दो साल से चोदने की प्यास

मेरा नाम जय है. मैं गोराखपुर से हूं. मैं 28 साल का हूँ और मेरी हाइट 5 फिट 11 इंच है.

वह घटना आज से 3 साल पहले की है जब मैं सऊदी अरब नौकरी कर्ता था. मैं एक कंप्यूटर और मोबाइल तकनीशियन हु.

मेरी दुकान पे एक पाकिस्तानी नर्स लैपटॉप मरम्मत के लिय लाई. मैने पुछा क्या समस्या है तो बोली साउंड  के प्रॉब्लम  है और आप देख लेना. मै बोला पासवर्ड हो तो हमें बता दो और कल शाम के समय हो जायेगा. उसके बाद ओ चली गई और मेरा मोबाइल नंबर ले ली. रात 10 बजे उसका कॉल आया और पूछी जय मेरा लैपटॉप सही होगया. मैंने बोला जी मैडम मस्त चल रहा है और 150 riyal हुए इसका चार्ज. ओ बोली  हम भी बाहर के ही हैं कुछ कम कर लीजिए. मै बोला कोई बात नहीं आप 100 दे देना. फिर उसने बोला आप imo यूज़ करते हैं मुझे अपना लैपटॉप देखना है. क्योंकि सऊदी मे वाटसअप कॉल नहीं होता है.

मै अपना imo नंबर दिया तो उसने विडियो कॉल की. क्या बताऊँ फ्रेंड देख के मेरा तो आउट ऑफ कंट्रोल होगया. उसका उम्र 32 के होगा और फिगर ओय होए 36.34.36 था. कुछ देर  लैपटॉप देख के बोली मेरे लिए कुछ और कम कर दीजिए ना प्लीज हम भी आपके कोई काम आ सकती हूँ. आपको जब भी कोई दवा चाहिए तो मैं आपको दूँगी. उसके बाद थोड़ा पर्सनल बात होने लगी. मैंने पूछा आपको यहा कितने साल हो गए हैं तो बोली 2 साल फिर मै मजाक मे बोला 2 साल में मन नहीं किया करने को.

ओ हसने लगी बोली कोई मिला ही नहीं..!मैंने बोला हमे भी 2 साल हो गया. आपकी जैसी हसीन मिला नहीं और दोनों हसने लगे. अगले दिन ओ दुकान पर आई लैपटॉप लेने के लिए तो मैंने उसका नाम पूछा तो ताहिरा बताई. दुकान पर ग्राहक ज़्यादा थे तो बोली नाइट को फोन करने के लिये. मै भी बिना पैसे लिए उसका लैपटॉप दे दिया. रात को उसका फोन आया ताहिरा बोली जय आप बहुत मस्त है. मै बोला मेरा सब कुछ है. कब  लेना चाहोगी ताहिरा बोली कब दीजिएगा. मै उसे फ्राइडे को 1 बजे दोपहर मे बुलाया.

क्योंकि 1 बजे सारा मार्केट बंद रहता ही है. मैं इसके लिये कुछ दे भी सकती हूँ!” तब मैंने कहा, “आप क्या दे सकती हो?” तो वो कुटिल मुस्कान भरते हुए अदा के साथ बोली, “चाय पानी!” मैं भी हंस कर रह गया. उसके बाद से तो मैंने महसूस किया कि वो मुझे अजीब निगाहों से देखती थी और उसकी नज़रों में काम वासना की ललक नज़र आती थी. पहले मैं समझ नहीं सका कि वो ऐसे क्यों देखती है। फिर मुझे लगा किफिर दो साल से प्यासी होगी। ताहिरा  को देख केर अक्सर मेरा लण्ड भी पैंट में तंबू की तरह खड़ा हो जाता था।दो दिन सेक्सी बाते होती रही imo पे फिर फ्राइडे का दिन भी आ गया जिसका बहुत बेसब्री से इंतजार था.

