चुत और चूतड़ की धुआंधार पेलाई

ये तब की बात है जब मैं पढ़ने के लिए दिल्ली गया। में 18 साल का था। एक किराए के फ्लैट में हम दो लड़के रहते थे। मैं और राजिंदर। वो सिख था, ऊंचा कद, मजबूत सूंदर मर्दाना बदन। मेरा शरीर थोड़ा फर्क था। छाती भरी भरी थी, बड़ी चुचियाँ तो नही पर कुछ लड़कियों जैसी। पतली कमर और भरे भरे चूतड़।

जल्दी ही हम घुल मिल गए। हम रोज़ डबल बेड पे सोते थे। मैं ज्यादातर नाईट सूट में और वो अंडरवियर में। उस दिन गर्मी बहुत थी। मैं सिर्फ पायजामे में था वो हमेशा की तरह। अंडरवियर में उसका बदन बहुत शानदार दिखता था। रात को… मैं करवट सोया हुआ था, वो मेरे पीछे। मेरी नींद खुली, उसका हाथ मेरी छाती के उभार पे था, सहला रहा था। मैं सोने की एक्टिंग करता रहा। उसने दबाना शुरू कर दिया। पीछे मेरे चूतड़ों के बीच में भी उसका खड़ा हथियार टच करने लगा। फिर उसने मेरे निप्पल मसल दिए।

“आह ये क्या कर रहा है तू”
और मैं उसकी तरफ घूम गया। उसने मेरे होंठों पे होंठ रख दिए। भरपूर चूसा, अपना रस पिलाया।
“तेरी चुचियाँ मस्त हैं, तू मेरी गर्ल फ्रेंड बन जा”
मैं थोड़ा शरमाया।
उसने मुझे अपने साथ चिपका लिया।

“में तेरी गर्ल फ्रेंड नही बन सकता”
“क्यों?”
“क्योंकि मैं तेरी गर्ल फ्रेंड बन गयी”
उसने एक और चुम्बन और राजिंदर बोला
“राजीव मेरी डार्लिंग”
“नही गर्ल फ्रेंड का कोई और नाम रख”
“मेरी निशा”

मेरी चूची दबाते हुए वो बोला
“तेरे को पता है लड़की केलिए सबसे प्यारा क्या होता है?”
“हाँ, मेरा प्रियतम जिस से मैं चिपकी हुई हूँ”
उसने मेरा हाथ अपने अंडरवियर पे रखा
“सबसे प्यारा ये होता है”

मैं हंसी। (अब मैं राजिंदर की गर्ल फ्रेंड बन गयी थी, मैन से लड़की बन गयी थी)
“अंडरवियर प्यारा होता है?”
“शरारती… उसके अंदर हाथ डाल”
“नही डालूंगी”
“क्यों?”
“लाइट जला के तुझे नंगा कर के नज़ारा करूँगी”

उसने लाइट जला दी और नंगा हो गया।
मस्त खूबसूरत लण्ड, शान से तना हुआ। मैंने हाथ में ले लिया और प्यार से सहलाने लगी। फिर उसे प्यार से चूमा, चाटा और मुह में ले लिया चूसने लगी। उसने मेरा सिर पकड़ लिया और धीरे धीरे कमर हिलाने लगा।
“निशा मेरी रानी, आज मैं तेरे मुह के मज़े लूंगा। कल पूरी सुहाग रात करेंगे।
और उसका लौड़ा मेरे होंठों में फिसलने लगा। मेरे मुह में अंदर बाहर होने लगा। मैंने उसके चूतड़ पकड़ लिए। रफ्तार तेज़ हो गयी और फिर उसने मेरा मुह अपने मर्दाने मक्खन से भर दिया। मैने लण्ड को चाटा और फिर हम सो गए।

सुबह…
“राजिंदर आज मैं कॉलेज नही जाऊंगी और मुझे 1000 रुपये दो”
“पैसे क्यों?”
“सैयां गर्ल फ्रेंड बनाई है तो कुछ खर्चा तो करना पड़ेगा”
वो पैसे दे के चला गया।

मैंने एक पार्लर में फोन किया कि मुझे वैक्सिंग करवानी है
“लेकिन ये तो सिर्फ लड़कियों का है”
पर बाद में वो मान गयी।
“पार्लर 11 बजे खुलता है, तुम 10 बजे आ जाओ. कर दूंगी”
पार्लर में…
“पैरों की करवानी है”
“नही गर्दन के नीचे पूरे बदन की”
“ठीक है, उतारो कपड़े”

वो गर्म wax से मेरे बाल निकालने लगी।
“तुम ये क्यों करवा रहे हो”
मैंने कुछ नही कहा
“समझ गयी मैं, आज यार को देनी है”
मैं शर्मा गयी।
वो मुस्कुराई। फिर उसने मुझे मेकअप करना सिखाया, एक विग दी।

