टूरिस्ट की गुप्तांग और जननांग में उंगली किया

मैं युपी के वाराणसी में एक टूरिस्ट एजेंसी में काम पर लगा हुआ हूँ. आज से करीब छा महीने पहले मैं काम पर लगा था. मैं दसवीं तक पढ़ा हूँ लेकिन मेरी अंग्रेजी बहुत अच्छी है. इसी कारण मेरे मालिक ने मुझे विदेशी टूरिस्टों के लिए रखा. मैं दिखने में साधारण हूँ लेकिन मेरा कद ५ फुट ११ इंच और वजन ८० किलो है. किसी पहलवान से कम नहीं दिखता हूँ.

एक बार अमेरिका ने एक बड़ा ग्रुप आया. उस ग्रुप में पंच शादी शुदा जोड़े थे. उसके अलावा तीन युवक और पांच अन्य युवतीयां भी थी. मेरा मालिक खुश हो गया क्यूंकि मेरे अंग्रेजी ज्ञान के कारण उस ग्रुप के नेता ने मेरे मालिक के यहाँ ही अपना सारा घूमने का प्रोग्राम पका कर दिया. मेरे मालिक ने एक इम्पोर्टेड मिनी बस किराए पर करवा दी और उस ग्रुप को मेरे हवाले कर दिया. पहले दो दिन वाराणसी ही घुमे. इसके बाद एक दिन थोड़ी दूर पर एक गाँव घूमने का कार्यक्रम बनाया गया. मैंने उन सभी को सब बताते हुए गाँव घुमाया.

हमने दोपहर का खाना गाँव से थोड़ी दूर पेड़ों के एक झुण्ड के नीचे बैठ कर खाया. ड्राइवर और उसका साथी बस के पास जाकर आराम करने लगे. सभी टूरिस्ट भी कुछ लेटे और कुछ अधलेटे आराम करने लगे.मैंने देखा कि जो पांच जोड़े थे वे पास पास बैठ हुए थे. आपस में बात करते करते एक दूजे को चूम लेते. कभी गालों पर ; कभी छाती पर ; कभी होंठों पर. मुझे ये गन्दा लगा क्यूंकि मैंने कभी ऐसा पहले देखा नहीं था. इन जोड़ों के अलावा बाकी के ग्रुप में भी मैंने जब यही चलता देखा तो मुझे गुस्सा आने लगा लेकिन क्या करता. हमारे मेहमान और अन्नदाता जो ठहरे.

मैं वहां से दूर आकर बैठ गया. कुछ देर के बाद जब मैं बस में रख एअपने बैग में से पानी पीकर वापस अपनी जगह जा रहा था तो मैंने देखा कि एक पेड़ के पीछे कोई लेटा हुआ है. मैं उधर देखने गया क्यूंकि वो पेड़ दूर था. मैंने वहां पहुंचकर जो देखा तो मेरे एक बार तो होश ही उड़ गए. उन पांच जोड़ों में से एक जोड़ा वहां अपने सभी कपडे उतारकर आपस में लिपट कर सोया हुआ था और उनमे उछलकूद चल रही थी. गुस्से तो आया लेकिन मैंने ऐसा कभी पहले देखा नहीं था इसलिए उन्हें चोरी छुपे देखने लगा. मैंने कभी इससे पहले किसी को भी सेक्स करते नहीं देखा था. इसी जिज्ञासावश मैं उन्हें देखता रहा. मुझे धीरे धीरे मजा आने लगा और साह ही मेरे शरीर में हलचल भी महसूस होने लगी.

 मैं अपनी जगह लौटने को हुआ तो मैंने देखा कि मेरे ठीक पीछे एक युवती मुझे मुस्कुराकर देख रही थी. मैं झिझका तो वो मेरे पास आकर बोली ” मैं जानती हूँ तुम्हे वो देखना अच्छा लगा था. अगर तुम चाहो तो मेरे साथ वो सब कुछ दोहरा सकते हो.” मैं उस युवती की बेशर्मी देख गुस्से में आ गया लेकिन कुछ ना बोल कर अपनी जगह आकर बैठ गया.

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रात को हम लोग वापस वाराणसी लौट आये. मेरे मालिक के एक छोटा सा होटल भी है. सभी उसमे ठहरे थे. उस होटल में केवल हार कमरे हैं. सभी उसमे खाने के बाद सोने चले गए. मैं उसी होटल की छत पर बने एक छोटे से कमरे में ही रहता था. कमरा क्या था; बस सूखे घास .से दीवारें और ऊपर एक प्लाईवुड का शीट लगाकर बस सोने लायक बना हुआ था.

