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गैर मर्द से रिश्ता

गैर मर्द से रिश्ता ( Gair Mard Se Rishta )

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम नसीम खान है मे एक सीधी सादी हाऊसवाइफ हु जो हमेशा घर के कामकाज या पति और बच्चो की देखभाल में ही लगी रेहती है मेरी उम्र 33 साल हाइट 5.3 फीट 60 किलो वजन रंग गोरा काफी खुबसुरत हु मेरी शादी को 12साल हो गए है पति का नाम शेहजाद खान है उम्र 36साल वो एक फार्मा कंपनी मे सुपरवाइजर है हम दिल्ली मे रहते है मेरे 2 बच्चे है बडा बेटा 10 साल का है नाम साहिल और छोटी बेटी जो 5 साल की है नाम समीना जिसे हम प्यार से गुड्डी बुलाते है हमारा घर काफी बडा है दो मंजिला और इतने बडे घर मे हम चार लोग ही रहते है बचपन से ही मे एक रुढीचुस्त और स्ट्रीक्ट फेमिली मे पलीबडी होने की वजह से कभी किसी लडके की तरफ नजर उठाके नही देखा और ना ही शादी से पहले मेरा कोइ अफेयर रहा मे घर से बाहर हमेशा बुरखे मे ही निकलती हु और घर मे भी ज्यादातर रुमाली या फुल साईज डुपट्टे मेही रेहती हु मेरे पहले हम बिस्तर मेरे शोहर शेहजाद ही थे हम एक दूसरे से बहोत प्यार भी करते है और वो मुझपर भरोसा बी करते है मेरे पति मुझे हर तरह की खुशी देते है मुझे कभी किसी बात की कमी नही होने दी फिरभी मेरी जिंदगी ने कुछ ऐसा मोड लिया जो मैंने कभी ख़्वाब मे भी नहीं सोचा था जिसमे का भरोसा तोड दिया | मेरा गैर मर्द से रिश्ता बन गया था हुआ कुछ एसा था |

बात आजसे 6 महीने पहले की है एक दीन रात को खाना खाते वक़्त शेहजाद ने मुझसे कहा के नसीम क्यों ना हम अपना उपर वाला कमरा किराये पर दे दे!!?
मै : क्यों किस लिए??
शेहजाद: अरे कुछ नहीं बस ऐसे ही मेरी ओफिस मे एक नया लडका आया है संजय शरमा जो अमृतसर से है उसकी ट्रान्सफर दिल्ली मे हुइ है और बेचारे के कोइ रिश्तेदार भी यहा नही है तो वो मुजसे कोइ ठीकाना करने के लिए पुछ रहा था

मै : लेकिन मुझे ये ठीक नहीं लग रहा है किसी गैर मज़हबी का हमारे साथ रहना!! मेरा मतलब है के वो सेट हो पाएगा??

शेहजाद: अरे कोइ नही वेसे भी पंजाबी लोगों की लाइफ स्टाइल बिलकुल हमारे जेसी ही होती है वो नोनवेज मास मच्छी सब खाते है!! तो बोलो क्या कहती हो बुलालु उसे कल???

मैंने मन मार कर हा मे सर हीला दिया पर मन मे कुछ गभराहट सी मेहसुस हो रही थी दूसरे दिन सुबह शेहजाद ने मुझसे उपर के दोनो कमरे ठीक करने को कहा और ओफिस चले गए शाम को जब 8 बजे वो वापस आए तो उनके साथ एक लडका आया जो करीब 24 साल का था साथ मे कुछ कपडे और थोडा सामान था दिखने मे वो काफी हैन्डसम था मैंने मुस्कुराहट के साथ उनका वेलकम किया |

शेहजाद: नसीम ये संजय है जो मेरे कलीग है जीनके बारे मे मैंने कल तुम्हे बताया था

संजय: (हाथ जोडकर)नमस्ते भाभीजी।। उसकी आखे मेरे पुरे बदन को घुर रही थी

मै : (मुस्कुराहट के साथ) आइये संजय भाइ !!

संजय: शेहजादभाइ आपका घर तो बहोत खुबसुरत है।। ये बात कहते हुए उसकी नजरे मुझपर थी

शेहजाद: शुक्रीया संजय, आओ तुम्हे मे उपर के कमरे दीखाता हु।।

मै : आप लोग उपर जाइए मे चाय वगैरह लेकर आती हु।। वो दोनो उपर गए और मे कुछ देर मे चाय लेकफर पहुँची।। उपर के फ्लोर पे 2 कमरे है जीस्मे से 1 कमरे की बाल्कनी हमारे बराम्दे मे पढती है जहा मे सुबह कपडे धोने शुखाने का काम करती हु मैंने चाय दी और कहा
मै : और कहिये संजयभाइ कौनसा कमरा सीलेक्ट किया आपने??