मेरा lund का साइज़ 8 इंच और 3 इंच मोटा है. ओ आई उसके बाद उसको दुकान में बुलाकर बाहर देखा कोई नहीं था. मै दरवाजा बंद कर दिया दिया. ताहिरा बेहद खूबसूरत थी और उसका फिगर था. उसका 36.34.36 भरा-भरा सा जिस्म बेहद सुडौल था और मैं तो उसके चूतड़ों पर बहुत फिदा था. मैंने उसको दीवार के सहारे और दबा दिया.ताहिरा  की गाँड पर मेरा लण्ड सटा हुआ था और ताहिरा के दोनों बूब्स मेरी मुठ्ठी में थे. मैं उंगली और अंगूठे से ताहिरा  के निप्प्लों को बेदर्दी से मसलने लगा. ताहिरा तो जोश में एक दम जैसे पागल सी हो रही थी. दस मिनट बाद मैं ताहिरा  को पकड़ कर टेबल के पास ले गया और उसे टेबल पर बैठने को कहा. ताहिरा टेबल पर बैठ गयी. अब मेरा मोटा और लंबा तना हुआ लण्ड ताहिरा  के सामने था. सने तुरंत ही मेरा लण्ड हाथ में पकड़ा और सहलाने लगी.

मैं बोला, “डिंपल, मुँह में लेकर चूसो इसको!” ताहिरा  लण्ड को पकड़ कर अपनी जीभ से चाटने लगी. थोड़ी ही देर बाद ताहिरा ने लण्ड अपने मुँह में ले लिया और लण्ड के सुपाड़े को चूसने लगी. ताहिरा  भी जोश में अपने आपको काबू में नहीं रख पा रही थी और बोली, “जानू, प्लीज़ जल्दी कुछ करो ना! नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगी!” ताहिरा टेबल पर आधी लेटी हुई थी. मैंने ताहिरा  की टाँगों को हाथों से पकड़ कर फैला दिया और अपने लण्ड के सुपाड़े को उसकी चूत के बीच में रख दिया. फिर एक झटका दिया तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया. ताहिरा दर्द से चिल्ला उठी, “ऊऊईईई! अल्लाह!! मर जाऊँगी मैं! आहहह रुक जाओ जानू! प्लीज़ऽऽ!” ताहिरा कराहने लगी तो मैं रुक गया और अपने लण्ड को ताहिरा की चूत से बाहर निकल लिया.

मैं ताहिरा  के ऊपर झुक गया और ताहिरा  के होंठों को अपने मुँह में ले लिया. फिर मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा एक बार फिर उसकी चूत के मुहाने पर रख कर एक जोरदार धक्का मारा. ताहिरा  की चींख निकलते-निकलते रह गयी क्योंकि मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में दबा रखा था. ताहिरा दर्द से कराह उठी तो मैं रुक गया. ताहिरा के शौहर का लण्ड छोटा था और उसकी चूत का छेद छोटे लण्ड के लिये ही मुनासिब था.मेरा आधा लण्ड घुस चुका था.दो-तीन मिनट तक मैं उसके ऊपर बिना हिलेडुले लेटा रहा. फिर मैंने धीरे-धीरे लण्ड को अंदर बाहर करना शुरू किया. ताहिरा  अभी भी दर्द से कराह रही थी. अचानक मैंने एक जोरदार धक्का दिया तो मेरा लण्ड सरसराता हुआ ताहिरा की चूत में और ज्यादा अंदर तक घुस गया.

ताहिरा चिल्लाते हुए रुकने के लिये कहने लगी लेकिन मैं नहीं रुका और ताहिरा को तेजी से चोदने लगा. बिजली की तरह मेरा लण्ड ताहिरा की चूत में अंदर बाहर हो रहा था.जैसे ही ताहिरा की चींख कुछ कम होती मैं एक धक्का ज़ोर से लगा देता था और ताहिरा  फिर चींख पड़ती थी. कुछ देर तक मैं इसी तरह चोदता रहा. धीरे-धीरे मेरा पूरा लण्ड ताहिरा की चूत की गहराई तक जगह बना चुका था और तेजी के साथ अंदर-बाहर हो रहा था. ताहिरा दर्द से तड़प रही थी. आठ-दस मिनट के बाद ताहिरा को भी मज़ा आने लगा. उसने अपने हाथ मेरी कमर पर कैंची की तरह कस दिये और अपनी गाँड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी. मैं बोला, “शाबाश जानेमन! अब तो तुम्हें भी चुदवाने में मज़ा आ रहा है!”

