मेरा नाम सन्नी है और मैं मनाली का रहने वाला हूँ। अभी मेरे घर में चार ही लोग हैं, मैं, मेरी माँ और मेरी दो बहने। बात उस समय की है जब हम लोग दिल्ली में रहते थे मेरे पिताजी (जिनका एक दुर्घटना में देहांत हो गया) एक प्राइवेट कंपनी में अच्छी नौकरी करते थे, उनके देहांत के 2 साल के बाद हमे मजबूरन वापस मनाली आना पड़ा.

मैं उस समय तक मेरी पढाई पूरी हो चुकी थी और दिल्ली के बढ़ते खर्चे की वजह से हमने ये सोचा की यहाँ दिल्ली के घर को किराये पर रहने के लिए दे दे किसी को और हम लोग वापस मनाली चले जाए , ये कहानी उसी दिन से शुरू होती है जिस दिन हम लोग मनाली में अपने घर आये थे, हमारा मनाली का घर ज्यादा बड़ा तो नहीं पर छोटा भी नहीं लेकिन पिछले एक साल से घर की कोई साफ़ सफाई नही हुई थी.

हम लोग तकरीबन सुबह १० बजे मनाली के घर पहुच गए और बाकि का दिन साफ़ सफाई और दिल्ली से लाये गए सामान को एडजस्ट करने में चला गया, शाम को माँ ने कहा, माँ.सन्नी आज खाना तो बनेगा नहीं तो तु जाके बाजार से आज रात का खाना ले आ. मैं. ठीक है माँ. और मैं बाजार से खाना ले के आ गया.

तब तक माँ और मेरी बहनों ने मिल के हमारे सोने का बंदोबस्त एक ही कमरे में कर लिया. मैं. खाना खालो गरमा गरम. माँ.सन्नी इधर कमरे में ही ले आ. यही बैठ के खायेंगे. आग भी जला रखी है मैं खाना लेकर कमरे में ले गया और हम चारो वही बैठ के खाना कहने लगे.खाना खाने के बाद माँ..आज सब इसी कमरे में ही सो जाओ. .आज थक गए है ,,,सब के रूम की साफ़ सफाई नहीं हो आएगी. और हम सब उसी कमरे में सो गए. दो बिस्तर लगाये थे एक दम पास पास. बिस्तर के एक तरफ माँ दूसरी तरफ मैं और बीच में दोनों बहने.

अब मैं आप लोगो को मेरी बहनों के बारे में बताता हूँ। बड़ी का नाम सीमा और छोटी का अंशु था। दोनों की जवानी उभार पर थी पर छोटी वाली तो कुछ ज्यादा आगे थी। सीमा का फिगर बड़ा मस्त था 24-36-24, पर रंग थोड़ा सांवला था। अंशु तो गजब की बला थी, गोरा रंग और गजब का फिगर ! ऐसा कि देखते ही चोदने का मन करे और कई लड़के तो खड़े-2 मुठ मार दें !

फिर भी मैं इन सब पर ध्यान नहीं देता था। रात को सोने के कुछ देर बार मैंने महसूस किया की मेरे पायजामे के अन्दर को कुछ ढूंढ रहा है.ये कौन हो सकता है. धीरे धीरे उस हाथ ने वो ढूंढ लिया जिसकी उससे तलाश थी.उस हाथ को मैं मेरे लंड पर महसूस कर रहा था.धीरे धीरे उस हाथ ने मेरा पायजामा और अंडरवियर निचे सरका दी. थोडा इधर उधर होक. थोड़ी अपनी गांड ऊँची उठा के मैंने भी मदद कर दी.

मेरे दिमाग में अभी भी यही सवाल था की कौन हो सकती है. . सीमा. नहीं नहीं. अंशु. .पता नहीं. माँ. बिलकुल नहीं. तभी मेरे शरीर के उपर उसका शरीर था. अरे ये तो सीमा है.मैं कुछ बोलने वाला था की उसने अपने होठ मेरे होंठो पर रख दिए.और तभी मैंने महसूस किया की वो बिलकुल नंगी है और मेरे हाथ उसके पूरे शरीर पर घूमने लगे.उर फिर वो हुवा जो होना चहिये था या नहीं.मुझे नहीं पता लेकिन जो उस दिन हुआ वो आज भी हो रहा है.