फिर मैं बाजार गयी। सलवार कमीज ब्रा पैंटी और कुछ मेकअप का सामान लेके आयी।
शाम का राजिंदर आया। मुझे बांहों में भरने लगा…
“अभी नही थोड़ा वेट करो”
मैंने 2 पेग बनाए। एक उसको दिया और अपना लेके बाथरूम में चली गयी।
पूरी तरह तैयार हुई।
बाहर आयी तो…
राजिंदर कुछ देर तो मुझे देखता रहा फिर एकदम से दबोच लिया। और बहुत लंबा चुम्बन लिया।
मेरे होंठ चूसे।

फिर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया।
हम शराब पीते रहे और वो मेरी चुम्मियां लेता रहा, मेरी चुचियाँ दबाता रहा।
“चल अब बिस्तर पे”
मैं बेड पे लेट गयी। वो आया। पूरा नंगा। शानदार बदन और फंफनाता हुआ खड़ा लण्ड। मेरे साथ लेट गया।
मैंने लण्ड मुह में ले लिया और चूसने लगी।
“आज निशा अब तुझे अपनी औरत बनाऊं”
“हाँ मेरे प्रियतम”
मैं घोड़ी बन गयी। टांगें चौड़ी, चूतड़ खुले हुए।

उसने लण्ड निशाने पे लगाया और पेल दिया।
“आआआआआह…”
और धक्के शुरू हो गए। उसकी जाँघे मेरे चूतड़ों से टकराने लगी। लौड़ा मेरी गांड में तेजी से अंदर बाहर होने लगा।
ताबड़तोड़ मेरी गांड मार के उसने मेरे अंदर बरसात कर दी।
मैंने उसके लौड़े को चाट कर साफ किया और हम चिपक कर  सो गए।

फिर ये रोज़ होने लगा। कॉलेज से वापस आ कर मैं निशा बन जाती। उसकी औरत और वो मेरा मर्द। मैंने पूरा वार्डरोब बना लिया। साड़ी, स्कर्ट, टॉप, नाइटी सब।

फिर एक दिन। फ़ोन आया। मेरी मम्मी का। वो अगले दिन आएंगी।
मैंने राजिंदर को बताया।
“तेरी मम्मी आएगी ये तो बड़ी अच्छी बात है”
“हाँ, लेकिन फिर मैं तेरी गर्ल फ्रेंड बनके नही राह ढकती न”
“कोई बात नही तू मेरी गर्ल फ्रेंड नही मेरी बीवी बन के रहना”
“क्या मतलब?”
“मतलब ये मेरी जान की में तेरी मम्मी के सामने तेरी मांग में सिंदूर भर दूंगा”
“हाए राम, मम्मी के सामने?”
“और क्या रानी”

मैं बड़े प्यार से उस से लिपट गयी।
“मेरे राजा अब ये मत कह देना की मम्मी के सामने ही मेरे साथ सुहाग रात मनाओगे”
“नही मम्मी के सामने तेरे साथ सुहाग रात नही मनाऊंगा बल्कि तेरे सामने मम्मी के साथ मनाऊंगा”
“क्या तुम मेरी मम्मी की लोगे?”
“क्यों तुझे ऐतराज़ है?”
“नही, बिल्कुल नही। मुझे तो बस तुम्हारी खुशी चाहिए। पर वो मान जाएगी?”

“पक्का, देखना वो मेरे से चूत और गांड दोनों मरवायेगी”
इन बातों से हम खूब गरम हो गए थे।
उसके बाद खूब धुआंधार पेला उसने मुझे।

अगले दिन…
शाम को। मैं रसोई में थी। मम्मी आयी। राजिंदर ने बिठाया। दोनो बातें करने लगे।
“ऑन्टी हम दोनो एक दूसरे को बहुत प्यार करते हैं”
“हाँ बेटा दोस्तों में प्यार तो होना ही चाहिए”
“नही आंटी वो नही”
“तो फिर?”

राजिंदर ने बड़े आराम से मम्मी की  जांघ पे हाथ रखा और सहलाते हुए बोला “आंटी हम लोग सुहाग रात मना चुके हैं, अब आप आ गयी हैं मैं उसकी मांग में सिंदूर भर दूंगा”
“क्या कह रहे हो? ठहरो में उसे बुलाती हूँ। बेटा इधर आ”
“आंटी मैं बुलाता हूँ। निशा आ जा”
मैं आयी। स्कर्ट टॉप में। मम्मी मुझे देखती रही। पैडेड ब्रा में उभार, नीचे चिकनी टांगें।

राजिंदर ने मम्मी की जांघ दबाई और बोला “मान जाइये’
मम्मी मुस्कुराई।
“तू मांग भरवाएगी, इन कपड़ों में? जा साड़ी पहन के आ”
में चली गयी।
राजिंदर ने दो पेग बनाए।
मम्मी ने कहा “मैं पीती नही”
“आज तो खास दिन है, आज तो पी लो”
दोनो पीने लगे।
मैं सज के आ गयी।