मैं जमीन पर एक मोटा कालीन बिछा हुआ था उसी पर सोता था. मैं जैसे ही लेटा वो ही युवती मेरे कमरे में आ गई. उसने आते ही बिना कोई लाग लपेट के अपना टी शर्ट उतार दिया और हाफ पैंट भी उतार दी. अब केवल चोली और चड्डी में वो मेरे सामने बैठ गई और मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी. मैं घबरा गया. वो मेरे करीब आ गई. उसने कहा ” डरो मत. मुझे पता है उम उच्च नहीं जानते हो सेक्स के बारे में. मैं तुम्हें सब बता दूंगी और सिखा भी दूंगी. आओ मेरे पास आ जाओ.” मैं पहले तो डरा लेकिन फिर उस युवती ने मुझे जब और करीब आकर पकड़ लिया तो मेरा बदन कांपने लगा. उसने मेरे कपडे उतार दिए. उसने मुझे गालों को चूमा.

फिर उसने मुझे गाल; गरदन ; सीना और आखिर में होंठों को चूमना सिखाया. मैं अब अपना डर एक तरफ रखकर उस युवती से सब कुछ सीखे जा रहा था. तभी उसके साथ वाली एक और लड़की आ गई. वो तो पहले से ही केवल चोली पहने हुए थी और नीचे एक छोटा कपड़ा लपेटा हुआ था. उसने हम दोनों को चिपके हुए देखा तो उसने पहली वाली युवती से कहा ” मुझे तो तुमने कहा था कि हम दोनों इसके साथ मजा करेंगे. लेकिन तुमने मुझे धोखा दिया.” पहली ने कहा ” बिलकुल नहीं. इसे तो सेक्स के बारे में कुछ भी पता नहीं है. मैंने इसे अभी किस के बारे में बताया है.” अब दूसरी भी मेरे पास बैठ गई.

उसने अपनी चोली खोली और फिर अपने नीचे लपेटा हुआ कपड़ा खोल दिया. वो अब वो बिलकुल ही नंगी थी. मैंने आज पहली बार किसी औरत को नग्नावस्था में देखा था. पहली ने अब दूसरी के गुप्तांग और जननांग को मेरी ऊँगली से टच कराया. मुझे दोनों जगहें बहुत गुदगुदी और गीली गीली लगी. अब दूसरी ने पहली वाली की चोली और चड्डी खोल दी. अब दोनों ने मुझसे कहा ” अब तुम हमारे साथ आ जाओ. हम तुम्हें सक्स करना सिखा देते हैं.” उन दोनों के गोरे गोरे और ग्द्गुदे जिस्म देखकर मेरे मुंह में पानी आ गया. मैं उनसे लिपट गया. वो दोनों मुझे चूमने लगी और मैं भी उनकी तरह उन्हें चूमने लगा.

अब उन दोनों ने मुझे दोनों तरफ से अपने कब्जे में लेकर दबाना शुरू कर दिया. मुझे यह बहुत अच्छा लगा. अब उन दोनों ने मेरे गुप्तांग को अपने हाथोसे धीरे धीरे सहलाना और दबाना शुरू किया. मेरा लिंग इससे कड़क; लंबा और एकदम खडा हो गया. पहली वाली ने अपने पास से एक पैक निकाला और उसे खोलकर मेरे लिंग को, यह कहते हुए कि इसे कोंडोम कहते हैं, उसमे घुसकर पूरा ऊपर तक ढँक दिया. दूसरी अपनी टांगें फैलाकर सो गई. पहली ने मुझे उस पर झुकने को कहा. अब पहली ने मेरे गुप्तांग को पकड़ा और दूसरी के जननांग में धीरे से डाल दिया और मुझे जोर लगाने को कहा. मैंने थोडा जोर लगाया.

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धीरे धीरे मेरा गुप्तांग अन्दर की तरफ बढ़ने लगा और मुझे एक गुदगुदा अहसास होने लगा. अब पहली भी लेट गई. मैंने उसके अन्दर भी अपना गुप्तांग डाला. मैं बारी बारी से दोनों के अन्दर अपने गुप्तांग को कई बार डाला. एक बार जब मैंने पहली के अन्दर से निकलकर दुसिर के अन्दर डालने जा ही रहा था कि दोनों ने बैठकर मुझे रोक दिया. उन्होंने मेरे गुप्तांग पर से कोंडोम हटा दिया.अब दोनों ने मुझे एक साथ चूमना और मेरे गुप्तांग को हाथों से सहलाना शुरू किया. तभी मेरे लिंग में से एक सफ़ेद गाढा दूध निकलना शुरू हो गया. उन दोनों न उसे अपने हाथों में ले लिया और अपने अपने गुप्तांग के अस पास उसे लगा लिया और नीच एलेट कट मुझे अपने गुप्तांग को उनके गुप्तांग से रगड़ने को कहा.एकदम च्पिचिपे और गीले जगहों पर मुझे गुप्तांग रगड़ने में बहुत मजा आया. उन दोनों ने देर रात तक मुझे अपने साथ ही लिटाया और चूमा चाटी करती रही. सवेरा होने तक मैं सेक्स की हर बात बारीकी से जान गया था.