सीमा थोडा निचे सरक गयी और मेरे लंड को गप्प से अपने मुंह में ले लिया. सीमा. .“वाह, तुम और तुम्हारा लंड तो पहले से ही तैयार हो, मैं.. तैयार तो तुमने कर दिया पर मैं भी तुम्हारी चूत चुसना चाहता हूँ..!” सीमा :”कोई बात नहीं, तुम मेरी चूत चुसो और मैं तुम्हारा लंड, हम 69 की position ले लेते हैं.” मुझे ये आईडिया पसंद आया.यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

सीमा ने जल्दी से अपनी पोजीशन बदल ली उसके भरे हुए मुम्मे और तने हुए निप्पल्स देखकर मेरे लंड ने एक-दो झटके मारे, और मैंने नोट किया की उसकी चूत एकदम साफ़ थी, चिकनी. शायद उसने आज अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे… मेरे तो मुंह में पानी आ गया. वो झुकी और अपने गीले मुंह में मेरा लंड ले लिया और अपनी टाँगे उठा कर घुमाते हुए, जैसे कोई घोड़े पर चढ़ रहा हो, रजाई के अन्दर ही और उसकी चूत सीधे मेरे खुले हुए मुंह पर फिक्स हो गयी.

उसके मुंह में मेरा लंड था पर फिर भी उसके मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी, उसकी चूत जल रही थी, एकदम गरम, लाल, गीली, रस छोडती हुई…मैं तो अपने काम में लग गया, उसकी चूत के लिप्स को अपनी उँगलियों से पकड़ के मैंने अन्दर की बनावट देखि, उबड़ खाबड़ पहाड़ियां नजर आई, और उन पहाड़ियों से बहता हुआ उसका जल…मैंने अपनी लम्बी जीभ निकाली और पहाड़ियां साफ़ करने में लग गया, पर जैसे ही साफ़ करता और पानी आ जाता…

मैं लगा रहा…लगा रहा..साथ ही साथ मैं अपनी एक ऊँगली से उसकी clit भी रगड़ रहा था. मेरे लंड का भी बुरा हाल था वो उसको आज ऐसे चूस रही थी जैसे कुल्फी हो..अन्दर तक ले जाती जीभ से चारों तरफ circle बनाती और फिर बाहर निकालते हुए हलके से दांतों का भी इस्तेमाल करती..वो लंड ऐसे चुस रही थी की चूसने में परफेक्ट हो. यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।और ढेरो लंड चूस चुकी हो मैंने अब उसकी चूत के मुंह पर अपने दोनों होंठ लगा दिए, और बिना जीभ का इस्तेमाल किये बिना चुसना शुरू कर दिया, वो तो बिफर ही गयी मेरे इस हमले से और उसकी चूत में से ढेर सारा रस निकलने लगा और वो झड़ने लगी…

मैं भी अब कगार पर था, मेरे लंड ने भी विराट रूप ले लिया और जैसे ही मेरी बाल्स को अपने हाथ में लेकर मसलना शुरू किया, मैं झड गया और वो मेरा पूरा माल हड़प कर गयी.. फिर हम दोनों उठे और एक दुसरे की तरफ देखा, दो के चेहरे गीले थे और रजाई के अन्दर पसीने से भीग गए थे. सीमा :”कितना टेस्टी जूस है . .बहुत मजा आया तुम्हारा लंड चूसने में और तुम्हारा वीर्य पीने में.”

मैं : “मुझे भी. जी करता है सारी रात तुम्हारी चूत चूसता रहूँ.” मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था, वो मेरे साथ लेट गयी, उसके मोटे-२ चुचे मेरे सीने से लगकर दब गए, उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा और उसे ऊपर नीचे करने लगी, मैंने अपनी आँखे बंद करली और मजे लेने लगा. उसकी गरम साँसे मेरे कानो पर पड़ रही थी.

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