मैं उसको लगभग पंद्रह-बीस मिनट तक चोदता रहा. इस दौरान ताहिरा  तीन-चार बार झड़ चुकी थी लेकिन मेरा लण्ड था कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.ब मैं ताहिरा के ऊपर से हट गया और उसको घोड़ी की तरह बन जाने को कहा. ताहिरा उठ कर ज़मीन पर आ गयी और घोड़ी की तरह हो गयी. मैंने उसकी कमर पकड़ कर अपना लण्ड पीछे से ताहिरा की चूत में डाल दिया.ताहिरा फिर दर्द से कराहने लगी पर कुछ ही देर में ताहिरा का दर्द कम हो गया और ताहिरा को मज़ा आने लगा. ताहिरा अब अपनी गाँड को पीछे ढकेल-ढकेल कर ताल से ताल मिला रही थी. दस-पंद्रह मिनट के बाद मैं ताहिरा  की चूत में ही झड़ गया और अपना लण्ड ताहिरा की चूत से बाहर निकाल कर ताहिरा के मुँह में दे दिया. ताहिरा ने मेरे लण्ड को चाट-चाट कर साफ़ किया और हम दोनों साथ साथ ही ज़मीन पर ही लेट गये।

उसने तरसती निगाहों से मेरी तरफ़ देखा.मैं उसका इशारा समझ गया.मैंने उसकी कमर को पकड़ कर ज़ोर से नीचे किया तो एक झटके से आधे से ज्यादा लण्ड ताहिरा की चूत में घुस गया. अब ताहिरा धीरे-धीरे ऊपर नीचे होने लगी और मैं ताहिरा की कमर को पकड़े हुए था. ताहिरा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और चुदाई का मज़ा लेने लगी. उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी और वो इतनी तेज़ हो गयी कि पता ही नहीं लगा कब दोनों झड़ गये. फिर हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में लिपट कर लेट गये.

कुछ देर बाद मैंने ताहिरा  को तेजी से चोदना शुरू कर दिया. ताहिरा  के सैंडल मेरे हर धक्के के साथ मेरी गर्दन के पास थपथपाते थे जिससे मुझे और जोश आने लगा और मैं ताहिरा  को और तेजी के साथ चोदने लगा. मेरे हाथ अभी भी ताहिरा की चूचियों और निप्पलों को मसल रहे थे और ताहिरा को दर्द हो रहा था लेकिन उसे फिर भी मज़ा आ रहा था क्योंकि आज दो साल बाद कोई उसकी चूत की प्यास को बुझा रहा था वो भी इतने मोटे तगड़े लण्ड से थोड़ी देर बाद मैंने ताहिरा  के पैरों को अपने कंधों से उठाया और ताहिरा की टाँगें पीछे मोड़कर उसके कंधों की तरफ़ झुका दीं. अब ताहिरा एक दम दोहरी हो गयी और ताहिरा की चूत और ऊपर उठ आयी.

फिर आगे होकर मैंने उसके पैरों के पास उसकी टाँगों को पकड़ कर बहुत ही तेजी के साथ ताहिरा  की चुदाई करनी शुरू कर दी. मुझे मेरे लण्ड के सुपाड़े पर उसकी बच्चेदानी का मुँह महसूस होने लगा था. ताहिरा  और भी जोश में आ गयी और अपनी आँखें बंद कर लीं. ताहिरा के मुँह से केवल मस्ती भरी आवाज़ें निकल रही थी, “हाय मेरे जानू! ऐसे ही… और कस-कस कर जोर से चोदो… और जोर से चोदो… फाड़ दो मेरी चूत को!”

मेरे चेहरे का पसीना ताहिरा  की चूचियों पर टपक रहा था लेकिन लण्ड रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था. ताहिरा  अब तक दो-तीन बार झड़ चुकी थी. कुछ ही देर में मेरे लण्ड ने फिर उसकी चूत में पानी छोड़ दिया था.मैं ऐसे ही थोड़ी देर ताहिरा  के ऊपर पड़ा रहा और ताहिरा मुझे चूमती रही. फिर मैं ताहिरा के ऊपर से हट कर उसके बगल में लेट गया.

