़ी बनी हुई झुकी हुई थी और समीम भी बिल्कुल नंगा उसके पीछे से अपना मूसल जैसा लौड़ा तेजी से जायरा की चूत के अंदर-बाहर कर रहा था। जायरा ने अपना चेहरा बिस्तर में दबाया हुआ था। उसका पूरा जिस्म समीम के झटकों से हिल रहा था। “आहहह समीम मेरी जान… मैंने तो सारा जहान पा लिया… आहहह ऐसा लौड़ा आज तक नहीं देखा… आहहह एक दम जड़ तक अंदर घुसता है तेरा लौड़ा… आहहह मेरी चूत के अंदर इस कदर गहरायी पर ठोकर मार रहा है जहाँ पहले किसी का लौड़ा नहीं गया… आहहह चोद मुझे फाड़ दे मेरी चूत को मेरी जान!”

शबाना ने देखा दोनों के कपड़े फ़र्श पर तितर-बितर पड़े हुए थे। टेबल पे शराब की बोतल और दो गिलास मौजूद थे जिससे शबाना को साफ़ ज़ाहिर हो गया कि समीम और जायरा ने शराब भी पी रखी थी। इतने में समीम ने अपना लंड जायरा की चूत से बाहर निकला और बेड पर लेट गया और जायरा फ़ौरन समीम के ऊपर चढ़ गयी। जायरा ने ऊपर आते ही समीम का लंड अपने हाथ में थाम लिया और उसके लंड के सुपाड़े को अपनी चूत के छेद पर लगा कर उसके लंड पर बैठ गयी… और तेजी से अपनी गाँड ऊपर नीचे उछलते हुए चुदाने लगी। समीम का चेहरा दरवाजे की तरफ़ था। तभी उसकी नज़र अचानक बाहर खड़ी शबाना पर पड़ी और दोनों की नज़रें एक दूसरे से मिली। शबाना को लगा कि अब गड़बड़ हो गयी है पर समीम ने ना तो कुछ किया और ना ही कुछ बोला। उसने शबाना की तरफ़ देखते हुए जायरा के नंगे चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ कर दोनों तरफ़ फ़ैला दिया।
जायरा की गाँड का छेद शबाना की आँखों के सामने नुमाया हो गया जो जायरा की चूत से निकले पानी से एक दम गीला हुआ था। समीम ने शबाना की तरफ़ देखते हुए अपनी कमर को ऊपर की तरफ़ उछालना शुरू कर दिया। समीम का आठ इंच का लंड जायरा की गीली चूत के अंदर बाहर होना शुरू हो गया। समीम बार-बार जायरा की गाँड के छेद को फैला कर शबाना को दिखा रहा था। शबाना के पैर तो जैसे वहीं जम गये थे। वो कभी जायरा की चूत में समीम के लंड को अंदर-बाहर होता देखती तो कभी समीम की आँखों में!

समीम: “बोल साली… मज़ा आ रहा है ना?”

जायरा: “हाँ समीम मेरी जान! बहोत मज़ा आ रहा है…. आहहह दिल कर रहा है कि मैं सारा दिन तुझसे अपनी चूत ऐसे ही पिलवाती रहूँ… आहहहह सच में बहोत मज़ा आ रहा है…!”

समीम अभी भी शबाना की आँखों में देख रहा था। फिर शबाना को अचानक से एहसास हुआ कि ये वो क्या कर रही है और वहाँ से हट कर नीचे आ गयी। उसकी सलवार में उसकी पैंटी अंदर से एक दम गीली हो चुकी थी। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | उसे ऐसा लग रहा था कि जिस्म का सारा खून और गरमी चूत की तरफ़ सिमटते जा रहे हों! वो बेड पर निढाल सी होकर गिर पड़ी और अपनी टाँगों के बीच तकिया दबा लिया और अपनी चूत को तकिये पर रगड़ने लगी पर चूत में सरसराहट और बढ़ती जा रहा थी। शबाना की खुली हुई आँखों के सामने जायरा की चूत में अंदर-बाहर होता समीम का आठ इंच लंबा और बेहद मोटा लंड अभी भी था।