संजय: भाभीजी ये बाल्कनी वाला कमरा ही ठीक रहेगा

शेहजाद: नसीम इन्हे बाल्कनी वाला कमरा पसंद है

मै : ठीक है तो बस आप अपना सामान यही पर सेट करलो और फटाफट नीचे आजाओ खाना तैयार है

संजय: अरे नहीं नहीं खाना वगैरह मे अपने आप सेट कर लुंगा

शेहजाद: नही भाइ कोइ जरुरत नहीं है बाहर का खाना खाने की

मै : अरे संजयभाइ फिक्र मत करो मे बहोत अच्छा खाना बनाती हु

संजय: अरे नहीं नहीं भाभीजी ऐसी कोइ बात नहीं है

मेरे और शेहजाद के जोर देने पर वो राजी हो गया उधर नीचे होल से बच्चो की आवाज आइ जो टयुशन से आ चुके थे खाना खाते वक़्त शेहजाद ने बच्चो से संजय को मिलवाया कुछ ही देर मे संजय उनसे घुल मील गया रातको मे और शेहजाद बेडरुम मे बाते कर रहे थे

शेहजाद: नसीम तुम्हें कोइ तकलीफ तो नहीं होगी ना संजय के यहा रेहने से ?

मै : नही एसा कुछ नहीं है वो तो बस एक गैर मज़हबी लडके को साथ रखना कुछ अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए आपसे कहा था पर अभी ठीक है ।। अच्छा लडका है सेट हो जाएगा.

शेहजाद: हा सही केह रही हो,, और एक ही दिन मे बच्चों से भी कितना घुलमील गया है

मै : हा बच्चे बहोत इंजोय कर रहे थे संजय के साथ

इसी तरह दीन बीतते गए और एक महीने मे तो संजय हमारी फेमिली मे काफी एक्जेसस्ट हो गया ज्यादातर रात के खानेपर हम सब साथ ही होते वो बच्चो के साथ हसीमजाक करता था जीस्मे कभी कभी मे भी शामील हो जाती जीस्से कइ बार मेरा हाथ संजय के हाथ से टच हो जाता या कइ बार वो जानबुझ कर मेरे हाथ से अपने हाथ को टच करता था | आप यह हिंदी गैर मर्द से रिश्ता की कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | इस बीच मैंने नोटीस किया के संजय मुझे कुछ अजीब ही नजरो से देखता रेहता था खाशकर जब शेहजाद कुछ काम मे लगे हो या मेरी नजर उसपर ना हो तब फिर जब हमारी नजरे मिलती तो वो नजर हटा लेता था मुझे बड़ा अजीब लगता था पर मे हमेशा इग्नोर कर देती थी कभी कभी वो मेरे खाने की और मेरी खुबसुरती की तारीफ़ कर देता खासकर जब मे ब्लेक शुट पेहनती।।

संजय ने बताया के वो काफी अच्छा पेइन्टर भी है उसने अपनी ड्रोइंग की हुइ कुछ तसवीरे भी हमे दीखाइ जो बेहद खूबसूरत थी मुझे भी बचपन से ही पेइन्टींग का शौख था तो मे बहोत ही इंम्परेस हुइ एक दिन सुबह जब मे बराम्दे मे कपडे धो रही थी तो मुझे महसूस हुआ के कोइ उपर के कमरे की बाल्कनी मे है जो संजय के कमरे की थी उस वक़्त मे सिर्फ कुर्ती और सलवार मे थी दुपट्टा नही ओढा था और मेरे कपडे काफी भीगे हुए थे तो मैंने फोरन खडी होके दुपट्टा डाल लीया और बाल्कनी मे देखा तो कोइ नही था शायद तबतक संजय चला गया था मुझे थोड़ा गुस्सा आया पर फिर सोचा शायद कुछ काम से आया होगा धीरे धीरे वो रोजाना मुझे बाल्कनी से चुपके चुपके देखता अबतक के मे इतना जान चुकी थी के संजय की नियत मुजपर ठीक नहीं थी एक दिन रात को मे और शेहजाद उपर संजय के कमरे मे कुछ काम से गए और वापस आते वक्त मे अपना मोबाइल उसके कमरे मे ही भूल आइ जीस्का पता मुझे देर रात बेडरुम मे सोते वक्त चला

मै : शेहजाद मेरा फोन नही दीख रहा???

शेहजाद: यही कही होगा रींग मार के देखलो ।। कही उपर संजय के कमरे मे ही तो नहीं छोड दीया???

