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मेरी बन्नो बड़ी सयानी है

गतांग से आगे …..

मैं कसमसाई, ताकत लगाकर मैंने उसे दूर धकेला.

मैं: ये क्या कर रही हो.

किरन मुझे फिर से आमने पास खीचते हुए बोली “मेरी जान आजा मेरी प्यास बुझा दे , मेरे बदन में आग लगी है…… आजा मेरी जान”

मै: “ये क्या पागलो जैसी हरकत कर रही हो किरन ….. छोडो मुझे….” और मैंने उसे जबरदस्ती अपने से अलग किया .

किरन: प्लीज यार प्रीति ….. प्लीज …. फिर से दबा दे …… देख मैं कैसी जल रही हूँ…. मेरा बदन कैसे ताप रहा है……” इतना कह के उसने मेरा हाथ फिर से उसकी टॉप के अन्दर डाल दिया.

मैंने महसूस किया की उसका बदन भट्टी की तरह तप रहा था. उसकी आँखे लाल हो गई थी. घबराकर मैं बोली ” अरे तेरा बदन तो बहोत ज्यादा गरम लग रहा है…. बुखार आया क्या ?”

किरन : ” हा मेरी जान …. ये जवानी का बुखार चढ़ा है मेरे पे …. जल्दी से इसे ठंडा कर दे….” और फिर से वो मेरे हाथो से उसकी छतिया दबाने लगी.

मैं: “किरन रुक मैं मामी से मांग के कुछ मेडिसिन लाती हूँ” मैंने फिर से अपने आप को छुडाने का असफल प्रयास किया.किरन मेरे हाथ जबरदस्ती से भिचते हूए बोली ” हाय रे मेरी भोली डॉक्टर ….. मेरी मेडिसिन तो तेरे ही पास है”

मैं: ” मैं समझी नहीं किरन….. ये तुम क्या बोल रही हो …….”

किरन: ” मैं सब समझाती हूँ मेरी भोली प्रीति …. तू बस इनको दबाती जा ……”

मैंने हथियार डालते हुए उसके स्तनों को दबाना शुरू किया ……

मेरे लिए भी ये नया अनुभव था . मुझे कुछ कुछ अच्छा भी लगने लगा था…..किरन ने फिर से मुझे आपने पास खीचा और मेरे होटो पे चुम्बन जड़ दिया .

किरन: ” क्या तुमने अभी तक ऐसा नहीं किया ?”

मैं :”ऐसा यानी ….. मै समझी नहीं ”

किरन: ” मेरी भोली बन्नो ….. क्या आज तक तुमने किसी को चुम्मा नहीं दिया….. ”

मैं: “छि …. गन्दी कही की ……”

किरन ने मुझे थोड़ी देर के लिए अलग किया और वह दरवाजे की तरफ भागी. उसने दरवाजे की कुण्डी अच्छी तरह से बंद कर दी और फिर भाग के मेरे पास आते हुए मुझे जोर से अपनी बाहों में भीच लिया .मैं उसे देखती ही रही ….. मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था . मैं बोली ” ये क्या कर रही हो किरन…. दरवाजा क्यों बंद किया….. क्या हूवा है तुझे ”

किरन ने बड़े प्यार से मेर तरफ देखा और बोली “आज मैं मेरी भोली बन्नो को ….जवानी का अद्भुत खेल समझाने वाली हूँ .”

मैं : “जवानी का अद्भुत खेल? ये क्या है..”

उसने फिर एक बार अपने होटो से मेरे होट बंद किये….. और मेरी उभरती हुयी छातियो को अपने हाथो से भीचना शुरू किया.

जैसे ही किरन के हाथ मेरी छातियो से लगे …. मैंने एक अजीब सा रोमांच महसूस किया ….एक नशा सा होने लगा था …. किरन ने मेरे निचले होट पर अपनी जुबान फिराना शुरू किया …. उसके हाथ अब मेरी टॉप के अन्दर जाने की कोशिश कर रहे थे ….. मुझे थोडा अजीब लगा पर ना जाने क्यों मैंने उसे रोकने का प्रयास भी नहीं किया. दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

जल्द ही उसके हाथ मेरी टॉप के अन्दर थे ……. लेकिन उन हाथो की मंझिल कुछ और थी……. उसने फिर थोड़ी मेहनत कर के अपनी मंझिल को पा ही लिया…उसने मेरी समिज के अन्दर हाथ डालते हुए मेरे नग्न स्तनों को छु लिया….उफ़…… मेरी तो साँस जैसे थम गई…एक पल के लिए मुझे ऐसा लगा की ….. मैं हवा में हूँ…. मैं उड़ रही हूँ.

किरन ने मझे जमीं पर उतरने का मौका ही नहीं दिया , और वो मेरे स्तनों को जोर से दबाने लगी… दोस्तों मेरी जिन्दगी का पहेला स्तन मर्दन हो रहा था. एक अजीब सा …मीठा सा दर्द महसूस कर रही थी मैं….. मैंने आज तक ऐसा कभी अनुभव ही नहीं किया था .

किरन ने तो जैसे मुझे पागल करने की ठान ली थी , उसने मेरे स्तानाग्रो को चुटकी में भर कर उमेठा …..स्स स्स स्स स्स स्स…….. हाय मेरी तो जान ही निकल गई …… मैं चीखना चाहती थी……. मगर चीख नहीं सकती थी …. क्योंकि मेरे होट तो किरन ने अपने होटो से बंद किये थे. पर हुआ ये के मेरा मुह थोडा सा खुल गया …….

किरन ने इसी मौके का फायदा लेते हूए अपनी जीभ को मेरे होटो से अन्दर की और सरका दिया ….अब उसकी जीभ मैं अपने जीभ से टकराती महसूस कर रही थी…….मुझे एक अजीब सा मजा आ रहा था …… मैंने अपने जीभ से किरन की जीभ को धकेलना चाहा…….मेरी इस कोशिश में मेरी जीभ किरन के मुह में चली गई.

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …..

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