राजिंदर ने मेरी मांग सजाई। मैने उसके पैर छुए। फिर हम दोनो ने मम्मी के पैर छुए।
“खुश रहो”
“आंटी गले लगा के आशीर्वाद नही दोगी”
“आ जाओ”
और राजिंदर ने मम्मी को बांहों में भरा और होंठ जोड़ दिए। होंठ चूसने के साथ साथ मम्मी की चुचियाँ और चूतड़ दबाने लगा।
“ये क्या कर रहे हो?”
“प्यार कर रहा हूँ’
“पर निशा ऐतराज़ करेगी”
“नही मम्मी मैं तो बड़ी खुश हूँ कि मेरे पति को ज्यादा मज़ा मिलेगा”

हम तीनो शराब पीने लगे और राजिंदर मेरी मम्मी के बदन से खेलने लगा।
“निशा अब मम्मी को चुदाई के लिए तैयार कर”
“मतलब?”
“अरे कपड़े उतार। नंगी कर इसे”
मम्मी खड़ी हुई। मैंने उसकी साड़ी पेटीकोट ब्लाउज उतार दिया।
मम्मी पूरे नशे में थी। सिर्फ ब्रा पैंटी में।
“कैसी लग रही हूँ?”
“मस्त माल है। मज़ा आएगा तेरे ऊपर चढ़ के”

मैंने मम्मी को बिस्तर पे लिटा के पूरा नंगा कर दिया।
राजिंदर भी कपड़े उतार कर बेड पे चढ़ गया।
“पुष्पा तेरी चुचियाँ मस्त हैं और वो उन्हें दबाने लगा चूसने लगा। मम्मी पूरी गरम हो चुकी थी।
“निशा अपनी माँ की चूत चाट कर मेरे लौड़े के लिए तैयार कर। वो चुचियों के मज़े लेता रहा और मैंने मम्मी की चूत चूस कर गरम कर दी।
फिर वो चढ़ गया मेरी माँ के ऊपर और अपना हथियार पेल दिया। और धुआंधार चुदाई शुरू हो गयी।
“चोदो मुझे, मैं तुम्हारी हूँ, मेरे मज़े लो, मेरी चूत का भोसड़ा बना दो”
मम्मी मस्त चुदवा रही थी।

फिर अचानक राजिंदर ने लण्ड बाहर निकाल लिया।
‘क्या हुआ मज़ा नही आ रहा? मेरे अंदर अपना प्रशाद नही डालोगे?”
राजिंदर ने मम्मी के चूतड़ मसले और “पुष्पा मेरी छमिया तेरे अंदर अपना पानी छोडूंगा, खूब रगडुंगा तेरी चूत को लेकिन अभी ये तेरे चिकने चूतड़ों के बीच में जो गदराई गांड है इसका बैंड बजाऊंगा”

“हाय राम गांड मारोगे, मैंने कभी नही मरवाई”
“राजिंदर, मेरे साजन, मज़ा आ जाएगा मम्मी ने अपनी गांड तुम्हारे लिए ही कुंवारी रखी है”
“चल फिर पुष्पा घोड़ी बन जा तेरे पिछवाड़े का उद्घाटन करता हूँ”
मम्मी घोड़ी बनी, मैंने उसकी गांड को चूमा, प्यार किया फिर थोड़ी वैसलीन लगाई। राजिंदर ने अपना मस्त हथियार मेरी माँ के चूतड़ों के बीच के छेद में घुसा दिया। और फचाक फचाक धक्के लगने लगे। मेरा आशिक पूरी मस्ती से ठोकने लगा, मारने लगा मेरी मम्मी की गांड।
धुआंधार पेलने के बाद उसने मेरी माँ की गहराई में पानी छोड़ दिया।

फिर हम तीनो सो गए।
सुबह राजिंदर ने पहले मुझे चूमा फिर मम्मी को।
“आंटी कल अच्छी शुरुआत हो गयी”
“मैं समझीं नही बेटा”
“हम पूरा पारिवारिक रिश्ता बनाएंगे।”
वो मेरी चुचियाँ दबाने लगा।

“देखिए निशा तो मेरा माल है ही, आप की भी चूत और गांड पे मैंने अपने लण्ड का ठप्पा लगा दिया है। फिर मैने निशा की कुछ ब्रा पैंटी वाली फ़ोटो अपने भाई को भेजी थीं, उसे बहुत पसंद आयी। वो कल आ रहा है और निशा के जिस्म का पूरा मज़ा लेगा। फिर निशा की बहन है, मेरे पापा हैं। मतलब कुछ दिनों में मेरे परिवार का हर लण्ड आपके परिवार की हर चूत का भोग लगा लेगा”
मम्मी मुस्कुराई, राजिंदर के होंठों को चूमा और बोली
“सिर्फ चूत क्यों बेटा हमारी गांड भी तुम्हारे परिवार के लौंडों की गुलाम बन जाएगी।

कहानी कैसी लगी दोस्तों…