थोड़ी देर बाद ताहिरा  ने मेरे मुर्झाये हुए लण्ड को अपने हाथों में लिया और अपने होंठों को दाँत से काटते हुए बोली, “अगर बुरा ना मानो तो मैं तुम्हारे लण्ड को फिर से चूसना चाहती हूँ, प्लीज़!!!” मैं बोला, “इसमें इजाज़त की क्या बात है… ये लण्ड तो अब सिर्फ़ तुम्हारा ही है!” ताहिरा  मेरे पैरों के बीच में आकर बैठ गयी और दोनों हाथों से लण्ड को पकड़ कर लण्ड के सुपाड़े पर धीरे से किस किया. ताहिरा ने मेरी तरफ़ देख कर आँख मारी और वापस अपने होंठ मेरे लण्ड पर रख दिये. लण्ड को पकड़ कर चूसते हुए ताहिरा अपने मुँह को ऊपर-नीचे करने लगी और मेरा लण्ड बिल्कुल तन गया. फिर ताहिरा  उठ कर मेरे ऊपर आ गयी और अपने हाथ से लण्ड को पोज़िशन में करके अपनी चूत के बीच में सटा दिया और ऊपर से दबाव डालने लगी पर सिर्फ़ सुपाड़ा ही ताहिरा की चूत में घुस पाया.

उसने तरसती निगाहों से मेरी तरफ़ देखा. मैं उसका इशारा समझ गया. मैंने उसकी कमर को पकड़ कर ज़ोर से नीचे किया तो एक झटके से आधे से ज्यादा लण्ड ताहिरा  की चूत में घुस गया. अब ताहिरा धीरे-धीरे ऊपर नीचे होने लगी और मैं ताहिरा की कमर को पकड़े हुए था. ताहिरा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और चुदाई का मज़ा लेने लगी. उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी और वो इतनी तेज़ हो गयी कि पता ही नहीं लगा कब दोनों झड़ गये। फिर हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में लिपट कर लेट गये.

लण्ड फिर से पत्थर की तरह सख्त हो कर तन कर गया था। मैं बोला, “ताहिरा , अब तुम फिर से घोड़ी बन जाओ!” ताहिरा ने जल्दी से अपना गिलास खाली किया और ज़मीन पर घोड़ी बन गयी। तब मैंने कहा, “ताहिरा , अब मैं तुम्हारी गाँड मारुँगा!” ताहिरा  थोड़ा डरते हुए बोली, “लेकिन तुम्हारा लण्ड तो बहुत मोटा है!” मैं बोला, “तुम घबराओ मत… मैं आराम से करुँगा!” ताहिरा अब काफी नशे में थी और मस्ती में चहकते हुए बोली, “ओके, तुम सिर्फ मेरे बॉस ही नहीं बल्कि जानेमन हो, मेरा सब कुछ तुम्हारा ही तो है! चाहे जो करो… आज तुम्हारी ताहिरा  तुम्हारे लण्ड की ग़ुलाम है! मारो मेरी गाँड को, फाड़ दो इसे भी… मैं कितना भी चिल्लाऊँ… तुम रुकना मत…. अपनी ताहिरा की गाँड बेदर्दी से पेलना!”