अपनी सलवार का नाड़ा ढीला करके उसका हाथ अंदर पैंटी में घुस गया। वो तब तक अपनी चूत को उंगलियों से चोदती रही जब तक कि उसकी चूत के अंदर से लावा नहीं उगल पढ़ा। शबाना का पूरा जिस्म थरथरा गया और उसकी कमर झटके खाने लगी। झड़ने के बाद शबाना एक दम निढाल सी हो गयी और करीब पंद्रह मिनट तक बेसुध लेटी रही। फिर वो उठ कर बाथरूम में गयी और अपने कपड़े उतारने शुरू किये।

उसने अपनी सलवार कमीज़ उतार कर टाँग दी और फिर ब्रा भी उतार कर कपड़े धोने की बाल्टी में डाल दी और फिर जैसे ही उसने अपनी पैंटी को नीचे सरकाने की कोशिश की पर उसकी पैंटी नीचे से बेहद गीली थी और गीलेपन के वजह से वो चूत की फ़ाँकों पर चिपक सी गयी थी। शबाना ने फिर से अपनी पैंटी को नीचे सरकाया और फिर किसी तरह उसे उतार कर देखा। उसकी पैंटी उसकी चूत के लेसदार पानी से एक दम सनी हुई थी। उसने पैंटी को भी बाल्टी में डाल दिया और फिर नहाने लगी। नहाने से उसे बहुत सुकून मिला।

नहाने के बाद उसने दूसरे कपड़े पहने और बाथरूम का दरवाज़ा खोला तो उसने देखा कि जायरा बेड पर लेटी हुई थी और धीरे-धीरे अपनी चूत को सहला रही थी।

शबाना को बाथरूम से निकलते देख कर जायरा ने अपनी चूत से हाथ हटा लिया। शबाना आइने के सामने अपने बाल संवारने लगी तो जायरा ने उससे कहा, “शबाना मैं कल घर वापस जाने की सोच रही थी लेकिन अब सोच रही हूँ कि तुम्हारी कमर का दर्द ठीक होने तक कुछ दिन और रुक जाऊँ!” शबाना के दिल में तो आया कि जायरा का मुँह नोच डाले। बदकार कुत्तिया साली पहले तो उसके शौहर को अपने बस में करके उसकी शादीशुदा ज़िंदगी नरक बना दी और ज़िंदगी में अब जो उसे थोड़ी सी इज़्ज़त और खुशी उसे समीम से मिल रही थी तो अज़ारा समीम को भी अपने चंगुल में फंसा रही थी। शबाना ने कुछ नहीं कहा। कमर में दर्द का नाटक जो उसने जायरा को जल्दी वापस भेजने के लिये किया था अब जायरा उसे ही यहाँ रुकने का सबब बना रही थी। अब उसे यहाँ पर तगड़ा जवान लंड जो मिल रहा था।
रात को फ़िरोज़ घर वापस आया तो वो बहुत खुश लग रहा था… शायद उसे छुट्टी मिल गयी थी। रात को फ़िरोज़ ही समीम का खाना उसे ऊपर दे आया। जब फ़िरोज़ ने जायरा को बताया कि उसे एक हफ़्ते की छुट्टी मिल गयी है तो जायरा ने उसे यह कहकर अगले दिन जाने से मना कर दिया कि शबाना की तबियत अभी ठीक नहीं है। लेकिन शायद किस्मत जायरा के साथ नहीं थी। दिल्ली से उसके शौहर का फ़ोन आ गया कि उनके बेटे की बोर्डिंग स्कूल में तबियत खराब हो गयी है और वो जल्दी से जल्दी घर पहुँचे। जायरा को बेदिल से अगले दिन फ़िरोज़ के साथ अपने घर जाना ही पड़ा लेकिन उस रात फिर जायरा और फ़िरोज़ ने शराब के नशे में चूर होकर खूब चुदाई की। हसद की आग में जलती हुई शबाना कुछ देर तक चोर नज़रों से उनकी ऐयाशी देखते-देखते ही सो गयी।

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