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मेरी बन्नो बड़ी सयानी है

गतांग से आगे …..

अब किरन मेरी जीभ को अपने मुह में लेकर चूस रही थी …..मेरे निप्पल अब पूरी तरह से कठोर हो गए थे . किरन का दबाना, उमेठना और मेरे होटो को चूसना जारी था और मुझे पूरी तरह से पागल कर रहा था. न जाने कितनी देर तक हम वैसे ही रहे …… अचानक किरन ने चुम्बन तोडा और अपने हाथ खीच कर अलग खड़ी हो गई . जैसे उसने मुझे आसमान से उठाकर जमीं पर पटक दिया.

मैं किरन की तरफ असंजस भरी नजरो से देखने लगी. किरन मंद मंद मुस्कुरा रही थी . मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था . किरन धीमे कदमो से चलते हुए मेरे पास आई , मेरी पीठ सहलाते हूए मुजे पलंग की ओर ले गयी. उसने मेरे कंधे पकड़कर मुझे निचे बिठाया. मैं एक नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्म से लाल हो गई. किरन ने धीरे से पुछा..

“प्रीति मेरी जान ….. कैसा लगा?”

मैं तो शर्म से मरी जा रही थी , मैंने अपना चेहरा किरन की छातियो में छुपाना चाहा. उसने फिर से मेरा चेहरा हाथो में लेकर एक चुम्बन जड़ दिया और फिर से पुछा

“मेरी भोली रानी …. कैसा लगा यह खेल?” मैंने मुस्कुराकर निचे देखा.

किरन : ” देखो प्रीति , अगर तुम जवानी का यह अद्भुत खेल सीखना चाहती हो तो शर्मना छोडो और बताओ की तुम्हे ये सब कैसा लगा?”

मैं: “क्या कैसा लगा?”

किरन : “ओह , तो तूमको अच्छा नहीं लगा …… ठीक है मैं चलती हूँ अपने घर ….”

मैं घबरा गयी …. मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे जबरदस्ती निचे बैठाते बोला “किरन मैंने ऐसा तो नहीं बोला यार” उसने फिर से मेरा चेहरा पकड़कर एक जोरदार चुम्बन जड़ दिया और बोली “तो तुम्हे जवानी का अद्भुत खेल खेलना है ?”जवाब मे इस बार मैंने खुद को समर्पित करते हूए किरन के होटो पर अपने होट रख दिए. किरन ने ख़ुशी के मारे मुझे अपने सिने से लगाया और बोली

” चलो मेरी जान अब इस खेल की शुरुवात करते है ” किरन ने बतया “देखो प्रीति इस खेल के कुछ नियम है उनका पालन कठोरता से करना १ मेरी सभी बाते बिना हिचक माननी होगी 2 कोई भी शंका अभी नहीं पूछनी (बाद मे कोई भी शंका बाकि नहीं रहेगी).

मैंने कहा “मुझे तुम्हारी हर शर्त काबुल है किरन …. लेकिन जल्दी शुरू करो ” किरन ने हसते हुए मेरे निप्पल को उमेठा ……. स्स्स्सस्स्स्स …… हाय मेरी तो जान ही निकल गयी . किरन ने मेरी टॉप को निचे से पकड़ा और उसे खीचकर मेरे सर से निकाल दिया. मैं सिर्फ समीज पहनकर बैठी थी.

दोस्तों इस के पहले मैं किसी के सामने सिर्फ समीज में नहीं गयी. मुझे शर्म आ रही थी, मैंने हाथो से अपनी छातियो को ढकना चाहा पर किरन ने मेरे हाथो को पकड़ कर मन कर दिया. किरन बड़े प्यार से मेरे रूप को देख रही थी. मैंने शर्मा के नजरे नीची कर ली . किरन ने फिर से मेरी ठोड़ी पकड़कर मेरा चेहरा ऊपर किया और बोली “मेरी जान शर्मना छोडो और मेरी आंखो मे आँखे डाल कर देखो ” मैंने उसकी आग्या का पालन करते हूए उसी की आँखों में देखा किरन मेरी तरफ तारीफ भरी नजरे से देख रही थी .

उसने मेरी समीज को निचे से पकड़ा , मैं उसका इरादा भाप गयी, और उसके हाथ पकड़ लिये. उसने भी जोर लगा कर समीज को ऊपर की तरफ खीचना चालू किया समीज को ऊपर खीचते वो बोली ” मेरी जान तुम मेरी सारी शर्ते काबुल कर चुकी हो …. अब ये शर्माने का नाटक छोड़ दो ”

मैंने हार कर अपने हाथ ढीले छोड़ दिए. किरन ने एक झटके में मेरी समीज को मेरे सर से निकल दिया. अब मैं ऊपर से पूरी तरह नंगी थी. मैंने देखा मेर संतरे जैसे स्तन कठोर हो गए थे मेरे गुलाबी निप्पल पूरी तरह फुल चुके थे मैंने इसके पहले कभी अपने आपको भी इतना गौर से नहीं देखा था. इधर किरन अपनी आँखे बड़ी-बड़ी करके मेरी सौन्दर्य का पान कर रही थी.

मेरी नजरे उससे मिली तो वह प्यार से मुस्कुरा दी . फिर किरन ने एक पल में अपना भी टॉप निकल फेका. उसने टॉप के निचे कुछ भी नहीं पहना था . टॉप के निकलते ही उसके दो बड़े संतरे जैसे स्तन मेरी आँखों के सामने उछल पड़े.मैं मंत्रमुग्ध सी उन दो संतरों को देखने लगी, मन ही मन मैं अपने और उसके स्तन की तुलना करने लगी . दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

किरन की रंगत सावली है जबकि मैं गोरी चट्टी , दोस्तों मेरा रंग दूध में हल्का केसर मिक्स करन के बाद होता है वैसा है किरन के निप्पल जामुनी थे तो मेरे गुलाबी . लेकिन उसके स्तन मेरे स्तनो से आकार में डेढ़ गुना थे. मुझे इस तरह देखता पा कर किरन हस दी और बोली ” मेरी जान माल पसंद आया की नहीं ” मैं बस शरमाकर मुस्कुराई.

किरन ने मेरा हाथ पकड़कर आपने स्तनों पर रखा और बोली “प्रीति रानी ये सब तुम्हारे लिये है इसे चूमो ” मैं तो जैसे हिप्नोटाइस हो चुकी थी मेरा सर अनायास ही उसकी छाती पर झुका …. और मेरे लरजते हुए होटो ने उसके निप्पलस को छुआ. किरन ने एक लम्बी सिसकारी भरी, ” स्स्स्सस्स्स्सSSSSS ” और उसने मेरे सर को स्तानो के ऊपर दबाया .

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …..

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