मै : हा हा शायद उपर ही रेह गया है ।

शेहजाद: ठीक है जाओ ले कर आओ। मैंने देखा रात 12 बज चुके थे मुझे इस वक्त संजय के कमरे मे अकेले जाना कुछ ठीक नहीं लगा तो मैंने कहा सुबह ले आउंगी वेसे भी रात को किसका फोन आने वाला है।। और हम सो गए सुबह 7 बजे रोज की तरह कपडे धोते वक्त मैंने नोटिस किया के संजय बाल्कनी से मुझे देख रहा है मैंने फोरन पीछे मुड के देखा पर मे लेट हो गइ थी संजय वहा नही था तभी मुझे याद आया के मेरा फोन उपर है सो मैंने सोचा के जाके ले आती हु।।

वेसे भी शेहजाद और बच्चे 8 बजे तक उठते है उस वक्त मेरे कपडे पुरे भीगे हुए थे तो मैंने अपना दुपट्टा ओढा और उपर गइ मैंने देखा संजय के कमरे का डोर थोडा खुला हुआ था मैंने नौक किया पर कुछ जवाब नहीं आया पर बाथरुम से पानी की आवाज़ आइ मे समझ गइ के वो बाथरुम मे है मे अंदर चली गई सोचा अपना फोन लेके चली जाती हु मैंने इधर उधर नजर घुमाइ तो फोन टेबल पर पडा दीखा साथ मे एक पेइन्टींग भी थी मैंने जब वो देखी तो मेरे होश उड गए और शौक के मारे मेरी आंखें बडी हो गई।।।

वो मेरी पेइन्टींग थी जीस्मे मे बीना दुपट्टे के सिर्फ़ ब्लेक शुट और सलवार मे थी बाल खुले हुए और मेरे पुरे शरीर को बखुबी पेइन्ट किया था बहोत ही खुबसुरत पेइन्टींग थी वो मे उसे देखने मे खोगइ थी के तभी पीछेसे संजय की आवाज़ आइ।।

संजय: केसी लगी भाभीजी पेइन्टींग??? मे चौक गई और पीछे मुडते हुए

मै : अच्छी है पर क्यु ऐसी ? मेरा मतलब बीना दुपट्टे के,, अगर शेहजाद ने देखली तो उन्हे अच्छा नहीं लगेगा।।

संजय: और आप को??? मैंने शर्म से नजरे झुका ली

संजय: कहीये ना भाभीजी आपको केसी लगी??

मै : (शर्मा ते हुए) बहोत अच्छी,,

संजय थोडा मेरे करीब आया और हमारी नजरे मिली,, मैंने उस्से थोडा गुस्से से कहा

मै : ओह तो तुम ये पेइन्टींग बनाने के लिए रोज मुझे बाल्कनी से छुप छुप के देखते हो।।

संजय: हा,, भाभीजी आप हो ही इतनी खुबसुरत के मे आपको देखने के लिए मजबूर हो जाता हु और ना चाहते हुए भी मैंने ये पेइन्टींग बना दी।। मुझे ना जाने आज क्या हो गया था कि मे संजय की बातो को सुनते जारही थी संजय की बातो मे इतनी कशीस थी के मे उसकी आंखों मे आंखें डालकर उसे ध्यान से सुन रही थी

संजय: भाभाजी आपसे एक बात कहु?? मेरी आँखें उसे हर सवाल का हा मे जवाब दे रही थी

संजय: मे आपको एकबार इस पेइन्टींग की तरह देखना चाहता हूं मे बहोत ही डर गई मैंने फोरन मना कर दिया

संजय: (मेरे करीब आते हुए) प्लीज़ भाभीजी मे देखना चाहता हु के मैंने ये पेइन्टींग ठीक बनाई है के नही।। वो बडी सिद्दत से मेरे पूरे बदन को निहार रहा था मे उसकी बात और उसका मतलब दोनो बखुबी समझ रही थी मे उसे मना करना चाहती थी पर उससे पहले ही संजय ने मेरे बिलकुल करीब आकर धीरे धीरे करके मुजसे लीपटे हुए मेरे दुपट्टे को खिच लिया मे आज पहली बार किसी गैरमर्द के सामने इस तरह बीना दुपट्टे के खडी थी संजय की नजरो मे मुझे हवस साफ नजर आ रही थी हम एकदुसरे को बीना पलक झप्काए देख रहे थे मेरे पुरे शरीर मे अजीब सी सरसराहट हो रही थी मेरी धडकने बढ रही थी गभराहट के मारे मेरा गला सुख रहा था और होठ कांप रहे थे संजय मेरे इतने करीब आचुका था की हम दोनों की सांसो की गरमाहट एकदुसरे मे समा रही थी |