अब हमारा कार्यक्रम वाराणसी के आस पास रेट के टीलों को घूमने का था. हमारे टेंट्स भी थे जो टीलों पट बाँध दिए जाते और टूरिस्ट रातें वहीँ बिताते. इस ग्रुप के लिए कुल चार टेंट्स लगाये गए. पूरा दिन हमने टीलों पर पूरे ग्रुप को खूब घुमाया. शाम को युपीी नाच गाना भी हुआ. रात हो गई. सभी ने खाना खा लिया. चांदनी रात थी. चाँद की जबरदस्त रौशनी थी. मैं रेत पर ही लेट गया. एक एक कर एनी अलोग भी सोने चले गए. तम्बुओं में लालटेन जल रही थी. अन्दर से दिखती परछाइयों से मुझे पता चल गया कि सभी आपस में सेक्स करने लग गए हैं.

तभी मैंने देखा कि दो जोड़े तो बाहर रेत पर ही काम कर रहे हैं. उन्होंने चद्दर बिछाई हुई है और आपस में लिपटे हुए हैं. मेरा भी मन अब मचल रहा था. कुछ देर के बाद मैं उठा और उस तम्बू की तरफ गया जिसमे बाकी के युवक और युवतीयां थी. मैं जैसे ही उस तम्बू के अन्दर पहुंचा मैंने देखा कि अन्दर तो जैसे नंगे लोगों का मेला लगा हुआ है. सभी नंगे थे. कोई किसी से चिपक रहा था तो कोई किसी से. मुझे यह देख बड़ा अजीब लगा. मैं उन सभी देखने लगा. सभी युवतीयां अच्छे हौसले वाली थी जब कि मर्द कमजोर.

करीब एक घंटे के अन्दर तीनों मर्द थक कर सो गए. पाँचों युवतीयां अभी भी भूखी थी. उन्होंने मुझे देखा. कुछ इशारा किया. मैंने हाँ कहा. मैंने उन्हें रेत पर आने को कहा. पाँचों मेरे साथ बाहर आ गई. वे पाँचों नंगी थी. मैंने भी अपने कपडे उतार लिए. उनमे से एक ने मुझे कोंडोम दे दिया. अब मैं था और वो पांच. मुझे अपनी ताकत पर पूरा विश्वास था. ठंडी रेत पाँचों को बहुत पसंद आई. वे पाँचों रेत पट नंगी लेट गई. मैं एक एक के पास गया. जिसके साथ भी मैं होता; हम दोनों एक दूजे को खूब चूमते और फिर मैं अपने गुप्तांग को उसके जननांग के भीतर तक घुसाकर उसे खुश कर देता. इसी तरह मैंने सभी पाँचों को दो दो बार पांच पांच मिनट तक खुश किया. वे पंचों इतनी खुश हो गई कि उन्होंने मुझे होंठों पट खूब चूमा. मेरा मुंह मीठा हो गया.

जब हम यह सब कर रहे थे तो टेंट के अन्दर विबाहित जोड़ों में से एक महिला ने हमें देख लिया. सवेरे उस महिला ने मुझ एआन्ख मारते हुए कहा कि मैं बहुत ही ताकत वाला हूँ और वो मुझे आजमाना चाहती ई. अब मैं उनके जैसा हो गया था. उसके साथ एक पेड़ के पीछे आ गया. वो पेड़ छोटा था और उसकी डालीयाँ जमीन छु रही थी. मैं डालियों के नीचे उसे लेकर इस तारा से लेटा कि किसी को हम नजदीक से भी दिखाई ना दे. मैंने उस औरत को नंगा कर दिया. अब मैंने अपने लम्बे और गरम गुप्तांग को उसके जननांग में जोर से डाल दिया. उसके मुंह से सिसकी निकली.

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उस औरत को जबरदस्त मजा आया. मैंने उसे आधे घंटे तक गरम रखा. उसने मुझे वहीँ रुकने को कहा और खुद कपडे पहनकर तम्बू में चली गई.
मैंने देखा कि वो मुझे तम्बू में आने का इशारा कर रही है. मैं तम्बू में चला गया. मैंने देखा कि वो महिला मुझे फिर से बिस्तर पर आने के लिए कह रही है. मैंने आव देखा ना ताव और उस महिला पर टूट पडा. वो महिला भी गज़ब की मजबूत थी. मैं जितना जोर लगता वो उसे सह जाती और वापस मुझे गरमगरम चुम्बन से जवाब देती. इसी बीच वो पाँचों युवतीयां भी अन्दर आ चुकी थी.

वे भी हम दोनों का मुकाबला देखने लगी. मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी. करीब एक घन्टे तक हमारा मुकाबला चला और आखिर में उस महिला ने जब मुझे कसकर पकड़ लिया तो मैंने भी अपने लिंग में जमा हुए सारे मलाईदार दूध को उसके जननांग में छोड़ दिया
रात के करीब एक दो बज चुके थे. वे पाँचों युवतीयां फिर से तैयार थी. अब मैं अकेला छह. मैंने सभी को जमीन पर लिटाकर अपनी पूरी ताकत से चित्त कर दिया. सवेरा होने तक एक सीधा सदा छोरा पूरी तरह से बिगड़ चुका था. .