मैं उठ कर उसके पीछे आ गया और ताहिरा  की गाँड के छेद पर ढेर सारा थूक लगा दिया। मेरा लण्ड तो पहले से ही ताहिरा  के थूक से सना हुआ था. फिर मैंने ताहिरा की गाँड के छेद पर अपने लण्ड की टोपी रखकर ताहिरा  की कमर को पकड़ लिया और धीरे-धीरे अपने लण्ड को ताहिरा की गाँड में घुसाने लगा। ताहिरा ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। अभी तक लण्ड का सिर्फ़ सुपाड़ा ही घुस पाया था. फिर मैंने ताहिरा की गाँड के छेद को हाथों से फैलाया और फिर से ताहिरा की कमर पकड़ कर एक धक्का दिया. ताहिरा दर्द से अपना सर कुत्तिया की तरह इधर-उधर हिलाने लगी। मैंने थोड़ा ज़ोर और लगाया तो ताहिरा  और भी ज़ोर-ज़ोर से चींखने-चिल्लाने लगी. मैं बोला, “ताहिरा मेरी जान! अगर तुम ऐसे चिल्लाओगी तो कैसे काम बनेगा? अभी तो ये तीन इंच ही अंदर घुसा है!” ताहिरा दर्द से चिल्लाते हुए ही बोली, “मेरे चिल्लाने कि तुम परवाह मत करो! घुसा दो अपने तमाम लण्ड को मेरी गाँड में… फाड़ डालो इसे!”

फिर मैंने ताहिरा  के मुँह पर एक हाथ रख दिया और उसकी कमर को पकड़ कर धक्के पर धक्का लगाते हुए अपने लण्ड को ताहिरा  के गाँड में घुसाने लगा. लण्ड ताहिरा की गाँड में और गहराई तक घुसने लगा तो ताहिरा दर्द के मारे छटपटाने लगी. मैं बोला, “शाबाश ताहिरा ! मेरा लण्ड अब तुम्हारी गाँड में करीब छः इंच तक घुस चुका है!” दर्द से ताहिरा  कि हालत अभी भी खराब हो रही थी. मैं पूरी ताकत से ताहिरा की गाँड में लंड ठूँसने में लगा था और रुकने का नाम ही नहीं ले रहे था.ताहिरा की गाँड चौड़ी होती गयी और दर्द भी बढ़ता गया. गाँड में दर्द की वजह से ताहिरा सिसकियाँ लेती रही. ताहिरा के आँसू भी निकल आये पर ताहिरा ने हिम्मत नहीं हारी. ताहिरा की गाँड में अपना लण्ड पूरा घुसाने के बाद मैं रुक गया.

थोड़ी देर में दर्द धीरे-धीरे कम हो गया तो मैंने फिर धीरे-धीरे पेलना शुरू कर दिया. अब मैं अपना आधा लण्ड बाहर निकालता और वापस एक ही धक्के में पूरा लण्ड उसकी गाँड में अंदर तक घुसेड़ देता. हालांकि दर्द अभी खतम नहीं हुआ था पर फिर भी ताहिरा अब अपनी गाँड मेरे हर धक्के के साथ आगे-पीछे हिलाने लगी थी.अब मैं पुरी स्पिड से ताहिरा को चोदने लगा. अब मैं अपना पुरा लण्ड बाहर निकालता और वापस तेजी के साथ अंदर घुसा देता. ताहिरा को तो यकीन ही नहीं था कि इतना लंबा और मोटा लण्ड वो कभी अपनी गाँड में ले पायेगी.

मैं बहुत मज़े ले-ले कर ताहिरा  की गाँड मारने में लगा हुआ था. ताहिरा  भी और ज्यादा मस्त हो गयी थी और अपनी गाँड ढकेलते हुए बोली, “पेलो मुझे! मेरी गाँड फाड़ दो! अपनी ताहिरा  की गाँड चौड़ी कर दो! बेदर्दी से पेलो मुझे… मेरे जनू! मैं ताहिरा की गाँड पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारता हुआ अपना लण्ड उसकी गाँड में गहराई तक घुसेड़-घुसेड़ कर पेलता रहा. वो भी कभी चींखती तो कभी सिसकती और कभी मुजे ज़ोर-ज़ोर से गाँड पेलने को कहती और फिर चींखने लगती. थोड़ी देर में मैं ताहिरा  की गाँड में ही झड़ गया और हम दोनों दोने ज़मीन पर ही लेट गये. दोनों की साँसें फूली हुई थीं. बीस पच्चीस मिनट ऐसे ही पड़े रहने के बाद मैं ताहिरा को दुकान से बाहर भेज दिया.

मित्रों कैसी लगी मेरा सच्चा कहानी. मुझे मेरे मेल पे लाइक और कमेंट जरूर करना. [email protected]