मैंने शर्मा कर अपनी नजरे झुका ली संजय ने अपने दोनो हाथो को मेरे बालो मे डालते हुए मेरे कांपते हुए होठो पे अपने होठ रख दीये और चुसना शुरु कर दिया उसकी इस हरकत से मे शौक्क थी मे उसे रोकना चाहती थी पर उसने मुझे कसकर अपनी बांहो मे भर लिया कुछ ही पल मे मेरा विरोध कम हो गया और धीरे धीरे मे भी पुरा साथ देने लगी हम एक दुसरे के होठो को चुसे जा रहे थे मैंने दोनो हाथ संजय की पीठ पे सेहलाते हुए उससे चीपक गइ मेरे बुब्स संजय के सीने मे समा गए वो अपनी जीभ को मेरे मुह मे डालते हुए डीपस्मुच कर रहा था

मै भी अपनी जीभ को संजय के मुह मे डालकर डीपस्मुच का पुरा आनंद ले रही थी उस्का एक हाथ मेरी पीठ को सेहला रहा था और दुसरा हाथ मेरे बम्प्स को दबा कर मुझे उस्के लंड की तरफ खिंच रहा था करीब दो मिनीट के लिपस्मुच के बाद संजय के होठ मेरे गालो को चुमते हुए मेरी गरदन पे जा पहोचे संजय मेरी गरदन को दोनो तरफ से बेतहासा चाट रहा था जिससे संजय के स्लेव से मेरी गरदन पुरी गीली और लाल हो चुकी थी मेरे मुह से मदहोशी भरी सिस्किया निकल रही थी संजय मेरे होठ गाल कान और गरदन पे चुम्बनो की बौछार कर रहा था |

मै भी अब इतनी मदहोश हो चुकी थी के पुरा जोर लगा कर उस्को अपने अंदर खींच रही थी करीब पांच मिनट तक यही चलता रहा फिर संजय ने मुझे घुमा कर दीवार से चिपका दिया और पीछेसे मुझे अपनी बांहो मे भर लिया और मेरे बुब्स को दबाते हुऐ फिरसे मेरी गरदन को चुम्ना शुरू कर दिया मेरे मूह से सिस्की निकल गई पता नही क्यु आज मेरा शरीर मेरा साथ नहीं दे रहा था और संजय की हर हरकत का मजा लेना चाहता था मेरी सांसे तेज चल रही थी मेरे दोनो बुब्स संजय के हाथो मे खेल रहे थे और उस्के गीले होठ मेरी मखमली गरदन को मसाज दे रहे थे और संजय का लंड मेरे बम्प्स के बीच जगह बना रहा था मे विरोध तो नहीं कर रही थी पर मेरे मुह से नहीं संजय,, नहीं प्लीज …|

ये गलत है,, मे शादीशुदा हु,, ये गलत है,, जेसे शब्द निकल रहे थे संजय का ऐक हाथ मेरे पेट को सेहलाते हुए मेरी सलवार तक पहुंचा मे कुछ समजती उस्से पहले तो मेरा नाडा खीच चुका था और मेरी सलवार जमीन पे थी मैंने संजय की तरफ देखकर मना करना चाहा पर मे कुछ कहती उस्से पहले संजय ने मेरे होठो को अपने होठो मे भर के लिपलोक कर लिया और अपनी उंगलियों से मेरी पेन्टी के उपर से सेहला रहा था फिर उस्ने मेरी पेन्टी मे हाथ डाल कर मेरी चुत पे अपनी कामूक उंगली सेहला दी और धीरे धीरे संजय ने एक उंगली मेरी रस से तरबरती हुई गीली चुत मे डालदी मे एकदम से उछल पडी और संजय के बालो मे हाथ डालके उस्के होठो को जोर से काटने लगी संजय मेरे होठ गाल कान और गरदन पे बेतहासा चुम रहा था और अपनी दो उंगली मेरी रसभरी गीली चुत मे अंदर बाहर कर रहा था मे सिस्किया ले रही थी सिस्स्स्सस अम्म्म्मम मेरा पूरा तन और मन अब वासना की आग मे डुब चुका था और मे अपनी सारी मर्यादा भुल चुकी थी मे भुल चूकी थी की मे शादीशुदा हु और अपने पति से बहोत प्यार करती हु मे दो बच्चो की मॉ हु किसी के घर की इज्ज़त हु सबकुछ भुलकर मे अब एक गैर मर्द की कामुक फींगर सेक्स का भरपुर आनंद ले रही थी जो उम्र मे मुजसे करीब 10 साल छोटा था संजय ने अपनी स्पीड बढादी आह्ह्ह्ह्ह अम्म्म्म्मम मे बहोत ही उत्तेजित हो गइ और किसी भी वक्त झड़ने वाली थी।

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