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Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

लेस्बियन सेक्स के साथ सामूहिक सेक्स

गतांग से आगे …..

एक दिन उसने जब शिवम को स्कूल के ड्रेस ठीक करती श्रुती को वासना भरी नज़रों से घूरते देखा तो श्रुती के स्कूल जाने के बाद शिवम को ताना मारते हुये बोली- क्यों लाला, मुझसे मन भर गया क्या? जो अब इस कच्ची कली को घूरते रहते हो, और वो भी अपने दोस्त की सग़ी छोटी बहन को?

शिवम के चेहरे से हवाइयाँ उड़ने लगी कि आख़िर उसकी चोरी पकड़ी गई, वो कुछ ना बोल पाया।तब पदमा ने उसको एक दो और बातें सुनाई, फिर खिलखिला कर हंस पड़ी और शिवम के होंठो को चूमते हुए कहा- मैं भी इस कमसिन गुड़िया की दीवानी हूँ, इसके बदन से खेलना चाहती हूँ और इससे अपनी फ़ुद्दी की आग ठण्डी करवाना चाहती हूँ। तो शिवम खुशी से उछल पड़ा।
पदमा ने शिवम से कहा- तुम तो ऑफीस चले जाते हो दोपहर को, इधर अपनी वासना शांत करने में मुझे बड़ी तकलीफ़ होती है, मैं उंगली से ही अपनी मार मार कर परेशान हो जाती हूँ। इस चूत की आग बुझती ही नहीं, तुम बताओ मैं क्या करूँ?

उसने अपनी शादी के पहले की अपनी सारी समलैंगिक प्रेम-वासना-कथाएँ शिवम को बता दी।
शिवम उसको चूमते हुये बोला- पर डार्लिंग, मैं तो हर रात तुमको चोदता हूँ।

पदमा उसे दिलासा देते हुये बोली- तुम तो लाखों में एक हो जानू, इतना मस्त लंड तो किस्मत वालियों को ही मिलता है। पर मैं ही ज़्यादा गर्म हूँ और मुझे लेस्बीयन सेक्स की आदत पड़ गई है, मुझे भी किसी लड़की की चूत चाटने और चूसने का दिल करता है। श्रुती पर मेरी नज़र बहुत दिनों से है, क्या रसीली छोकरी है। दोपहर को ये मेरी मस्त ननद मेरी बाहों में आ जाए तो मेरी किस्मत ही खुल जाए।

शिवम फ़ौरन ही मान गया और उसने पदमा से कहा- अभी तो तूने मेरे लौड़े को ही खड़ा कर दिया है रानी, अब जरा जल्दी से मेरे लौड़े को बैठाने का इंतजाम कर दे !आप ये कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

पदमा भी गर्म हो गई थी, उसने भी शिवम के कपड़े उतार कर फेंक दिये, जल्दी से अपनी साड़ी ब्लॉउज उतार कर सिर्फ ब्रा-पैंटी में अपने भरपूर मस्त और गुन्दाज बदन को शिवम के सामने पेश कर दिया और एक मादक अंगड़ाई लेकर बोली- लो लाला, लगाओ भोग तेरी जवान भौजी तैयार खड़ी है चुदने को…

शिवम का मूसल सा लंड तनतना कर आसमान की तरफ देखने लगा, जल्दी से उसने पदमा की ब्रा पैंटी को भी उतार फैंका और उसके रूप के सागर में गोते लगाने लगा… धचाधच फ़चाफ़च चुदाई से माहौल गर्म हो गया, करीब 20 मिनट की मस्त चुदाई लीला के बाद शिवम ने अपना माल पदमा की चूत में छोड़ दिया।

चुदाई के बाद शिवम ने पदमा से एक सिगरेट सुलगाने के लिये कहा। पदमा ने शिवम की पैंट में से सिगरेट निकाल कर बड़ी अदा से सिगरेट अपने होंटों से लगा कर माचिस से सुलगाई और खुद ही एक जोरदार सुट्टा लगा कर शिवम की तरफ सिगरेट बढ़ा दी।

फिर दोनों सोचने लगे कि श्रुती को कैसे पटरी पर लाया जाये, शुरूआत कैसे की जाए।
तभी पदमा ने कहा- कल मैं किसी भी बहाने श्रुती को स्कूल नहीं जाने दूँगी और अपने बेडरूम के तकिये के नीचे नंगी तस्वीरों वाली पत्रिका रख कर उसको कमरे की साफ सफाई के काम में लगा कर वो कुछ घंटों के लिए मार्केट चली जाऊँगी।

श्रुती जब बिस्तर की चादर ठीक करेगी तब उस किताब को ज़रूर पढ़ेगी और यही वक्त होगा जब तुम वहाँ पहुँचोगे, और फिर प्यार से, उसकी मर्जी से उसको चोदकर फिर ऑफ़िस के लिए निकल जाना। फिर मैं आकर दर्द से रोती उस मासूम छोकरी को पूछने और सहलाने के बहाने खुद भी भोगूँगी।

उस रात श्रुती की मस्त जवानी को चोदने के ख्याल से शिवम को नींद भी नहीं आई और उसकी जुगाड़ पदमा भी उस रात उससे चुदने नहीं आई।

सुबह शिवम ने नहा धोकर ऑफ़िस में फोन किया कि वो आज लेट आएगा और उधर रात को शिवम के साथ सम्भोग न करने के कारण पदमा भी श्रुती के साथ देर तक जागती रही और उससे बातें करके उसे भी जगाये रही। इससे हुआ यह कि श्रुती सुबह स्कूल जाने के लिये समय पर ही नहीं उठी और पदमा ने श्रुती को जगाया ही नहीं जिसके कारण उसका स्कूल टाइम निकल गया।

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